Disclaimer

यह ब्लॉग पूरी तरह काल्पनिक है। किसी से समानता संयोग होगी। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयाँ ((जैसे स्तन वर्धक या हार्मोन परिवर्तन)न लें - यह जानलेवा हो सकता है।— अनीता (ब्लॉग एडमिन)

BeingFaltu Crime Series | अनीता का अपहरण – जब प्यार बना क्राइम और पहचान बनी राज़

📝 Story Preview:

मैं हूं अमित, और मेरा काम है लड़कियों की डिलीवरी करना , सुनने में थोड़ा डरावना जरूर है पर अब इतने समय से ये करते हुए अब सब नॉर्मल हो गया है और सबसे बड़ी बात के कोई डर नही था फुल प्राइवेसी रहती है, कस्टमर ऑनलाइन बात करते हैऑनलाइन पेमेंट कर देते है , मेरा काम बस पेमैंट रिसीव होने के बाद पार्सल को अच्छी तरह से लॉक करके बेहोश करके बस छोड़ देना है, और पार्सल वाले अपना सामान खुद ले जायेंगे , चलो सीधे कहानी पर चलते है ,





वैसे तो मैं लड़कियों से ज्यादा अटैच्ड नही होता था बस उन्हें पैसे के लालच में फसाओ होटल बुलाओ फिर उन्हे बेहोश करो और बस पैक कर के पार्सल पर ये जो लड़की मेरे सामने बिस्तर पर बैठी थी बहुत खास थी क्यों के ये शायद पहेली लडकी थी जिससे मुझे सच में प्यार हो गया था बाकी सारी लड़कियां मेरे पैसे पर मरती थी पर ये पैसे के लिए नहीं थी ये सच में मुझसे प्यार करती थी और एक बार तो इसने मेरे लिए गुंडों से भी लड़ाई कर दी थी बहुत चोट आई थी इसे पर इसने एक बार भी मुझसे शिकायत नहीं की कभी इसने मुझे बदलने की कोशिश नहीं की इसने मुझे वैसे ही पसंद किया जैसा मैं हूं और शायद दुनिया में ऐसी लड़की बहुत कम किस्मत वालो को मिलती है 


ये है अनिता मेरी बहन की दोस्त , हम दीदी के बर्थडे पर पहली बार मिला था इसकी जो एक खास बात थी ये हमेशा मेहंदी ब्राइडल लगती अपने दोनो हाथो में और चूड़ियां दोनो हाथ भर कर पहनती थी रंग गोरा था हमेशा कानो में बड़े बड़े झुमके पहनती गले में नेकलेस और पूरे कपड़े पहन कर भी आज की फैशन मॉडल से बेहद ज्यादा खूबसूरत दिखती थी ,मुझे भी इससे प्यार लगभग हो गया था, पर कस्टमर की अर्जेंट डिमांड थी तो समय कम था और पैसे मैं जितने नॉर्मली लेता था उसे कई सौ गुना ज्यादा थे, तो दिल पर पत्थर रख कर मैने अपने प्यार को कुर्बान करना ही सही समझा,


अनीता अपनी सहेली के घर गई थी मेहंदी फंक्शन में , नाच गाना हो रहा था दुल्हन के बाद अनीता जो की दुल्हन की सहेली थी उसकी मेहंदी भी ब्राइडल ही लगी थी सारी सहेलियों ने एक जैसी मेहंदी लगवाने का प्लान किया था,


मैने अनीता को कॉल किया और बताया कि बहुत मुश्किल से होटल रूम अरेंज हुआ है हम बहुत सारी बातें करेंगे और फंक्शन खत्म होने से पहले मैं उसे घर पहुंचा दूंगा किसी को शक भी नहीं होगा बस वो अपने कुछ फोटोज अपने स्टेटस में डाल दे और अपने घर वाले को भेज दे जिससे उन्हें कोई शक न हो और सहेलियों को बिना बताए बाहर आ जाए मैं गाड़ी ले कर गेट के बाहर खड़ा हु

जैसे प्लान किया था वैसे ही हुआ अनीता ने अपनी सहेली को बताया के थोड़ा सफोकेशन हो रहा है तो खुली हवा में जा रही है सहेलियों ने सोचा कोई ब्वॉयफ्रेंड होगा जिससे बात करनी होगी थोड़ा चिढ़ाया पर जाने दिया अक्सर इस उमर की नई नई लड़कियां जो खूबसूरत होती हैं वो जब कली से फूल बनती है उनमें ये सब होना कॉमन होता है।


अनीता जल्दी से घर से बाहर आई, गाड़ी में बैठ गई, उसके दोनों हाथों में कंधों तक मेहंदी लगी थी, पीली ड्रेस खुले बाल, दूध से सफेद पैरो में गोल्डन हिल पहन रखी थी, होठों पर पिंक लिपस्टिक, आंखों में काजल, और माथे पर बिंदी थी, मैने थोड़ी दूर जाकर गाड़ी रोक दी, और उसे बस देखने लगा, क्यों के इस बेचारी को तो पता ही नहीं था, के आज के बाद इस गुलाब का रस पता नहीं कौन कौन चखेगा ,


अनीता ने मुझे पूछा ऐसा क्या देख रहे हो पहली बार थोड़े देखा है मुझे , मैने कहा मेहंदी बहुत खूबसूरत लगाई है तुमने वहीं देख रहा था तो अनीता बोली मैने चोरी से इसमें तुम्हारा नाम भी लिखवा लिया है तुम ढूंढ न पाओ इस तरह से। उसके चेहरे की मासूमियत देखते ही बनती थी

मैने कहा तुम्हे लिपस्टिक की क्या जरूरत है तुम्हारे होंठ तो नेचुरल ही पिंक है गुलाब की पंखुड़ियों जैसे


अनीता बोली तुम्हारे लिए ही लगाई है बुद्धू, कही तुम्हे ऐसा न लगे के मुझे मेकअप पसंद नहीं और तुम पैसे बचाने की सोचो


अमित बोला अरे अगर मेरे लिए ही लिपस्टिक लगाई है तो मुझे 💋 किस करने क्यों नहीं देती हो


अनीता मैं तुम्हे कैसे रोक पाऊंगी मेरे हाथों में तो मेहंदी लगी है न अच्छा सुनों मेरा दुपट्टा नीचे गिर रहा है क्या तुम मेरा दुपट्टा सेट कर दोगे


अमित क्या करूं मैं तुम्हारा, तुम्हे मुझे परेशान करने के सारे तरीके आते है रुको करता हूं और मैने अनीता के दुपट्टे को उसके गर्दन पर सेट किया


अनीता कितना टाइम लगा रहे हो कही तुम मेरे दुपट्टे को सेट करने के बहाने कुछ गलत चीज देख तो नहीं रहे हो


