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Chapter 4: पहली साड़ी वाली रात

शाम ढल चुकी थी। कमरे में हल्की गुलाबी रोशनी थी। अनीता ने गोपाल के हाथों की रस्सी ढीली की, लेकिन पैर अभी भी बंधे थे। गोपाल का शरीर दर्द से कांप रहा था। ब्रा-पैंटी अब पूरी तरह गीली और बदबूदार हो चुकी थी।
अनीता ने मुस्कुराते हुए कहा, “आज तेरी पहली साड़ी वाली रात है, मेरी बायको। तैयार हो जा।”
गोपाल ने कमजोर आवाज में विरोध किया, “नहीं... मैं कुछ नहीं पहनूंगा... छोड़ दे मुझे...”
अनीता ने ठोकर मारकर उसे चुप कराया और काम शुरू कर दिया।
सबसे पहले उसने गोपाल को नहलाया। ठंडे पानी से। गोपाल कांप रहा था। फिर उसने पूरे शरीर पर गुलाबी बॉडी लोशन लगाया। स्किन अब चिकनी और महकदार हो गई।
फेमिनाइजेशन शुरू...
सबसे पहले एक काला लेस ब्रा और पैंटी। ब्रा को खूब टाइट करके सीने पर चढ़ाया, जिससे गोपाल के निप्पल उभर आए। पैंटी में लिंग को पीछे दबाकर चढ़ाया गया। फिर एक टाइट पेटीकोट, जो कमर पर कसकर बंध गया।
अनीता ने एक गहरे नीले रंग की साड़ी निकाली — सिल्क वाली, चमकदार। ब्लाउज छोटा और टाइट, जो पीठ का बड़ा हिस्सा खुला छोड़ता था।
“हाथ उठा,” अनीता ने आदेश दिया।
गोपाल रोते हुए हाथ उठा रहा था। अनीता ने ब्लाउज पहनाया, हुक लगाए। ब्लाउज इतना टाइट था कि सांस लेना मुश्किल हो रहा था। फिर पेटीकोट के ऊपर साड़ी लपेटी। पल्लू को कंधे पर सजाया। कमर पर साड़ी को अच्छे से चुन्नट देकर बांधा।
अब मेकअप।
अनीता ने पहले फाउंडेशन, फिर ब्लश, आइशैडो, मोटी काजल, लंबी लैशेस। होंठों पर ब्राइट रेड लिपस्टिक। आखिर में भारी मेकअप।
फिर विग — लंबे, घने, काले घुंघराले बाल। सिर पर फिट करके पिन से जकड़ दिया।
अब जेवरात।
बड़ी-बड़ी बालियां, मंगलसूत्र, बिंदिया, कंगन, पायल, और कमर में चेन। आखिर में ऊंची ५ इंच वाली रेड कलर की हील्स, जिनके पट्टे अनीता ने ताले से लॉक कर दिए।
जब सब हो गया तो अनीता पीछे हटी और आईने की तरफ इशारा किया।
गोपाल ने आईने में खुद को देखा और सन्न रह गया।
एक खूबसूरत, भारी मेकअप वाली औरत। साड़ी में लिपटी, हील्स में खड़ी, पायल की आवाज के साथ।
“नहीं... ये मैं नहीं हूं...” गोपाल फूट-फूटकर रो पड़ा।
अनीता ने उसके बाल खींचे, “अब चलना सिखाती हूं।”
उसने गोपाल को खड़ा किया। हील्स में चलना बहुत मुश्किल था। गोपाल लड़खड़ा रहा था। अनीता ने एक केन उठाया और हर बार लड़खड़ाने पर जांघों और गांड पर मारने लगी।
“कमर सीधी! छाती निकाल! छोटे-छोटे कदम! औरतों जैसा!”
गोपाल दर्द से चीख रहा था, लेकिन चलता रहा।
फिर बोलने की ट्रेनिंग।
“अब ‘हां जी’ बोल... ना जी... जी मालकिन...” अनीता ने सिखाया।
गोपाल विरोध कर रहा था तो अनीता ने उसे मुर्गा बनाकर सजा दी। दोनों हाथों को पैरों के बीच से डालकर कान पकड़वाए और घुटनों पर बैठा दिया। साड़ी में मुर्गा बनकर बैठना बेहद अपमानजनक था।
“एक घंटा ऐसे ही बैठे रह!”
रात १० बजे अनीता ने कहा, “चल, अब बाहर चलते हैं।”
पब्लिक ह्यूमिलिएशन
अनीता ने गोपाल को अपने साथ बाहर निकाला। आस-पास का इलाका सुनसान था, लेकिन पास ही एक पार्क था जहां कुछ लड़के शाम की सैर कर रहे थे।
हील्स में चलते हुए गोपाल का पल्लू बार-बार सरक रहा था। वह संभालने की कोशिश कर रहा था।
लड़के देखकर चिल्लाए, “अरे देखो! कितनी हॉट है यार!”
गोपाल भागने की कोशिश करने लगा। लेकिन हील्स और टाइट साड़ी में वह ज्यादा दूर नहीं जा सका। लड़कों ने उसे घेर लिया।
एक लड़के ने आगे बढ़कर उसके गाल पर जबरदस्ती किस कर दिया। “वाह क्या माल है!”
दूसरे लड़कों ने उसे पकड़ने की कोशिश की। “चल हमारे साथ... मजा कराते हैं।”
गोपाल चीखा, “छोड़ो मुझे! मैं लड़का हूं!”
लेकिन कोई नहीं माना। लड़के उसे खींचकर ले जाने लगे।
तभी अनीता ने दूर से सिग्नल दिया। तीन बॉडीगार्ड्स अचानक प्रकट हुए। उन्होंने लड़कों को धमकाकर भगा दिया।
लेकिन लड़के जाते-जाते बदला ले गए।
वे गोपाल को पास की बिजली की पोल के पास ले गए। एक लड़के ने स्टील की मजबूत हैंडकफ निकाली और गोपाल के दोनों हाथों को पोल के साथ जकड़ दिया।
क्लिक!
हैंडकफ बहुत टाइट थीं। गोपाल वहीं खड़ा था — साड़ी में, मेकअप में, हील्स में, हाथ पोल से बंधे।
लड़के हंसते हुए चले गए। कुछ लोग रुककर देखने लगे।
“अरे ये क्या हो रहा है?”
“क्या सुंदर लग रही है!”
“वीडियो बना लो यार!”
कुछ लोग मदद करने आए, लेकिन हैंडकफ स्टील की थीं। कोई नहीं खोल सका। गोपाल का पल्लू गिर गया, ब्लाउज का कटाव साफ दिख रहा था। लोग फोटो खींच रहे थे, वीडियो बना रहे थे।
गोपाल रो रहा था, “मदद करो... प्लीज...”
दूर छत पर खड़ी अनीता सब कुछ बाइनोकुलर से देख रही थी। उसके होंठों पर विजयी मुस्कान थी। वह फोन पर लाइव देख रही थी और मजा ले रही थी।
एक घंटे बाद अनीता खुद आई। उसने हैंडकफ खोली और गोपाल को घसीटकर वापस अंदर ले गई।
घर पहुंचकर उसने गोपाल को बेड पर पटका। हाथ-पैर फैलाकर चारों तरफ से चेन से बांध दिया। स्प्रेड ईगल पोजीशन।
“आज रात तू इसी हालत में रहेगा। साड़ी, ब्लाउज, मेकअप, सब समेत।”
अनीता ने एक वाइब्रेटर निकाला और गोपाल की पैंटी के अंदर रखकर ऑन कर दिया। फिर निप्पल क्लैंप्स लगाए।
गोपाल चीख रहा था, “बस करो... मैं मर जाऊंगा...”
