Disclaimer

यह ब्लॉग पूरी तरह काल्पनिक है। किसी से समानता संयोग होगी। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयाँ ((जैसे स्तन वर्धक या हार्मोन परिवर्तन)न लें - यह जानलेवा हो सकता है।— अनीता (ब्लॉग एडमिन)

BeingFaltu | Crossdressing Love Story | ट्रेन में मिली वो… जो मैं खुद भी नहीं था

📝 Story Preview:


ट्रेन के ए.सी. कम्पार्टमेंट में मेरे सामने की सीट पर बैठी लड़की ने मुझसे पूछा " हैलो, क्या आपके पास इस मोबाइल की सिम निकालने की पिन है??" 

उसने अपने बैग से एक फोन निकाला, वह नया सिम कार्ड उसमें डालना चाहती थी। लेकिन सिम स्लॉट खोलने के लिए पिन की जरूरत पड़ती है, जो उसके पास नहीं थी। मैंने हाँ में गर्दन हिलाई और अपने क्रॉस बैग से पिन निकालकर लड़की को दे दी। लड़की ने थैंक्स कहते हुए पिन ले ली और सिम डालकर पिन मुझे वापिस कर दी।


थोड़ी देर बाद वो फिर से इधर उधर ताकने लगी, मुझसे रहा नहीं गया.. मैंने पूछ लिया "कोई परेशानी??"


वो बोली सिम स्टार्ट नहीं हो रही है, मैंने मोबाइल मांगा, उसने दिया। मैंने उसे कहा कि सिम अभी एक्टिवेट नहीं हुई है, थोड़ी देर में हो जाएगी। एक्टिव होने के बाद आईडी वेरिफिकेशन होगा, उसके बाद आप इसे इस्तेमाल कर सकेंगी।


लड़की ने पूछा, आईडी वेरिफिकेशन क्यों??


मैंने कहा " आजकल सिम वेरिफिकेशन के बाद एक्टिव होती है, जिस नाम से ये सिम उठाई गई है, उसका ब्यौरा पूछा जाएगा बता देना"

लड़की बुदबुदाई "ओह्ह "

मैंने दिलासा देते हुए कहा "इसमें कोई परेशानी की कोई बात नहीं"


वो अपने एक हाथ से दूसरा हाथ दबाती रही, मानो किसी परेशानी में हो। मैंने फिर विन्रमता से कहा "आपको कहीं कॉल करना हो तो मेरा मोबाइल इस्तेमाल कर लीजिए"




लड़की ने कहा "जी फिलहाल नहीं, थैंक्स, लेकिन ये सिम किस नाम से खरीदी गई है मुझे नहीं पता"

मैंने कहा "एक बार एक्टिव होने दीजिए, जिसने आपको सिम दी है उसी के नाम की होगी"

उसने कहा "ओके, कोशिश करते हैं" 

मैंने पूछा "आपका स्टेशन कहाँ है??"


लड़की ने कहा "दिल्ली"

और आप?? लड़की ने मुझसे पूछा


मैंने कहा "दिल्ली ही जा रहा हूँ, एक दिन का काम है,

आप दिल्ली में रहती हैं या...?"


लड़की बोली "नहीं नहीं, दिल्ली में कोई काम नहीं , ना ही मेरा घर है वहाँ"

तो ???? मैंने उत्सुकता वश पूछा


वो बोली "दरअसल ये दूसरी ट्रेन है, जिसमें आज मैं हूँ, और दिल्ली से तीसरी गाड़ी पकड़नी है, फिर हमेशा के लिए आज़ाद" 

आज़ाद?? 

लेकिन किस तरह की कैद से?? 

मुझे फिर जिज्ञासा हुई किस कैद में थी ये कमसिन अल्हड़ सी लड़की..


लड़की बोली, उसी कैद में थी, जिसमें हर लड़की होती है। जहाँ घरवाले कहे शादी कर लो, जब जैसा कहे, वैसा करो। मैं घर से भाग चुकी हूं..


मुझे ताज्जुब हुआ, मगर अपने ताज्जुब को छुपाते हुए मैंने हंसते हुए पूछा "अकेली भाग रही हैं आप? आपके साथ कोई नजर नहीं आ रहा? "


वो बोली "अकेली नहीं, साथ में है कोई"

कौन? मेरे प्रश्न खत्म नहीं हो रहे थे


दिल्ली से एक और ट्रेन पकड़ूँगी, फिर अगले स्टेशन पर वो जनाब मिलेंगे, और उसके बाद हम किसी को नहीं मिलेंगे..

ओह्ह, तो ये प्यार का मामला है। 

उसने कहा "जी"


मैंने उसे बताया कि 'मैंने भी लव मैरिज की है।'

ये बात सुनकर वो खुश हुई, बोली "वाओ, कैसे कब?" लव मैरिज की बात सुनकर वो मुझसे बात करने में रुचि लेने लगी


मैंने कहा "कब कैसे कहाँ? वो मैं बाद में बताऊंगा, पहले आप बताओ आपके घर में कौन कौन है?


उसने होशियारी बरतते हुए कहा " वो मैं आपको क्यों बताऊं? मेरे घर में कोई भी हो सकता है, मेरे पापा माँ भाई बहन, या हो सकता है भाई ना हो सिर्फ बहनें हो, या ये भी हो सकता है कि बहने ना हो और 2-4 गुस्सा करने वाले बड़े भाई हो"


मतलब मैं आपका नाम भी नहीं पूछ सकता "मैंने काउंटर मारा"

वो बोली, 'कुछ भी नाम हो सकता है मेरा, टीना, मीना, रीना, कुछ भी'


बहुत बातूनी लड़की थी वो.. थोड़ी इधर उधर की बातें करने के बाद उसने मुझे टॉफी दी जैसे छोटे बच्चे देते हैं क्लास में, 

बोली आज मेरा बर्थडे है।


मैंने उसकी हथेली से टॉफी उठाते बधाई दी और पूछा "कितने साल की हुई हो?"

वो बोली "18"


"मतलब भागकर शादी करने की कानूनी उम्र हो गई आपकी" 

वो "हंसी"


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BeingFaltu | Crossdressing Story | साड़ी में एक दिन – जब भाभी ने बना दिया मुझे रानी

📝 Story Preview:



मेरा नाम समीर है, मेरी उम्र 24 साल है, में कॉलेज में BSC 3rd ईयर में पढ़ता हूँ,मेरे परिवार में माता पिता है और एक बड़ा भाई है जिसकी उम्र 31 साल है उसकी शादी हो चुकी है और उसे एक बेटा है, भाभी का नाम पूजा है वो 26 साल की है बहोत ही खूबसूरत और प्यारी सी, ये कहानी शरू होती है जब महिला दिवस यानी 8 मार्च का दिन महिला दिवस था, भैय्या मार्केटिंग की जॉब करते है जिसके लिए उन्हें हफ्ते में 2 से 3 दिन दूसरे शहर में जाना होता है,माताजी और पिताजी 2 दिनों के लिए शादी में गए हुए थे भैय्या भी घर पर नही थे केवल मैं ,पूजा भाभी  और उनका 3 साल का बेटा रोहन ही थे, सुबह जब मैं नाश्ता करने रूम में गया तो देखा भाभी ने नाश्ता बना कर टेबल पर रखा हुआ था,वो नहा कर तैयार हो चुकी थी, मैं ने भाभी को गुड़ मॉर्निंग बोला और अचंभे से पूछा, भाभी क्या बात है आज तो आप दुल्हन की तरह सझ धज के तैय्यार हुई हो कहीँ जा रही हो या आज आपका Wedding Anniversary है ? भाभी मुस्कुराई और बोली ना तो आज मेरी Wedding Anniversery है ना मैं कहीं जा रही हूँ लेकिन आज एक खास दिन है ? मैंने पूछा ऐसा क्या स्पेशल दिन है के आप दुल्हन की तरह तैय्यार हुई हो?  भाभी बोली के आज Womens Day (महिला दिवस) है, मैं ज़ोर से हँसा और बोला भाभी तो इसमें क्या दुल्हन बनने का कोई कॉम्पिटिशन है क्या ? मेरे हंसने पर भाभी की मुस्कुराहट गायब हो गयी, बोली इसमें हंसने की क्या बात थी ? महिला दिवस पर महिलाएँ सजती संवरती है , कई प्रोग्राम और कॉम्पिटिशन होते है ड्रामे प्ले होते है लेकिन आज भी तुम्हारे भैय्या घर पर नही, और तुम मेरा मज़ाक़ बना रहे हो ? मैं शर्मिंदा हो गया और बोला सॉरी भाभी, मैं आपका दिल नही दुखाना चाहता था मुझे इसकी जानकारी नही थी इसलिए गलती हो गयी, भाभी का गुस्सा कम हुआ वो बोली अगर किसी बात की जानकारी नही तो ऐसे मज़ाक़ नही बनाना चाहिए,पहले जानकारी लेनी चाहिए,मैं ने बात खत्म करने कहा ठीक है भाभी, भाभी ने पूछा क्या ठीक है,मैं बोला जो आपने कहा, और हाँ महिला दिवस की शुभकामनाएं, भाभी ने कहा सिर्फ शुभकामनाएं देने से कुछ नही होगा तुम्हे  मेरी बात माननी पड़ेगी, मैं ने पूछा कौनसी बात मैं तैयार हूँ, भाभी बोली आज महिला दिवस है और में उसे एन्जॉय करना चाहती हूँ, मैं बोला ठीक है भाभी , अचानक भाभी की आँखों मे चमक आई और वो बोली तुम्हे एक महिला बनना पड़ेगा मैं तुम्हे एक औरत की तरह तैय्यार करूँगी और एक महिला की तरह तुम्हें दिन भर रहना होगा, मैं चौंक गया और बोला , भाभी ये कैसे हो सकता है ? मैं एक पुरुष हूँ मैं महिला नही बनना चाहता प्लीज किसी दूसरी तरह एन्जॉय करते है हम बाहर कहीं जाते है या कोई मूवी देखने जाते है, पर भाभी अब ठान चुकी थी के मुझे औरत बनाना है वो बोली तुमने मेरा दिल दुखाया और सारी महिलाओं का अपमान किया है इसके बदले तुम्हे मेरी बात माननी पड़ेगी,मैं मना करने लगा पर भाभी नही मानी, कभी प्यार से तो कभी गुस्सा से, आखिर में मैं तैय्यार हो गया और बोला सिर्फ एक 2 घंटे के लिए ही करना और घर पर कोई भी आ सकता है भाभी बोली तुम चिंता मत करो मैं किसी को नही बताऊँगी और कोई आ भी गया तो तुम्हे छुपा दूंगी,मैं शर्माते हुए बोला पर भाभी मेरे पास तो महिलाओं के कपड़े नही है, भाभी मुस्कुरा के बोली तुम चिंता ना करो मैं आज तुम्हे भी अपनी तरह सजाऊँगी अपना दुल्हन का ड्रेस पहना कर मेकअप करूँगी, मैं घबरा कर बोला भाभी प्लीज ऐसा मत करो मैं आपका दुल्हन वाला ड्रेस नही पहनना चाहता, आप कोई शलवार सूट पहना कर बात खत्म करो, भाभी बोली आज महिला दिवस है तुम्हे मैं आज पूरी महिला बनाऊंगी, एक दुल्हन बना कर महिलाओं की फीलिंग का तुम्हे एहसास करूँगी, ये कह कर भाभी बोली तुम नहाने चले जाओ मैं अंडर गारमेंट्स लाती हूँ, मैं बाथरूम नहाने चला गया,भाभी वहां आकर बोली अच्छे से शेविंग करो और एक रेड नई पैंटी मुझे देकर बोली नहाने के बाद इसे पहन कर टॉवल लपेट कर मेरे रूम में आजाओ मैं तब तक कपड़े ज्वेलरी और मेकअप का सामान तैय्यार करती हूँ, मैंने अच्छे से शेविंग कर के नहाया फिर जब पैंटी हाथ मे ली तो एक अजीब एहसास हुआ, इतनी छोटी और लाल रंग की पैंटी पहनते हुए मुझे शर्म आने लगी,पैंटी पहन कर टॉवल से अपने बदन को छुपाए मैं भाभी के रूम में गया,जहाँ भाभी सारा सामान तैय्यार कर के बेचैनी से मेरा रास्ता देख रही थी मुझे यूं शर्माते देख वो हँस पड़ी, मैं बोला प्लीज भाभी मुझे जाने दो, वो बोला अभी तो शरू भी नही हुआ, 2 घंटे बाद जाने दूँगी चलो जल्दी आओ कह कर मुझे खींचा और मेरा टॉवल निकाल दिया, मैं शर्मा कर नीचे देखने लगा, भाभी हँसते हुए गयी और कपड़ो से एक रेड ब्रा मुझे देकर बोली इसे पहनो, मैं शर्माकर धीमी आवाज़ में बोला भाभी मुझे ब्रा पहनना नही आता आप हेल्प करो, भाभी बोली इस बार तो मैं हेल्प करूँगी लेकिन अगली बार खुद से पहनना, फिर उन्होंने मुझे ब्रा पहनाई, ब्रा के स्ट्रैप को सेट किया फिर ब्रा के कप में कॉटन डालकर फेक बूब्स बनाए और हँसने लगी, फिर एक रेड पेटीकोट पहनाया और कस के उसे बंधा, फिर भाभी ने दुल्हन वाला रेड ब्लाउज पहनना स्टार्ट किया, ब्लाउज थोड़ा टाइट था पर साइज परफेक्ट फिट आया,क्लीवेज उभर कर दिखने लगे, फिर ब्राइडल लहँगा पहनाया जो बहोत भारी था, उस पर काम भी बहोत सारा किया हुआ था, अब मैं खुद को महिला के टाइट और वेटेड कपड़ो में फील कर सकता था, अब भाभी ने एक लांग हेयर विग लाई और मेरे सर पर इसे फिक्स किया,इसके बाद मेकअप की बारी आई, मेरे चेहरे पर पता नही कौन कौनसे क्रीम लगाने लगी, ऑय ब्रो को सेट किया, काजल लगाया और एक डार्क लाल रंग की लिपिस्टिक होंठों पर लगाई, मैं चुप चाप बैठा रहा, भाभी बहोत खुश लग रही थी अब बारी आई ज्वेलरी की, पहले भाभी ने चूड़ियां और कंगन से कलाइयां भर दी, फिर पाऊँ में भारी पायल पहनाई, उसके बाद कानो में लम्बे (Clipon) झुमके पहनाए क्यों के मेरे कानों में छेद नही थे, फिर भाभी ने हैवी नेकलेस गले मे पहना दिया और कुछ ज्वेलरी बालों से लेकर कान के झुमकों तक पहनाई, फिर दुपट्टा लेफ्ट शोल्डर पे सेट किया, मैं एक दुल्हन बन चुका था,मुझे यकीन नही हो रहा था के ये दुल्हन मैं हूँ, आखिर में भाभी ने मेरी नाक में एक बड़ी से नथनी पहना दी,जिसके चैन मेरे होंठो को टच होकर कान के झुमकों को टच थी,मेरे होंठो पर टच होती नथनी से जैसे एक करंट लग रहा था, मैं हैरानी से बोला भाभी ये तो आपने कमाल कर दिया, कोई मुझे देख कर कह नही सकता के मैं एक महिला नही पुरुष हूँ, भाभी मुझे निहार रही थी और कुछ सोच रही थी, मैं खुद को बार बार आईने में देख रहा था, मेरे हाथों की चूड़ियां खनखन कर रही थी, मेरे पाऊँ की पायल छनछन कर रही थी, मेरे लंबे बाल पीठ पर लहरा रहे थे, कानों के झुमके गले के नेकलेस अपना एहसास दिला रहे थे, सब कुछ बदला बदला सा लग रहा था, तभी भाभी के बेटे रोहन के रोने की आवाज़ आयी तो भाभी ने उसे झूले से बाहर निकाला और उसे चुप कराने लगी, अब तक वो सो रहा था, नाश्ते के बाद नहाने और तैय्यार होने में करीब 2 घंटे हो गए थे अब भूख लगने लगी थी भाभी रोहन को गोद मे लिए बोली चलो नानंदजी किचन में चलते है,मैं तो शर्म से लाल हो गया एक हाथ से लहँगे को उठाये मैं भाभी के पीछे किचन में जाने लगा, मुझे चलने में दिक़्क़त हो रही थी, पायल के घुंगरू की आवाज़ चूड़ियों की आवाज़ से मुझे अब आनंद आने लगा था, किचन में पहोंच कर भाभी बोली आज दोपहर का खाना हमारी ननंद पकाएगी, रोज़ हमारे हाथ का पकाया खाना खाती हो आज अपने हाथों से पका कर हमें खिलाओ नानंदजी ये कह कर भाभी खिल खिला कर हंसने लगी, मैं धीमी आवाज़ में बोला मुझे खाना पकाना नही आता भाभी, अचानक भाभी गुस्से से बोली, बहु रानी को खाना पकाना नही आता  ?क्या माता पिता ने कुछ सिखाया नही ऐसे ही ससुराल भेज दिया, मैं परेशान होकर बोला भाभी ये क्या कह रही हो ? भाभी बोली महिलाओं को ऐसे ही ताने दिए जाते है, मैं जब घर मे आयी थी सब काम करने के बावजूद तुम्हारी माताजी और मेरी सासूमाँ ऐसे ही बातें सुनाती थी, क्या अब एहसास हो रहा है के एक महिला को क्या क्या सहन करना पड़ता है ? मैं सर झुकाए चुप खड़ा रहा , भाभी बोली मैं जैसे जैसे बताऊँ वैसे कर के खाना बनाओ, मैं चुप चाप वही करने लगा जैसे भाभी कह रही थी, मुझे काम करने में बहोत दिक़्क़त आ रही थी, कभी मेरे लंबे बाल चेहरे पर आते, हाथों की चूड़ियों पाऊँ की पायल की आवाज़ से लग रहा था के कोई महिला काम कर रही है, खाना तैय्यार होने के बाद मैंने टेबल पर खाना लगाया, भाभी खाने खाते हुए बोली ये कैसा घटिया खाना है ? अब तक खाना बनाना नही सीखा ? अब मुझे एहसास हो रहा था के महिलाओं को क्या कुछ सहना पड़ता है मैं चुप था, खाना खाने के बाद भाभी ने मुझसे बर्तन धुलवाए अब 4 बजने को थे, मैं चाहता था के मैं ऐसे ही रहूँ पर डर रहा था के भाभी क्या सोचेगी, मैं भाभी से बोला के मुझे इजाज़त दें, अब मैं अपने पुरुष के रूप में आना चाहता हूँ, भाभी बोली अभी नही आज तो तुम्हें ऐसे ही रहना है मैं एन्जॉय करना चाहती हूँ, चाय बना कर लेकर आओ फिर रात का खाना भी बनाना है, मैंने चाय बना कर लायी, फिर कुछ देर हम गपशप करने लगे, भाभी बोली के तुम बहोत खूबसूरत लग रही हो तुम्हारा नामकरण करना होगा, फिर कुछ सोच कर बोली मेरे बेटे का नाम रोहन है तुम्हारा नाम आज से रोहिणी होगा, मैं शर्मा गया भाभी हँस कर बोली शर्माओ मत कोई दूसरा नाम पसंद हो तो वो रख दूँ ? मैं चुप रहा, भाभी बोली खाना बना लो खाना खाने के बाद मैं तुम्हे एक कम्पलीट महिला बना दूँगी, मैं ने पूछा भाभी आपने तो मुझे एक दुल्हन बना दिया है अब क्या कमी है मुझमे ?
भाभी मुस्कुरा कर बोली थोड़ी देर में पता चल जायेगा,