अमित : तुम कितना बोलती हो मेरे सामने वैसे एक दम ऐसे रहती हो सबके सामने जैसे तुम्हारे मुंह में जवान ही न हो और मेरे सामने मुंह एक मिनिट बंद ही नहीं रहता है


अनीता : मुझे 🍦 आइस्क्रीम खानी है


अनीता ने जब 🍦 आइस्क्रीम खाने की इच्छा बताई मुझे हसी आ गई क्यों के मैं हर लड़की को 🍦 आइस्क्रीम मे ही नसे की दवा मिलाकर लड़कियों को अपने बस में करता था क्यों कि कोई भी लड़की हो सेक्स से पहले या बाद में आइस्क्रीम खाने को मना नहीं कर पाती थी शरीर की गर्मी शांत होने के बाद मन की शांति के लिए आइस्क्रीम बेस्ट है


मैं अनीता को अब भी पार्सल करूं या नहीं इस सोच में डूबा था और कन्फ्यूज़ था के क्या मुझे इससे अच्छी खूबसूरत क्यूट प्यारी लड़की दुबारा मिल पाएगी क्या मेरे पास कोई और ऑप्शन है या पैसा ही सब कुछ हैं और सब कुछ भूल कर बस मुझे पैसे पर ही ध्यान देना चाहिए मेरा दिमाग कहे रहा था पैसे को चुनूं और और दिल अनीता को चुन रहा था


मैं दिल और दिमाग की कश्मकश में था अनीता अपनी बक बक कर रही थी मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था बस मैं अनीता से नजरे नहीं हटा पा रहा था और हम होटल पहुंच गए वहां पहुंच कर मैने अनीता को कमरे में वेट करने को कहा और मैं उसके लिए आइसक्रीम लेने निकल गया, अनीता के लिए आइसक्रीम ली और फिर उसमें एक बॉडीनम्ब करने वाला पावडर मिलाया


इस पावडर की खाश बात थी कि इससे इंसान बेहोश नहीं होता था बस उसके हाथ पैर या बॉडी पार्ट्स रिएक्ट नहीं करते उसके कंट्रोल में नहीं रहते एक तरह से जैसे लकवा मार गया हो उसे सब दिखता है महसूस होता है दिमाग एक्टिव है बस एक्शन नहीं ले पाता तो बस अपने आप को लॉक होते बांधते हुए देखने के अलावा कुछ नहीं किया जा सकता था मुझे बहुत अफसोस हों रहा था के अनीता इसे खायेगी और फिर मैं अनीता के साथ वो सब करूंगा जो बहुत ही बुरा और खौफनाक होगा 


मैं कमरे में गया तब अनीता का दुप्पटा उसके गले में नहीं था वो कमरे में बेड पर बैठी पंखे की हवा में उसके बाल बार बार उसे परेशान कर रहे थे और आंखों में आ रहे थे और शायद एक बाल उसकी आंख में चला गया था उसकी आंख में आंसू आ गए थे मैने उसे आइसक्रीम दी और उसके बाल कान के पीछे किए और जो नहीं होना था वो हुआ अनीता ने तुरंत ही आइसक्रीम खा ली


Part 2

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 आइसक्रीम के खाने के बाद मुझे पता था, अनीता को बेहोशी आने लगेगी, लेकिन इस दवा की खास बात यह थी, कि इसे तुरंत आदमी बेहोश नहीं होता था, बल्कि उससे पहले थोड़ा-थोड़ा सा नशा सा फील होता था, आउट ऑफ द बॉक्स वह बहुत ज्यादा बोलने लगता था, बहुत ज्यादा एक्साइटेड फील करता था, उसके अंदर फैंटसीजस चलने लगती थी, और कई बार वह खुद बोलने, या उसकी जो भी अंदर की इच्छाएं होती थी, वह खुद बताने लगता था, एकदम शांत से शांत इंसान भी, एक अलग जोन में चला जाता था, और वह ऐसे सी बातें बताता था, कि आपको विश्वास ही नहीं हो सकता, कि यह सब सच भी हो सकता है 


 अनीता आइसक्रीम खाते ही,रोने रोने लगी ,मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ ,मैंने उससे पूछा कि क्यों रो रही हो, तो उसने बताया, आज वह बहुत खुश है, आज तक वह किसी लड़के के साथ, बाहर नहीं गई, कभी ठीक से बात भी नहीं की होगी, और देखो वह मेरे लिए एक अनजान होटल में है, अगर यह बात किसी को पता चल गई, या उसके पापा या भाई को तो ,उन्हें कितना बुरा लगेगा,उन्हें यही सब सोच सोच करके, अनीता का बुरा हाल था, मैंने उसे समझाया, ऐसा कुछ नहीं होगा, तुम मुझ पर विश्वास रखो और फिर भी, जब वह चुप नहीं हुई तो, मैंने उसे किस कर लिया, होठों पर, हम दोनों के होंठ एक दूसरे से मिल रहे थे, उसके लिपस्टिक सिर्फ पिक नहीं थी ,बल्कि उसके होंठ का टेस्ट भी गुलाबी ही था,सॉफ्ट नरम, ऐसा लग रहा था, बस इन्हे चबा जाऊं, हम दोनों के होंठ एक दूसरे से मिले हुए थे, अनिता के नरम नरम होंठ, अपने मुंह में लेकर ,उन्हें मैंने धीमे से काट लिया,उन्हें क्योंकि मैं अनिता के होंठो पर ,अपने प्यार की पहेली ,अपनेऔर आखिरी निशानी छोड़ना चाहता था 


 मुझे पता ही नहीं चला, कब प्यार के नशे में, मेरे हाथ अनीता के ब्लाउज पर चले गए, और मैंने उसका ब्लाउज खोल दिया, उसने रोकने की कोशिश की, लेकिन उसके होंठ मेरे मुंह में थे, तो जैसे ही रुकती मैं थोड़ा सा काट लेता , तो अपने हाथ ढ़ीले कर देती थी, और फिर मैंने उसको ब्लाउज खोल दिया, उसके बाद मैंने उसकी ब्रा का हुक, भी खोल दिया, और थोड़ा सा पुश करके उसके हाथों में से, ब्लाउज ब्रा उतारने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ में जो ढेर सारी चूड़ियां  थी, उनकी वजह से ना ब्रा उतार पा रही थी ना ब्लाउज