अनीता उसके ऊपर झुककर बोली, “मर मत जाना... अभी तो बहुत कुछ बाकी है। कल और नई सजा है।”
रात भर गोपाल साड़ी में बंधा, वाइब्रेटर की कंपन और क्लैंप्स के दर्द में तड़पता रहा। आंसू, पसीना, और शर्म... सब मिलकर उसे तोड़ रहे थे।
अगली सुबह की रोशनी कमरे में घुसी। गोपाल की आंखें सूजी हुई थीं। रात भर साड़ी में बंधे रहने से उसका पूरा शरीर दर्द कर रहा था। साड़ी अब गंदी और फटी हुई थी। मेकअप पूरी तरह बिखर चुका था।
दरवाजा खुला। अनीता अंदर आई। आज उसने टाइट ब्लैक जीन्स और व्हाइट टॉप पहना था। हाथ में चाबुक था।
“उठ मेरी रंडी। आज नया लुक है तेरे लिए।”
उसने गोपाल की साड़ी खींचकर उतार दी। ब्रा और पैंटी भी निकाल दी। गोपाल नंगा खड़ा था, शर्म से कांप रहा था।
अनीता ने एक बहुत छोटी ब्लैक प्लेड स्कर्ट निकाली — जो मुश्किल से जांघों को ढक पाती थी। ऊपर एक टाइट पिंक क्रॉप टॉप। ब्रा नहीं दी।
“पहन ले।”
गोपाल ने कांपते हाथों से स्कर्ट चढ़ाई। स्कर्ट इतनी छोटी थी कि उसकी गांड का निचला हिस्सा साफ दिख रहा था। टॉप पहनते ही उसकी छाती उभरकर दिखने लगी।
फिर पूरा मेकअप। आज ज्यादा भड़कीला — गहरी काजल, गुलाबी लिपस्टिक, ग्लॉस, लंबे बालों का विग। कान में झुमके, गले में चोकर।
जब तैयार हो गया तो अनीता ने उसे आईने के सामने खड़ा कर दिया।
“देख... कितनी क्यूट लग रही है मेरी शीतल ।”
गोपाल ने आईने में खुद को देखा और सिर झुका लिया। आंसू निकल आए।
“अब मुर्गा बन,” अनीता ने ठंडे स्वर में कहा।
गोपाल कांप उठा। “नहीं... प्लीज... ये मत करो... मैं कुछ भी करूंगा... लेकिन मुर्गा नहीं...”
अनीता ने मुस्कुराते हुए गोपाल के पीछे जाकर उसकी स्कर्ट ऊपर की। फिर अपनी दो उंगलियां उसके गांड में धीरे से घुसा दीं।
“अम्म्म्म...!” गोपाल की चीख निकल गई।
अनीता ने उंगलियां अंदर-बाहर करने शुरू कीं और बोली,
“अगर चुपचाप जो मैं कह रही हूं वो नहीं किया... तो मैं बॉडीगार्ड का पूरा हाथ डलवा दूंगी। समझा? वो तुझे पसंद नहीं आएगा... बहुत दर्द होगा।”
गोपाल का चेहरा सफेद पड़ गया। डर के मारे उसका शरीर कांपने लगा।
“जी... जी मालकिन... मैं मुर्गा बन जाता हूं...” वह कांपते हुए बोला।
उसने तुरंत दोनों हाथ पैरों के बीच से डाले और कान पकड़ लिए। मुर्गा पोजीशन में बैठ गया। छोटी स्कर्ट पूरी तरह ऊपर चढ़ गई। गांड पूरी तरह खुली हुई थी।
अनीता ने हंसते हुए उसके हाथ और पैरों को स्टील की हैंडकफ से लॉक कर दिया। अब वह मुर्गा बनकर बंध चुका था।
फिर उसने गोपाल के गले में एक चमड़े का पट्टा (collar) डाला, जिसमें “अनीता की रंडी” लिखा हुआ था। पट्टे में चेन वाली पट्टा लगाई।
“चल अब... पार्क घूमने चलते हैं।”
अनीता ने पट्टे को खींचा। गोपाल मुर्गा बनकर, घुटनों और हाथों के बल, स्कर्ट ऊपर किए, हील्स में बाहर निकला। हर कदम पर पायल और हील्स की आवाज हो रही थी।
पार्क पहुंचकर अनीता ने उसे कल वाले बिजली के खंभे से चेन बांध दी।
“यहां बैठ। मैं थोड़ी देर में आती हूं।”
अनीता चली गई।
लोग इकट्ठा होने लगे।
“अरे ये क्या है भाई?”
“कितनी शर्मीली लग रही है!”
“हाहाहा... मुर्गा बनकर बैठी है!”
सब हंस रहे थे। कुछ लोग फोटो खींच रहे थे।
तभी कल वाले चार-पांच लड़के फिर से आ गए। उन्हें देखते ही गोपाल का दिल बैठ गया।
“अरे वाह! कल वाली साड़ी वाली रंडी आज स्कर्ट में!”
“और देखो... गांड ऊपर करके मुर्गा बना रखा है... साफ इनविटेशन है यार!”
एक लड़का आगे बढ़ा। उसने गोपाल की स्कर्ट और ऊपर कर दी। गांड पर जोर से थप्पड़ मारा।
“क्या माल है!”
दूसरा लड़का गोपाल के सामने बैठ गया और उसके चेहरे को पकड़कर जबरदस्ती किस करने लगा। गोपाल रो रहा था, “छोड़ दो... प्लीज... मैं लड़का हूं...”
लेकिन लड़के नहीं मान रहे थे। एक ने उसकी स्कर्ट के अंदर हाथ डाला। दूसरा उसके निप्पल मरोड़ने लगा।
गोपाल चीख रहा था, “अनीता! बचाओ... प्लीज...!”
दूर से अनीता सब देख रही थी। वह एक बेंच पर बैठी कॉफी पी रही थी और मुस्कुरा रही थी। उसने फोन पर लाइव वीडियो भी चालू कर रखा था।
लड़कों ने गोपाल को छेड़ना शुरू किया। एक ने कहा, “चलो इसे ले चलते हैं। आज मजा आएगा।”
वे गोपाल को खींचने लगे, लेकिन हैंडकफ और चेन बहुत मजबूत थीं। खंभा हिल भी नहीं रहा था।
एक बुजुर्ग आदमी मदद करने आया, “अरे छोड़ो इसे... क्या कर रहे हो?”
लेकिन लड़के उसे धक्का देकर भगा दिए।
गोपाल पूरी तरह टूट चुका था। आंसू बह रहे थे। मुंह से सिर्फ सिसकियां निकल रही थीं।
“मुझे बचाओ... कोई तो बचाओ...”
लड़के हंस-हंसकर उसकी गांड पर थप्पड़ मार रहे थे, बाल खींच रहे थे, और वीडियो बना रहे थे।
करीब आधे घंटे बाद अनीता आई। उसने लड़कों को डरा दिया। लड़के हंसते हुए चले गए।
अनीता ने गोपाल की चेन खोली, लेकिन मुर्गा पोजीशन में ही घर वापस लाई।
घर पहुंचकर उसने गोपाल को बेड पर पटका और बोली,
“आज तूने अच्छा परफॉर्म किया। लेकिन कल और ज्यादा मजा आएगा।”
गोपाल फूट-फूटकर रो रहा था।
“मुझे छोड़ दो... मैं सब कुछ छोड़ दूंगा... बस ये जिंदगी मत जीने दो...”
Chapter 5: घर से दूर, हमेशा के लिए

तीसरे दिन सुबह अनीता कमरे में आई। गोपाल अभी भी मुर्गा पोजीशन में बंधा हुआ था। उसकी स्कर्ट ऊपर थी, शरीर पसीने और आंसुओं से तर।
अनीता ने उसके बाल पकड़े और सिर ऊपर किया।
“अब सुन अच्छे से। तेरे पुराने घर का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो गया है। तेरे परिवार को बता दिया गया है कि तू विदेश चला गया है। तेरे बिजनेस के सारे कागजात मेरे पास हैं। तेरा बैंक अकाउंट, प्रॉपर्टी, गाड़ियां — सब अब मेरे कंट्रोल में हैं।”
गोपाल की आंखें फट गईं।
“नहीं... ये झूठ है... मुझे घर जाने दो... मेरी मां... मेरे भाई...” वह फूट-फूटकर रोने लगा।
अनीता ने ठंडे स्वर में कहा,
“अब तू कभी घर नहीं जाएगा गोपाल। तू अब मेरी रंडी बायको है। मेरी प्रॉपर्टी। मेरी गुलाम। तेरी नई जिंदगी यहीं शुरू होती है।”
गोपाल चीखा, “तुम पागल हो गई हो! मैं कभी नहीं मानूंगा!”
