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फरीदा ने चाकू को हटाया लेकिन सलीम के लिंग के पास ही रख दिया, ताकि वो डरा रहे।
"अब रुक मत जाना... अच्छे से सुन," फरीदा ने कहा।
सलीम का दोनों हाथ पीछे की ओर मजबूती से बंधे हुए थे। दोनों पैर फैलाकर रस्सी से जकड़े गए थे। वो अब पूरी तरह नंगा था। उसका लिंग डर के बावजूद थोड़ा-थोड़ा सख्त होकर हिल रहा था।
फरीदा उसके बिल्कुल बगल में बैठी थी। उसके हाथ में चमकता चाकू था, जो सलीम के पेट और जाँघों पर धीरे-धीरे घूम रहा था। ठंडी धार त्वचा को छूते ही सलीम काँप जाता।
"अब आँखें बंद कर," फरीदा ने सख्ती से आदेश दिया।
सलीम ने डरते हुए आँखें बंद कर लीं। फरीदा ने एक काला मोटा ब्लाइंडफोल्ड निकाला और उसे उसकी आँखों पर कसकर लपेट दिया। पूरी दुनिया अंधेरी हो गई।
फरीदा उसके कान के पास मुँह ले गई और बहुत धीरे से फुसफुसाई, "आज से तू मेरा गुलाम है, सलीम। समझा? अब भाभी नहीं... मास्टर फरीदा। बोल... कौन हूँ मैं?"

सलीम की आवाज़ काँप रही थी, लेकिन कामुकता भी उसमें घुल गई थी।
"आप... मास्टर फरीदा हो..."
फरीदा मुस्कुराई। उसने चाकू की नोक से सलीम के दोनों निप्पल्स को हल्का-हल्का चीरा। सलीम का पूरा शरीर एकदम तन गया।
"अच्छा बेटा... अब सुन। आज तेरा लंड बहुत परेशान होने वाला है। मैं तुझे तब तक नहीं छोड़ूँगी जब तक तू रो न दे।"
फरीदा ने अपना हाथ नीचे ले जाकर सलीम के लिंग को जकड़ लिया। वो पहले से ही बहुत सख्त और गर्म था। उसने बेहद धीमी गति से स्ट्रोक शुरू किए — ऊपर से नीचे, फिर ऊपरी सिरे पर अँगूठा घुमाते हुए।
"उफ्फ... मास्टर..." सलीम के मुँह से सिसकारी निकल गई।
"चुप! सिर्फ़ फील कर," फरीदा ने सख्त आवाज़ में कहा और स्ट्रोक थोड़े तेज कर दिए।
जब भी सलीम का शरीर तनता और वो लगता कि वो झड़ने वाला है, फरीदा रुक जाती और सिर्फ उसके अंडकोष को हल्के से दबाती। फिर दोबारा शुरू करती।
चार-पाँच बार ऐसा edging किया। सलीम का लिंग अब लाल हो चुका था, नसें उभर आई थीं, टिप से लगातार प्रीकम टपक रहा था। वो हाँफ रहा था, रोने के कगार पर था।
"प्लीज मास्टर... बस कर दो... मैं झड़ना चाहता हूँ..." सलीम बेबसी में कराह रहा था।
फरीदा हँसी।
"अब अपनी औकात में रख ले।"
उसने पास से एक चमकदार ब्लैक मेटल चास्टी बेल्ट उठाया। पहले उसने सलीम के लिंग और अंडकोष को सावधानी से अंदर धकेला। सलीम तड़प रहा था। फिर बेल्ट को उसकी कमर और जाँघों के चारों ओर कसकर फिट किया।
क्लिक।
ताला बंद हो गया।
फरीदा ने चाबी निकालकर अपने गले में लटका ली। फिर सलीम के ब्लाइंडफोल्ड के ऊपर से उसके होंठों को धीरे से किस किया।
"अब ये लंड मेरा है। जब तक मैं न कहूँ, तू छूटेगा नहीं। समझा, मेरा छोटा गुलाम?"
सलीम हिलता हुआ, बेसब्री से बोला, "जी... मास्टर फरीदा..."
फरीदा ने चास्टी बेल्ट की जाली पर हल्का सा थपकी मारी और मुस्कुराई।
"तो अब रोने की तैयारी कर ले... क्योंकि आज की रात बहुत लंबी होने वाली है।"

फरीदा उठी और कमरे में घूमने लगी। सलीम अभी भी अंधेरे में, नंगा, बंधा हुआ और लिंग जकड़ा हुआ पड़ा था। हर साँस में उसे अपनी नई कैद महसूस हो रही थी।
कुछ देर बाद फरीदा वापस आई। अब उसके हाथ में कुछ और चीजें थीं — एक छोटा वाइब्रेटर, लुब्रिकेंट, और कुछ क्लॉथ्स।
उसने सलीम के ब्लाइंडफोल्ड को थोड़ा ढीला किया, लेकिन पूरी तरह नहीं हटाया।
"देख... कितना सुंदर लग रहा है तेरा नया रूप।"
फरीदा ने सलीम के लंबे बालों को सहलाया, फिर धीरे से उसके गाल पर थपकी दी।
"अब रात भर तुझे यही हालत में रहना है। लेकिन इससे पहले... तुझे थोड़ी और सजा मिलेगी।"
उसने वाइब्रेटर को लुब्रिकेट करके सलीम की जाँघों के बीच, चास्टी बेल्ट के ठीक पीछे वाले हिस्से पर रख दिया। कम वाइब्रेशन पर ऑन कर दिया।
सलीम का शरीर एकदम से झटका खा गया।
"आह... मास्टर... ये... ये क्या कर रही हो..."