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BeingFaltu | Crossdressing Story | साड़ी पहनाई, मेकअप करवाया…भाभी बोली – अब घर के काम भी तुम्हारे हैं

📝 Story Preview:

मेरा नाम अनिल है, मैं महाराष्ट्र का रहने वाला हूँ, मेरे परिवार में माता पिता है मैं और एक बड़ा भाई है, मैं कॉलेज में पढ़ाई करता हूँ, पता नही कब और कैसे मेरी इच्छा होने लगी के मैं महिलाओं के कपड़े पहन कर मेकअप करू, और मेरी ये इच्छा बढ़ती ही जा रही थी, पर मुझे घर में कभी चांस नही मिलता था, मैं कभी कभी माँ की ब्रा पैंटी छुप कर बाथरूम ले जाकर पहन लेता, साड़ी पहनना मुझे नही आता था इसलिए मैं ने यूट्यूब पर देख कर साड़ी पहनना सीखना शुरू किया, परंतु साड़ी पहनने के लिए उतना समय मुझे ना मिलता,मैं ने अपने बाल बढ़ाने शुरू किए और कानों में छेद करवा कर बॉयज वाली बाली कभी कभी पहनने लगा, इस लुक से मेरे परिवार वाले खुश नही थे, पर किसी तरह मैं ने लंबे बाल करने के निर्णय पर अड़ा रहा, मैं हमेशा क्लीन शेव रहने लगा, लम्बे बाल और क्लीन शेव से चेहरा अजीब लगता इसलिए मैं ने हैट पहनना शुरू किया जिसमें मैं अपने बाल छुपा लेता,


