📝 Story Preview:
शीतल… और उसके साथ वो छह modern, बोल्ड, लंबे बालों वाली दिल्ली वाली औरतें —
शिवानी देशमुख (पॉनीटेल), नंदिनी छोटमल (खुले बाल), अंजलि राउत (बड़ा हेयर बन), रीना आमभोरे (लंबी चोटी), आश्विनी वानखेड़े (पॉनीटेल), प्रतिक्षा डोंगरे (खुले बाल)।
सबकी साड़ियाँ, लेहेंगे, बैकलेस ब्लाउज, शाइनी सिल्क — सब तैयार।
तभी मुख्य दरवाजा खुला।
शीतल की हाई हील्स की आवाज आई… और उसके साथ छह और जोड़ी जूतों की खट-खट।
“अरे वाह… सुनो तो, मेरी छोटी सी स्लेव गर्ल कितनी मजे से कराह रही है,” शीतल ने हँसते हुए कहा।
मैंने आँखें उठाईं। आँसू भरी आँखों से उन सातों को देखा।
शीतल के साथ थीं —
शिवानी देशमुख (टाइट पॉनीटेल, ब्लैक मरमेड साड़ी, कमर नंगी)
नंदिनी छोटमल (खुले लहराते बाल, रेड हल्टर नेक अनारकली)
अंजलि राउत (बड़ा-सा हेयर बन, डीप बैकलेस ब्लैक ब्लाउज के साथ लेहेंगा)
रीना आमभोरे (कमर के नीचे तक लंबी चोटी, गोल्डन शाइनी सिल्क साड़ी)
आश्विनी वानखेड़े (पॉनीटेल, बलून स्लीव ब्लू कुर्ता-लेहेंगा)
प्रतिक्षा डोंगरे (खुले बाल, पिंक लेस मरमेड लेहेंगा)
सबकी बालें बहुत लंबी और घनी थीं… लेकिन मेरी चोटी उन सबसे लंबी थी।
शीतल मेरे चारों तरफ घूमी। उसने मेरी गांड को सहलाया, फिर निप्पल्स को लेस के ऊपर से जोर से ट्विस्ट किया। मैं “म्म्म्मह्ह्ह!!” करके चीखा।
एक-एक करके सब लड़कियाँ मेरे पास आईं। रीना ने मेरी लंबी चोटी पकड़कर खींची। “वाह गोपिका… तेरी चोटी तो हमारी सबसे लंबी है।
नंदिनी ने मेरी चिकनी टाँगों पर हाथ फेरा। अंजलि ने प्लग वाले हिस्से को बाहर से दबाया — “अभी भी अंदर है ना?”
शीतल कुछ देर मुझे ऐसे ही लटकता देखती रही, फिर बिना कुछ बोले कमरे से बाहर चली गई। कुछ मिनट बाद वो एक बड़ा-सा ब्लैक बैग लेकर वापस आई।
“अब समय आ गया है,” उसने मुस्कुराते हुए कहा। “आज रात हम गोपिका को पूरी तरह तोड़कर रख देंगे।”
बैग खुला।
अंदर से निकले — चमड़े के और भी कफ्स, चेन, कोड़े, निप्पल क्लिप्स, वाइब्रेटर, रस्सियाँ, मोम की मोमबत्तियाँ, और एक बहुत मोटा डील्डो।
मेरी आँखें फट गईं।
मैं लटका हुआ था… पूरी तरह helpless। दर्द पहले से ही बहुत था, लेकिन अब असली torture शुरू होने वाला था।
शीतल ने मेरे गैग को हल्का ढीला किया (बस बोलने लायक) और कान में फुसफुसाया, “अब चीखो जितना मन करे गोपिका… आज कोई रुकने वाला नहीं है।”
शीतल ने बैग में हाथ डाला और एक छोटी-सी मोटी रस्सी निकाली। उसने मेरी एंकल कफ्स के ऊपर से रस्सी लूप की और फर्श में लगा हुआ एक हुक (जो मैंने पहले कभी नहीं देखा था) से बाँध दिया। फिर उसने रस्सी को खींचा… बहुत जोर से खींचा।
“आआआह्ह्ह्ह!!! म्म्म्मह्ह्ह!!”