"चुप। बस सह। ये तेरी पहली ट्रेनिंग है। सुबह तक तू पूरी तरह टूट जाएगा। और फिर मैं तुझे नया मेकअप, नया सूट, और नई चाल सिखाऊँगी।"
सलीम की आँखों से आँसू बहने लगे। दर्द, शर्म, डर और अनचाही उत्तेजना — सब कुछ एक साथ था।
फरीदा ने सलीम की जाँघों के बीच रखे वाइब्रेटर को थोड़ा और नीचे सरकाया। फिर उसने लुब्रिकेंट की बोतल उठाई और ठंडा, चिपचिपा लिक्विड सलीम की गांड पर और वाइब्रेटर पर अच्छे से लगा दिया।
सलीम का शरीर काँप रहा था।
"मास्टर... वहाँ मत... प्लीज..." उसकी आवाज़ में शर्म और डर दोनों थे।
फरीदा ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने एक उँगली से सलीम की गांड के छेद को हल्का सा फैलाया और धीरे-धीरे वाइब्रेटर को अंदर धकेलना शुरू किया।
"आह... आह...!" सलीम के मुँह से दर्द भरी सिसकारी निकली। उसका शरीर रस्सियों में तन गया। वाइब्रेटर धीरे-धीरे अंदर जा रहा था, उसकी अंदरूनी दीवारों को दबाते हुए।
जब पूरा वाइब्रेटर अंदर चला गया, फरीदा ने उसे थोड़ा और गहरा धकेला और फिर स्विच ऑन कर दिया।
बzzz...
मध्यम स्पीड का वाइब्रेशन शुरू हो गया।
सलीम की साँसें तेज हो गईं। उसका चास्टी बेल्ट में जकड़ा हुआ लिंग बेकार में ही फड़कने लगा। दबाव, उत्तेजना और असहायपन — तीनों एक साथ उसे तोड़ रहे थे।
फरीदा ने सलीम की आँखों पर लगा ब्लाइंडफोल्ड और भी नीचे खींचकर कस दिया। अब उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
"एंजॉय कर... मेरी सिसी सलीम," फरीदा ने बहुत मीठी लेकिन क्रूर आवाज़ में कहा। "जितना मन करे कराह, चीख, रो... आज कोई सुनने वाला नहीं है।"

सलीम ने बेबसी में सिर हिलाया। उसके मुँह से अनियंत्रित सिसकारियाँ निकल रही थीं।
फरीदा उठी। उसके पायल की आवाज़ कमरे में गूँजी। वो दरवाज़े की तरफ़ गई।
सलीम ने घबराकर पूछा, "मास्टर... कहाँ जा रही हो? प्लीज मत जाओ...!"
फरीदा रुकी। फिर मुस्कुराते हुए बोली,
"मैं यहीं हूँ तेरे सामने, सिसी। बस बैठी हूँ और तुझे देख रही हूँ। तू कितना सुंदर तड़प रहा है... कितना हेल्पलेस।"
लेकिन असल में वो धीरे-धीरे कमरे से बाहर निकल गई। दरवाज़ा हल्का सा बंद किया, लेकिन पूरी तरह नहीं। वो बाहर गलियारे में खड़ी होकर सलीम की कराह सुन रही थी।
सलीम को लगा वो अभी भी कमरे में ही है। वाइब्रेटर की तेज़ी बढ़ती-घटती जा रही थी। कभी तेज़, कभी धीमी। उसका लिंग चास्टी बेल्ट के अंदर बुरी तरह दब रहा था। दर्द और लालच दोनों बढ़ते जा रहे थे।
"मास्टर फरीदा... प्लीज... मुझे छुड़वा दो... मैं बहुत दर्द सह रहा हूँ..." सलीम फफक-फफक कर रोने लगा।
कमरे में सिर्फ़ उसकी सिसकारियाँ और वाइब्रेटर की हल्की buzzing आवाज़ गूँज रही थी।
लगभग बीस मिनट बाद फरीदा वापस अंदर आई। वो चुपचाप सलीम के पास आई और उसके लंबे बालों को सहलाने लगी।
"कैसा लग रहा है मेरी सिसी को? गांड में वाइब्रेटर... लंड ताले में... और आँखें बंद। कितना मजा आ रहा है ना?"
सलीम रोते हुए बोला, "बहुत... बहुत मुश्किल है मास्टर... प्लीज निकाल दो... मैं कुछ भी करूँगा..."