कुछ महीनों बाद भैय्या की शादी हो गयी, और श्वेता भाभी हमारे घर आ गयी,वोबहोत सुंदर थी, और उनका सारे घर वालो के साथ व्यवहार अच्छा था, सब उनसे खुश थे, भाभी के पास बहोत सुंदर सुंदर कपड़े थे, और वो मेकअप करना भी जानती थी और जब वो मेकअप कर के तैय्यार होती तो बहोत ही सुंदर लगती, उन्हें देख कर मेरी इच्छा होती के मैं भी भाभी जैसे सज संवर कर तैय्यार हो जाऊं,मैं उन से ज़्यादा बात नही करता था, और उनसे दूर दूर ही रहने की कोशिश करता क्यों के जब वो करीब रहती तो मेरी नज़र उनकी खूबसूरत साड़ी ब्लाउज,चूड़ियों पर जैसे चिपक जाती, मैं नही चाहता था के कोई इस बात से गलत ना सोचे,
भैय्या की शादी को अब 4 महीने हो गए थे, मेरे कॉलेज की छुट्टियाँ थी तभी गाँव से शादी का न्योता आया, मेरे मामा के लड़की की शादी थी तो सभी को शादी के लिए गाँव बुलाया था, सब जाने की तैय्यारी करने लगे, जाने से एक दिन पहले अचानक मैं बीमार हो गया, सब परेशान हो गए के अब क्या करें, डॉक्टर ने आराम करने को कहा है, अब 4 दिन तक अनिल के खाने का कैसे इनतज़ाम होगा माँ बोली, अगर आप कहें तो मैं घर पर अनिल के साथ रुक जाऊँ ? भाभी ने पूछा, पर भैय्या ने तुम्हें भी लाने को कहा है, अगर तुम नही गयी तो शायद वो नाराज़ हो जाएंगे माँ बोली, मैं चाहता था के भाभी भी चली जाए तो मुझे क्रॉस ड्रेसिंग करने का समय मिलेगा इसलिए मैं ने कहा के भाभी आप चिंता ना करें, मैं किसी तरह रह लूँगा 4 दिन की ही तो बात है आप जाइये शादी अटेंड कीजिये वरना मामाजी को अच्छा नही लगेगा, पर किसी को तो तुम्हारे लिए घर पर रुकना पड़ेगा, मुझे या तुम्हारी भाभी को, मेरा जाना भी ज़रूरी है, ठीक है बहु अगर तुम यहाँ रुकना चाहो तो रुक जाओ चलना चाहो तो चलो तुम्हारी मर्ज़ी, माँ बोली, भाभी ने भैय्या की ओर देखा तो भैय्या बोले, तुम क्या चाहती हो बताओ, भाभी बोली, मैं भी थोड़ी बीमार हूँ इसलिए रुकना चाहती हूँ, अगर आप चाहो तो,भैय्या बोले ठीक है रुक जाओ और मुझसे कहा भाभी का ध्यान रखना, घर में ही रहना बाहर कहीं मत जाना और आराम करना, मैं ने कहा ठीक है,
दूसरे दिन सब गाँव चले गए घर पर अब मैं और भाभी ही थे, मैं भाभी पर गुस्सा था के काश ये भी चली जाती तो मुझे माँ की साड़ी ब्लाउज पहनने और सजने धजने का मौका मिलता , खुद का रूम तो ये लॉक कर के जाती है,यही सोच के मैं थोड़ा अपसेट था, भाभी ने खाना दिया फिर पूछा, अब कैसे लग रहा है ? अब ठीक हूँ मैं बोला, पर इतने अपसेट क्यों हो ? भाभी ने पूछा, कुछ नही, सच बताओ क्या बात है ? क्या मैं तुम्हें अच्छी नही लगती ? ऐसी बात नही है भाभी आप बहोत अच्छी हो और साड़ी में तो बहोत ही सुंदर लगती हो, तो फिर मुझसे दूर क्यों भागते हो मैं ने नोटिस किया है और आज भी मेरा यहाँ घर पर रुकना तुम्हें पसंद नही आया ऐसा मुझे लग रहा है, भाभी जैसे मेरे चेहरे से मेरे मन की बात पढ़ रही थी, ऐसी कोई बात नही है भाभी मैं ऐसे ही रहता हूँ कॉलेज में भी, मेरे ज़्यादा फ्रेंड्स भी नही है, ओ हो, फिर तो मैं ने बेकार ही यहाँ रुकना पसंद किया, मुझे इतने सारे लोगों में रहने का मन नही था , और ट्रेवल करना नही था, इसलिए मैं यहाँ रुकी, मुझे क्या पता था के घर में 4 दिनों तक बोर होना पड़ेगा, वहाँ बहोत सारे लोग बातें कर के परेशान कर देते और यहाँ पर तुम चुप रह कर मुझे बोर करोगे, काश मुझे देवर की जगह नंद होती तो मैं उसके साथ खूब एन्जॉय करती,  खूब मस्ती करती, ये सुन कर मैं चौंक गया, क्या भाभी जानती है के मुझे क्रोसड्रेसिंग करना पसंद है, क्या उन्हों ने मुझे देखा है ? उन्हें कैसे पता चला यही मैं सोचने लगा, क्या सोच रहे हो, अगर तुम लड़की होते तो कैसे लगते यही सोच रहे हो ना भाभी हँस कर बोली, भाभी आप भी ना, मज़ाक़ अच्छे से कर लेती हो, मैं सोचने लगा कैसे भाभी को बताऊँ के वो 4 दिनों के लिए मुझे अपनी नंद बना दें पर मेरी हिम्मत नही हो रही थी,
मज़ाक़ नही, तुम केवल लेडीज के कपड़े और ज्वेलरी पहन लो और अपने बालों को अच्छी हेयर स्टाइल दे दो तो दिख जाएगा के तुम लड़की होते तो कैसे लगते, भाभी फिर मज़ाक़ से बोली, अगर तुम चाहो तो मैं हेल्प कर सकती हूँ,
सच में भाभी ? अचानक मेरी ज़ुबान से निकला, मेरा मतलब है किसी हेल्प भाभी मैं ने पूछा ?  यही, लड़की जैसे तैय्यार करने में हेल्प कर सकती हूँ, क्या तुम रेडी हो ? भाभी ने पूछा , मैं सोच में पड़ गया कि कहीं मैं हाँ बोल दूँ तो भाभी मेरा मज़ाक़ ना बनाएं, पर भाभी आप क्यों चाहती हो मुझे लड़की के कपड़े पहनाना ? अरे बाबा तुम मुझसे खुल के बात कर सको, और मैं देखना चाहती हूँ के मैं मेकअप करने में कितनी एक्सपर्ट हूँ, क्या मैं मेकअप से लड़के को लड़की का रूप दे सकती हूँ या नही, मैं ने बीयूटी पार्लर की क्लास में सीखा था वो तुम पर प्रयोग करूँगा, इससे हमारा समय अच्छे से बीत जाएगा, भाभी आपका आईडिया तो अच्छा है पर आप कभी मेरा मज़ाक़ तो नही उड़ाओगी अगर मैं तैय्यार हो गया तो ? बिल्कुल नही, मुझे तो नंद के रूप में एक सहेली मिल जाएंगी, वैसे क्या तुम तैय्यार हो ?
क्या आपको अच्छा लगेगा अगर मैं तैय्यार हुआ तो ? हाँ, मुझे खुशी होगी भाभी बोली, तो ठीक है भाभी मैं आपकी खुशी के लिए लड़की बनने तैय्यार हूँ पर पहले वचन दीजिये के किसी को ये बात नही बताओगी, अच्छा बाबा मैं वचन देती हूँ, भाभी बोली, ठीक है तो मैं रेडी हूँ, पर मेरे पास कपड़े नही है और माँ के कपड़े शायद मुझे ना आये, अब हम क्या करें ?
तुम चिंता ना करो, मैं सब कर लूँगी, तुम बाथरूम जाकर अच्छे से नहाओ , मैं तुम्हें अंडर गारमेंट दूँगी, वो पहन कर मेरे रूम में आना मैं सब तैय्यार रखूँगी, ठीक है भाभी मैं ने कहा और नहाने बाथरूम चला गया, कुछ देर बाद भाभी आयी और मुझे एक नई लाल रंग की पैंटी दी और बोली, इसे पहन कर आना,

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BeingFaltu | Crossdressing Experience जब भाभी ने कहा – "चलो नाप लेते हैं तुम्हारा ब्लाउज़"

📝 Story Preview:

हर crossdresser का सपना रहता हें खुद के नाप का ब्लाउज सिल्वाने का और अगर आप अपना ब्लाउज किसी महिला दर्जी से सीलवाने को मिले तो यह बहुत दुनिया की बड़ी बात से कम नहीं है।
मेने अपना नाप का ब्लाउज सील वाने के लिए बहुत सारे दर्जी के पास कोशिश किया लेकिन कोई तैयार ही नहीं होता था। महिला दर्जी के पास जाने से डर लगता था कि वह इस बात का बुरा ना मान जाए। 
बहुत कोशिश करने के बाद थक कर अंतिम में घर के पास में एक महिला दर्जी के पास में कोशिश किया। दुकान पर उसके साथ उसके पति भी रहता हें। मेरे पास एक रेडीमेड ब्लाउज था जो में उस महिला दर्जी के पास लेकर गई और कहा के यह मेरी माँ का ब्लाउज हैं। किसी काम से मेरी माँ बाहर गई हैं और मुझे यह 3-4 ब्लाउज पीस के कपड़े दिये हैं। उनके यह ब्लाउज सिलने है। महिला दर्जी ने बिना कोई सवाल किए कपड़ा और नाप वाला ब्लाउज ले लिया। महिला दर्जी पूछने लगी ब्लाउज  कैसे डिजाइन में सिलने हैं ?? महिला दर्जी से बात करते waqt थोड़ा डर रही थी कि कहीं किसी को पता चला तो क्या होगा। पैसे की बात करके वहां से जल्दी से यह बोलकर निकल गई के डिजाइन whatsapp पर भेजती हू।

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BeingFaltu | Crossdressing + Bondage | जब अमित ने मांगी सज़ा और मिल गई कैद