मेरी कलाइयाँ और कंधे पहले से भी ज्यादा खिंच गए। अब मैं पूरी तरह तना हुआ लटक रहा था — हाथ ऊपर, टाँगें नीचे खींची हुईं। कंधे जल रहे थे जैसे कोई आग लग गई हो। पसीना मेरी चिकनी, स्मूद छाती पर बह रहा था। गांड में प्लग और भी गहरा दब गया था।
शीतल मेरे सामने आई और मेरी आँखों में देखकर मुस्कुराई।
“ये इसलिए ताकि तू ज्यादा हिले नहीं जबकि मैं तुझे यातना दूँ।”
वो मेरे चारों तरफ घूमी। फिर रुककर बोली,
“अब सुन ले गोपिका… आज से सब कुछ बदल गया है।
तुम बहुत दिनों से मेरे गुलाम हो, लेकिन फिर भी तुम्हें कंट्रोल था। ‘बस कर दो’, ‘बहुत हो गया’ — ये सब बोलकर तुम मुझे रोक देते थे। लेकिन मुझे रोकना नहीं था। मुझे तुम्हें और ज्यादा दर्द देना था। तुम्हारे आँसू देखने थे, तुम्हारी चीखें सुननी थीं।
आज से तुम्हारा कोई कंट्रोल नहीं रहा।
मैं जो चाहूँगी, वो करूँगी। तुम जितना भी रोओ, चीखो, भीख माँगो — मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। गैग इसी लिए है… ताकि तुम्हारी चीखें सिर्फ मुझे और मेरी सहेलियों को मजा दें।”
मेरी आँखें फट गईं।
ये बहुत ज्यादा था। मैंने जो सपने देखे थे, उससे कहीं ज्यादा खतरनाक। मैंने अपने बंधनों में जोर-जोर से छटपटाना शुरू कर दिया। कलाइयाँ खींचीं, शरीर हिलाया, लेकिन रस्सी और हुक ने मुझे बिल्कुल immovable बना रखा था।
“म्म्म्मह्ह्ह!!! म्म्म्मह्ह्ह!!!” गैग के अंदर से मेरी चीख निकल रही थी।
शीतल जोर से हँसी। उसके पीछे वो छह लड़कियाँ भी हँस रही थीं।
रीना ने अपनी लंबी चोटी घुमाते हुए कहा, “देखो… गोपिका डर गई है।”
नंदिनी (खुले बाल) मेरे पास आई और मेरे निप्पल्स को लेस के ऊपर से चुटकी ली, “अभी तो शुरुआत है रे।”
अंजलि (बड़ा हेयर बन) ने मेरी गांड पर थप्पड़ मारा, “प्लग अभी भी अंदर है… अच्छा।”
शिवानी, आश्विनी और प्रतिक्षा भी मेरे चारों तरफ घूम रही थीं — मेरी लंबी चोटी को सहला रही थीं, मेरी चिकनी टाँगों को छू रही थीं।
शीतल ने बैग से एक लंबा, चमड़े का कोड़ा निकाला। उसने उसे अपने हाथ पर तानकर चटकाया।
“तो गोपिका… तैयार हो?
आज रात हम तुम्हें पूरी तरह तोड़ देंगे।
तेरी वो खूबसूरत लंबी चोटी, तेरे निप्पल्स, तेरी गांड — सब हमारा है।”
मैं लटका हुआ था… आँखों से आँसू बह रहे थे, शरीर दर्द से काँप रहा था, लेकिन मेरा लंड पैंटी के अंदर सख्त होकर टपक रहा था।
अब कोई वापसी नहीं थी।
“जितना मन करे छटपटा ले गोपिका…” शीतल ने ठंडे स्वर में कहा, “तेरा कोई बचाव नहीं है आज।”
उसने बैग में हाथ डाला और एक लंबी, पतली बेंत निकाली — रत्तन की कैन, जो बहुत लचीली थी। उसने उसे दोनों हाथों से मोड़कर टेस्ट किया। “चटाक” की आवाज हुई। मेरी आँखें उस बेंत पर जमी रह गईं। डर से मेरा पूरा शरीर सिहर उठा।
मैंने छटपटाना बंद कर दिया। शरीर ढीला पड़ गया। बस आँखें उस बेंत को फॉलो कर रही थीं।
शीतल मेरे पीछे चली गई। मैंने आँखें कसकर बंद कर लीं। मन में बार-बार सोच रहा था — ये सपना है… बस बुरा सपना है… कृपया…
“फूँ…” हवा में बेंत की सनसनाती आवाज आई।
“चट्टााााक्क्क!!!”
आग लग गई मेरी गांड पर।
एक तेज, जलता हुआ लकीर मेरी चिकनी, स्मूद गांड पर उभर आई। दर्द इतना तीव्र था कि मेरी आँखें फट गईं। गैग के अंदर से मेरी चीख फट पड़ी —
“MMMMMMMMMHHHHHHHHHHHH!!!!!!”