फरीदा ने उसके गाल पर हाथ फेरा और धीरे से कहा,
"अभी नहीं। अभी तो रात शुरू ही हुई है।
अब मैं तुझे एक नया काम सिखाऊँगी।"
उसने वाइब्रेटर की स्पीड और बढ़ा दी। फिर सलीम के मुंह में एक सॉफ्ट बॉल गैग ठूँस दिया।
रात भर सलीम को नींद नहीं आई।
वाइब्रेटर की स्पीड कभी तेज़ हो जाती, कभी धीमी पड़ जाती। कभी वो सिर्फ़ हल्का कंपन करता, तो कभी इतना तेज़ कि सलीम की पूरी कमर हिलने लगती। चास्टी केज की वजह से उसका लिंग पूरी तरह सिकुड़कर कसा हुआ था। कोई राहत नहीं मिल रही थी। मुंह में गैग होने की वजह से वो ठीक से चीख भी नहीं पा रहा था — सिर्फ़ गले से दबी हुई कराह निकल रही थी।
आँखों पर ब्लाइंडफोल्ड, हाथ पीछे बंधे, पैर फैले हुए, गांड में लगातार वाइब्रेटर और लंड ताले में — सलीम रात भर तड़पता रहा।
पता नहीं कब फरीदा ने वाइब्रेटर बंद किया। थकान के कारण सलीम को कुछ देर के लिए झपकी लग गई।
तभी उसे लगा उसका मोबाइल बज रहा है।
फरीदा ने फोन उठाया और शांत स्वर में बोली,
"हैलो... जी... सलीम वॉशरूम में है... हाँ, थोड़ी देर में कॉल करेगा... ठीक है।"
कुछ देर बाद फरीदा कमरे में आई। उसने सलीम की आँखों से ब्लाइंडफोल्ड हटा दिया।
सलीम की आँखें रोशनी से चौंधिया गईं। फरीदा सामने कुर्सी पर आराम से बैठी चाय पी रही थी। उसके बाल खुले हुए थे, वो एक हल्की सी नाइट सूट में थी।
सलीम का गला बुरी तरह सूख रहा था। होंठ फटे हुए थे। वो हाँफते हुए बोला,
"मास्टर... पानी... प्लीज... थोड़ा पानी दे दो..."
फरीदा ने चाय का घूँट लिया, आईना देखते हुए धीरे से मुस्कुराई और बोली,
"पानी तो मिलेगा... लेकिन एक शर्त पर। तू मेरे पैरों पर अपनी नाक रगड़ेगा। और अपनी खूबसूरत जीभ से मेरे पैरों को कुत्ते की तरह चाटेगा। अच्छे से।"
सलीम के चेहरे पर गुस्सा आ गया।
"मैं मर जाऊँगा... लेकिन ऐसा कुछ नहीं करूँगा!" उसने काँपती आवाज़ में कहा।
फरीदा ने शांत भाव से चाय रख दी।
"ठीक है। तो अपनी बात पर अड़ा रह। रोना मत बाद में।"
उसने मोबाइल उठाया और वाइब्रेटर को फुल स्पीड पर कर दिया।
BZZZZZZZZ...
सलीम का शरीर एकदम से तन गया। वाइब्रेटर अब पूरी तेज़ी से अंदर हिल रहा था।
फरीदा ने फिर एक छोटा रिमोट निकाला और बटन दबाया।
तुरंत सलीम के लिंग में एक तेज़ बिजली का झटका लगा।
"आआआह...!!"
सलीम चौंक गया। पहले उसे लगा धोखा हुआ है, लेकिन फिर झटकों की स्पीड बढ़ने लगी। चास्टी केज के अंदर उसके लिंग में हल्के-हल्के इलेक्ट्रिक शॉक लग रहे थे।
दर्द असहनीय था।
"नहीं... नहीं... मास्टर... आह... बस करो...!!"
सलीम पूरी तरह पागल हो गया। वो रस्सियों में जितना भी तड़पा, उतना ही दर्द बढ़ता गया। चीखने की कोशिश कर रहा था लेकिन गैग की वजह से सिर्फ़ दबी हुई आवाज़ निकल रही थी। उसका पूरा शरीर पसीने से तर था।
आखिरकार वो टूट गया।
"मैं... करूँगा... प्लीज... बंद कर दो...!"
फरीदा ने शॉक थोड़ा कम किया लेकिन वाइब्रेटर बंद नहीं किया।
सलीम ने बेबसी में खुद को घसीटते हुए फरीदा के पैरों तक पहुँचाया। उसके हाथ अभी भी पीछे बंधे थे, फिर भी वो किसी तरह आगे बढ़ा।
और फिर... उसने फरीदा के दोनों पैरों पर अपनी नाक रगड़नी शुरू कर दी।
"मैं... कुत्ता हूँ... मास्टर..." वो रोते हुए बोला और फिर अपनी जीभ निकालकर फरीदा के पैरों को चाटने लगा। कुत्ते की तरह — लम्बी-लम्बी चाट, हर उँगली को चूसते हुए।
फरीदा ज़ोर से हँस पड़ी।
"यही तो मैंने कहा था ना... बेकार में इतने झटके खाए तूने। देख... कितना आसान था। बस अपनी औकात याद रखनी थी।"
सलीम आँसू बहाते हुए लगातार उसके पैर चाटता रहा। फरीदा ने एक पैर उसके चेहरे पर रख दिया और दूसरे पैर से उसके बालों में उँगलियाँ फिराईं।
"अच्छा लड़का। अब चुपचाप चाटता रह। जब तक मैं संतुष्ट नहीं हो जाती, पानी नहीं मिलेगा।"
सलीम की आँखों से आँसू गिर रहे थे, लेकिन वो रुक नहीं रहा था। शॉक, वाइब्रेटर और शर्म — सब कुछ मिलकर उसे पूरी तरह तोड़ चुका था।
फरीदा ने सलीम को उसी हालत में तड़पते छोड़ दिया। वाइब्रेटर अभी भी धीमी स्पीड पर चल रहा था। उसने सलीम के गाल पर हल्की थपकी दी और मीठे स्वर में बोली,
"तड़पता रह... मेरी सिसी। मैं जरा तैयार होकर आती हूँ।"
कुछ देर बाद फरीदा कमरे में वापस आई।