📝 Story Preview:

Bondage की ख्वाहिश, Amit की कैद"

– एक इमोशनल ट्रांसफॉर्मेशन की डार्क फैंटेसी


अमित — एक साधारण, संवेदनशील पुरुष, जिसकी ज़िन्दगी तलाक की तल्ख़ सच्चाइयों में बिखर चुकी थी। रिश्तों से भरोसा उठ चुका था और जीने की वजहें धुंधली हो चली थीं।


लेकिन एक रात, एक बार में, उसकी मुलाकात होती है रोशनी से — एक रहस्यमयी, आत्मविश्वास से भरी और सम्मोहक महिला, जिसकी आँखों में खेल था और मुस्कान में आग।


रोशनी उसे अपने घर ले जाती है… लेकिन यह कोई आम दावत नहीं थी।

यह थी एक मानसिक और शारीरिक ट्रांसफॉर्मेशन की शुरुआत — जहां प्यार की परिभाषा नियंत्रण से गुजरती है, और समर्पण किसी सुंदर बंधन में बंधने को तैयार होता है।


🔗 बॉन्डेज फैंटेसी और रोलप्ले की सीमाओं को चुनौती देती एक अनोखी यात्रा

💔 दिल टूटे अमित की आत्मा का धीरे-धीरे पुनर्निर्माण

🔥 हर अध्याय में बढ़ती नज़दीकियां, बदलती सीमाएं, और एक कशमकश — इश्क़ और अधीनता के बीच


 थोड़ा पास आकर धीरे से बोली —

"मैं तुम्हें वो सारी खुशियाँ दे सकती हूँ, जिनके तुम हकदार हो… और शायद वो भी, जिनके बारे में तुमने कभी सोचा तक नहीं होगा।"


"पर…" उसने रुक कर मेरी आँखों में झाँका —

"उसके लिए तुम्हें अपनी मर्ज़ी खुद बतानी होगी।

अगर तुम सिर्फ बीयर पीने आए हो, तो हम सिर्फ बीयर पिएंगे, बातें करेंगे, और सुबह होने से पहले मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ आऊँगी।

लेकिन अगर तुम मेरी बाहों में सुकून तलाशने आए हो… तो हमें थोड़ी तैयारी करनी होगी।"


मैंने बीयर का घूंट लिया, गला सूख रहा था…

और फिर रोशनी की आँखों में देखते हुए कहा —


"मैं तुम्हारे साथ सिर्फ ये रात नहीं… पूरी ज़िंदगी बिताना चाहता हूँ।

तुम सिर्फ खूबसूरत नहीं… बेहद खास हो।

अगर तुम कहो, तो मैं तुम्हारे लिए सब कुछ छोड़ सकता हूँ।

तुम्हें खोने से बेहतर है… मैं तुम्हारा बन जाऊँ।

अगर तुम चाहो, तो मैं तुम्हारे घर का नौकर बन जाऊँ।

अगर तुम कहो, तो तुम्हारा कुत्ता भी बनने को तैयार हूँ…

बस… मुझसे दूर मत जाना, रोशनी।

कभी मत।"


कुछ पलों की खामोशी के बाद रोशनी का चेहरा नरम हो गया…

उसने बीयर का कैन नीचे रखा…

मेरे पास आई… और बस एक बात बोली —

"तब आज की रात सिर्फ मेरी होगी… और तुम्हारी भी।"


रोशनी हँस पड़ी।


"अरे अमित... ये क्या कह रहे हो!"

फिर उसने मुस्कराते हुए कहा,

"अच्छा... तो अगर तुम वाकई मेरे घर का कुत्ता बनना चाहते हो, तो एक बार भौंक के दिखाओ!"


मैं थोड़ा झेंप गया… लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान और आँखों की शरारत ने कुछ ऐसा असर किया कि मैं बिना सोचे ही "भौं-भौं" कर उठा।



क्या अमित इस अनजान खेल का हिस्सा बनकर अपनी खोई हुई पहचान पाएगा?

या रोशनी की रहस्यमयी दुनिया उसे एक ऐसे मोड़ पर ले जाएगी जहाँ से वापसी असंभव है?


यह कोई आम प्रेम कथा नहीं है — यह है एक गहराई से भरी psychological erotic journey, जहाँ हर कदम पर एक नई कशिश है, हर मोड़ पर एक रहस्य।


🛑 नोट:

इस कहानी में दिखाए गए भाव, स्थितियाँ और रिश्ते बालिग पाठकों के लिए हैं। यह एक फिक्शनल दुनिया है जहाँ पात्र अपनी मर्ज़ी, सीमाओं और चाहतों के साथ भावनाओं को एक्सप्लोर करते हैं।


मैं अमित हूँ। आज वो दिन भी आ गया, जिसका डर मैं सालों से अपने मन के किसी कोने में छुपाए बैठा था। कोर्ट की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए मेरे पैर लड़खड़ा रहे थे, जैसे वो भी जानते हों कि आज के बाद सब कुछ बदल जाएगा। जज साहब ने जैसे ही तलाक के कागजों पर मुहर लगाई, मेरी सांसें एक पल के लिए थम सी गईं।

वैसे तो मेरी शादी कब की खत्म हो चुकी थी, ये तो बस एक औपचारिकता भर थी। फिर भी... जब वकील ने कागज मेरी तरफ बढ़ाए, तो मेरी उंगलियाँ कांप उठीं। कल तक जिस शख्स के नाम से मेरी पहचान जुड़ी थी, आज वो सिर्फ कानूनी कागजों में दर्ज एक नोटिस बनकर रह गया था।

बार का दृश्य:
शाम के 6 बजे थे। मैं अपनी धुली हुई नीली जीन्स और मैरून कलर की हाफ स्लीव शर्ट पहने, अपने छोटे से बैग के साथ 'मूनलाइट पब' के भारी लकड़ी के दरवाजे के सामने खड़ा था। बार का बाहरी हिस्सा ईंटों से बना था, जिस पर नीली लाइट्स टिमटिमा रही थीं। अंदर से हल्का जैज़ संगीत सुनाई दे रहा था, जो दरवाजा खुलते ही गर्म हवा के झोंके की तरह मेरे कानों से टकराया।

अंदर का माहौल गर्मजोशी से भरा था। बाईं तरफ कुछ कॉलेज स्टूडेंट्स अपने रंग-बिरंगे कपड़ों में - एक लड़की फीरोजी टॉप और रिप्ड जीन्स में, उसका दोस्त ब्लैक लेदर जैकेट पहने - मस्ती में झूम रहे थे। दाईं तरफ एक मिडिल-एज्ड कपल ब्राउन वुडेन टेबल पर बैठा था, शायद उनकी वर्षगांठ थी। महिला ने गुलाबी सूट पहना था, उसके हाथ में वाइन का गिलास चमक रहा था।

मैं बार काउंटर की तरफ बढ़ा। बारटेंडर - लाल चेकर्ड शर्ट और डेनिम एप्रन पहने - ने पूछा, "सर, क्या लेंगे?" मेरी आवाज़ थोड़ी कांपी, "व्हिस्की, नीट।" ग्लास की ठंडक मेरी हथेली को चुभ रही थी, जैसे मेरे अंदर का सन्नाटा।

अकेलापन भीड़ में:
मैं कोने वाली टेबल पर बैठ गया, जहाँ नीली मद्धिम लाइट मेरे चेहरे के उदास हिस्सों पर गहरी छाया डाल रही थी। मेरे सामने रखा ग्लास धीरे-धीरे खाली हो रहा था, पर दिल का बोझ हल्का होने का नाम नहीं ले रहा था।

आसपास के लोगों की हँसी, ग्लास के टकराने की आवाज़, डीजे का बजता हुआ गाना - "तुम ही हो... अब तुम ही हो..." - सब कुछ मेरे लिए एक धुंधला सा शोर बनकर रह गया था। मेरी आँखों के आगे पुराने पल तैर रहे थे - उसकी हंसी, हमारा पहला घर, उस रात की लड़ाई जब सब टूट गया...