मेरा पूरा शरीर झटके से काँप उठा। कलाइयाँ, कंधे, कमर — सब जल रहे थे। प्लग अंदर और भी जोर से दब गया। आँसू मेरी आँखों से बहने लगे। लार गैग से टपक रही थी। मेरी लंबी चोटी पीठ पर पसीने से चिपक गई थी।
शीतल जोर-जोर से हँस रही थी।
“वाह! शुक्र है कि गैग लगा रखा है गोपिका। वरना रोहिणी के पूरे सेक्टर-14 तक तेरी चीख सुनाई देती। पड़ोस वाले सोचते कि किसी की हत्या हो रही है।”
रीना (अपनी लंबी चोटी घुमाते हुए) हँसते हुए बोली, “एक ही मार में इतनी चीख? अभी तो शुरुआत है रे।”
नंदिनी (खुले बाल) मेरे सामने आई, मेरे निप्पल्स को लेस के ऊपर से मरोड़ा और बोली, “देखो… तेरी गांड पर कितना सुंदर लाल निशान बन गया है।”
अंजलि ने बेंत को हाथ में लिया और दूसरा वार करने की तैयारी की। शिवानी, आश्विनी और प्रतिक्षा भी मेरे चारों तरफ खड़ी थीं — उनकी आँखों में भूख थी।
शीतल ने मेरी लंबी चोटी पकड़कर खींची, मेरे कान के पास मुँह लगाकर फुसफुसाया,
“रो… चीख… भीख माँग… जितना मन करे।
आज रात हम तुझे वो दर्द देंगे जो तूने सपने में भी नहीं सोचा होगा।
तेरी वो खूबसूरत लंबी चोटी, तेरी चिकनी गांड, तेरे निप्पल्स — सब हमारा है।”
मैं लटका हुआ था… आँसू बह रहे थे, गांड जल रही थी, कंधे फट रहे थे, लेकिन मेरी पैंटी पूरी तरह भीग चुकी थी।
दर्द असहनीय था…
फिर भी मैं और ज्यादा चाह रहा था।
शीतल ने बेंत को फिर ऊपर उठाया। इस बार उसका हाथ और भी ऊँचा गया।
“फूँ… चट्टााााक्क्क!!!”
दूसरा वार पहले से कहीं ज्यादा जोरदार था। आग की लपट मेरी गांड पर फैल गई।
“MMMMMMMMHHHHHHHHH!!!!!!”
गैग के अंदर से मेरी चीख फट पड़ी। मेरा पूरा शरीर झटके से उछला, लेकिन रस्सी और हुक ने मुझे बिल्कुल अटका रखा था।
फिर रुकना ही नहीं था।
चटाक! चटाक! चटाक! चटाक!
एक के बाद एक… बार-बार… बेंत मेरी चिकनी, स्मूद गांड पर पड़ रही थी। कभी दाहिनी साइड, कभी बाईं, कभी बीच में। हर वार के साथ नया लाल-लाल निशान उभर रहा था। दर्द अब आग बन चुका था। मेरी आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे। लार गैग से टपक-टपक कर मेरी छाती पर गिर रही थी।
मैं नहीं जानता वो कितनी देर मारती रही — शायद ४०-५० बार। मेरे दिमाग में सिर्फ दर्द था। गांड पर जलन, कंधों में फटने जैसा दर्द, कलाइयों में रस्सी काट रही थी। मेरी लंबी चोटी पसीने से भीगकर पीठ से चिपक गई थी।
जब आखिरकार वो रुकी, तो मेरा पूरा शरीर सिसकियों से काँप रहा था। मैं रो रहा था… बिना रुके। आँसू मेरे गालों पर बह रहे थे, मेकअप से पहले ही मेरे चेहरे को गीला कर चुके थे।
शीतल हाँफते हुए मेरे सामने आई। उसके चेहरे पर एक भयानक, क्रूर मुस्कान थी — वो मुस्कान जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। उसकी आँखों में शक्ति और भूख थी।
रीना ने अपनी लंबी चोटी पीछे करके कहा, “वाह शीतल… तेरी गोपिका तो अच्छे से रो रही है। देखो आँसू कितने सुंदर लग रहे हैं।”
नंदिनी (खुले बाल) मेरे पास आई, मेरी भीगी हुई चोटी को सहलाते हुए बोली, “अभी तो सिर्फ गांड गर्म हुई है… आगे और बहुत कुछ बाकी है।”
अंजलि (बड़ा हेयर बन) ने मेरी लाल-लाल गांड को हाथ से दबाया। “इतना सुंदर लाल हो गया है… जैसे टमाटर।”
मैं गैग के अंदर से भीख माँगने की कोशिश कर रहा था —
“प्लीज शीतल… बस… बहुत हो गया… मmmmmmhh… प्लीज…”
लेकिन गैग की वजह से सिर्फ “म्म्म… म्म्मह्ह्ह… म्म्म्म…” जैसी दबी हुई सिसकारियाँ निकल रही थीं।