सलीम ने उसे देखा तो उसकी साँस अटक गई। फरीदा आज एकदम हीरोइन लग रही थी। लाल रंग की साड़ी, जिसमें उसकी कमर और छाती खूब उभर रही थी। बाल खुले और घुंघराले, आँखों में काजल, होंठों पर गहरी लिपस्टिक। उसकी चाल में एक नई चमक थी। आज तक सलीम ने उसे इतना खुश और खूबसूरत कभी नहीं देखा था।
फरीदा उसके पास आई और मुस्कुराते हुए बोली,
"चल, अब मैं तेरे हाथ-पैर खोल रही हूँ। लेकिन याद रखना — अगर कोई चालाकी की, तो तुझे अंदाज़ा भी नहीं है कि तेरे साथ क्या होने वाला है। मैंने सब इंतजाम कर रखा है।"

सलीम थका हुआ था। रात भर सो नहीं पाया था। हाथ पीछे बंधे रहने से कंधे और कलाइयाँ सुन्न पड़ गई थीं। उसने चुपचाप सिर हिला दिया।
फरीदा ने रस्सियाँ खोलीं। सलीम के हाथ-पैर छूटते ही वो कराह उठा। फरीदा ने उसे सहारा देकर उठाया और बोली,
"जाकर नहा ले। जल्दी तैयार हो। लेकिन वाइब्रेटर और चास्टी केज दोनों वैसे ही रहेंगे।"
सलीम लड़खड़ाते हुए वॉशरूम गया।
आईने में खुद को देखकर उसका दिल बैठ गया। चेहरा थका हुआ, आँखों के नीचे काले घेरे। कमर पर ब्लैक मेटल चास्टी केज चमक रहा था। उसका लिंग पूरी तरह कैद था।
उसने मूतने की कोशिश की। खड़े होकर मूतने की आदत थी, लेकिन केज की वजह से बहुत मुश्किल हो रहा था। आखिरकार उसे बैठकर मूतना पड़ा। थोड़ा-बहुत निकला, लेकिन राहत नहीं मिली।
फिर गांड में वाइब्रेटर की वजह से हगने की कोशिश की। पेट में भारी दबाव था, लेकिन कुछ नहीं निकला। उसने वाइब्रेटर निकालने की बहुत कोशिश की — उँगली डाली, जोर लगाया — लेकिन फरीदा ने उसे इस तरह फिट किया था कि निकलना नामुमकिन था। पेट में गैस बन रही थी, दर्द बढ़ रहा था।
नहाकर वो बाहर आया। पुराने कपड़े पहन लिए।
फरीदा ने उसे रसोई में बिठाया। सामने गरमागरम पराठा, दही, चाय और नाश्ता रख दिया।
सलीम ने डरते हुए कहा,
"मास्टर... मेरा पेट बहुत दुख रहा है। मुझे हगना है... लेकिन नहीं हो पा रहा।"
फरीदा हँस पड़ी। उसने चाय का घूँट लिया और आराम से बोली,
"ये दर्द तुझे सहना पड़ेगा। कम से कम दो दिन तक। मैं तुझे खाना तो खिलाऊँगी, लेकिन तू सिर्फ़ मूत ही सकेगा। हग नहीं पाएगा। वाइब्रेटर और केज दोनों अंदर रहेंगे।"
सलीम की आत्मा रो गई। उसने घबराकर कहा,
"फरीदा... इससे तो मेरा पेट फट जाएगा। गैस बन रही है... बदबू आने लगेगी..."
फरीदा ने ठंडी मुस्कान के साथ जवाब दिया,
"यही तो मैं चाहती हूँ। तू हमेशा एक बदबूदार प्राणी बना रहे। देह और परफ्यूम लगाने का कोई फायदा नहीं होगा। तू गंदा, बदबूदार और अपमानित रहेगा — यही तेरी सजा है। अब खा ले। बिना शिकायत के।"
सलीम की आँखों में आँसू आ गए। पेट में तेज़ दर्द और गैस का दबाव था, फिर भी फरीदा के डर से उसने पराठा खाना शुरू कर दिया। हर निवाला गले के नीचे मुश्किल से उतर रहा था।
फरीदा ने उसे देखते हुए कहा,
"धीरे-धीरे खा। अच्छे से चबा। आज दोपहर तक तुझे मेरा पूरा मेकअप करके, साड़ी पहनाकर, चूड़ियाँ और बिंदिया लगाकर तैयार करूँगी। फिर तू घर के सारे काम करेगा — मेरी तरह। और हर काम शुरू करने से पहले मेरे पैर चाटेगा।"
सलीम चुपचाप खाता रहा। उसका पेट फूलता जा रहा था। बदबू का डर, शर्म और मजबूरी — सब कुछ मिलकर उसे अंदर ही अंदर तोड़ रहा था।
फरीदा ने उसके सिर पर हाथ फेरा और धीरे से बोली,
"रो मत। बस आदत डाल। दो दिन बाद जब तू हगेगा, तब भी मैं तेरे सामने खड़ी रहूँगी और देखूँगी। ताकि तुझे अपनी हालत का पूरा अहसास हो।"
खाने के बाद फरीदा उठी और मुस्कुराते हुए बोली,
"चल अब मेरे मायके चलते हैं। वहाँ मैं तेरी इज्जत को तार-तार करूँगी। जो लोग अपनी बेटी की जगह तेरी तारीफ करते नहीं थकते थे, आज वही तेरी नई सूरत देखेंगे।"
सलीम कुछ बोलना चाहता था, लेकिन फरीदा ने उसे एक तीखी नज़र दी। सलीम चुप हो गया।
फरीदा ने उसे अपनी बाइक पर पीछे बिठाया। पूरा रास्ता सलीम चुपचाप बैठा रहा। उसका पेट भारी था, अंदर वाइब्रेटर दबाव बना रहा था, और चास्टी केज में लिंग कसा हुआ था। हर उछाल पर दर्द बढ़ता जा रहा था।
मायके पहुँचते ही सलीम का भारी स्वागत हुआ। फरीदा की माँ, छोटी बहनें, चाची और अन्य रिश्तेदार सब बाहर निकल आए।
"अरे वाह! सलीम आ गया! कितना अच्छा लगा!"