तभी अचानक मुझे महसूस हुआ जैसे किसी ने मेरे कंधे को हल्का सा छुआ। मैंने सिर उठाया। सामने खड़ी थी एक लड़की - लाल रंग की ड्रेस, हाथ में वाइन का गिलास, और आँखों में एक अजीब सी चमक। उसने पूछा, "यह सीट खाली है?"



मैं घबरा गया और अपने ख्यालों की दुनिया से अचानक बाहर आया। बार का तेज़ संगीत अब भी कानों में गूंज रहा था, लेकिन मेरा ध्यान अब सिर्फ उस शख्स पर था जिसने मेरे कंधे पर हाथ रखा था।


वो एक खूबसूरत लड़की थी—उम्र ज़्यादा नहीं, शायद 30 के आसपास। उसने मुझे सवालिया निगाहों से देखा, फिर अपना रूमाल मेरी तरफ बढ़ाते हुए मेरे सामने वाली सीट पर बैठ गई। उसकी मुस्कान में एक अजीब सी गर्मजोशी थी, जैसे कोई पुराना दोस्त मिला हो।


"हाय, मेरा नाम रोशनी है," उसने कहा, आवाज़ में नर्मी। "आप मुझे परेशान लग रहे थे... शायद रो भी रहे थे? मैं खुद से रहा नहीं गई, इसलिए आ गई। आप अकेले ही आए हैं, न?"


उसकी बातों में कोई दखलअंदाजी नहीं थी, बस एक सहज पूछताछ। मैंने उसे गौर से देखा—लाइट पिंक लिपस्टिक, स्लीक ब्लाउज और फिट जीन्स, गले में पतला-सा गोल्डन नेकलेस, कानों में छोटे-छोटे डायमंड स्टड्स। उसके बाल खुले थे, जो बार-बार उसकी आँखों पर आ जाते, और वह उन्हें बार-बार हटाती। उसकी स्मार्टवॉच पर चमकती स्क्रीन से लग रहा था कि वह किसी प्रोफेशनल दुनिया से ताल्लुक रखती है।


"अरे, प्लीज़, आप बैठिए," मैंने कहा, अपने आँसू पोंछते हुए। "मुझे कोई परेशानी नहीं है। मेरा नाम अमित है।"


हमने दोनों ने बीयर ऑर्डर की और कुछ स्नैक्स भी। जब वेटर ने ड्रिंक्स रखे, तो रोशनी ने अपने बालों को पीछे खींचकर एक स्कार्फ से पोनीटेल बना ली। अब उसके चेहरे के एक्सप्रेशन और भी क्लियर दिख रहे थे—उसकी आँखों में एक अजीब सी गहराई थी, जैसे वह भी किसी दर्द को समझती हो।


"तुम परेशान क्यों थे?" उसने पूछा, अपनी बीयर का घूंट लेते हुए। "अगर बात करना चाहो, तो मैं सुनने के लिए तैयार हूँ। दुख बाँटने से हल्का हो जाता है... और मैं एक अच्छी श्रोता हूँ।"


मैंने उसकी आँखों में देखा—वहाँ कोई जल्दी नहीं थी, कोई झूठी हमदर्दी नहीं। सिर्फ एक इंसान था, जो सच में जानना चाहता था।


मैंने साँस ली और शुरू किया—अपनी टूटी शादी के बारे में, उन रातों के बारे में जब मैं अकेले सोफे पर सोया करता था, उन लम्हों के बारे में जब प्यार धीरे-धीरे खत्म हो गया। जैसे-जैसे मैं बोलता गया, रोशनी की आँखें भी नम होती गईं। उसने एक बार भी मेरी बात काटने की कोशिश नहीं की—बस सुनती रही, कभी हाँ बोलकर, कभी मुस्कुराकर।


जब मेरी कहानी खत्म हुई, तो हम दोनों की बीयर के गिलास खाली हो चुके थे। मैंने बिल पे करने की पेशकश की, लेकिन रोशनी ने इनकार कर दिया।


"नहीं, हम दोनों अपना-अपना बिल अलग-अलग पे करेंगे," उसने कहा, थोड़ी अड़ियलता के साथ। "मैं आजकल इस नियम पर चलती हूँ।"


बार बंद होने का समय हो चुका था। लाइट्स धीरे-धीरे ब्राइट होने लगी थीं, और स्टाफ टेबल्स साफ करने लगा था। पर हमारी बातें अभी भी खत्म नहीं हुई थीं।


"तुम्हारी फ्लाइट कब है?" मैंने पूछा, याद करते हुए कि उसने बताया था कि वह एयर होस्टेस है।


"कल सुबह," उसने कहा। "पर तुम्हारा दुख सुनकर मुझे लगा कि शायद हम थोड़ा और वक्त बिता सकते हैं। अगर तुम चाहो तो...?"


उसकी आँखों में एक सवाल था। मैंने हाँ में सिर हिलाया।


थोड़ी ही देर में हम दोनों ऐसे घुल-मिल गए थे, जैसे सालों के दोस्त हों। शायद यही होता है जब दो टूटे हुए दिल एक-दूसरे की आँखों में अपना ही दर्द ढूँढ लेते हैं। रोशनी ने अपने पसंद-नापसंद के किस्से सुनाए—वो कैसे समुद्र के किनारे खड़े होकर सूरजास्त देखना पसंद करती है, कैसे उसे गुलाबी रंग से चिढ़ है, कैसे उसकी माँ का खत्म न होने वाला दबाव उसे हमेशा परेशान करता रहता है। और मैंने बताया कि कैसे मुझे बारिश की बूंदों की आवाज़ सुनकर शांति मिलती है, कैसे मैं अपनी एकांत की दुनिया में किताबों के साथ खो जाता हूँ।


हमने जीवन के सबसे खुशनुमा पल भी शेयर किए, और वो क्षण भी जब सब कुछ टूटकर बिखर गया था। मैं हैरान था—कैसे एक अजनबी इतनी जल्दी मेरे दिल के इतने करीब आ गई? शायद इसलिए क्योंकि वह भी उसी तरह के दर्द से गुज़री थी, जिस तरह मैं गुज़र रहा था।


बार से बाहर:

आखिरकार, बार के लाइट्स पूरी तरह से जल उठे, और स्टाफ ने इशारा किया कि अब बंद होने का वक्त हो चुका है। हमने अपना-अपना बिल अलग-अलग पे किया—रोशनी ने अपना कार्ड निकाला, मैंने नकद दिया। बाहर निकलते ही ठंडी हवा ने हमें झकझोर दिया। सड़क पर अब बस कुछ लेट-नाइट टैक्सियाँ और दूर कहीं किसी पार्टी से लौटते हुए लोगों की आवाज़ें थीं।


हमने एक-दूसरे को गुडबाय कहा। कोई नंबर एक्सचेंज नहीं हुआ, कोई सोशल मीडिया रिक्वेस्ट नहीं भेजी गई। शायद हम दोनों जानते थे कि यह मुलाकात सिर्फ एक पल के लिए थी—एक सुकून भरी रात, जिसे हम कल के सूरज के साथ भूल जाना चाहते थे।


अकेले चलते हुए:

मैं पैदल ही अपने घर की तरफ चल पड़ा। रात की खामोशी में मेरे कदमों की आवाज़ गूंज रही थी। दिल में वही पुराना खालीपन लौट आया था, मानो भगवान ने एक पल के लिए मुझे खुशी का स्वाद चखाया हो, और फिर छीन लिया हो।


रोशनी की मुस्कान, उसकी आँखों में चमक, उसके हाथों का हल्का स्पर्श—सब कुछ अब एक धुंधली सी याद बनकर रह गया था। क्या वह सच में थी, या सिर्फ मेरे दर्द की एक कल्पना?