पार्ट 3 

 मेरे स्ट्रगल को देखकर अनीता हंसने लगी, और बोली  इतना आसान थोड़ी है हम लड़कियों का जीवन फिर उसने अपने दोनों हाथ आगे कर दिया और मैंने धीरे-धीरे करके उसकी चूड़ियां उतारना शुरू कर उसके बाद ब्लाउज और ब्रा मैंने पहली बार अनीता को बिना कपड़ों के देखा था एकदम गोरा बदन जैसे दूध की मलाई से बना हो जहां भी हाथ रखो एकदम फिसल सजा और उसके शरीर की बनावट इतनी खूबसूरत थी जैसे भगवान ने फुर्सत में बनाया हूं एकदम परफेक्ट ना कहीं ज्यादा ना कहीं काम जहां ज्यादा होना चाहिए था बस वहीं पर बाकी सब जगह एकदम फ्लैट वह यह कुदरत का एक नया नगीना था जिसे देखकर बस में अंदर ही अंदर बेचैन हो रहा था क्योंकि यह बस अब मेरा नहीं रहने वाला था और पता नहीं किस-किस का होने वाला था लेकिन मैं थोड़ी देर में उसमें आ गया और अनीता के प्यार से बाहर निकाल कर मैं अपने काम पर ध्यान देने के बारे में सोचने लगा बस में वेट कर रहा था कि अनीता को थोड़ा सा नशा और बढ़ जाए 


वैसे अब मैं अमित के सामने बिना ब्लाउज और ब्रा के, उसके सामने बैठी  थी,  फिर अमित ने   धीरे से मेरी चनिया का नाडा खोल दिया, और मैं अब सिर्फ अमित के सामने पेटी में खड़ी थी, पैरों में पायल थी और गले में नेकलेस भी, तो पहले अमित ने नेकलेस को उतारना सही समझा, अमित ने मेरे  गले का नेकलेस उतार कर साइड में रखा  उसके बाद पैरों की पायल उतारी और मेरे  पूरे शरीर पर सिर्फ मेरी पैंटी और कानों में झुमके थे फिर अमित ने  मेरे  झुमके उतार दिए और एक साइड में रख दिया उसके बाद जब अमित मेरी  पैंटी उतारने लगा तो मैंने अमित को  रोक दिया और बोली मुझे शर्म आ रही है मैंने उसे साफ़ मना कर दिया पेंटी उतरने के लिए  लेकिन अमित  बिल्कुल भी मान  नहीं रही था और वह जिद पर अड़ गया था मेरी पेंटी उतरने के लिए इसलिए मैं भी जिद पर अड़ गयी के मैं  पैंटी नहीं उतारने दूंगी 


अमित के  लाख कोशिश के बाद भी, मैंने उसे अपनी पैंटी नहीं उतरने दी , फिर मैंने अमित से  कहा, के एक लड़की का सबसे गहना उसकी इज्जत होती है, और हर लड़की चाहती है, के उसका शरीर सिर्फ वो लड़का देखे, जिससे वो बहुत प्यार करती हो, और मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं, मुझे नही पता के तुम, मुझसे प्यार करते हो या नहीं, पर मैं दिल से तुम्हे चाहती हूं, और बस चाहती हूं के, तुम मुझे एक दम परफेक्ट ही देखो ,और इसलिए क्या मैं तुम्हारी आंखे बांध सकती हूं 


Part 4

फिर मैं कुछ कहेता उसके पहले अनिता ने मेरे आंखों पर दुप्पटा बंध दिया और अपने पर्स से एक क्रीम मुझे दी और बोली ये हेयर रिमूव करने की क्रीम है तुम अपने हाथो से मेरे प्राइवेट पार्ट के बाल साफ़ करो और फिर तुम जो चाहो कर सकते हो 


मैंने अनिता ने मेरे हाथ को पकड़ कर पूरा गाइड किया उसके प्राइवेट पार्ट के आस पर हेयर रिमूव क्रीम लगाने में और फिर बोली अब बस पांच मिनट का और इंतजार करना है 


वैसे तुम्हे कैसे लग रहा है ये इंतजार करना 


मैंने कहा मुझसे तो इंतजार नहीं हो रहा है 


 मुझसे भी नही हो रहा है, फिर मैंने अमित के  हाथ को अपने हाथ में लिया और अमित के  हाथ को अपने कंधे पर रखा और अब धीमे धीमे अमित के  हाथो को अपने कंधे से नीचे सरकाने  लगी, मेरे  चिकने शरीर पर अमित के  हाथ जैसे जैसे फिसल  रहे थे, धीमे धीमे मेरे   कंधे से नीचे सरकते हुए, मेरे  एक दम परफेक्ट शेप के बबल्स  पर उसके  हाथ पहुंच गए,  फिर मेरे  पेट पर फिर नाभी, और फिर मेरे  पैरो तक अमित के हाथ धीमे धीमे सरकते गए 


फिर अनिता,  मेरे माथे पर किस कि, आंखों पर, फिर नाक पर, और फिर लिप्स पर, किस कि, और बोली अमित तुम मुझे धोका तो नही दोगे न, मैं तुमसे सच में बहुत प्यार करती हूं ,

मैंने तुरंत कहा, नहीं अनिता, मैं तुम्हे कभी धोखा नहीं दूंगा,

तो अनिता बोली, तो तुम मुझसे ,कभी आई लव यू क्यों नही कहते हो, 

मैंने कहा, ऐसी कोई बात नही है, 

मैं बोलने से ज्यादा करने में विश्वास रखता हूं, बोलने से ज्यादा प्यार करने में ज्यादा मजा है, 

थोड़ी देर में, अनिता मुझे कमरे में छोड़ कर वाशरूम गई, और शायद क्रीम साफ करने गई, और फिर मुझे बिस्तर पर ले गई, मेरे हाथ को अपनी नाभि के पास ले गई, और मेरे हाथ को धीमे धीमे नीचे की तरफ ले जाने लगी, 

पर दबा का असर, अब उस पर होने लगा था, अब वो स्लो हो रही थी, और फिर बेहोश हो, गई मैंने तुरंत अपनी आंखे खोली, और मेरे सामने अनिता बिना कपड़ो के बेहोश पड़ी थी 



मैंने उसे टाइट काले चमड़े की एक ड्रेस पहनाई थी, जिसमें लंबी बाजू थीं और एक हुड बंद ऊँचा कॉलर था।वह किसी भी वस्तु को नहीं हटा सकती थी क्योंकि ड्रेस की ज़िप केवल हुड को हटाने के बाद खुल सकती थी, और हुड और गैग के पीछे एक ताला था।उसकी ड्रेस वास्तव में एक बॉडीसूट की तरह थी, जिसमें एक टाइट स्कर्ट थी जो उसकी जांघों को एक साथ रखती थी। उसकी  ब्लैक पैंटीहोज़ भी कमर तक थी।