मिठाई, नमकीन, कोल्ड ड्रिंक, बिस्किट — सब कुछ सामने रख दिया गया।
सलीम का पेट पहले से ही फटा जा रहा था। लेकिन फरीदा बार-बार उसे घूर रही थी। जैसे ही वो मना करने का इशारा करता, फरीदा अपना मोबाइल निकालकर कुछ दबाने का नाटक करती। सलीम डर के मारे सब कुछ खाता रहा — पराठा, मिठाई, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक... सब।
आखिर में जब सब कुछ खत्म हो गया, सलीम ने थके स्वर में कहा,
"मैं थोड़ा आराम करना चाहता हूँ..."
सबने प्यार से कहा, "हाँ बेटा, अंदर जाकर क़मर सीधी कर लो।"
सब लोग बैठे हुए थे। तभी सलीम के मोबाइल पर एक मैसेज आया।
"सबके सामने फरीदा से request कर कि वो तेरे बाल बना दे। सिर में दर्द हो रहा है।"
सलीम का चेहरा सफेद पड़ गया। लेकिन मजबूरी थी। उसने काँपती आवाज़ में कहा,
"फरीदा... मेरे सिर में बहुत दर्द हो रहा है। क्या तुम मेरे बाल बना दोगी... प्लीज?"
फरीदा की माँ और बहनें हैरान हो गईं, लेकिन मुस्कुरा दीं।
फरीदा मीठे स्वर में बोली, "हाँ बिल्कुल! आ जा।"
फरीदा की माँ, उसकी दो छोटी बहनें और चाची — सब सलीम के आस-पास बैठ गईं। फरीदा ने सलीम के लंबे बालों को खोल दिया। धीरे-धीरे ब्रश किया, बीच में माँग निकाली और दो सुंदर पिगटेल (चोटियाँ) बना दीं — बिल्कुल लड़कियों जैसी। अंत में दोनों चोटियों में सफेद रिबन बाँध दिए।

सलीम का चेहरा शर्म से लाल हो गया।
सब लड़कियाँ ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगीं।
"वाह सलीम! कितना प्यारा लग रहा है!"
"लड़की जैसा लग रहा है ना!"
"देखो, रिबन कितना सूट कर रहा है!"
सब उसे लड़की की नज़रों से देख रही थीं। कुछ डर के मारे चुप थीं, कुछ मन-ही-मन हँस रही थीं। लेकिन किसी को भी अंदाज़ा नहीं था कि ये सब फरीदा की चाल है। सबको लगा कि सलीम खुद चाहता है।
सलीम ने आँखें बंद करके सोने का नाटक कर लिया।
धीरे-धीरे सारी लड़कियाँ कमरे से बाहर चली गईं।
कुछ देर बाद अचानक वाइब्रेटर ऑन हो गया।
Bzzzz...
सलीम की नींद एकदम खुल गई। उसका शरीर झटके से तन गया। पेट में पहले से दबाव था, अब ये कंपन और भी तकलीफ दे रहा था।
तभी उसके मोबाइल पर नया मैसेज आया:
"अब फरीदा को आवाज़ लगाकर पानी माँग। आवाज़ में प्यार से बोलना — 'मास्टर फरीदा, मुझे पानी पिला दो प्लीज।'"
सलीम के हाथ काँप रहे थे। लेकिन उसने हिम्मत करके आवाज़ लगाई,
"फरीदा... प्लीज... मुझे पानी पिला दो..."
फरीदा बाहर से आई। कमरे में सिर्फ़ दोनों थे। उसने दरवाज़ा बंद कर लिया।
"क्या कहा? ठीक से बोल।"
सलीम की आँखों में आँसू थे। वाइब्रेटर की स्पीड धीरे-धीरे बढ़ रही थी। उसने काँपती आवाज़ में कहा,
"मास्टर फरीदा... मुझे पानी पिला दो... प्लीज..."
फरीदा ज़ोर से हँसी। उसने सलीम की एक चोटी खींची और बोली,
"बहुत अच्छा। अब तेरी असली ट्रेनिंग शुरू होती है। पानी तो मिलेगा... लेकिन पहले मेरे सामने घुटनों के बल बैठ। और फिर से कह — 'मास्टर, अपनी सिसी को पानी पिला दो।'"
सलीम का पेट फटने को था। शर्म और दर्द दोनों चरम पर थे। लेकिन मजबूरी में वो घुटनों के बल बैठ गया और बोला,
"मास्टर... अपनी सिसी को पानी पिला दो..."