मैंने अपने फ्लैट का दरवाजा खोला। अंदर का सन्नाटा मुझे फिर से अपनी गिरफ्त में लेने को तैयार था। पर आज, इस खालीपन में भी एक अजीब सी शांति थी। शायद इसलिए क्योंकि आज मैं अकेला नहीं था—कम से कम कुछ घंटों के लिए, किसी ने मुझे सुना था, समझा था।


मैंने खिड़की से बाहर देखा। रात का आकाश साफ था, तारे टिमटिमा रहे थे। कहीं दूर, शायद रोशनी भी उन्हीं तारों को देख रही होगी। और फिर मैंने मुस्कुराया—क्योंकि कभी-कभी, कुछ लोग हमेशा के लिए नहीं, बस एक पल के लिए होते हैं... पर वो पल जिंदगी भर याद रहता है।


मैं चीखना चाहता था, चिल्लाना चाहता था, सड़क पर गिरकर रोना चाहता था—पर मैं अभी भी वहाँ खड़ा था, जैसे मेरी आवाज़ मेरे ही गले में दब गई हो। मेरे कदम लड़खड़ा रहे थे, पर मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। तभी...


एक काली एसयूवी मेरे पास आकर रुकी। उसकी शीशे की खिड़की धीरे-धीरे नीचे उतरी, लेकिन अंदर अंधेरा था—कुछ दिख नहीं रहा था। फिर एक जानी-पहचानी आवाज़ आई—


"अमित?"


वो रोशनी थी।


"तुम्हें कहीं छोड़ दूँ?" उसने पूछा, आवाज़ में एक अजीब सी गर्माहट।


मैंने हिचकिचाते हुए कहा, "नहीं... मैं यहीं पास में रहता हूँ।"


"चलो, मैं छोड़ देती हूँ," वह बोली, और फिर हँसते हुए जोड़ा, "या फिर... साथ में कुछ देर और बीयर पी लेते हैं?"


मैंने सोचा—मेरे पड़ोसी बहुत शंकालु हैं। अगर किसी ने मुझे किसी लड़की के साथ देख लिया, तो कल सुबह तक पूरी सोसाइटी में खबर फैल जाएगी।


"मेरे यहाँ तो नहीं चल सकते... पड़ोसी बहुत गॉसिप करते हैं," मैंने कहा।


रोशनी ने अपने बालों को पीछे हटाते हुए मुस्कुराई, "तो फिर... चलो मेरे घर चलते हैं। वहाँ किसी को कोई परेशानी नहीं होगी।"


और फिर, बिना एक पल सोचे—जैसे भाग्य ने मुझे दूसरा मौका दिया हो—मैंने दरवाज़ा खोला और गाड़ी में बैठ गया।


गाड़ी के अंदर:

जैसे ही मैं बैठा, रोशनी ने गाड़ी को सेंटर लॉक कर लिया। अंदर की लाइट्स नीली-हल्की थीं, और गाड़ी में उसके पर्फ्यूम की खुशबू फैली हुई थी—वो हल्की सी वेनिला और जैसमिन की मिली-जुली खुशबू।


वह मुड़ी और मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक गंभीरता थी।


"अमित... एक रिक्वेस्ट है," उसने धीरे से कहा। "अगर तुम बुरा न मानो तो..."


मेरा दिल धड़क रहा था। क्या वो कुछ ऐसा कहने वाली है जो मैं सोच रहा हूँ?


"हाँ, बोलो," मैंने कहा, आवाज़ थोड़ी काँपती हुई। "मैं वादा करता हूँ, बुरा नहीं मानूँगा।"


रोशनी ने गहरी साँस ली, और फिर बोली—


रोशनी की अजीब सी रिक्वेस्ट सुनकर मैं थोड़ा ठिठका, फिर मुस्कुरा दिया। "तुम सच में बहुत सारे सीरियल देखती हो, है न?" मैंने हंसते हुए कहा।


उसने गंभीरता से सिर हिलाया, "पर अबकी बार मैं ज़िंदगी में थ्रिल चाहती हूँ। तुम्हारे हाथ बांधने दो ना, प्लीज? वादा करती हूँ, कोई हरकत नहीं करूँगी!"


मैंने अपनी पीठ पीछे हाथ कर दिए। "ठीक है, लेकिन शर्त ये है कि तुम भी कोई साइको किलर न निकलो," मैंने मजाक किया।


रोशनी ने अपने बैग से एक सॉफ्ट, सिल्की स्कार्फ निकाला—वही जिससे उसने बार में अपने बाल बाँधे थे। उसने मेरी कलाइयों को पीछे की तरफ कसकर बाँध दिया। स्कार्फ का मुलायम स्पर्श और उसकी उंगलियों का हल्का दबाव... एक अजीब सी रोमांचक ऊर्जा मेरे शरीर में दौड़ गई।


ये फैंटेसी तो मैं सालों से अपनी बीवी के साथ जीना चाहता था... पर वो हमेशा टाल देती थी।


"अमित..." रोशनी ने धीरे से कहा, "एक लास्ट रिक्वेस्ट। क्या मैं तुम्हारी आँखें भी बाँध सकती हूँ? प्लीज... मैं अकेली लड़की हूँ, तुम समझ सकते हो ना?"


उसकी आवाज़ में एक अजीब सी बेचैनी थी, जैसे वो किसी डर और एक्साइटमेंट के बीच झूल रही हो। मैंने सिर हिलाया। "ठीक है... बाँध दो।"


उसने दूसरा स्कार्फ निकाला—ये हल्के गुलाबी रंग का था, जिस पर छोटे-छोटे फूलों का प्रिंट था। धीरे-धीरे उसने मेरी आँखों के ऊपर से बाँध दिया। अँधेरा छा गया।


"तुम्हें डर तो नहीं लग रहा?" उसने पूछा, आवाज़ थोड़ी काँपती हुई।


मैंने मुस्कुराने की कोशिश की। "नहीं... बस इतना ज़रूर लग रहा है कि तुम मुझे कहीं ले जा रही हो।"


"हाँ... एक सरप्राइज है," उसने कहा, और फिर गाड़ी का इंजन स्टार्ट किया।


मैंने बस हाँ में सिर हिला दिया।

उसने बिना कुछ कहे अपने बालों में बंधा हुआ स्कार्फ खोला और धीरे-धीरे मेरी आँखों पर बांध दिया। अब मेरी दुनिया में सिर्फ अंधेरा था... लेकिन एक अजीब-सा सुकून उस अंधेरे में भी छिपा था।


जब वो मेरे करीब झुकी और मेरी आँखों पर वो स्कार्फ बांध रही थी, उसके खुले बाल मेरे चेहरे को छूते जा रहे थे। उन बालों से आती हल्की-सी खुशबू — शायद उसके शैम्पू की — एक शांत, मीठी मादकता लिए हुए थी। मेरा दिल धड़क रहा था, और सांसें उस खुशबू में उलझती जा रही थीं।


जो पल मैंने कभी अपनी बीवी के साथ जीने की कल्पना की थी, और जो अब तलाक की बातों में दब कर रह गया था... वही एहसास आज बिना कहे, बिना मांगे, मेरे सामने था।


मैं कहीं खो गया था... और गाड़ी अपनी रफ्तार से चल रही थी।

अचानक मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे रोशनी का हाथ मेरी जांघ को छू गया हो।

मेरा शरीर झनझना उठा... मेरा प्राइवेट पार्ट तनाव में था, लेकिन मन में एक झिझक भी थी... एक संकोच, एक उलझन।

"शायद गियर बदलते हुए हाथ लग गया हो," मैंने मन ही मन सोचा और खुद को संयमित किया।


रोशनी बातों में मग्न थी —

"अमित, एक बात पूछूं? ये बाल क्यों बढ़ा रखे हैं तुमने?"

मैंने हल्की-सी हँसी के साथ जवाब दिया,

"पिछले कुछ महीनों से तलाक और कोर्ट-कचहरी में इतना उलझा रहा... अपने लिए वक़्त ही नहीं मिला। बस, बढ़ते गए।"


"पर तुम पर बहुत अच्छे लगते हैं लंबे बाल,"

उसने बड़े सहज स्वर में कहा, "तो फिर दाढ़ी क्यों नहीं रखी?"