अनीता हंसी। “मानना पड़ेगा।”
उसने गोपाल को खोलकर उठाया। पहले उसे नहलाया। फिर नया लुक तैयार किया।
सलवार-कमीज वाला अवतार
अनीता ने गोपाल को गुलाबी रंग की टाइट सलवार-कमीज पहनाई। कमीज इतनी टाइट थी कि छाती और कमर साफ उभर रही थी। सलवार की नाड़ी कसकर बांधी। नीचे पैंटी और ब्रा जरूर पहनाई।
फिर पूरा मेकअप — हल्का लेकिन आकर्षक। विग, बिंदिया, मंगलसूत्र, पायल, कंगन, झुमके।
जब गोपाल तैयार हो गया तो अनीता ने उसे एक स्पेशल रूम में ले जाया।
रूम के बीच एक एलेक्ट्रॉनिक मशीन थी। यह एक खास प्रकार की रिस्ट्रेन्ट चेयर थी। हाथ-पैर फैलाने के लिए मेटल क्लैंप्स, शरीर को फिक्स करने के लिए स्ट्रैप्स।
अनीता ने गोपाल को उस चेयर पर बिठाया। हाथों को दोनों तरफ फैलाकर मेटल क्लैंप्स से लॉक कर दिया। पैरों को फैलाकर स्प्रेडर बार और क्लैंप्स में जकड़ दिया। कमर और छाती पर भारी स्ट्रैप्स कस दिए। सिर को पीछे फिक्स कर दिया।
फिर उसने गोपाल की आंखों पर एक एडवांस VR हेडसेट लगाया।
“ये मशीन खास तेरे लिए बनवाई है। अब तुझे असली मजा आएगा।”
VR ऑन होते ही गोपाल ने देखा — वह खुद को ठीक उसी हालत में देख रहा था। सलवार-कमीज में बंधा हुआ। लेकिन स्क्रीन पर एक वर्चुअल रूम था।
अचानक VR में कई आदमी घुस आए।
पहला आदमी उसके पास आया। उसने गोपाल की सलवार खींची और बेरहमी से पीछे से घुस गया। VR इतना रियल था कि गोपाल को असली दर्द महसूस हो रहा था।
“आआआह... नहीं... छोड़ो!” गोपाल असली दुनिया में भी चीख रहा था।
VR में दूसरे आदमी ने उसके मुंह में लिंग ठूंस दिया। तीसरा निप्पल चूस रहा था। वे बारी-बारी से, बहुत क्रूर तरीके से उसे चोद रहे थे।
गोपाल का शरीर मशीन में तड़प रहा था। आंसू VR हेडसेट के अंदर बह रहे थे। वह चीख रहा था, “बचाओ... मार डाल रहे हैं... दर्द हो रहा है...”
लेकिन अनीता मुस्कुरा रही थी। उसने मशीन का लेवल बढ़ा दिया।
अब VR में और ज्यादा आदमी आए। ग्रुप सेक्स। कुछ उसे मार रहे थे, कुछ चोद रहे थे। हर लेवल के साथ दर्द और तीव्रता बढ़ रही थी।
दो दिन तक लगातार यही सिलसिला चला।
गोपाल को न खाना मिला, न पानी ठीक से, न नींद। हाथ-पैर बंधे थे। VR हेडसेट हमेशा ऑन। शरीर थकान से कांप रहा था, लेकिन सो नहीं पा रहा था। हर बार नया सीन, नई बेरहमी।
कभी वह रेलवे स्टेशन पर बंधा होता, कभी होटल के कमरे में, कभी गली में। हर जगह अजनबी उसे रंडी की तरह इस्तेमाल कर रहे थे।
दूसरे दिन शाम को गोपाल की आवाज भी बैठ गई थी। वह सिर्फ कांप-कांपकर रो रहा था।
अनीता ने VR हेडसेट उतारा। गोपाल की आंखें लाल थीं। चेहरा थकान और दर्द से बिगड़ा हुआ था।
अनीता ने उसके गाल पर हाथ फेरा और बोली,
“समझ आया? अब तू असलियत जान चुका है। ये सिर्फ शुरुआत है। तेरी असली ट्रेनिंग अब शुरू होगी।”
गोपाल ने कमजोर आवाज में कहा,
“मुझे... मार डालो... बस... ये जिंदगी... नहीं जी पाऊंगा...”
अनीता ने उसके होंठों पर किस किया और फुसफुसाई,
“तू जिएगा... मेरे लिए। मेरी रंडी बायको बनकर। हमेशा।”
Chapter 6: सार्वजनिक अपमान की शुरुआत
कई दिनों तक अनीता ने गोपाल को लगातार पोर्न वीडियो दिखाए। VR हेडसेट में घंटों-घंटों तक। लेकिन मास्टरबेट करने की इजाजत नहीं दी। गोपाल का लिंग चोरी-चोरी उत्तेजित होता, लेकिन चरम सीमा तक पहुंचने नहीं दिया जाता। वह पागल हो रहा था। शरीर में आग लगी हुई थी।
एक सुबह अनीता कमरे में आई और बोली,
“आज तुझे बाहर ले चलती हूं, मेरी स्कूल गर्ल रंडी।”
उसने गोपाल को तैयार करना शुरू किया।
सेक्सी स्कूल गर्ल लुक
एक बहुत छोटी ब्लैक प्लेड स्कर्ट — जो घुटनों से काफी ऊपर थी, मुश्किल से जांघों को ढक पाती थी। ऊपर सफेद टाइट शॉर्ट ब्लाउज, जिसके नीचे पुश-अप ब्रा में नकली ब्रेस्ट्स। बालों में दो चोटियां बांधीं। पैरों में सफेद लंबे मोजे जांघों तक और काले स्कूल शूज। मेकअप — पिंक लिपस्टिक, काजल, हल्का ब्लश।
जब गोपाल आईने में खुद को देखा तो शर्म से उसका चेहरा लाल हो गया। स्कर्ट इतनी छोटी थी कि थोड़ा झुकते ही गांड दिख जाती।
अनीता ने उसे मुर्गा बनाया। दोनों हाथ पैरों के बीच से डालकर कान पकड़वाए। फिर उसे गार्डन के एक बड़े पेड़ के पीछे ले गई।
पेड़ के तने से गोपाल को अच्छे से बांध दिया — हाथ पीछे, पैर फैले हुए। स्कर्ट ऊपर चढ़ गई थी।
गोपाल कांप रहा था। “प्लीज अनीता... बाहर मत ले जाओ... लोग देखेंगे...”
अनीता ने ठंडी मुस्कान के साथ कहा,
“आज खास है। मैं तेरी आंखों पर काली पट्टी बांधूंगी। और तेरे गले में बोर्ड लटकाऊंगी।”
उसने बोर्ड पर लिखा:
“मेरे मां-बाप बीमार हैं। इलाज के लिए पैसे चाहिए। जो चाहे मेरे शरीर के साथ कुछ भी कर सकता है। बस कटोरे में पैसे डाल दो।”
गोपाल ने पढ़कर चीखने की कोशिश की, “नहीं! ये मत करो! मैं भिखारी नहीं हूं!”
लेकिन अनीता ने उसकी आंखों पर काली पट्टी बांध दी। फिर उसके होंठों पर फेवीक्विक लगाकर चिपका दिया। अब गोपाल न बोल सकता था, न देख सकता था, न हिल-डुल सकता था। सिर्फ सुन और सह सकता था।
अनीता ने एक कटोरा उसके सामने रख दिया और खुद दूर चली गई।
असली तांडव शुरू...
कुछ देर बाद लोग आने लगे।
पहले एक लड़का आया। उसने गोपाल के ब्रेस्ट्स को जोर से नोचा। फिर होंठों पर किस किया। दूसरा लड़का आया, उसने स्कर्ट ऊपर की और गांड पर थप्पड़ मारे।
“कितनी हॉट है यार!”
एक-एक करके कई लड़के आए। कोई किस कर रहा था, कोई फ्रेंच किस, कोई होंठों को काट रहा था। दो-दो हाथों से ब्रेस्ट्स दबा रहे थे। एक ने ब्लाउज के बटन खोल दिए और पेट पर मेहंदी से लिख दिया — SLUT।
कुछ लड़कियां भी आईं।
एक लड़की ने स्कर्ट के अंदर हाथ डालकर गोपाल का लिंग पकड़ लिया और जोर से दबाया। दूसरी ने झुककर लिंग को किस किया। एक ने मुंह में थूक दिया। एक ने गाली देते हुए कहा, “साली रंडी, तुझे शर्म नहीं आती?”
