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यह ब्लॉग पूरी तरह काल्पनिक है। किसी से समानता संयोग होगी। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयाँ ((जैसे स्तन वर्धक या हार्मोन परिवर्तन)न लें - यह जानलेवा हो सकता है।— अनीता (ब्लॉग एडमिन)

भाभी ने बनाया सलीम को सलमा... बुर्के में इंडिया गेट घुमाया, माँ ने भी कह दिया - अब तू घर की बहू है

📝 Story Preview:

फरीदा अपनी सास की बातें सुनकर चुपचाप रसोई में खड़ी थी। उसका मन जल रहा था। सलीम के लंबे, घने बालों की तारीफ करते हुए उसकी सास ने फिर वही जहर उगला था।

"देखो तो इसकी माँ, कितने सुंदर बाल हैं मेरे बेटे के। लड़कियों जैसे। और तुम्हारी बेटी जैसी कोई नहीं।"

फरीदा के हाथ मुट्ठी में भिंच गए। उसकी आँखों में आँसू नहीं, आग थी। सालों से ये ताने, ये अपमान, ये अकेलापन... सब कुछ सहती आई थी। उसका पति महीने में सिर्फ़ 3-4 दिन आता, वो भी सिर्फ़ शरीर की भूख मिटाने। प्यार नाम की कोई चीज़ नहीं थी। और सलीम? वो हमेशा बीच में आकर उसकी गलतियों पर उँगली उठाता।

लेकिन अब बस हो चुका था।

एक दिन सलीम की माँ को अपने मायके में शादी थी।

सलीम उसे स्टेशन छोड़ने गया। ट्रेन में बिठाकर जब घर लौटा तो दोपहर की तेज़ गर्मी में उसका पूरा शरीर पसीने से तर था।

"भाभी... पानी देना।" सलीम ने थककर कहा।

फरीदा चुपचाप गिलास में पानी लाई। सलीम ने एक साँस में पी लिया।

"चाय भी बना दो ना... बहुत प्यास लग रही है।"

फरीदा ने बिना कुछ बोले चाय बनाई। उसमें वो पाउडर मिला चुकी थी जो उसने पिछले हफ़्ते चुपके से मँगवाया था। स्वादहीन, लेकिन बहुत तेज़।

सलीम चाय पीकर सोफ़े पर बैठ गया। कुछ देर बाद उसने अपनी कनपटी पर हाथ रखा।

"भाभी... मुझे चक्कर सा आ रहा है। शायद गर्मी की वजह से..."

फरीदा खड़ी होकर उसे देखती रही। कोई जवाब नहीं दिया।

दस मिनट बाद सलीम का सिर झुक गया। वो एकदम बेहोश होकर सोफ़े पर गिर पड़ा।

फरीदा ने कुछ देर तक उसे देखा। फिर धीरे से उसके पास आई। उसने सलीम के लंबे बालों को उँगलियों में लपेटा और धीरे से खींचा।

"आज से... तुम मेरी जगह लोगे, सलीम।"


सलीम जब होश में आया तो उसका सिर भारी था। वो उठना चाहा लेकिन नहीं उठ पाया।

उसके दोनों हाथ पीछे की ओर बंधे थे। पैर भी रस्सी से बंधे हुए थे। वो फर्श पर लेटा था। उसके कपड़े उतारे जा चुके थे — सिर्फ़ अंडरवियर बचा था।

"क्या... क्या हो रहा है ये?" उसकी आवाज़ काँपी।

फरीदा कमरे में आई।

फरीदा कमरे में आई। उसने एक काला साड़ी पहनी हुई थी, बाल खुले हुए थे, और चेहरे पर ठंडी मुस्कान थी।

सलीम ने उसे देखते ही सिहर गया। उसके हाथ पीछे बंधे थे, पैर भी जकड़े हुए थे। वो फर्श पर लेटा था, सिर्फ अंडरवियर में।

"भाभी... ये क्या कर रही हो? मुझे क्यों बाँध रखा है? छोड़ दो प्लीज!" सलीम की आवाज़ काँप रही थी। डर उसकी आँखों में साफ दिख रहा था।

फरीदा धीरे से उसके पास बैठ गई। उसने सलीम के लंबे बालों को उँगलियों में फेरा और एक जोर से खींचा।

"कुछ नहीं सलीम... बस तुझे वो चीज़ दे रही हूँ जो तुझे बहुत पसंद है। लड़कियों जैसे बाल बढ़ाने का शौक है ना तुझे? खासकर मेरे सामने घमंड करने का। आज मैं तुझे मेरे से भी बेहतर लड़की बना दूँगी।"

सलीम की आँखें फैल गईं।

"क्या... क्या बक रही हो तुम? पागल हो गई हो क्या? मुझे खोलो!"

फरीदा ने पास रखे ट्रॉली से एक चमकदार चाकू निकाला। उसने धीरे से सलीम की जाँघ पर चाकू की नोक फेरी, फिर धीरे-धीरे ऊपर की तरफ ले जाती हुई उसके अंडरवियर के पास ले गई।

"देख... ये तेरा लिंग। मैं इसे काट कर फेंक दूँगी। फिर तुझे पूरा का पूरा लड़की बना दूँगी। हार्मोन्स, सिलिकॉन ब्रेस्ट, और वो सब जो तुझे हमेशा के लिए औरत बना दे।"

सलीम बुरी तरह तड़पने लगा। उसके शरीर में पसीना छूट गया। वो रस्सियों में जितना भी जोर लगा रहा था, उतना ही कसकर बंधन खिंच रहा था। फरीदा ने सच में बहुत टाइट बाँधा था।

"नहीं... नहीं भाभी! प्लीज! ऐसा मत करो! मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? माफ कर दो!" सलीम रोने लगा। आँसू उसकी आँखों से बहने लगे।

फरीदा ने चाकू की नोक को उसके लिंग के ठीक ऊपर हल्का सा दबाया। बस हल्का सा कट लगा। खून की एक पतली धार निकल आई।

"आआआह...!" सलीम चीख पड़ा। दर्द और डर दोनों ने उसे पागल कर दिया।

"प्लीज भाभी! मैं कुछ भी करूँगा! जो कहोगी वो करूँगा! बस ये मत काटो... प्लीज... मैं मर जाऊँगा...!" वो पूरी तरह गिड़गिड़ा रहा था, उसकी आवाज़ टूट रही थी।

फरीदा ने चाकू को थोड़ा और दबाया, फिर रुक गई। उसने सलीम की आँखों में देखा।

"ठीक है। मैं इसे नहीं काटूँगी... अभी के लिए। लेकिन इसके बदले में तुझे एक शर्त माननी पड़ेगी।"

सलीम तेजी से सिर हिलाया, आँसू बहते हुए बोला, "हाँ... हाँ... जो शर्त होगी वो मान लूँगा। प्लीज... बस इसे मत काटो। मैं तुम्हारी हर बात मानूँगा।"

फरीदा मुस्कुराई। उसने चाकू को हटाया लेकिन सलीम के लिंग के पास ही रख दिया, ताकि वो डरा रहे।

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