शीतल मेरे सामने आई। उसने मेरे गाल पर हाथ रखा, आँसू पोंछे और बहुत प्यार से, लेकिन ठंडे स्वर में बोली,
“रो ले गोपिका… जितना रोना है रो ले।
ये तेरी नई जिंदगी है।
आज रात हम तुझे वो सब देंगे जो तूने कभी सपने में भी नहीं सोचा।
अब तू हमारी प्रॉपर्टी है… पूरी तरह।”
उसने मेरी लंबी चोटी को मुट्ठी में भरकर जोर से खींचा। दर्द की एक और तेज लहर गई।
मेरी गांड अब जल रही थी। हर सांस लेने में भी दर्द हो रहा था। प्लग अंदर दब रहा था। कंधे फटने वाले थे।
लेकिन सबसे डरावनी बात —
शीतल की वो नई, क्रूर मुस्कान थी… और छहों लड़कियों की भूखी नजरें।
शीतल ने मेरे आँसू भरे चेहरे को लंबे समय तक घूरा। उसकी आँखों में एक अजीब सी भूख थी। फिर अचानक उसने अपना हाथ अपनी पैंट के अंदर डाल दिया।
मैं लटका हुआ उसे देख रहा था। उसकी उँगलियाँ तेजी से हिल रही थीं। उसकी साँसें भारी हो गईं। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।
“आह्ह्ह… हाँ…” वो कराह रही थी।
जैसे ही वो चरम पर पहुँचने वाली थी, उसने अपना दूसरा हाथ बढ़ाया और मेरे दाहिने निप्पल को लेस के ऊपर से पकड़ लिया। फिर जितनी ताकत थी, उतना जोर से मरोड़ दिया।
“MMMMMMMMMHHHHHHHHHHHH!!!!!!”
मेरी चीख गैग के अंदर फट पड़ी। निप्पल पर तेज, जलता हुआ दर्द फैल गया। मेरी आँखें फट गईं, शरीर काँप उठा।
और उसी पल शीतल भी चीख पड़ी — लेकिन ये दर्द की नहीं, खुशी की चीख थी।
“आआआह्ह्ह्ह… हाँ… गोपिका…!!”
वो जोर-जोर से काँप रही थी। उसका ऑर्गेज्म बहुत तेज था। उसकी टाँगें थरथरा रही थीं। उसने मेरे निप्पल को तब तक नहीं छोड़ा जब तक उसका पूरा शरीर शांत नहीं हो गया।
एक मिनट तक वो हाँफती रही, मेरी आँखों में देखती रही। फिर उसने बैग से एक डिजिटल कैमरा निकाला।
“ये फोटोज इंटरनेट पर डालूँगी,” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “ताकि पूरा दुनिया देख सके कि मेरी गोपिका अब क्या बन गई है।”
क्लिक… क्लिक… क्लिक…
उसने मेरे चेहरे के कई फोटो खींचे — आँसू भरे गाल, गैग में फटा मुँह, “GOPIKA” वाला कॉलर, लंबी चोटी, लटकता हुआ शरीर।
फिर वो मेरे पीछे गई। मेरी केमिज को ऊपर उठाया, मेरी लाल-लाल, बेंत से मारी हुई गांड को पूरी तरह एक्सपोज कर दिया।
क्लिक… क्लिक… क्लिक…
“बहुत सुंदर… लाल निशान बहुत अच्छे आए हैं,” वो बोली।
रीना हँसते हुए बोली, “ये फोटोज वायरल हो जाएँगे। ‘दिल्ली की गोपिका स्लेव’।”
नंदिनी (खुले बाल) ने मेरे निप्पल को फिर से चुटकी ली, “देखो… अभी भी खड़ा है।”
अंजलि, शिवानी, आश्विनी और प्रतिक्षा सब मेरे चारों तरफ खड़ी थीं। उनकी आँखों में वही क्रूर चमक थी।
मैं लटका हुआ रो रहा था। मेरी गांड आग की तरह जल रही थी। निप्पल सूजकर लाल हो गया था। कंधे फट रहे थे। लेकिन सबसे ज्यादा डर इस बात का था कि अब मेरी फोटोज इंटरनेट पर जा रही हैं… और कोई रोक नहीं सकता।
शीतल ने कैमरा नीचे रखा और मेरे बालों को खींचकर मेरे कान में फुसफुसाया,
“अब असली मज़ा शुरू होता है गोपिका…
तुम्हें साड़ी पहनाएँगे, मेकअप करेंगे, और फिर…
जो बाकी है, वो देखकर तुम और भी रोओगे।”
मेरी सांस रुक गई।
“बिल्कुल खूबसूरत…” शीतल ने साँस लेते हुए कहा। उसकी आवाज में संतोष था।
उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और मेरी लाल-लाल, सूजी हुई गांड को धीरे से सहलाया।
“आआआह्ह्ह्ह!!! म्म्म्मह्ह्ह्ह!!!”