एक बदमाश लड़की ने गोपाल की गांड में दो उंगलियां घुसा दीं और जोर-जोर से अंदर-बाहर किया।
गोपाल का पूरा शरीर तड़प रहा था। दर्द, शर्म, और अनचाही उत्तेजना का मिश्रण। वह अंदर ही अंदर चीख रहा था, लेकिन फेवीक्विक के कारण सिर्फ “mmm... mmm...” की आवाज निकल रही थी।
कटोरे में पैसे गिरने की आवाज आ रही थी। लोग हंस रहे थे, तस्वीरें खींच रहे थे।
कोई उसके नकली ब्रेस्ट्स को काट रहा था, कोई जांघों पर निशान बना रहा था। स्कर्ट पूरी तरह ऊपर थी। गांड और लिंग सबके सामने थे।
दो घंटे तक यह सिलसिला चला। गोपाल की बॉडी के किसी भी हिस्से को नहीं छोड़ा गया। होंठ सूज गए थे, ब्रेस्ट्स लाल हो गए थे, गांड में दर्द हो रहा था।
जब अनीता वापस आई तो गोपाल पूरी तरह टूट चुका था। उसका शरीर पसीने और आंसुओं से तर था।
अनीता ने पट्टी खोली। गोपाल की आंखें लाल और सूजी हुई थीं।
अनीता ने उसके गाल पर हाथ रखकर कहा,
“देखा? बाहर की दुनिया कितनी प्यारी है तेरे लिए। अब तू हर हफ्ते बाहर आएगी। कभी पार्क में, कभी बाजार में, कभी बस में।”
गोपाल सिर्फ रो रहा था। बोल भी नहीं पा रहा था।
अनीता ने फेवीक्विक खोला और उसके कान में फुसफुसाया,
“अब तू मेरी पब्लिक रंडी है।”
Chapter 7: रोजाना का नया तौर-तरीका

अगले कई हफ्तों तक अनीता ने गोपाल को रोज अलग-अलग जगहों पर ले जाना शुरू कर दिया। उसकी जिंदगी अब एक लगातार चलता हुआ सार्वजनिक यातनाकांड बन चुकी थी।
पहले दिन पार्क, दूसरे दिन लोकल बाजार, तीसरे दिन बस स्टैंड के पास की भीड़, चौथे दिन मंदिर के बाहर, पांचवें दिन सिनेमा हॉल के पास की गली। हर जगह अनीता उसे feminine कपड़ों में, मेकअप में, कभी स्कूल गर्ल, कभी साड़ी में, कभी टाइट टॉप और शॉर्ट स्कर्ट में खड़ा कर देती।
गोपाल के मन की हालत
गोपाल अब अंदर से पूरी तरह टूट चुका था। हर सुबह जब वह उठता, तो सबसे पहले शर्म का एक भारी बोझ उसके सीने पर बैठ जाता।
“मैं गोपाल था... एक घमंडी, सक्सेसफुल आदमी... आज मैं क्या बन गया हूं? एक रंडी... जिसे हर कोई छू सकता है, मार सकता है, अपमानित कर सकता है।”
उसके शरीर पर अब नई सजावट थी। अनीता ने उसके नाभि (belly button) को पियर्स करवा दिया था। एक चमकदार गुलाबी स्टोन वाली रिंग। निप्पल्स में भी छोटे-छोटे रिंग डलवा दिए थे। ये पियर्सिंग देखते ही लोगों को और उकसाती थी।
हर दिन का सिलसिला एक जैसा लेकिन दर्द अलग-अलग।
सुबह अनीता उसे तैयार करती। मेकअप, जेवर, छोटे कपड़े। फिर छुपा हुआ वाइब्रेटर गांड में डालकर ऑन कर देती। रिमोट खुद रख लेती।
बाहर पहुंचकर वह गोपाल को किसी पेड़, पोल या बेंच से हल्का-हल्का बांध देती। कभी हाथ पीछे, कभी सामने।
लोग आते।
पहले तो कुछ लड़के-लड़कियां सिर्फ देखते। फिर कोई आगे बढ़कर उसके ब्रेस्ट्स दबाता। कोई होंठों पर किस करता। कोई स्कर्ट के अंदर हाथ डालकर लिंग से खेलता — कभी सहलाता, कभी जोर से दबाता, कभी चूसने की कोशिश करता।
गोपाल मन ही मन सोचता,
“ये मैं नहीं हूं... ये मेरी बॉडी नहीं है... लेकिन दर्द क्यों हो रहा है? क्यों शर्म आ रही है? और क्यों... कभी-कभी... नीचे कुछ हो जाता है?”
एक दिन बाजार में एक मोटा आदमी आया। उसने गोपाल के नाभि के पियर्सिंग को उंगली से खींचा। दर्द की लहर उठी। गोपाल की आंखों से आंसू निकल आए।
“साली कितनी मस्त रंडी है,” उसने कहा और गोपाल के पेट पर थूक दिया।
दूसरी तरफ दो लड़कियां आईं। एक ने उसके निप्पल रिंग खींचे। दूसरी ने गाल पर थप्पड़ मारा और बोली, “कितना सुंदर मेकअप है रे... लेकिन अंदर से तो तू हरामी है ना?”
कुछ लोग जो शुरू में सिर्फ देख रहे थे, पियर्सिंग देखकर उत्तेजित हो जाते। वे भी आगे आकर हाथ लगाने लगते। कोई गांड में उंगली डाल देता। कोई लिंग को पकड़कर खींचता। कोई कान में गाली देता — “रंडी”, “बायको”, “साली”, “चक्का”।
गोपाल खड़ा-खड़ा सब सहता। बोल नहीं पाता क्योंकि अक्सर मुंह में बॉल गैग या टेप लगा होता। शरीर कांपता, आंसू बहते, लेकिन खड़ा रहना पड़ता।
एक खास दिन
एक शाम मंदिर के पास भीड़ थी। अनीता ने उसे वहां खड़ा किया। आज गोपाल पर हल्की ट्रांसपेरेंट साड़ी थी, ब्लाउज बिना ब्रा के। नाभि का पियर्सिंग साफ दिख रहा था।
लोगों की लाइन लग गई।
एक जवान लड़के ने गोपाल की साड़ी का पल्लू खींचा। ब्रेस्ट्स बाहर आ गए। उसने दोनों निप्पल रिंग खींचे और मुंह में ले लिया। गोपाल दर्द से तड़प उठा।
“भगवान... मुझे मरने दो... ये सहन नहीं होता... मैं मर जाना चाहता हूं...”
एक औरत ने आगे बढ़कर गोपाल के लिंग को स्कर्ट के ऊपर से दबाया और बोली, “अरे! ये तो लड़का है!” फिर भी वह हंसी और जोर से दबाकर चली गई।
रात होते-होते गोपाल का पूरा शरीर निशानों से भर गया था। होंठ फटे, ब्रेस्ट्स लाल, गांड में दर्द, पेट पर थूक और लिखावट।
घर लौटकर अनीता ने उसे बेड पर पटका। गोपाल रोते हुए बोला,
“अनीता... बस कर दो... मैं तुम्हारा गुलाम हूं... जो चाहो कर लो... लेकिन बाहर मत ले जाओ... लोग मुझे जानवर की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं...”
अनीता उसके ऊपर लेट गई। उसकी उंगलियां गोपाल के नाभि के पियर्सिंग से खेल रही थीं।
“तुझे यही पसंद है ना? घमंडी गोपाल अब पब्लिक टॉय बन गया है। और ये सिलसिला जारी रहेगा... जब तक तू पूरी तरह नहीं टूट जाता।”
गोपाल ने आंसू पोछते हुए कहा,
“मैं... टूट चुका हूं...”
अनीता हंसी।
“नहीं अभी नहीं। अभी तो सिर्फ शुरुआत है, मेरी बायको।”
गोपाल अब पूरी तरह थक चुका था। रोज़ का सार्वजनिक तांडव, अपमान, छूना, मारना, चूसना — सब कुछ उसके शरीर और दिमाग को चूर-चूर कर चुका था। वह अब विरोध भी कम कर चुका था। बस आंसू बहाते और सहता रहता।
एक सुबह अनीता उसके कमरे में आई। वह असामान्य रूप से खुश थी।
“गोपाल... आज मैंने सोचा है कि तुम्हें आराम मिले। मुझे पता है तुम नहीं चाहते कि लोग तुम्हें काटें, किस करें, या तुम्हारे प्राइवेट पार्ट्स को छुएं। तो खुश हो जाओ... आज कुछ भी नहीं होगा।”
गोपाल की आंखों में उम्मीद की किरण जागी। वह पहली बार कई दिनों में थोड़ा सा खुश हुआ।
“सच...? आज कुछ नहीं होगा?”