मैं उसकी पैंटी होज की चिकनाई, महसूस करते हुए उसकी भीतरी जांघों पर अपना हाथ लगाया।वह कांप उठी, लेकिन मुझे रोक नहीं सकी,  क्योंकि वह बिस्तर से बंधी हुई थी, हाथों को रस्सी से बेड के सिरहाने के दोनो ओर फैला कर बांधा हुआ था,उसके नाखूनों पर कैंडी सेब लाल कोटिंग पर, काले रंग के की नेलपेंट ने अच्छा कंट्रास्ट बनाया था, ।उसके पैर उसके घुटनों के ऊपर, और उसके एडी पर एक ही रस्सी से, एक साथ बंधे हुए थे, और बिस्तर के बेडपोस्ट से भी बंधे हुए थे।मैंने उसके पैरों में  तीन इंच के काले घुटने तक, लंबे हाई हील्स    पहना दिया, और उसके पैरो के जूते को भी, एक पैडलॉक से लॉक कर दिया ।जूतों की चाबी पैंटीहोज़ के साथ, उसकी जांघो पर टेप कर दिया,उसके हुड़   की चाबी इसी तरह, उसके बाएं पैर के जांग में टैप कर दिया।मैं हमेशा अपने सभी पार्सल गर्ल्स , को यह महसूस कराना पसंद करता हूं, कि वे बचने के बहुत करीब हैं।


अनिता को ऊपर से नीचे तक लगभग बिस्तर से ढक दिया था।अनिता  एक बहुत लंबी लड़की थी ।वास्तव में, वह मेरे जितनी लंबी थी, लगभग 5'11 थी जिसकी वजह से उसकेपैर भी बहुत बड़े थे अनिता इस मॉडर्न गेटअप में पूरी अंग्रेज लग रही थी शायद आज से पहले उसने कभी ऐसे टाइट कपड़े नही पहेने होंगे पर इन कपड़ो में बहुत  शानदार लग रही थी, और वह शिपमेंट के लिए तैयार थी।अनिता की मुझे अच्छी कीमत मिल रही थी।


Part 5

ये बिजनेस पूरा ऑनलाइन था डार्क वेब पर मेरा कॉन्टैक्ट एक ग्रुप से हुआ था जो बहुत सीक्रेट था इसमें दोनो ही तरफ की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाता था मैंने इससे पहले भी कई लड़कियों को डिलीवर कर चुका था , और हर बार चीजें हमेशा बिना किसी अड़चन के चलती रहीं। हम अभी अपने घरों से बहुत दूर एक सस्ते होटल  में थे।खरीदार द्वारा पिक-अप रात 10 बजे के लिए निर्धारित किया गया था।मैं सिर्फ अपने शिकार पर अंतिम टचअप कर रहा था।हम ऑनलाइन पेमेंट का एक्सचेंज करते पेमेंट होने के बाद मैं लड़कियों की डिलीवरी देता था लड़कियों की इसी मोटेल में ले के आता उन्हें आइसक्रीम खिलाता बेहोश करता उनके कपड़े और उनके बेलोंगिंग को अपने पास रखता और लड़कियों को सेक्सी फॉरेन मॉडल की ड्रेस पहनता मेकअप करता और उन्हें अच्छे से बांध कर बेड पर कमरे से निकल जाता उसके बाद का काम डिलीवरी मन खुद करता  मुझे आमतौर पर पता नहीं था कि खरीदार कौन था या क्या वह हर बार एक ही व्यक्ति था, और स्पष्ट रूप से, मैं जितना कम जानता था, उतना ही बेहतर था।पिक-अप के समय से लगभग आधा घंटा पहले, मैं यह सुनिश्चित करता कि कमरे में सब कुछ ठीक हो।फिर, मैं कमरे की चाबियों को एक पूर्व निर्धारित स्थान पर छोड़ देता था, आमतौर पर मोटल लॉबी में एक कुर्सी के नीचे टेप किए गए एक लिफाफे में।


मैं बस अब कमरे को — और अनीता को — भगवान के भरोसे छोड़ने ही वाला था,
 कि अचानक दरवाजे पर एक नॉक हुई।

शाम के सिर्फ़ सात बजे थे।
 ये वक़्त कुछ अजीब था।

मैंने सोचा, शायद हाउसकीपिंग होगी,
 या कोई और मामूली बात —
 क्योंकि किसी को पता नहीं था कि मैं यहाँ हूँ।

थोड़ा परेशान होकर,
 मैंने दरवाज़े के peephole से झाँक कर देखा...
 और जो देखा, उस पर मेरा दिल धक से रह गया।

दरवाज़े के बाहर...
 पूरी यूनिफॉर्म में दो महिला पुलिस अफ़सर खड़ी थीं।

मेरे हाथ-पैर सुन्न हो गए।
 घबराहट होने लगी।

पर मैंने तय किया —
 कि दरवाज़ा खोलना ही होगा।

क्योंकि कमरे की लाइटें जल रही थीं,
 और शायद उन्होंने देख भी लिया होगा कि कोई अंदर है।

मैं नहीं चाहता था कि वो होटल की रिसेप्शन से चाबी मँगवा लें
 या जबरदस्ती अंदर आ जाएँ।

मैंने जल्दी से अलमारी से एक एक्स्ट्रा कंबल निकाला,
 और अनीता के ऊपर अच्छे से ढक दिया।

फिर दरवाज़ा खोलने से पहले...
 तीन-चार लंबी, गहरी साँसें लीं।

दरवाज़ा खोला,
 तो सामने वही दो अफ़सर —
 दोनों गोरी, लंबी,
 एक के बाल गोल्डन और दूसरी के गहरे लाल।

पहले तो मुझे ये अजीब लगा,
 लेकिन फिर सोचा —
 आजकल इंडिया में बाल कलर करवाना तो आम बात है।

इसलिए ज़्यादा दिमाग नहीं लगाया...
 और धीरे से दरवाज़ा खोल दिया।



"गुड ईवनिंग, सर,"

गोल्डन बालों वाली ऑफिसर ने शांत लेकिन सख्त आवाज़ में कहा।

"हम इस देर रात हुई असुविधा के लिए माफ़ी चाहते हैं,

लेकिन हमें इस इलाके में एक संदिग्ध बलात्कारी की मौजूदगी की सूचना मिली थी।

हम सिर्फ यह सुनिश्चित कर रहे थे कि वो इस होटल में कहीं छिपा तो नहीं,

या फिर यहाँ मौजूद किसी ने कुछ संदिग्ध देखा हो, महसूस किया हो..."