दर्द फिर से भड़क उठा। जैसे कोई आग पर तेल डाल दिया हो। मेरी आँखों से नए आँसू बह निकले। मैं सिसक-सिसक कर रो रहा था।
“देखो… तुम्हारी त्वचा कितनी अच्छे से वेल्ट्स बना रही है,” शीतल बोली। “इतनी नाजुक, इतनी चिकनी… और इतनी आसानी से निशान पड़ जाते हैं।”
रीना अपनी लंबी चोटी घुमाते हुए जोर से हँसी, “शीतल, तेरी गोपिका तो परफेक्ट निकली है।”
नंदिनी (खुले बाल) मेरे पास आई और मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए बोली, “अभी तो पीठ बाकी है… बहुत कुछ बाकी है।”
शीतल बैग की तरफ गई और इस बार एक भयानक चाबुक निकाला। ये कोई साधारण कोड़ा नहीं था। दो फीट लंबा, मोटी braided लेदर स्ट्रिप्स वाला, जिसके सिरे पर एक गाँठ थी और उस गाँठ से चार-पाँच पतली चमड़े की लटें लटक रही थीं। साफ दिख रहा था — ये सिर्फ और सिर्फ दर्द देने के लिए बनाया गया था।
बिना एक शब्द बोले वो मेरे पीछे चली गई।
मैं काँप रहा था।
“फटाक्क्क!!!”
पहला वार मेरी पीठ पर पड़ा।
“MMMMMMMMHHHHHHHHH!!!!!!”
दर्द की बिजली मेरी रीढ़ से लेकर कंधों तक दौड़ गई। फिर दूसरा, तीसरा… वो रुक ही नहीं रही थी।
फटाक! फटाक! फटाक! फटाक!
चाबुक मेरी पीठ पर, जाँघों पर, कमर पर, कंधों पर… हर जगह पड़ रहा था। हर वार के साथ नया जलता हुआ निशान उभर रहा था। मेरी लंबी चोटी बार-बार चाबुक की लपेट में आ जाती और खिंच जाती। मैं चीखता रहा, रोता रहा, शरीर हिलाता रहा… लेकिन कोई फायदा नहीं।
समय का पता नहीं चला। शायद १० मिनट… शायद २०। बस दर्द और चीखें।
फिर शीतल रुकी। वो हाँफ रही थी। उसने मेरी गांड को देखा और बोली, “लगता है अभी भी तेरी गांड काफी नहीं जली।”
और फिर वो वापस मेरी गांड पर उतर आई।
फटाक! फटाक! फटाक!
अब सिर्फ गांड पर… बार-बार… बहुत जोर से। हर वार के साथ मेरी चीख और तेज होती जा रही थी। प्लग अंदर दब रहा था, पुराने बेंत के निशानों पर नया दर्द जुड़ रहा था। मेरी टाँगें काँप रही थीं। पसीना और आँसू मिलकर मेरे पूरे शरीर को भीगा रहे थे।
आखिरकार जब वो रुकी, तो मेरी पीठ, जाँघें और गांड — हर जगह लाल-लाल, सूजी हुई धारियाँ पड़ चुकी थीं। मैं सिसकियों से काँप रहा था। गैग से लार टपक रही थी। मेरी लंबी चोटी पूरी तरह भीगकर पीठ से चिपक गई थी।
शीतल मेरे सामने आई। उसके चेहरे पर वही क्रूर, संतुष्ट मुस्कान थी। उसने मेरे गाल से आँसू पोंछे और बोली,
“बहुत अच्छी गोपिका… बहुत सुंदर रो रही है।
मैं लटका हुआ था… दर्द से तड़प रहा था… लेकिन अंदर से जानता था —
अब कोई रुकावट नहीं।
दर्द… असहनीय था।
मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतना दर्द हो सकता है। हर चाबुक के वार के साथ मेरी चीख लंबी और ज्यादा बौखलाई हुई होती जा रही थी।
“MMMMMMMMMHHHHHHHH!!!!!!”
“आआआह्ह्ह्ह… म्म्म्मह्ह्ह्ह!!!”