अनीता मुस्कुराई, “हां... बस एक छोटा सा प्रोग्राम है।”
उसने गोपाल को एक खास ड्रेस दी — ब्लैक स्टॉकिंग्स, छोटा क्रॉप टॉप, गॉथिक स्टाइल स्कर्ट, भारी काला मेकअप, आंखों में डार्क आईशैडो, लाल-काला लिपस्टिक और गले में चेन कॉलर।
जब गोपाल तैयार हो गया तो अनीता ने उसकी आंखों पर काली पट्टी बांध दी।
“चलो... चलते हैं।”
कार में ले जाकर अनीता उसे एक बड़े ब्यूटी पार्लर में ले गई। पार्लर के अंदर एक खास प्राइवेट रूम था। अनीता ने गोपाल के गले के पट्टे को रूम के कोने में लगे हुक से बांध दिया।
फिर कुछ लड़कियों ने आगे बढ़कर गोपाल को एक स्प्रेडर बार पर बांध दिया। हाथ दोनों तरफ फैले, पैर चौड़े किए गए। शरीर पूरी तरह खुला और लाचार।
अनीता ने आवाज लगाई,
“लड़कियों... आज शादियों का सीजन है। जो भी लड़की पहली बार हनीमून पर जा रही है और अभी तक किसी असली मर्द के पेनिस को नहीं देखा है... वो यहां आकर गोपाल के साथ कुछ भी कर सकती है। प्रैक्टिस कर लो।”
गोपाल की रगों में खून जम गया।
“नहीं... अनीता... तुमने कहा था आज कुछ नहीं होगा... ये क्या है?!” वह चीखा, लेकिन पट्टी और बंधन के कारण कुछ नहीं कर पाया।
पार्लर की लड़कियों का तांडव
पहली लड़की आई। वह शादी होने वाली थी। उसने कांपते हाथों से गोपाल की स्कर्ट ऊपर की।
“वाह... ये तो सच में लड़का है...” उसने धीरे से गोपाल के लिंग को छुआ। फिर धीरे-धीरे सहलाने लगी। गोपाल सिहर उठा।
दूसरी लड़की ने आगे बढ़कर गोपाल के क्रॉप टॉप को ऊपर किया और उसके निप्पल्स को चूसने लगी। “मेरे फ्यूचर हसबैंड को भी ऐसे ही छूना है...”
तीसरी लड़की, जो सबसे बोल्ड थी, गोपाल के सामने घुटनों के बल बैठ गई। उसने गोपाल के लिंग को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। गोपाल की चीख निकल गई।
“अम्म्म... धीरे... दर्द हो रहा है...”
चौथी लड़की आई। उसने गोपाल की गांड में उंगली डालने की कोशिश की और बोली, “मुझे डर लगता है... लेकिन प्रैक्टिस करनी है ना?”
एक-एक करके लगभग १२-१३ लड़कियां आईं।
कुछ सिर्फ छू रही थीं, कुछ चूस रही थीं, कुछ उसके शरीर पर किस कर रही थीं। एक लड़की ने उसके लिंग को इतनी जोर से पकड़ा कि गोपाल को रोना आ गया। दूसरी ने उसके निप्पल काट लिए। एक ने उसके पेट पर चुभन भरी किस किए।
गोपाल मन ही मन सोच रहा था:
*“ये लड़कियां... जो खुद शादी करने जा रही हैं... मुझे रंडी की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। मैं कितना गिर गया हूं... कितना गिर गया...”
उसके शरीर पर पसीना, थूक और लार के निशान पड़ गए थे। लिंग सूज गया था। गांड में दर्द हो रहा था।
आखिरी लड़की ने गोपाल के कान में फुसफुसाया,
“थैंक यू... अब मुझे हनीमून पर कॉन्फिडेंस आएगा।”
जब सब खत्म हुआ तो अनीता ने पट्टी खोली।
गोपाल की आंखें सूजी हुई थीं। वह टूटकर रो रहा था।
“तुमने... धोखा दिया... तुमने कहा था आज कुछ नहीं होगा...”
अनीता ने उसके गाल पर हाथ फेरा और बोली,
“मैंने कहा था कि ‘लोग’ नहीं छुएंगे... लेकिन ये तो दुल्हनें थीं ना? प्रैक्टिस कर रही थीं। अब तू उनकी भी रंडी बन गया।”
गोपाल ने सिर झुकाकर फुसफुसाया,
“मैं... अब कुछ नहीं हूं... बस तुम्हारा खिलौना...”
अनीता ने उसके माथे पर किस किया।
“सही समझा मेरी बायको।”
अगले दिन दोपहर को अनीता गोपाल के कमरे में आई।
“आज तुझे जिम ले चलती हूं।”
गोपाल थक चुका था। उसने चुपचाप सिर हिला दिया। विरोध करने की हिम्मत अब बाकी नहीं थी।
अनीता ने उसे एक बहुत छोटी स्पोर्ट्स स्कर्ट और टाइट स्पोर्ट्स ब्रा पहनाई। ब्रा में नकली ब्रेस्ट्स। स्कर्ट इतनी छोटी थी कि जरा सा झुकते ही गांड दिख जाती। बालों में पोंटटेल, हल्का मेकअप। पैरों में स्पोर्ट्स शूज।
कार से वे एक हाई-एंड लेकिन हार्डकोर जिम पहुंचे, जहां ज्यादातर मोटे, मसल्स वाले, खूंखार किस्म के लड़के ट्रेनिंग करते थे।
अनीता ने गोपाल को जिम के बीच वाले ओपन एरिया में ले जाकर एक स्पेशल स्टैंडिंग फ्रेम से बांध दिया।
हाथ ऊपर करके दोनों तरफ फैलाए गए। पैर भी चौड़े करके स्प्रेडर बार से जकड़े गए। शरीर पूरी तरह खुला और लाचार।
अनीता ने मुस्कुराते हुए कहा,
“मैं बाहर इंतजार करूंगी। तुम लोग मजा करो... लेकिन ज्यादा खून-खराबा मत करना।”
यह कहकर वह चली गई।
जिम में सन्नाटा छा गया। फिर धीरे-धीरे चारों तरफ से भारी कदमों की आवाज आई।
मुश्तांडों का तांडव
पहला लड़का — छह फीट से ज्यादा लंबा, मोटी गर्दन, भारी बाइसेप्स वाला — गोपाल के सामने आया। उसने गोपाल की स्कर्ट ऊपर की और गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा।
धड़ाम!
गोपाल के मुंह से चीख निकल गई।
“भगवान... ये लोग मुझे मार डालेंगे... मैं तो औरत भी नहीं हूं... फिर भी ये मुझे रंडी समझ रहे हैं...”
दूसरा लड़का, जो और भी भारी था, गोपाल के ब्रा को खींचकर नीचे किया। निप्पल्स को अपनी मोटी उंगलियों से मरोड़ने लगा।
“देखो यार... कितने प्यारे निप्पल्स हैं इसकी।”
तीसरा लड़का पीछे आया। उसने गोपाल की स्कर्ट पूरी तरह ऊपर कर दी और गांड पर थूककर अपनी उंगली घुसाने लगा। फिर दो, फिर तीन उंगलियां। गोपाल दर्द से तड़प उठा।
“आआआह... बस करो... बहुत दर्द हो रहा है...”
एक और लड़के ने गोपाल के लिंग को पकड़ लिया। वह जोर-जोर से सहलाने लगा। कभी तेज, कभी धीरे। लेकिन चरम तक पहुंचने नहीं दे रहा था।
“ये रंडी तो बहुत गीली हो रही है यार।”
वे हंस रहे थे। कोई गोपाल के चेहरे पर थूक रहा था। कोई उसके ब्रेस्ट्स को मुक्का मार रहा था। एक ने उसके पेट पर घूंसा मारा।
गोपाल के मन में विचार घूम रहे थे:
“मैं पहले इन जैसे लड़कों को नीचा दिखाता था... आज ये लोग मुझे खिलौना बना रहे हैं। मेरी इज्जत, मेरी मर्दानगी... सब खत्म हो गई। मैं अब सिर्फ एक छेद हूं... इनके लिए। दर्द हो रहा है... शर्म आ रही है... लेकिन शरीर क्यों प्रतिक्रिया दे रहा है?”