फरीदा ने गिलास में पानी लिया, लेकिन सलीम के मुँह के पास ले जाकर रुक गई।
"पहले मेरे पैर चूस। फिर पानी मिलेगा।"
फरीदा ने पानी का गिलास सलीम को पिला दिया। सलीम ने अधूरी प्यास के साथ पानी पिया। फरीदा ने उसके बालों की एक चोटी सहलाते हुए धीरे से कहा,
"अब ध्यान से सुन। मैं कमरे से बाहर जा रही हूँ। कुछ देर बाद तू मुझे आवाज़ लगाना। मैं अपनी छोटी बहन के साथ अंदर आऊँगी। फिर तुझे ठीक वैसे ही बोलना है जैसा मैं बता रही हूँ। समझ गया?"
सलीम ने डरते हुए सिर हिला दिया।
फरीदा कमरे से बाहर चली गई। सलीम कुछ देर तक अकेला बैठा रहा। पेट में दर्द, गांड में हल्का वाइब्रेटर, और चास्टी केज — सब कुछ उसे परेशान कर रहा था। आखिरकार उसने हिम्मत करके आवाज़ लगाई,
"फरीदा...!"
कुछ ही देर बाद फरीदा अपनी छोटी बहन रुखसार के साथ अंदर आई। रुखसार १९-२० साल की थी, पतली-दुबली, सलीम जितनी ही हाइट की।
सलीम ने शर्माते हुए कहा,
"फरीदा... मुझे बहुत गर्मी लग रही है।"
फरीदा ने जैसे अनजान बनते हुए पूछा,
"तो नहा लो ना।"
सलीम ने पहले से तय लाइन बोली,
"मेरे पास कपड़े नहीं हैं..."
फरीदा हँसते हुए बोली,
"कोई बात नहीं, हम अरेंज कर देंगे।"
फरीदा ने रुखसार की तरफ देखा और बोली,
"रुखसार, तेरी पुरानी जींस और टी-शर्ट ला दे ना।"
रुखसार जा रही थी कि फरीदा ने तुरंत रोका,
"अरे रुक... ये देख, ये मेरी बहन है ना छोटी। इसका और तुम्हारा साइज़ लगभग एक समान है। मैं इसकी सलवार-कमीज़ लाती हूँ।"
फरीदा ने अलमारी से एक हल्के गुलाबी रंग की सूती सलवार-कमीज़ निकाली — जिसमें हल्के फूलों का प्रिंट था। साथ में दुपट्टा भी।
सलीम के चेहरे का रंग उड़ गया। उसने फुसफुसाकर कहा,
"फरीदा... ये क्या..."
फरीदा ने सख्त नज़र से देखा और बोली,
"और कोई ऑप्शन नहीं है। तेरे सारे कपड़े मैंने धोने डाल दिए हैं। अब यही पहन। वरना नंगे ही घूमना पड़ेगा।"
रुखसार ज़ोर से हँस पड़ी,
"भैया, आप लड़की के कपड़े पहनोगे? कितना मज़ा आएगा!"
सलीम मजबूरी में खड़ा हुआ। उसने बाथरूम में जाकर कपड़े बदले। सलवार-कमीज़ पहनते वक्त उसके हाथ काँप रहे थे। कमीज़ की आस्तीनें उसके पतले हाथों पर अच्छे से फिट हो गईं। सलवार की नाड़ी कसते वक्त उसका पेट और भी दर्द करने लगा।
जब वो बाहर आया तो फरीदा और रुखसार दोनों उसे घूर रही थीं।
फरीदा मुस्कुराई,
"वाह... बहुत अच्छा लग रहा है।"
उसने सलीम को पास बिठाया और उसके बाल फिर से खोल दिए। धीरे-धीरे ब्रश किया, दो सुंदर पिगटेल (चोटियाँ) बना दीं। दोनों चोटियों में फिर से सफेद रिबन बाँध दिए।

सलवार-कमीज़ में दो चोटियों के साथ सलीम अब बिल्कुल लड़की जैसा दिख रहा था। पतला शरीर, लंबे बाल, नाजुक चेहरा — सब कुछ मैच कर रहा था।
रुखसार ताली बजाते हुए बोली,
"अरे वाह दीदी! सलीम भैया... नहीं, सलीम बhabhi! कितनी प्यारी लग रही हो! सच में लड़की लग रही हो!"
फरीदा ने सलीम की एक चोटी खींचकर कहा,
"देखा? कितना अच्छा लग रहा है। अब तुझे इसी में रहना है। दुपट्टा भी ले ले।"
सलीम शर्म से सिर झुकाए बैठा रहा। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन बोलने की हिम्मत नहीं थी। पेट का दर्द बढ़ता जा रहा था, वाइब्रेटर हल्का-हल्का कंपन कर रहा था, और अब ये लड़की वाले कपड़े...