"ऑफिसर मैंने किसी को नही देखा और कमरे में मेरे अलावा कोई और नहीं है ।"मैंने धीरे से जवाब दिया।


"ठीक है", रेड बालो वाली  ने कहा, "गड़बड़ी के लिए क्षमा करें।"


वे जाने वाले थे। मैंने गहरी साँस ली और जब मैं  दरवाजा बंद करने ही वाला था तो,   तभी  लाल बालों वाली  ने मुझे रोक दिया।


"एक मिनट, क्या हम आपके कमरे को एक बार देख सकते है ? लाल बालों वाली ने पूछा।


मैं फिर से घबरा गया,  


इससे पहले कि मैं जवाब देता, पुलिस वालों ने अपनी बंदूकें खींच लीं और जबरन मेरे कमरे में घुस गए।


"एक मिनट रुकिए!तुम लोग ऐसा  नहीं कर सकते-"मैंने चिल्लाने की कोशिश की।



सुनहरी बालों वाली लड़की ने मुझे इतनी तेजी से दीवार से धक्का दिया कि मैं कुछ समझ ही नहीं पाया।
 उसने मेरी दोनों कलाईयों को पीठ पीछे ले जाकर हथकड़ी में जकड़ दिया —
 और फिर बिना एक शब्द कहे, एक ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया।
 उस एक पल में, सब कुछ जैसे धुंधला हो गया।

लाल बालों वाली लड़की बिस्तर के पास पहुँची —
 और बिना कोई हिचकिचाहट, अनीता के ऊपर से कंबल खींच लिया।

"लगता है, तुम दोनों 'पति-पत्नी' कुछ दिलचस्प कर रहे थे,"
 उसने व्यंग्य से कहा।

फिर उसने अनीता की तरफ झुककर पूछा,
 "तुम ठीक हो, अनीता?"

ये सुनकर, मेरा दिमाग अचानक दौड़ने लगा —
 उन्हें उसका नाम कैसे पता था?
 उन्हें ये कैसे मालूम हुआ कि वो यहाँ है?

मैं कुछ और सोचता, इससे पहले ही —
 गोल्डन बालों वाली ने मुझे पेट में घूंसा मारा।
 मैं दर्द से तड़पता हुआ ज़मीन पर गिर गया।

और फिर… उसने अपनी जेब से एक सिरिंज निकाली —
 तेज़ी से मेरे हाथ में चुभो दी।

उस दवा का असर तुरंत हुआ —
 मुझे पूरे शरीर में एक अजीब सी सुन्नता महसूस होने लगी।

"तुम... मेरे साथ क्या कर रहे हो?"
 मैंने हिम्मत जुटा कर चिल्लाया —
 हालाँकि मेरी आवाज़ में अब भी झटका और डर साफ़ था।



Part 6

गोल्डन बालो वाली   ने समझाया, "यह एक शक्तिशाली मांसपेशियों को आराम देने वाली दवा है, जब तक कि एंटीडॉट नहीं दी जाती, तब तक तुम अपने शरीर को गर्दन से नीचे हिला नहीं पाओगे ।"लेकिन तुम पूरी तरह से होश में रहोगे।और हम चाहते हैं कि जब तक हम तुम्हारे साथ  हैं तब तक तुम जागते रहो।


इससे पहले कि मैं समझ पाता कि "यह" वास्तव में क्या हो रहा है, सुनहरे बालों वाली एक लड़की ने अचानक मेरे मुँह में एक पेनिस-गैग गहराई तक ठूंस दिया।
 जो चीज़ उसने इस्तेमाल की... वो असल में वही था जो उसने अपने अंडरवियर के भीतर पहना हुआ था।

उसी वक्त, लाल बालों वाली ने अनीता को पूरी तरह खोल दिया था — उसका मास्क और जूते, दोनों के ताले खोल दिए गए थे।

फिर उसने मेरी तरफ देखा... और अचानक मुझे एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा।
 बिना कोई चेतावनी दिए, मेरे पैंट और अंडरवियर नीचे कर दिए गए।
 मैं कुछ समझ पाता, इससे पहले ही उसने एक धारदार चाकू लिया और उसे मेरे जननांग के पास ऐसे रगड़ने लगी, जैसे किसी भी पल काट देगी।

मैं डर से काँप उठा।
 मेरे चेहरे से आँसू बहने लगे।
 मैं कुछ बोलना चाहता था... लेकिन मेरे मुँह में वो गैग इतनी गहराई तक था कि बस "म्फ्फ म्फ्फ" जैसे टूटे-फूटे स्वर ही निकल पा रहे थे।

यह देखकर, सुनहरी बालों वाली लड़की आगे बढ़ी और मेरे मुँह से गैग निकालने लगी।

"अगर ज़रा भी आवाज़ की, तो तेरे प्राइवेट पार्ट को काट कर गटर में फेंक दूंगी," उसने बर्फ-सी ठंडी आवाज़ में कहा।

मैंने जल्दी से सिर हिलाकर इशारे में बताया कि मैं शांत रहूंगा।

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“क्या मेरी identity सिर्फ ग्रहों का मज़ाक है?” – BeingFaltu Crossdressing Story

📝 Story Preview:

सितारे, शरारत और नियति का खेल: जब तक ग्रह न बदलें!

अनीता पटेल 


📑 अनुक्रमणिका (Table of Contents):

  1. शादी की शहनाइयाँ और स्वागत की रौनक
    दुल्हन की पहली दस्तक ससुराल में, माहौल खुशियों से भरपूर

  2. ठिठोली की शुरुआत: बहनों का चुटीला प्लान
    दूल्हे की बहनों ने बनाया मज़ाकिया रिवाज़

  3. जब दूल्हा बना दुल्हन: कपड़ों की अदला-बदली
    हँसी-ठिठोली में दूल्हे को पहनाए गए लहंगे

  4. आया वो पंडित: ग्रहों का उलटफेर
    पुश्तैनी पंडित की भविष्यवाणी से पलट गया जीवन

  5. शुरू हुआ रिवर्स जीवन: एक महीने की अदला-बदली
    अब दूल्हा रहेगा दुल्हन बनकर, और दुल्हन निभाएगी दूल्हे की भूमिका

  6. दुल्हन की ससुराल में ‘नया दूल्हा’
    परिवार की नई दिनचर्या और अजीब सी परिस्थिति

  7. दूल्हे की ‘मुँह दिखाई’: साड़ी में संकोच
    जब सभी मेहमानों ने देखी नई नवेली ‘दुल्हन’

  8. दुल्हन की ‘घोड़ी चढ़ाई’
    अब सवारी का नंबर दुल्हन का है – दूल्हा बना दुल्हन सजता है

  9. ससुराल में नई रस्में और नए रिश्ते
    बदलते रिश्तों में समझ और नज़दीकियाँ

  10. सुहागरात उलटी: भावनाओं का तूफान
    जब दूल्हा दुल्हन की जगह बैठा और दुल्हन दूल्हा बनकर सामने आई

  11. एक महीना: प्यार, उलझन और अपनापन
    जब दोनों ने सीखा एक-दूसरे के जीवन को जीना

  12. ग्रह शांति और असली रूप में वापसी
    जब पंडित ने बताया अब रिवर्स रोल खत्म

  13. समाप्ति या नई शुरुआत?
    क्या अब रिश्ता और गहरा होगा या कुछ छूट जाएगा?