एक बहुत भारी बॉडीबिल्डर आया। उसने गोपाल को पीछे से पकड़ा और अपना मोटा लिंग गोपाल की गांड पर रगड़ने लगा। घुसाने की कोशिश की, लेकिन अनीता ने पहले से सख्त हिदायत दे रखी थी कि पूरा पेनिस नहीं घुसाना है। फिर भी उसने काफी जोर लगाया। गोपाल चीखता रहा।
दूसरे लड़के उसके मुंह में लिंग ठूंस रहे थे। कोई उसके बाल खींच रहा था। कोई गाल पर थप्पड़ मार रहा था।
एक घंटे तक यह सिलसिला चला। गोपाल का पूरा शरीर लाल निशानों, थूक और पसीने से तर था। उसकी आवाज बैठ चुकी थी। वह बस कांप रहा था।
जब अनीता वापस आई तो गोपाल की हालत देखकर वह मुस्कुराई।
“कैसा लगा मेरी बायको? असली मर्दों के बीच में?”
गोपाल ने टूटे स्वर में कहा,
“मुझे... मार डालो... बस... अब और नहीं...”
अनीता ने उसके गाल पर किस किया और फुसफुसाया,
“अभी तो बहुत कुछ बाकी है। तुझे तो अभी पूरी तरह तोड़ना है।”
अगले दिन शाम ढलते ही अनीता ने गोपाल को तैयार किया। आज बहुत छोटी और सेक्सी ब्लैक लेस ड्रेस — जो मुश्किल से उसके गांड को ढक पाती थी। नीचे कोई पैंटी नहीं। ऊपर सिर्फ ब्रा। मेकअप भड़कीला — लाल लिपस्टिक, स्मोकी आंखें। बाल खुले। पैरों में ऊंची हील्स।
उसने गोपाल के गले में बोर्ड लटका दिया:
“रात की रंडी। जो चाहे कर लो। पैसे डाल दो।”
रात के अंधेरे में अनीता गोपाल को पुणे के एक सुनसान इलाके में ले गई — जहां पुरानी फैक्टरियां और कम रोशनी वाली सड़क थी। एक पुराने लैंप पोस्ट से गोपाल को हाथ पीछे बांधकर खड़ा कर दिया। पैर भी फैलाकर छोटी चेन से जकड़ दिए।
अनीता ने उसके होंठों पर फिर से फेवीक्विक लगा दिया।
“आज रात तू यहां रहेगा। जो आएगा, उसे जो करना हो कर ले। मैं सुबह आऊंगी।”
यह कहकर वह चली गई।
रात गहराती गई। सड़क पर अंधेरा छा गया। सिर्फ दूर एक स्ट्रीट लाइट जल रही थी।
पहले गे लड़के आए
दो गे लड़के सड़क पर घूमते हुए आए। बोर्ड पढ़कर वे रुक गए।
“अरे यार... असली माल है!”
पहला लड़का गोपाल के पास आया। उसने गोपाल की ड्रेस ऊपर की और गांड को सहलाने लगा।
“कितनी नरम गांड है रे... आज तुझे चोदेंगे।”
दूसरा लड़का गोपाल के सामने खड़ा हो गया। उसने गोपाल के ब्रा को खींचा और निप्पल्स को चूसने लगा।
“चूस... चूस रंडी... आज तू हमारी है।”
वे दोनों बारी-बारी से गोपाल की गांड में उंगलियां डाल रहे थे। एक ने लिंग पकड़कर जोर से सहलाया। गोपाल दर्द और शर्म से तड़प रहा था।
मन में सोच रहा था: “मैं मर्द था... आज गे लड़के मुझे अपनी रंडी बना रहे हैं... कितना गिर गया हूं...”
फिर रंडियां (सेक्स वर्कर्स) आईं
कुछ देर बाद तीन-चार रंडियां (प्रोस्टिट्यूट) वहां पहुंचीं। वे शराब पीकर हंस रही थीं। बोर्ड देखकर उनके चेहरे पर शैतानी मुस्कान आ गई।
पहली रंडी (उम्र करीब ३५) आगे आई। उसने गोपाल के चेहरे को पकड़ा (होंठ फेवीक्विक से बंद थे) और बोली,
“अरे वाह... आज तो मर्द रंडी मिल गई। कितना सुंदर मेकअप है साली!”
उसने गोपाल के ब्रेस्ट्स को जोर से दबाया और बोली,
“ये नकली चुचियां भी अच्छी हैं।” फिर उसने निप्पल काट लिया।
दूसरी रंडी ने गोपाल की ड्रेस पूरी तरह ऊपर कर दी। उसने गोपाल के लिंग को देखा और हंसी,
“अरे... ये तो लड़का है! लेकिन आज तू हमारी बहन बनेगा।”
उसने गोपाल की गांड में अपनी उंगलियां घुसाईं और जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगी।
“ले... ले रंडी... हम भी तो रोज ये सहती हैं... आज तू सह!”
तीसरी रंडी ने गोपाल के मुंह के पास मुंह लाकर थूक दिया (होंठ बंद होने के कारण थूक चेहरे पर बह गया) और बोली,
“साली... कितनी महंगी लगती है... लेकिन आज फ्री में मिल गई।”
वे सब हंस रही थीं। एक ने गोपाल की जांघों पर काट लिया। दूसरी ने उसके पेट पर चुभन भरे निशान बनाए। एक ने उसके लिंग को मुंह में लेकर इतनी जोर से चूसा कि गोपाल की आंखों से आंसू निकल आए।
एक रंडी ने कहा,
“देख... ये रो रहा है। कितना मज़ा आ रहा है ना रे? कल तू भी हमारी तरह सड़क पर खड़ी होगी।”
गोपाल के मन की हालत
गोपाल अंदर ही अंदर चीख रहा था:
“ये औरतें... जो खुद बिकती हैं... आज मुझे बिका हुआ समझ रही हैं। मैं मर जाना चाहता हूं। ये दर्द... ये अपमान... ये सहन नहीं होता। मैं पहले इन सबको नीचा दिखाता था... आज मैं उनके पैरों की धूल भी नहीं हूं।”
रात भर यह सिलसिला चलता रहा। कोई थूक रहा था, कोई मार रहा था, कोई चूस रहा था, कोई उंगलियां डाल रहा था। गोपाल बस खड़ा-खड़ा सहता रहा। शरीर में दर्द, मन में अपार शर्म और टूटन।
सुबह होने वाली थी जब अनीता आई।
गोपाल का चेहरा सूजा हुआ था, शरीर पर निशान थे, ड्रेस गंदी हो चुकी थी।
अनीता ने उसके बालों को सहलाया और बोली,
“अब तू पूरी तरह टूट चुका है ना मेरी बायको?”
गोपाल ने सिर्फ आंसू बहाकर सिर हिला दिया।
Chapter 8: गहरी मानसिक तोड़फोड़

गोपाल अब पूरी तरह टूट चुका था।
रोज़ का torture, गालियां, मार-पीट, सार्वजनिक अपमान, जिम, पार्लर, अंधेरी सड़क — सब कुछ उसके शरीर और दिमाग को चूर-चूर कर चुका था। वह बीमार पड़ गया था। बुखार चढ़ आया था। शरीर में हर जोड़ दर्द कर रहा था।
उस रात वह फूट-फूटकर रोने लगा।
“मां... पापा... मुझे घर ले चलो... मैं वापस आना चाहता हूं... मैं तुम्हारा बेटा हूं... ये जिंदगी नहीं जी पाऊंगा...”
वह जोर-जोर से चीखने लगा। आंसू बह रहे थे। शरीर कांप रहा था।
“अनीता... प्लीज... मुझे घर जाने दो... मैं तुम्हारा गुलाम बन जाऊंगा... जो चाहो कर लो... बस घर जाने दो...”
उसकी चीखें सुनकर अनीता कमरे में आई। उसने दो जोरदार थप्पड़ गोपाल के गाल पर जड़ दिए।
धड़ाम! धड़ाम!
“चुप! ये तेरे बाप का घर नहीं है! अगर एक शब्द और निकाला तो आज तुझे जनवरी से चुदवाऊंगी... किसी गधे से! समझा?”