मैं अपने बंधनों में जितना हो सके शरीर को आगे की तरफ झुकाने की कोशिश कर रहा था, ताकि चाबुक मेरी पीठ और गांड पर कम पड़े। लेकिन रस्सियाँ मुझे बिल्कुल immobile बना रखी थीं। बस हल्का-हल्का झटका दे पा रहा था।
ये देखकर शीतल और ज्यादा उत्तेजित हो गई। उसकी साँसें तेज हो गईं और वो चाबुक और तेजी से चलाने लगी।
फटाक! फटाक! फटाक! फटाक!
अब वार और भी तेज और बेरहम हो गए थे। मेरी पीठ, कमर, जाँघें और गांड — हर जगह पर आग लगी हुई थी। मेरी लंबी चोटी बार-बार चाबुक की लपेट में आकर खिंच रही थी, जैसे कोई और सजा मिल रही हो। आँसू अब रुक ही नहीं रहे थे। गैग से लार की धार बह रही थी। मेरी स्मूद, चिकनी त्वचा पर लाल-लाल, सूजी हुई धारियाँ बन चुकी थीं।
आखिरकार शीतल रुक गई।
मैं हाँफते हुए लटक रहा था। सीने में आग सी जल रही थी। दर्द अब बिल्कुल नहीं कम हो रहा था — हर पुराना वार ताजा-ताजा महसूस हो रहा था।
शीतल मेरे कान के पास आई। उसकी गर्म साँस मेरे गाल को छू रही थी। वो फुसफुसाई,
“ओह… कितना मजा आया गोपिका।
तुम्हारी चीखें… तुम्हारा रोना… सब परफेक्ट था।
लेकिन अभी बहुत कुछ बाकी है।”
फिर उसने दोनों हाथ पीछे ले जाकर मेरी सूजी हुई, जलती हुई गांड को बहुत धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया।
“आह्ह्ह… उफ्फ्फ… म्म्म्म!!”
सहलाते वक्त भी दर्द बढ़ रहा था। हर उँगली के स्पर्श से पुराने निशान फिर से जल उठते थे। लेकिन उसकी उँगलियाँ इतनी नरम थीं कि दर्द के साथ एक अजीब सी उत्तेजना भी हो रही थी।
“लेकिन सबसे पहले…” शीतल ने मेरे कान में कहा, “मुझे ये चेक करना है कि मेरा प्लग अभी भी अंदर है या नहीं।”
उसने मेरी केमिज को पूरी तरह ऊपर किया। फिर अपनी उँगलियों से मेरी गांड की दरार को छुआ। प्लग का रिंग बाहर निकला हुआ था। उसने रिंग को हल्का-हल्का खींचा।
“आआआह्ह्ह्ह!!!!”
प्लग अंदर-बाहर हिलने लगा। दर्द और उत्तेजना दोनों एक साथ। मेरी टाँगें काँपने लगीं।
पीछे से रीना हँसी, “देखो… प्लग अभी भी अच्छे से अंदर है।”
नंदिनी (खुले बाल) बोली, “अब इसे निकालकर कुछ बड़ा डालेंगे।”
शीतल ने प्लग को थोड़ा और घुमाया और बोली,
“बहुत अच्छा… अभी भी टाइट है।
लटका हुआ था… दर्द से तड़प रहा था, आँसू बह रहे थे, लेकिन जानता था — अब कोई बचाव नहीं।
मैं पहले तो समझा ही नहीं कि शीतल क्या करने वाली है। मैं सोच रहा था कि वो फिर चाबुक उठाएगी। लेकिन अचानक उसने अपनी उँगली प्लग के रिंग में डाली और…
“आआआह्ह्ह्ह!!!!”