शादी की शहनाइयाँ और स्वागत की रौनक

 दुल्हन की पहली दस्तक ससुराल में, माहौल खुशियों से भरपूर

राठौड़ हवेली की भव्यता अपने शिखर पर थी। दीवारों पर लगे झूमर मद्धम रोशनी बिखेर रहे थे, और फर्श पर बिछी फूलों की लड़ियां एक अलग ही सुगंध फैला रही थीं। लेकिन हवेली के अंदर एक अलग ही खेल चल रहा था—एक खेल जिसमें प्यार था, शरारत थी और… राजीव राठौड़ के लिए एक बड़ा सरप्राइज भी था!

शादी के बाद तनुश्री ने एक खास रस्म के बहाने राजीव को अपने कमरे में बुलाया। उसने खुद को एक भव्य राजपूती दुल्हन की तरह सजाया था—गहरा लाल और सुनहरा घाघरा, भारी जरी की किनारी, माथे पर झूमर टिका, हाथों में लाल चूड़ियां, और पैरों में पायल की खनक। उसकी बड़ी-बड़ी काजल लगी आँखों में एक अलग ही चमक थी, और होंठों पर हल्की शरारती मुस्कान खेल रही थी।



"राजीव, आज एक रस्म है जिसमें पति-पत्नी एक-दूसरे के कपड़े पहनते हैं… और आज तुम्हारी बारी है!" तनुश्री ने धीरे से कहा, आँखों में हल्की चमक लिए।

राजीव, जो पहले ही भारी अंगरखा से परेशान था, चौंक कर बोला, "क्या?! यह मज़ाक कर रही हो ना?"

"बिल्कुल नहीं! शादी में बराबरी होनी चाहिए ना? मैंने ये भारी लहंगा, गहने, और ये मेकअप पूरे दिन पहना… अब तुम्हारी बारी!" तनुश्री ने मुस्कुरा कर कहा, लेकिन उसकी आँखों में एक रहस्यमयी चमक थी।

राजीव ने पहले इनकार किया, लेकिन जब तनुश्री ने अपनी काजल लगी आँखों से उसे प्यार से देखा, तो वह मान गया।

"ठीक है, लेकिन मुझे तुम पर पूरा भरोसा नहीं हो रहा!"

"बस एक बार ट्राय करो, फिर खुद ही कहोगे कि कितना कम्फर्टेबल है!" तनुश्री ने हंसी दबाते हुए कहा।

कुछ ही देर बाद, राजीव अपने आपको लाल और सुनहरे घाघरे, भारी दुपट्टे और ढेर सारे गहनों में जकड़ा हुआ पा रहा था। उसके माथे पर बिंदी, गले में एक खूबसूरत हार, कानों में बड़े झुमके, और हाथों में चूड़ियां चमक रही थीं। तनुश्री ने हल्के गुलाबी रंग की लिपस्टिक भी लगा दी, जिससे उसका चेहरा और भी अलग दिखने लगा।





ठिठोली की शुरुआत: बहनों का चुटीला प्लान

 दूल्हे की बहनों ने बनाया मज़ाकिया रिवाज़

राजीव ने आईने में खुद को देखा और आश्चर्य से अपनी ही झुकी हुई पलकों को देखने लगा

"ओह भगवान! ये बिंदी मेरी नाक तक गिर रही है!"

"हां, और देखो, जब तुम चलोगे तो पायल की आवाज़ भी आएगी!" तनुश्री ने हंसते हुए कहा।

"तनु… ये बहुत अजीब लग रहा है!"

"अरे नहीं, तुम बहुत सुंदर लग रहे हो! बिल्कुल मेरी तरह!" तनुश्री ने शरारत से उसकी आँखों में काजल लगाते हुए कहा।

लेकिन जैसे ही दोनों हंस रहे थे, दरवाजे पर अचानक दस्तक हुई।

"राजीव, बेटा! बाहर आओ, घर के बड़े लोग तुम्हें बुला रहे हैं!"

राजीव का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया! माथे पर पसीना आ गया, और उसने तुरंत घाघरे को समेटने की कोशिश की।

"तनु!! अब मैं क्या करूं?"

"एक मिनट रुको… मैं दरवाजा खोलती हूँ!"

"नहीं, मत खोलना!"

लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। दरवाजा खुला… और बाहर खड़ी थी राजीव की मां, भाभी और चाचा!

सभी ने जैसे ही राजीव को इस नये अवतार में देखा, हवेली ठहाकों से गूंज उठी!

"अरे वाह! लगता है हमारी बहू ने अपने पति को ही अपनी तरह बना दिया!" भाभी ने हंसते हुए कहा।

चाचा ने मुस्कुराते हुए कहा, "अरे राजीव बेटा, मंगल और शुक्र का अद्भुत मेल है यह!"

राजीव ने तनुश्री को घूरा, जो अब तक हंसी रोकने की असफल कोशिश कर रही थी। लेकिन फिर खुद ही अपनी हालत देखकर हंस पड़ा।

"ठीक है, तनु! आज तुम जीत गईं। लेकिन अगली बार मेरी बारी होगी!"

"ओह, मैं इंतज़ार करूंगी, मेरे महाराज!" तनुश्री ने आंख मारते हुए कहा।

और इस तरह, हवेली में यह अनोखी रात हंसी, प्यार और सितारों की शरारतों से भर गई। उनका बंधन मंगल और शुक्र की तरह—जुनून और मोहब्बत का एक खूबसूरत संगम बन चुका था।

सब लोग बहुत खुश थे हसी मजाक कर माहोल था पूरे घर  में, राजीव थोड़ा असहज महसूस कर रहा था उसने तनुश्री से उसके कपड़े वापस देने को कहा तभी राजीव की शाली यानी तनुश्री की छोटी बहन बोली अरे जीजू अभी तो सिर्फ आपका मेकओवर दीदी ने किया है दीदी का मेकओवर तो बाकी ही है अभी तो हमने जी भर कर आपको देखा भी नहीं है 

जब दूल्हा बना दुल्हन: कपड़ों की अदला-बदली

 हँसी-ठिठोली में दूल्हे को पहनाए गए लहंगे


राठौड़ हवेली में ठहाकों की गूंज अब तक सुनाई दे रही थी। राजीव का चेहरा अभी भी हल्की लाली से भरा था, शायद शर्म से या शायद उस गुलाबी लिपस्टिक से जो तनुश्री ने जबरदस्ती उसके होठों पर लगा दी थी।

लेकिन खेल अभी खत्म नहीं हुआ था। जैसे ही राजीव भारी घाघरे, भारी झुमकों और माथे पर बिंदी के साथ परेशान खड़ा था, हवेली की औरतों ने एक और शरारती योजना बना ली।

"अब तुम्हारी बारी, तनुश्री!"

भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुमने अपने राठौड़ दुल्हे को दुल्हन बना दिया, अब हमारी बारी नई नवेली दुल्हन को राठौड़ योद्धा बनाते हैं!"