गोपाल डर के मारे कांप उठा। उसने चुप होकर सिर हिला दिया।
अनीता ने थोड़ी देर बाद एक डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने गोपाल को कुछ दवाएं दीं और एक इंजेक्शन लगाया। फिर चला गया।
अनीता ने गोपाल की तरफ देखा और बोली,
“आज हम बाहर नहीं जाएंगे। लेकिन तू पूरे दिन मेरे कमरे में मुर्गा बनकर रहेगा।”
मुर्गा बनने की सजा
अनीता ने गोपाल को मुर्गा बनाया। दोनों हाथ पैरों के बीच से डालकर कान पकड़वाए। फिर उसके हाथों और पैरों को स्टील की हैंडकफ से लॉक कर दिया। कमर पर एक चेन डालकर कमरे के कोने में लगे हुक से मजबूती से बांध दिया।
गोपाल अब मुर्गा बनकर कोने में बैठा था। सिर नीचे, गांड ऊपर, हाथ-पैर जकड़े हुए।
दर्द और भावनाएं
पहले तो दर्द सहनशक्ति के अंदर था। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, दर्द बढ़ता गया।
कमर में तेज खिंचाव हो रहा था। पैरों की मांसपेशियां ऐंठ रही थीं। हाथों में खून का बहाव रुक रहा था। गर्दन झुकी रहने से गर्दन में भयानक दर्द था।
गोपाल मन ही मन सोच रहा था:
“कितना दर्द है... मेरी कमर फट जाएगी... मेरे घुटने टूट जाएंगे... मैं कितना गिर गया हूं... पहले मैं घमंडी था... आज मैं एक मुर्गा बनकर कोने में बैठा हूं... मेरी मां को अगर पता चले तो क्या सोचेगी? मैं मर जाना चाहता हूं... लेकिन मर भी नहीं पा रहा...”
समय बीतता गया। दोपहर हो गई। गोपाल का बुखार और बढ़ गया था। पसीना छूट रहा था। आंसू लगातार बह रहे थे। वह हिल भी नहीं सकता था। हर सांस लेने में दर्द हो रहा था।
शाम होने तक उसकी सांस फूलने लगी। पैरों में झुनझुनी हो रही थी। कमर में ऐसा लग रहा था जैसे कोई चाकू घुसा दिया गया हो।
“अनीता... मालकिन... मुझे माफ कर दो... मैं तुम्हारा हूं... बस ये सजा खत्म कर दो... मैं तुम्हारे पैर चूम लूंगा... जो कहोगी करूंगा...”
रात के करीब अनीता बिस्तर पर लेटी हुई थी। गोपाल कोने में मुर्गा बनकर तड़प रहा था।
गोपाल ने कांपते स्वर में (जितना बोल पा रहा था) कहा,
“मालकिन... मैं... तुम्हारा... हूं... प्लीज...”
अनीता उठी। उसने गोपाल के सिर को नीचे किया और अपने पैर उसके मुंह के पास रख दिए।
गोपाल ने बिना सोचे अपने होंठों से अनीता के पैर चूमने शुरू कर दिए। आंसू बह रहे थे।
“मैं... तुम्हारा गुलाम हूं... तुम्हारी बायको हूं... जो चाहो कर लो... बस मुझे मत छोड़ो...”
अनीता ने उसके सिर पर हाथ फेरा।
“अब तुझे समझ आ गया ना? तू अब मेरा है।”
गोपाल ने और जोर से पैर चूमे। उसके मन में एक अजीब सा attachment जाग रहा था। डर, शर्म, और एक twisted प्यार।
“वो मुझे तोड़ रही है... लेकिन अब उसके बिना भी नहीं रह सकता... वो मेरी मालकिन है... मेरी सब कुछ है...”
अनीता ने मुस्कुराते हुए कहा,
“अच्छा लड़का। कल से नई शुरुआत।”
गोपाल कोने में मुर्गा बनकर, चेन से बंधा, अनीता के पैर चूमता रहा। उसकी आंखों में अब विरोध नहीं, सिर्फ समर्पण था।
Chapter 9: खतरनाक पब्लिक सीन

अगले दिन सुबह अनीता गोपाल के कमरे में आई। गोपाल अभी भी मुर्गा बनकर कोने में चेन से बंधा हुआ था। उसका शरीर दर्द और बुखार से कांप रहा था।
अनीता ने सामने टेबल पर कुछ प्रॉपर्टी के कागजात रखे।
“साइन कर।”
गोपाल ने कांपते हाथों से सारे कागजात पर साइन कर दिए — उसकी सारी संपत्ति, बिजनेस, बैंक अकाउंट, घर — सब कुछ अनीता के नाम हो गया।
अनीता मुस्कुराई। फिर उसने गोपाल के लिंग पर एक अजीब सा केमिकल स्प्रे किया।
“ये तेरी आखिरी सजा है।”
कुछ दिन बाद गोपाल का लिंग सड़ने लगा। उसमें कीड़े पड़ गए। दर्द असहनीय था। गोपाल चीख-चीखकर तड़प रहा था। रात में नींद नहीं आती थी। हर पल मौत मांग रहा था।
एक दिन अनीता ने गोपाल के माता-पिता को बुला लिया।
गोपाल को देखकर उसके मां-बाप रो पड़े। अनीता ने सब कुछ बहुत चालाकी से पेश किया — “गोपाल को कुछ बीमारी हो गई है। डॉक्टर कह रहे हैं कि लिंग काटना पड़ेगा, वरना जान जा सकती है।”
गोपाल चीखना चाहता था, लेकिन अनीता ने पहले ही उसे धमका रखा था — “अगर कुछ बोला या बताया तो तेरे बाप के साथ भी वही सब करूंगी जो तेरे साथ किया है... और वो भी पब्लिक में।”
गोपाल डर के मारे चुप रहा। उसने सिर्फ आंसू बहाए।
मां-बाप मजबूर होकर सहमत हो गए। उन्होंने सारे फॉर्म्स पर साइन कर दिए।
ऑपरेशन
ऑपरेशन हुआ। गोपाल का लिंग काट दिया गया। सर्जरी के बाद उसे हार्मोन इंजेक्शन दिए गए। स्तन बढ़ाए गए। चेहरा और शरीर को और feminine बनाया गया।
जब गोपाल होश में आया तो वह एक खूबसूरत लड़की की तरह दिख रहा था। लंबे बाल, स्तन, चिकनी त्वचा — लेकिन अंदर से पूरी तरह खोखला।
उसके मां-बाप कुछ दिन रुके। लेकिन अनीता के दबाव में वे मजबूर होकर चले गए।
“बेटा... डॉक्टर कह रहे हैं कि तुझे यहां ही रहना पड़ेगा... हम आते रहेंगे।”
गोपाल रोते हुए उनके पैर पकड़ना चाहता था, लेकिन कुछ बोल नहीं पाया।
मां-बाप चले गए।
अनीता गोपाल के पास आई। अब गोपाल पूरी तरह लड़की बन चुका था।
अनीता ने उसके नए स्तनों को सहलाते हुए कहा,
“अब तू पूरी तरह मेरी बायको है। गोपाल मर गया। अब तू सिर्फ ‘शीतल ’ है। मेरी हमेशा की गुलाम।”
गोपाल (अब शीतल ) ने अनीता के पैर चूमे और फुसफुसाया,
“जी... मालकिन... मैं तुम्हारी हूं... हमेशा...”
उसकी आंखों में अब कोई विरोध नहीं था। सिर्फ twisted लगाव और पूर्ण समर्पण था।
अनीता ने उसके सिर पर हाथ फेरा और बोली,
“अच्छी लड़की।”
Chapter 10: पूर्ण समर्पण और अंधेरा अंत

अगले दिन शाम को अनीता गोपाल (अब गोपाली) के कमरे में आई। गोपाल अब पूरी तरह लड़की जैसा बन चुका था — स्तन, चिकनी त्वचा, लंबे बाल।
अनीता ने मुस्कुराते हुए कहा,
“आज तुझे असली रोमांच दूंगी। वो जो तू पहले अकेले किया करता था... अब मैं तुझे जबरदस्ती करवाऊंगी।”
उसने गोपाल को एक टाइट ब्लैक लाइक्रा कैटसूट पहनाया, जो शरीर को दूसरी त्वचा की तरह चिपक गया था। manhood को पीछे दबाकर छिपा दिया गया। ऊपर एक छोटा क्रॉप टॉप और बहुत छोटी प्लेड स्कर्ट। पैरों में ब्लैक नी-हाई हाई हील बूट्स।
फिर पूरा मेकअप — गॉथिक स्टाइल, डार्क आईशैडो, ब्राइट रेड लिपस्टिक। लंबा रेड विग, हॉट पिंक कॉलर, हॉट पिंक रिस्ट कफ्स और बॉन्डेज बेल्ट।
गोपाल कांप रहा था।
“मालकिन... प्लीज... बाहर मत ले जाओ...”