फरीदा ने उसके कान में धीरे से फुसफुसाया,
"अभी तो शुरुआत है मेरी सिसी। शाम तक सारी बहनें तुझे इसी रूप में देखेंगी। और तुझे उनके सामने चाय भी बनाकर देनी है
रात भर फरीदा और रुखसार हँसती रहीं। उनकी हँसी सलीम को साफ़-साफ़ सुनाई दे रही थी। हर हँसी उसके सीने में चुभ रही थी।
सलीम रुखसार पर कई दिनों से लाइन मार रहा था। उसकी मुस्कान देखकर सपने देखता था। और आज वही रुखसार उसे अपनी सलवार-कमीज़ में, दो चोटियों में सफेद रिबन बाँधे देखकर हँस रही थी। उसकी होने वाली गर्लफ्रेंड के कपड़ों में, उसी के घर में — सलीम की इज्जत फरीदा ने पूरी तरह तार-तार कर दी थी।
शर्म और गुस्सा दोनों से उसका चेहरा जल रहा था। लेकिन चास्टी केज और गांड में वाइब्रेटर बार-बार स्पीड बदल रहा था — कभी तेज़, कभी धीमा। वो चाहकर भी सो नहीं पा रहा था। करवट बदलते-बदलते रात कट गई।
सुबह जैसे-तैसे हुई। सलीम की आँख लगी ही थी कि अचानक एक चीख सुनकर उसकी नींद उड़ गई।
फरीदा की माँ चाय का ट्रे लेकर अंदर आई थीं। उन्होंने सलीम को सलवार-कमीज़ में, दो चोटियों में रिबन बाँधे, लेटे हुए देखा।
"अरे... ये... ये कौन...?"
उनके हाथ से ट्रे लगभग छूटते-छूटते बचा। चाय का कप हिल गया।
सलीम घबराकर उठ बैठा। उसकी चोटियाँ हिलीं। फरीदा की माँ ने पहले तो समझ ही नहीं पाया। फिर उनकी आँखें फैल गईं।
"सलीम...? बेटा... तू... ये क्या पहना है? ये... रुखसार की सलवार-कमीज़...?"
फरीदा और रुखसार भी पीछे-पीछे कमरे में दाखिल हो गईं। दोनों मुस्कुरा रही थीं।
फरीदा की माँ पहले तो स्तब्ध रह गईं, फिर उनके मुँह से निकला,
"अरे राम... ये क्या मज़ाक है? सलीम बेटा... तू लड़की बन गया है क्या?"
उनकी आवाज़ में हैरानी, हँसी और झटका सब मिला हुआ था। वो एकदम हँस पड़ीं, फिर खुद को रोकने की कोशिश की, फिर फिर से हँसी आने लगी।
"क्या हुआ माँ?" फरीदा ने innocent बनते हुए पूछा।
"देख तो... सलीम को... चोटियाँ... रिबन... और ये गुलाबी सलवार! अरे भगवान... मैं तो समझ ही नहीं पा रही। हँसी भी आ रही है, रोना भी आ रहा है। तूने ये क्या कर दिया बेटा?"
सलीम शर्म से ज़मीन में घुस जाना चाहता था। उसके गाल लाल हो गए। वो कुछ बोल नहीं पा रहा था।
रुखसार ने हँसते हुए कहा,
"माँ, भैया ने खुद कहा था कि उनके कपड़े धुल गए हैं। तो मैंने अपनी पुरानी सलवार-कमीज़ दे दी। और दीदी ने बाल भी बना दिए। कितनी प्यारी लग रही है ना?"
फरीदा की माँ अब खुलकर हँस रही थीं।
"अरे वाह! सच में लड़की लग रही है। चेहरा भी तो लड़कियों जैसा है। बाल भी इतने लंबे... सलीम बेटा, तू तो हमारी बहू लग रहा है!"
सलीम की आँखों में आँसू आ गए। गुस्सा, शर्म और मजबूरी — सब मिल गया। लेकिन वो चुप रहा। फरीदा ने उसे घूरा, तो वो भी मजबूरन मुस्कुराने की कोशिश करने लगा।
फरीदा की माँ ने चाय का कप आगे बढ़ाया और बोलीं,
"ले बेटा... चाय पी। लेकिन बताना ज़रूर — ये सब क्यों? कोई शर्त लगी है क्या? या बस मज़ाक कर रहे हो?"
फरीदा ने सलीम की तरफ देखकर कहा,
"हाँ सलीम... माँ को बता ना... तुझे लड़की वाले कपड़े पहनने में कितना मजा आ रहा है।"
सलीम ने सिर झुकाए हुए धीमी आवाज़ में कहा,
"जी... आंटी... बस... मज़ाक था..."
फरीदा की माँ फिर हँस पड़ीं।
"मज़ाक तो बहुत अच्छा है। आज पूरे दिन इसी में रहना बेटा। मैं सबको दिखाऊँगी। रुखसार की बहन आ गई है घर!"
फरीदा की माँ के कमरे से बाहर जाते ही सलीम फरीदा के पैरों में गिर पड़ा। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।
"मास्टर फरीदा... प्लीज... मुझे वॉशरूम जाना है। मेरा पेट फट जाएगा... बहुत दर्द हो रहा है... प्लीज..."
फरीदा ने ठंडी मुस्कान के साथ उसके बालों की चोटी खींची और बोली,
"ठीक है, निकाल दूँगी। लेकिन इसके लिए तुझे मेरी बहन रुखसार के पैरों पर नाक रगड़कर request करनी होगी। कहना कि वो तुझे चनिया-चोली में दुल्हन बनाकर इंडिया गेट ले जाए।"
सलीम सोच में पड़ गया। लेकिन पेट का दर्द असहनीय था। जब कमरे में कोई नहीं था, तो वो रुखसार के पैरों में गिर गया। उसने अपनी नाक उनके पैरों पर रगड़ी और गिड़गिड़ाते हुए बोला,
"रुखसार... प्लीज... मुझे चनिया-चोली में दुल्हन बनाकर इंडिया गेट ले चलो... मैं तुम्हारी जो भी बात मान लूँगा..."