उसने प्लग को आधा बाहर खींचा और फिर एक झटके से पूरा अंदर धकेल दिया। मेरी गांड में तेज झटका लगा। दर्द और उत्तेजना दोनों एक साथ। मैंने गैग के अंदर से चीख मारी।
वो रुकी नहीं।
तीन-चार बार उसने यही किया — प्लग को आधा बाहर खींचा, फिर जोर से अंदर ठेल दिया। हर बार मेरी प्रोस्टेट पर भारी दबाव पड़ता और शरीर में बिजली सी दौड़ जाती। कुछ पलों के लिए सारी पीठ और गांड का दर्द भूल गया। मैं “म्म्म्मह्ह्ह… म्म्म्मह्ह्ह…” करके कराहने लगा। उत्तेजना से मेरा लंड पैंटी में टपक रहा था।
शीतल मेरे कान में फुसफुसाई,
“अभी नहीं गोपिका… अभी नहीं।
ये मजा तभी मिलेगा जब तू अच्छी लड़की बनेगी और हमें खुश करेगी।”
उसने प्लग को पूरी तरह अंदर धकेल दिया और बैग की तरफ मुड़ी।
“अभी तो तेरे सामने वाले हिस्से पर काम करना है।”
उसने बैग से दो जोड़ी क्लिप्स निकालीं। ये सामान्य निप्पल क्लिप्स नहीं थीं। ये वाइस ग्रिप्स जैसे थे — प्लास की तरह, एक तरफ स्क्रू लगा हुआ था जिससे जितना चाहो टाइट किया जा सकता था।
मेरी आँखें फट गईं। मैंने तुरंत समझ लिया कि ये कहाँ लगने वाले हैं।
शीतल मेरे सामने आई। उसने मेरी केमिज का आगे वाला हिस्सा ऊपर उठाया। मेरी चिकनी, स्मूद छाती और दोनों निप्पल्स पूरी तरह नंगे हो गए। सुबह के ट्विस्ट और अब तक के torture की वजह से वो पहले से ही लाल और सूजे हुए थे।
उसने पहला वाइस ग्रिप उठाया और उसे मेरे दाहिने निप्पल के पास लाया।
मैं सिर हिलाने लगा, गैग के अंदर से “नहीं… प्लीज… म्म्म्मह्ह्ह!!” की आवाज निकालने की कोशिश कर रहा था।
शीतल मुस्कुराई, “डरो मत गोपिका… पहले तो बस हल्का-हल्का लगाएँगे। बाद में स्क्रू कसेंगे।”
उसने क्लिप को मेरे निप्पल पर रखा और धीरे से दबाया।
“क्लिक!”
पहली पकड़ लग गई। दर्द तुरंत शुरू हो गया — जैसे कोई लोहे की कली निप्पल को चबा रही हो।
फिर उसने दूसरा क्लिप बाएँ निप्पल पर लगाया।
“क्लिक!”
अब दोनों निप्पल्स पर वाइस ग्रिप्स कसे हुए थे। दर्द तेज था, लेकिन अभी सहन करने लायक।
रीना (अपनी लंबी चोटी खींचते हुए) बोली, “अभी तो सिर्फ शुरूआत है। स्क्रू कसो शीतल।”
नंदिनी (खुले बाल) हँसी, “देखना… गोपिका कितना रोएगी।”
शीतल ने पहले वाले क्लिप का स्क्रू पकड़ा और धीरे-धीरे घुमाना शुरू किया…
टाइट… टाइट… और टाइट…
“MMMMMMMMMHHHHHHHH!!!!!!”
दर्द अब असहनीय हो गया। मेरे निप्पल जैसे किसी ने काटे जा रहे हों। आँखों से फिर आँसू बह निकले। मेरी लंबी चोटी पीठ पर काँप रही थी।
शीतल मेरी आँखों में देखकर बोली,
“रो ले… जितना रोना है रो ले।
ये सिर्फ वार्म-अप है।
मेरी छाती जल रही थी। गांड जल रही थी। कंधे फट रहे थे।
लेकिन मैं जानता था — अभी बहुत कुछ बाकी है।
मैंने बदन को जोर से twist किया, बचने की कोशिश की, लेकिन बंधे हुए हाथों और टाँगों में कहाँ जाना था?
शीतल ने मुस्कुराते हुए पहले वाले वाइस ग्रिप को और कस दिया। स्क्रू घुमाया… घुमाया… और घुमाती रही।
“क्लिक… क्लिक… क्लिक…”
निप्पल पर दबाव बढ़ता गया। जैसे कोई लोहे का दाँत मेरे निप्पल को चीर रहा हो।
“MMMMMMMMMHHHHHHHHHHHH!!!!!!”
मेरी चीख गैग के अंदर फट पड़ी। आँखें बाहर निकलने को हो गईं। दर्द इतना तेज था कि मेरी पूरी छाती में आग लग गई।
जब शीतल को यकीन हो गया कि क्लिप नहीं छूटेगी, तो उसने उसे छोड़ दिया।
धड़ाम!