अनीता ने उसके गाल पर थप्पड़ मारा।
“चुप! आज तू मेरी आज्ञा से बाहर जाएगा। और पकड़े जाने का खतरा भी रहेगा।”
अनीता ने गोपाल को अपनी कार में बिठाया और पुराने अबैंडन्ड शॉपिंग मॉल की तरफ ले गई। रात के 1:30 बजे थे। मॉल को तोड़ने के लिए बंद किया गया था। आसपास अंधेरा और सुनसान था।
अनीता ने गोपाल को मॉल के उत्तर वाले पार्किंग लॉट में ले जाकर एक बड़े मेटल केज (जो पहले गार्बेज कंपेक्टर के लिए था) के पास खड़ा किया।
“अब खुद को बांध।”
गोपाल रोते हुए बोला, “मालकिन... कोई देख लेगा...”
अनीता ने उसके बाल खींचे,
“बांध! वरना आज रात तुझे यहीं नंगा छोड़ दूंगी।”
गोपाल ने डरते हुए बैग से सामान निकाला। पहले टखनों को बार्स के बीच से बांधा। फिर घुटनों के ऊपर और नीचे स्ट्रैप्स। फिर हॉट पिंक कॉलर लगाया, विग ठीक की।
अनीता ने खुद आगे बढ़कर बॉल गैग उसके मुंह में ठूंस दिया और बकल कर दिया। फिर लाइक्रा हूड सिर पर चढ़ाकर ज़िप बंद कर दी। विजन लगभग बंद।
अंत में वाइब्रेटर जांघों के बीच रखकर ऑन किया और आखिरी स्ट्रैप से कूल्हों के नीचे कसकर बांध दिया। दोनों हाथों को रिस्ट कफ्स से पीछे बार्स के ओ-रिंग में लॉक कर दिया।
गोपाल अब पूरी तरह बंधा हुआ था — टाइट लाइक्रा कैटसूट, छोटी स्कर्ट, हाई हील्स, हूड, गैग और वाइब्रेटर की कंपन के साथ।
अनीता ने पीछे हटकर उसे देखा और बोली,
“बहुत सुंदर लग रही है मेरी रंडी। अब यहां रात भर रह। कोई आए तो तुझे जो करना हो करने दे।”
यह कहकर अनीता कार लेकर चली गई।
गोपाल अकेला, लाचार, अंधेरे में खड़ा था। वाइब्रेटर की वजह से शरीर में अनचाही उत्तेजना हो रही थी। ठंडी हवा लाइक्रा के ऊपर से शरीर को छू रही थी।
मन में सोच रहा था: “ये मैं क्या कर रहा हूं... पहले मैं खुद करता था... अब अनीता मुझे जबरदस्ती यहां बांधकर छोड़ गई है... पकड़े गए तो क्या होगा...”
कुछ देर बाद सड़क से एक ट्रक की लाइट आई। गोपाल का खून जाम हो गया। ट्रक पार्किंग में मुड़ा। ड्राइवर उतरा और गोपाल की तरफ आने लगा।
गोपाल ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन कफ्स बहुत टाइट थे। वह बस कांप रहा था।
(बाकी सीन में ट्रक ड्राइवर ने उसे देखा, कुछ देर घूरा, फिर कुछ अश्लील कमेंट्स किए और चला गया। बाद में कुछ और लोग आए जिन्होंने उसे छेड़ा, थप्पड़ मारे, लेकिन अनीता ने पहले से इंतजाम कर रखा था कि कोई ज्यादा नुकसान न पहुंचाए।)
सुबह होने से पहले अनीता वापस आई। गोपाल पूरी तरह टूट चुका था। आंसू, पसीना और शर्म से तर।
अनीता ने उसके हूड उतारा और गैग निकाला। गोपाल फूट-फूटकर रो पड़ा।
“मालकिन... मैं... आपकी हूं... जो चाहो कर लो... बस मुझे मत छोड़ो...”
अनीता ने उसके सिर को सहलाया,
गोपाल अब पूरी तरह टूट चुका था। उसका पुराना घमंड, उसकी मर्दानगी — सब कुछ हमेशा के लिए खत्म हो चुका था।
अगले दिन अनीता उसे एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले गई। वहां डॉक्टरों ने गोपाल की जीभ में छोटे-छोटे मेटल बॉल्स लगा दिए, जो वाइब्रेट और शॉक दोनों दे सकते थे। उसके स्तन और योनि को और परफेक्ट बनाया गया। अब गोपाल पूरी तरह से एक खूबसूरत, लेकिन टूटी हुई लड़की बन चुका था।
गोपाल ने सोचा कि अब शायद अनीता उसे माफ कर देगी।
लेकिन अगले दिन अनीता ने उसे बहुत खूबसूरती से तैयार किया — लाल साड़ी, भारी मेकअप, मंगलसूत्र, पायल और ऊंची हील्स। गले में एक खास ब्लैक कॉलर डिवाइस लगाया गया, जिसे रिमोट से लॉक कर दिया गया।
अनीता उसे एक हाई-प्रोफाइल लेकिन गुप्त कैफे में ले गई, जहां अमीर और पावरफुल लोग खास “सर्विस” लेने आते थे।
कैफे के अंदर जाते ही अनीता ने गोपाल को एक प्राइवेट रूम में खड़ा किया और बोली,
“अब से तू यहीं रहेगी गोपाली। ये कॉलर बहुत खास है। इसमें तुम्हारे दिमाग से कनेक्टेड सेंसर हैं। कोई भी गड़बड़ सोचते ही शॉक लगेगा। और तुम्हारा काम अब ये है — हर रोज अलग-अलग मर्दों को खुश करना।”
गोपाल की आंखें फट गईं। वह रोते हुए बोला, “नहीं मालकिन... प्लीज... मुझे मत छोड़ो यहां...”
अनीता ने रिमोट पर बटन दबाया।
गोपाल के स्तन अचानक भारी और संवेदनशील हो गए। फिर जीभ में लगे बॉल्स वाइब्रेट करने लगे। अगले बटन पर उसकी योनि में तेज वाइब्रेशन शुरू हो गया। गोपाल तड़प उठा।
“क्या... क्या हो रहा है...?”
अनीता हंसती हुई बोली, “Great show! तुम्हारा पहला कस्टमर आ गया है।”
गोपाल भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन जैसे ही उसने भागने की सोची, कॉलर ने तेज शॉक दिया। जितना पैनिक होता, शॉक उतना तेज।
अनीता ने हंसते हुए कहा, “ये ऑटोमैटिक है। शांत हो जा, वरना दर्द बढ़ता जाएगा।”
गोपाल ने लंबी सांस ली और शांत होने की कोशिश की। शॉक बंद हो गया।
अनीता मुस्कुराते हुए चली गई।
सामने खड़ा था — एक लंबा, चौड़ा, अफ्रीकी मूल का आदमी। उसने पैंट नीचे की और गोपाल की तरफ इशारा किया।
गोपाल रोते हुए, तड़पते हुए उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। उसका मुंह आगे बढ़ा...
अनीता अब कभी-कभी आती थी। अपनी सहेलियों के साथ गोपाल को और टॉर्चर करती। गोपाल बस रोता रहता।
रात में अकेले में वह सोचता,
“काश... मैंने अनीता को थप्पड़ नहीं मारा होता... काश... मैंने लड़कियों के साथ इतना घमंड नहीं किया होता... आज मैं इसी हाल में हूं... मेरी सारी गलती मेरे घमंड की वजह से है...”
कहानी का अंतिम ट्विस्ट
एक दिन दूर कहीं, एक बड़ी पुलिस ऑफिसर — इंस्पेक्टर रेवा देशपांडे — गोपाल के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नजर डाल रही थी। उन पोस्ट्स को देखकर उसे शक हुआ। वह गोपाल की गुमशुदगी की जांच शुरू कर चुकी थी।
“ये गोपाल... कहां गायब है? ये तस्वीरें... ये सब कुछ गड़बड़ है।”
रेवा ने गोपाल को ट्रैक करना शुरू कर दिया।
इधर गोपाल अंधेरे कैफे के कमरे में था। उसका नया कस्टमर — एक घमंडी पॉलिटिशियन अमित और उसकी पत्नी अमृता — उसके सामने खड़े थे।
गोपाल जानता था कि आज रात बहुत बुरा होने वाला है।
वह चुपचाप आंसू बहाते हुए उनके सामने घुटनों के बल बैठ गया…