"थी दाढ़ी... पर आज बाहर आना था तो सोचा, क्लीन शेव कर लूं। घर पर ही कर ली।"


हमारी बातों का सिलसिला यूँ ही चलता रहा। वो पूछती जाती और मैं जवाब देता गया।

गाड़ी कहाँ जा रही थी, ये अब मुझे नहीं पता था।

मैंने खुद को बस उस सफ़र के हवाले कर दिया था...


अचानक गाड़ी एक जगह आकर रुक गई।

रोशनी ने धीरे से मेरा हाथ थामा और कहा, "आओ, अब अंदर चलो।"


वो मुझे सहारा देकर एक कमरे में ले गई — शायद उसका घर था।


दरवाज़ा बंद हुआ, तो उसने धीरे से कहा —

"अमित... एक आख़िरी सवाल।"




रोशनी किचन से दो बीयर लेकर लौटी।

उसकी चाल में एक सहज आत्मविश्वास था, और आँखों में… कुछ सवाल।


उसने बीयर मुझे थमाई और मेरी ओर देखते हुए मुस्कुरा कर बोली —

"क्या तुम मेरे घर सिर्फ बीयर पीने आए हो, या कुछ और भी चल रहा है तुम्हारे दिमाग में?"


मैं कुछ नहीं बोला… शायद बोल ही नहीं पाया।

उसने मेरी चुप्पी को पढ़ लिया।


"देखो, अमित," उसने कहा, "मुझे पता है कि अगले दो दिन छुट्टियाँ हैं… तुम्हारी भी, और मेरी भी।

और सबसे बड़ी बात — घर में कोई नहीं है।

हम कुछ भी कर सकते हैं।"


वो थोड़ा पास आकर धीरे से बोली —

"मैं तुम्हें वो सारी खुशियाँ दे सकती हूँ, जिनके तुम हकदार हो… और शायद वो भी, जिनके बारे में तुमने कभी सोचा तक नहीं होगा।"


"पर…" उसने रुक कर मेरी आँखों में झाँका —

"उसके लिए तुम्हें अपनी मर्ज़ी खुद बतानी होगी।

अगर तुम सिर्फ बीयर पीने आए हो, तो हम सिर्फ बीयर पिएंगे, बातें करेंगे, और सुबह होने से पहले मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ आऊँगी।

लेकिन अगर तुम मेरी बाहों में सुकून तलाशने आए हो… तो हमें थोड़ी तैयारी करनी होगी।"


मैंने बीयर का घूंट लिया, गला सूख रहा था…

और फिर रोशनी की आँखों में देखते हुए कहा —


"मैं तुम्हारे साथ सिर्फ ये रात नहीं… पूरी ज़िंदगी बिताना चाहता हूँ।

तुम सिर्फ खूबसूरत नहीं… बेहद खास हो।

अगर तुम कहो, तो मैं तुम्हारे लिए सब कुछ छोड़ सकता हूँ।

तुम्हें खोने से बेहतर है… मैं तुम्हारा बन जाऊँ।

अगर तुम चाहो, तो मैं तुम्हारे घर का नौकर बन जाऊँ।

अगर तुम कहो, तो तुम्हारा कुत्ता भी बनने को तैयार हूँ…

बस… मुझसे दूर मत जाना, रोशनी।

कभी मत।"


कुछ पलों की खामोशी के बाद रोशनी का चेहरा नरम हो गया…

उसने बीयर का कैन नीचे रखा…

मेरे पास आई… और बस एक बात बोली —

"तब आज की रात सिर्फ मेरी होगी… और तुम्हारी भी।"


रोशनी हँस पड़ी।


"अरे अमित... ये क्या कह रहे हो!"

फिर उसने मुस्कराते हुए कहा,

"अच्छा... तो अगर तुम वाकई मेरे घर का कुत्ता बनना चाहते हो, तो एक बार भौंक के दिखाओ!"


मैं थोड़ा झेंप गया… लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान और आँखों की शरारत ने कुछ ऐसा असर किया कि मैं बिना सोचे ही "भौं-भौं" कर उठा।


वो ठहाका मार कर हँसी।

"ओह मेरी जान! तुम तो बहुत स्वीट हो,"

उसने कहा और प्यार से मेरा गाल सहलाते हुए बोली,

"ठीक है, अब मैं तुम्हारे हाथ खोल रही हूँ… पर आँखें मत खोलना।"


मैंने सिर हिलाया — हाँ में।

अंदर से मन किया… एक झलक देख लूं…

पर कहीं कुछ बेवकूफी हो गई, तो जो कुछ भी सुंदर और सच्चा था, वो हमेशा के लिए टूट सकता था।

मैंने खुद को रोक लिया।


उसने मेरे हाथों की गिरहें खोल दीं।


अब हम आराम से सोफे पर बैठ गए…

बीयर के कैन फिर से खुले।

उसने मुझसे मेरी सारी फैंटेसी के बारे में पूछा —

और अपनी कुछ दिल की बातें भी साझा कीं।


शब्दों में कोई झिझक नहीं थी, पर इरादों में बहुत गहराई थी।


तभी वो मेरी ओर झुकी,

बीयर की मस्ती में नहीं — भरोसे की नज़दीकी में।


"अमित… अब वक़्त आ गया है असली मजे का।

बातों का वक्त खत्म…

अब वक्त है, उन ख्वाहिशों को महसूस करने का

जो सिर्फ सोच में थीं… अब एहसास में होंगी।"


चलो अपने सारे कपड़े उतार कर बिलकुल नंगे खड़े हो जाओ अगर कोई भी चालाकी की या मेरा मूड बिगड़ने की कोशिश की तो में तुम्हे नंगा ही घर से बाहर भागा दूंगी, मैने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दिए और नंगा खड़ा हो आया में नंगा खड़ा था और मेरा वो भी खड़ा हो गया, अब रोशनी ने मेरे कपड़े उठाए और एक अलमारी में लॉक कर दिए और फिर मुझे एक धक्का दिया और  में बिस्तर पर गिर गया फिर रोशनी ने मेरे हाथो को बिस्तर के कोनो से बांध रही थी पहले एक हाथ बांध दिया फिर दूसरा हाथ बांध दिया बिस्तर के दोनो तरफ हेडबोड से , उसके बाद उसने अपनी उंगलियां मेरे ही पर घुमाई और मेरे निप्पल पर जाकर रुक गई और मेरे निप्पल पर अपने नाखून को हल्का सा दबाया , और मैने ताने हुए पत्थर जैसे हथियार को भी अपने दूसरे हाथ से उस पर अपने नाखून सहलाए,


फिर रोशनी ने  अपनी पेटीकोट के नीचे से काले साटन पैंटी  को नीचे खींच लिया।  रोशनी ने अपनी पैंटी को मेरे सिर के ऊपर रख दि  ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पैंटी का  गीला स्थान मेरी  नाक के ऊपर आए ।  इसके बाद रोशनी एक काले रेशम के स्कार्फ में कई गांठें इस तरह बांधती है के उसकी पैंटी मेरे  मुंह में गहराई तक धकेल सके  जिससे मेरा  मुंह कसकर बंद जो जाए।  रोशनी बोली  तुम्हे  शांत रहना चाहिए।  क्या तुम्हे  मेरी खुशबू पसंद आई?  अमित  ने हां में सिर हिलाया, "अच्छा, तुम्हे बहुत बदबू आ रही होगी", कहकर हसने लगी। फिर उसने एक पैर को पकड़ लिया और उसे बिस्तर के नीचे रेलिंग से बांध दिया।  दूसरे पैर को पकड़कर  उसे भी  बांध दिया।

जो आपने अभी पढ़ा, वो तो बस शुरुआत थी — कहानी का सबसे रोमांचक हिस्सा अभी बाकी है!
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