रुखसार पहले तो हैरान हुई, फिर ज़ोर से हँस पड़ी।
"ठीक है... मैं ले चलूँगी।"
फरीदा एक कोने में खड़ी सब कुछ अपने फोन के कैमरे में कैद कर रही थी। वो मुस्कुरा रही थी।
जैसे ही रुखसार ने हाँ कह दी, फरीदा ने एक बटन दबाया। थोड़ी देर बाद वाइब्रेटर अपने आप स्लो हो गया और सलीम की गांड से बाहर आ गया।
सलीम तुरंत वॉशरूम भागा। एक घंटे तक वो अंदर रहा। पूरा पेट खाली होने के बाद जब बाहर आया तो थका हुआ था। उसने गंदे वाइब्रेटर को अपने हाथों से साफ किया।
फरीदा ने ऑर्डर दिया,
"अब इसे फिर से अपनी गांड में फिट कर।"
सलीम ने नाटक किया, "मास्टर... प्लीज... अभी मत..."
फरीदा ने तुरंत रिमोट से उसके लिंग में करंट ऑन कर दिया। सलीम चीखा और डर के मारे खुद ही वाइब्रेटर उठाकर अपनी गांड में धीरे-धीरे फिट कर लिया।
सलमा बनना शुरू
फरीदा और रुखसार ने मिलकर सलीम को पूरा दुल्हन लुक देना शुरू किया।
पहले उन्होंने उसे हल्के गुलाबी रंग की चनिया-चोली पहनाई। चोली बहुत टाइट थी, जिससे सिलिकॉन ब्रेस्ट अच्छे से उभर आए। चनिया घुटनों तक फूलदार थी। फिर पूरा मेकअप — फाउंडेशन, ब्लश, स्मोकी आईज, लंबी लिपस्टिक। भारी ज्वेलरी — कानों में झुमके, नाक में नथ, माथे पर मांग टीका, गले में हार।
जब सब हो गया तो सलीम आईने के सामने खड़ा था। वो खुद को पहचान नहीं पा रहा था। एक खूबसूरत दुल्हन — लंबी चोटियाँ, मेकअप, चनिया-चोली... बिल्कुल लड़की।

रुखसार ने उसकी आँखों पर काली पट्टी बाँध दी। फिर एक काला पूरा बुर्का पहना दिया। उसके अंदर नीकाब, हिजाब — सब कुछ। आँखों को छोड़कर पूरा चेहरा और शरीर ढक दिया गया। हाथों में दस्ताने, पैरों में हाई हील।
फरीदा ने सलीम के दोनों हाथ पीछे करके हैंडकफ लगा दिए। अब वो पूरी तरह कैद था। कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। गर्मी से पसीना छूट रहा था।
रुखसार ने उसे कैब में बिठाया। तीनों इंडिया गेट पहुँचे।
कैब से उतरते समय सलीम ने धीरे से पूछा,
"हम कहाँ हैं? मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा..."
फरीदा ने कहा, "इंडिया गेट है।"

जब उन्होंने सलीम की आँखों से पट्टी हटाई और बुर्का, हिजाब, नीकाब सब उतार दिया, तो सलीम घबरा गया। वो अब पूरी तरह चनिया-चोली में दुल्हन बन चुका था। लोग उसे घूर रहे थे। कुछ लड़के पास आकर फ्लर्ट करने लगे — "वाह सिस्टर, कितनी खूबसूरत हो!"
तीनों ने बहुत सारी फोटोज खींचीं। सलीम शर्म से मर रहा था, लेकिन कुछ बोल नहीं पा रहा था।
घर लौटते समय एक पेड़ के नीचे रुककर फरीदा ने फिर से सलीम को पूरा मुस्लिम कवरिंग पहना दिया — बुर्का, नीकाब, आँखों पर काली पट्टी। हाथ पीछे हैंडकफ, पैरों में हाई हील।

कैब में बैठ गए। गाड़ी चली।
जब गाड़ी रुकी, सलीम को लगा कि ये फरीदा का घर है। लेकिन जब आँखों की पट्टी हटाई गई तो सामने उसकी अपनी माँ खड़ी थीं।
सलीम की माँ ने उसे चनिया-चोली में, मेकअप किए, ज्वेलरी पहने देखा तो उनके होश उड़ गए।
"ये... ये क्या हालत है सलीम...? फरीदा... तूने मेरे बेटे के साथ ये क्या किया?!"
फरीदा ने मुस्कुराते हुए अपना फोन निकाला और रुखसार के पैरों में गिड़गिड़ाते हुए सलीम की वीडियो दिखा दी।
"आंटी, देखिए... आपका बेटा खुद माँग रहा था कि उसे दुल्हन बनाकर घुमाया जाए।"
रुखसार ने भी वही लाइन बोली जो वीडियो में थी, "हाँ आंटी... सलीम भैया ने खुद कहा था..."
सलीम की माँ स्तब्ध रह गईं। वो कुछ बोल नहीं पाईं।
बेचारा सलीम कुछ भी नहीं बोल पाया। उसने मुँह छुपाया, कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया और फफक-फफक कर रोने लगा।