"क्या?" तनुश्री का मुंह खुला रह गया।

"हाँ हाँ! जैसे तुमने राजीव को अपनी तरह सजाया, अब तुम्हें राजीव की तरह सजना होगा!" माँसा ने कहा।

राजीव, जो अब तक खुद को बचाने की कोशिश कर रहा था, अचानक मुस्कुराने लगा, "हाँ, हाँ! अब तुम भी देखो तुम, तनु!" कितना मुश्किल है राजपूती योद्धा होना

राजपूती दुल्हन से राजपूती योद्धा तक

तनुश्री, जो अब तक शरारती थी, अब खुद इस खेल में फंस गई थी। हवेली की औरतें उसे अंदर कमरे में ले गईं और उसकी लाल-गोल्डन घाघरा चोली उतारकर एक शानदार राजपूती पोशाक पहनाई—गहरा नीला और सुनहरा अंगरखा, ऊँचा पगड़ी बंधा साफा, और कमर पर चमकती कटार!

"वाह! बिल्कुल राजपूत योद्धा लग रही है!" छोटी ननद ने तालियाँ बजाते हुए कहा।


फिर छोटी नंद ने एक ग्लू लेकर तनुश्री के होंठो के ऊपर लगाकर उसके चेहरे पर नकली मूछ चिपका दी थी।

"बस अब ये तलवार पकड़ो और राजीव को चुनौती दो!" भाभी ने हंसते हुए कहा।

अब कौन ज्यादा दमदार दिख रहा था?

जब तनुश्री को बाहर लाया गया, पूरे आंगन में हंसी गूंज उठी। एक तरफ राजीव—जो भारी लहंगे, ओढ़नी और गहनों से लदा था, और दूसरी तरफ तनुश्री—जो एक परिपूर्ण राजपूती योद्धा की तरह दिख रही थी!

राजीव ने सिर से पैर तक तनुश्री को देखा और कहा, "हे भगवान! तुम मुझसे ज्यादा अच्छे लग रहे हो इस पोशाक में!"

तनुश्री ने कटार निकालते हुए मजाक में कहा, "अब तो मैं ही राजा लग रही हूँ, महारानी साहिबा!"

शरारत से भरी एक यादगार रात

पूरा परिवार हंसते-हंसते लोटपोट हो गया। यह शादीशुदा जोड़ा, जो पहले ही मंगल और शुक्र के खेल में उलझ चुका था, अब इस अनोखी याद के साथ हमेशा के लिए एक नई कहानी बना चुका था।

राजीव और तनुश्री ने एक-दूसरे को देखा और मुस्कुराए। शादी सिर्फ रस्मों तक सीमित नहीं होती, यह दोस्ती, प्यार और शरारतों से भी भरी होती है

राठौड़ हवेली की गलियों में हंसी की गूंज अभी भी धीमे-धीमे सुनाई दे रही थी। राजीव अभी भी भारी लहंगे और चूड़ियों से जूझ रहा था, और तनुश्री अपनी मूंछों को निहारते हुए हंस रही थी।

"बस बहुत हुआ! अब हम अपने असली कपड़े पहन लें?" राजीव ने शिकायत करते हुए कहा।

"हाँ, हाँ, बहुत हो गया ड्रामा, अब मैं वापस अपनी दुल्हन वाली ड्रेस पहनना चाहती हूँ!" तनुश्री ने भी राहत की सांस लेते हुए कहा।

लेकिन तभी…













आया वो पंडित: ग्रहों का उलटफेर

 पुश्तैनी पंडित की भविष्यवाणी से पलट गया जीवन


दरवाजे पर एक सधे हुए कदमों की आहट हुई। पंडितजी हवेली में प्रवेश कर चुके थे—हाथ में पंचांग, माथे पर लंबा तिलक और आँखों में गहरी ज्योतिषीय गंभीरता।

"अरे वाह! यहाँ तो बहुत बड़ा परिवर्तन हो चुका है!" पंडितजी ने राजीव और तनुश्री को ऊपर से नीचे तक देखा और अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए बोले।

"पंडितजी, ये सब बस मज़ाक था। अब हम अपने कपड़े बदलने जा रहे हैं!" राजीव हड़बड़ाते हुए बोला।

"नहीं! बिल्कुल नहीं! यह कोई मज़ाक नहीं है, यह तो स्वयं ग्रहों की इच्छा है!" पंडितजी ने गंभीर स्वर में कहा।

पंडितजी ने पंचांग को खोला और उसमें कुछ बारीकी से देखने लगे। फिर उन्होंने आंखें बंद करके कुछ गणनाएं कीं और गहरी सांस लेकर बोले,

"तुम दोनों की कुंडली में एक अद्भुत परिवर्तन चल रहा है। राजीव बेटा, तुम्हारे मंगल और शुक्र का स्थान अदला-बदली हो रहा है, और तनुश्री बहू, तुम्हारे सूर्य और चंद्र का संयोग एक विशेष स्थिति में आ गया है।"

"मतलब?" तनुश्री ने आँखें फैलाकर पूछा।

"मतलब यह कि अब तुम्हें अगले सात दिनों तक एक-दूसरे के कपड़ों में ही रहना होगा! अगर तुमने ऐसा नहीं किया, तो ग्रहों का प्रभाव तुम्हारे वैवाहिक जीवन पर भारी पड़ेगा! और मृत्यु योग के भी संयोग बन सकते है " पंडितजी ने भविष्यवाणी की।

"क्या?? सात दिन???" राजीव और तनुश्री एक साथ चिल्ला उठे।

अब यह खेल नहीं, ग्रहों की मर्जी थी!

"पंडितजी, यह तो संभव नहीं है! मैं इस भारी लहंगे में नहीं रह सकता!" राजीव ने घबराते हुए कहा।

"और मैं मूंछों के साथ नहीं घूम सकती!" तनुश्री ने भी ऐतराज जताया।

पंडितजी ने सिर हिलाया, "यही तो परीक्षा है! अगर तुमने यह समय बिना किसी परेशानी के निकाल लिया, तो तुम्हारा रिश्ता और भी मजबूत होगा। अन्यथा..."

"अन्यथा क्या?" तनुश्री ने जल्दी से पूछा।

"अन्यथा अगले सात सालों तक तुम्हारी कुंडली में असंतुलन बना रहेगा! और परिजनों की मृत्यु जैसी खबरे आती रहेंगी""

इसली इस चुनौती को  जिसे न चाहते हुए भी स्वीकार करना पड़ेगा

राजीव और तनुश्री ने एक-दूसरे की तरफ देखा—राजीव अभी भी भारी लहंगे और ओढ़नी में परेशान था, और तनुश्री का राजपूती अंगरखा और चेहरे पर मूछ उसके ऊपर अजीब लग रहे थे ।

"क्या हमें सच में ऐसा करना होगा?" राजीव ने धीमी आवाज़ में पूछा।

"मुझे तो अब यकीन नहीं हो रहा कि मैंने तुम्हें यह सब पहनने पर मजबूर किया था!" तनुश्री ने हंसते हुए कहा।

"अब भुगतो!" राजीव ने मुस्कुरा कर कहा।

अब यह खेल नहीं, परीक्षा थी!

अब पूरे सात दिनों तक तनुश्री को राजपूत योद्धा की तरह और राजीव को एक नई नवेली दुल्हन की तरह रहना था। हवेली के लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो रहे थे, लेकिन पंडितजी की भविष्यवाणी के चलते कोई भी इस नियम को तोड़ने की हिम्मत नहीं कर रहा था।

अब देखना यह था कि क्या यह मज़ाक उनके रिश्ते को और मजबूत करेगा या यह उनके लिए एक नई चुनौती साबित होगा! क्या वे इस परीक्षा को पास कर पाएंगे? या ग्रहों की चाल कुछ और ही मोड़ लाने वाली थी?













शुरू हुआ रिवर्स जीवन: एक महीने की अदला-बदली

 अब दूल्हा रहेगा दुल्हन बनकर, और दुल्हन निभाएगी दूल्हे की भूमिका

🌙 ग्रहों की चाल और सुहागरात की उलझन 🌙

राठौड़ हवेली की दीवारें तक हंसी के ठहाकों से गूंज रही थीं। पंडितजी को भारी दक्षिणा देकर विदा किया जा चुका था, लेकिन अब हवेली वालों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई थी—सुहागरात का इंतजाम!

💫 "अब दुल्हन कौन?"

राजीव भारी लहंगे और भारी गहनों के बोझ तले खड़ा सोच रहा था कि "हे भगवान, यह किस ग्रह-योग के कारण हो रहा है?"

राजीव लाल राजपूती ड्रेस में दुल्हन की तरह सजा हुआ

उधर, तनुश्री, जो अब पूरी तरह से राजपूती दूल्हे के रूप में तैयार थी, ठाठ से खड़ी थी और अपनी ननदों की शरारतों का मज़ा ले रही थी।

भैया अब आप ही हमारी नई  "भाभी हो ! अब आप हमारी दुल्हन हो, तो हम आपके सुहागरात वाले कमरे की तैयारी शुरू करें?" छोटी ननद ने शरारती मुस्कान के साथ कहा।

"क्या???" राजीव की आँखें फटी की फटी रह गईं।

"अरे भाभी, ये तो घर का रिवाज है। दुल्हन के कमरे को फूलों से सजाया जाता है, और घूंघट में उसे इंतजार करना पड़ता है। फिर दूल्हा अंदर आता है और…" बड़ी ननद ने जानबूझकर बात अधूरी छोड़ दी।

"नहीं, नहीं! ऐसा कुछ नहीं होगा!" राजीव ने विरोध किया।

लेकिन हवेली की औरतें कहा मानने वाली थीं! पूरे कमरे को सुहागरात के लिए सजाया गया—गुलाब की पंखुड़ियां, मोगरे की मालाएं, और झीनी रेशम की चादरें बिछाई गईं।

🌙 अब यह से आपकी  असली परीक्षा शुरू होती है भैया ! छोटी बहन ने राजीव को चिढ़ाते हुए कहा

💖 "अब घूंघट में बैठो, भाभी!"

"अरे भाभी, आपकी सुहागरात है, अब आप घूंघट डालकर पलंग पर बैठ जाइए!" छोटी ननद ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा।

"क्या? मैं? घूंघट?" राजीव ने खुद को शीशे में देखा—भारी झुमके, लाल चूड़ियां, लंबा घूंघट और कमर तक लहराता लहंगा।

"हाँ भाभी, अब तो अगले सात दिनों तक यही करना पड़ेगा!"

राजीव ने मन ही मन सोचा, "हे मंगल देव! ये कैसी सजा दे दी!"

🌙 "अब तनुश्री दूल्हा बनकर आएगी!"

इधर, घर की औरतों ने जोर-जोर से ढोलक बजानी शुरू कर दी और ठेठ राजपूती अंदाज में तनुश्री को सुहागरात के लिए कमरे तक छोड़ने जाने का फैसला किया।

"लो बहूजी, अब आप दूल्हे की तरह अंदर जाओ और अपनी दुल्हन का घूंघट उठाओ!" सासूमां ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा।

तनुश्री अंदर आते ही मुस्कुराने लगी। उसने कमरे का नज़ारा देखा—फूलों से सजी सेज, कोने में रखा दूध का गिलास, और पलंग पर राजीव, जो शर्म से लाल पड़ा था!

"हे भगवान! सच में, तुम मुझसे ज्यादा सुंदर दुल्हन लग रहे हो!" तनुश्री ने ठहाका लगाया।

"बहुत हो गया, तनु! ये सब कब खत्म होगा?" राजीव ने धीरे से कहा।

"जब तक ग्रह बदलेंगे! और तब तक तुम दुल्हन, मैं दूल्हा!" तनुश्री ने कटार निकालते हुए मज़ाक किया।

🌙 अब क्या होगा मेरा राजीव ने मन में सोचा?

क्या मैं तनु श्री को दूध का गिलास पकड़ाऊं?

क्या तनुश्री मुझे ऐसे गहनों में ही सुलाएगी?

क्या अगले 7 दिनों तक मुझे अपनी पत्नी की पत्नी बन कर ही रहना होगा?






सुहागरात उलटी: भावनाओं का तूफान

 जब दूल्हा दुल्हन की जगह बैठा और दुल्हन दूल्हा बनकर सामने आई



🌙 सितारों की छांव में अनोखी सुहागरात 🌙

कमरा किसी सपनों की दुनिया से कम नहीं लग रहा था। चारों तरफ़ हल्की मोमबत्तियों की टिमटिमाती रोशनी थी, गुलाब और मोगरे की खुशबू पूरे माहौल को महका रही थी। पलंग के चारों ओर झीने रेशम के परदे झूल रहे थे, और लाल गुलाब की पंखुड़ियां पूरे बिस्तर पर बिखरी हुई थीं। हल्की हवा खिड़की के पर्दों को सहला रही थी, और बाहर से मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि आ रही थी।

लेकिन इस खूबसूरत सेटिंग के बीच, राजीव घूंघट में बैठा पसीना-पसीना हो रहा था!

दरवाजे पर तनुश्री की एंट्री हुई—एकदम ठेठ राजपूती दूल्हे की तरह। सिर पर साफा, कंधे पर शाही अंगरखा, और चाल में वही शाही ठसक!

"अब तो रिवाज निभाना ही पड़ेगा!"

"चलो राजीव,मेरे पैर छुओ!" तनुश्री ने मुस्कान दबाते हुए कहा।


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