क्लिप का वजन नीचे की तरफ खींचने लगा। गुरुत्वाकर्षण ने मेरे निप्पल को और खींचा। दर्द की नई लहर सीने से लेकर गर्दन तक दौड़ गई। मैं जोर-जोर से बदन हिलाने लगा, चीखने लगा, क्लिप को झटकने की कोशिश करने लगा।
लेकिन जितना हिलता, क्लिप उतना ही झूलती और निप्पल को और खींचती।
शीतल ने दूसरा क्लिप भी मेरे बाएँ निप्पल पर रखा और उसे भी पूरी ताकत से कस दिया।
“क्लिक… क्लिक… क्लिक…”
अब दोनों निप्पल्स पर भारी वाइस ग्रिप्स लटक रहे थे।
मैं लटका हुआ चीखता रहा, बदन हिलाता रहा, रोता रहा। आँसू की धार मेरे गालों पर बह रही थी। मेरी लंबी चोटी पसीने से भीगकर पीठ पर चिपक गई थी। हर हिलने के साथ क्लिप्स झूलतीं और निप्पल्स पर नया-नया दर्द पैदा करतीं।
आखिरकार मैं थक गया। हिलना बंद कर दिया। लेकिन दर्द कम नहीं हुआ। दोनों निप्पल्स अब फटने जैसे हो रहे थे। जैसे कोई सुई बार-बार चुभो रही हो।
मैं चुपचाप सिसक-सिसक कर रोने लगा। “म्म्म… म्म्मह्ह्ह… म्म्म्म…” — गैग के अंदर से सिर्फ ये छोटी-छोटी कराह निकल रही थी।
शीतल मेरे सामने आई। उसने मेरे दोनों क्लिप्स को उँगलियों से हल्का-हल्का झुलाया।
“आआआह्ह्ह्ह… म्म्म्मह्ह्ह!!!”
“कितना प्यारा रो रहा है मेरा गोपिका,” वो हँसते हुए बोली। “देखो… निप्पल्स कितने सुंदर लाल और सूज गए हैं।”
रीना अपनी लंबी चोटी घुमाते हुए बोली, “अब इसे नीचे उतारो। साड़ी पहनाकर देखते हैं कि क्लिप्स साड़ी के ब्लाउज के अंदर कितना दर्द देते हैं।”
नंदिनी (खुले बाल) ने मेरी चोटी खींची, “हाँ… और इसकी लंबी चोटी को भी इस्तेमाल करेंगे bondage में।”
अंजलि, शिवानी, आश्विनी और प्रतिक्षा सब मेरे चारों तरफ खड़ी थीं, मेरी पीड़ा का मजा ले रही थीं।
शीतल ने मेरे गाल पर हाथ रखा और धीरे से बोली,
“रो ले गोपिका… जितना रोना है रो ले।
अब हम तुझे नीचे उतारते हैं।
तेरा चेहरा साफ करेंगे, पूरा मेकअप लगाएँगे — गाढ़ा काजल, लाल लिपस्टिक, बिंदिया, चूड़ियाँ, झुमके।
फिर तेरी पसंदीदा रेड शिमरी साड़ी पहनाएँगे।
और फिर…
तेरी उस खूबसूरत लंबी चोटी को खींचकर नई पोजीशन में बाँधेंगे।
तैयार है ना?”
मैं बस सिसकता रहा।
दर्द… शर्म… और बेबसी — सब मिलकर मुझे पूरी तरह तोड़ चुका था।
मेरी चीखें थोड़ी कम हुईं तो शीतल को बिल्कुल पसंद नहीं आया।
उसने दोनों हाथ बढ़ाए, दोनों वाइस ग्रिप्स को एक साथ पकड़ा और जोर से खींचा… फिर मरोड़ा।
“आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह!!!! म्म्म्मम्ह्ह्ह्ह्ह्ह!!!!”
दर्द जैसे बिजली की तरह छाती फाड़कर निकल गया। मेरी चीख फिर से शुरू हो गई। गैग के अंदर से इतनी तेज आवाज निकल रही थी कि गला फटने लगा।
शीतल रुकी नहीं।
वो एक निप्पल खींचती, फिर दूसरे को, फिर दोनों को साथ में। कभी-कभी वो क्लिप्स को घुमाती भी। हर बार निप्पल्स पर आग लग जाती। मैं बदन हिलाता, छटपटाता, लेकिन बंधे हुए हाथों में कुछ नहीं कर पाता। आँसू अब बिना रुके बह रहे थे — मेरे गालों पर, ठोड़ी पर, छाती पर गिर रहे थे।
उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। वो मेरे आँसू देखकर मुस्कुरा रही थी। जैसे मेरी पीड़ा उसे नशा दे रही हो।
“रो… और रो गोपिका… कितने सुंदर लग रहे हैं तेरे आँसू,” वो फुसफुसाई।
रीना, नंदिनी, अंजलि — सब हँस रही थीं। शिवानी ने मेरी लंबी चोटी खींचकर कहा, “देखो… इसकी चोटी भी काँप रही है।”
प्रतिक्षा (खुले बाल) बोली, “निप्पल्स अब कितने सूज गए हैं… लाल टमाटर जैसे।”
बहुत देर तक शीतल ने मेरे निप्पल्स को यातना दी। जब मैं थककर चुप होने लगा, तो वो फिर दोनों क्लिप्स खींच-मरोड़कर मुझे चीखने पर मजबूर कर देती।
आखिरकार उसने क्लिप्स छोड़ दिए… लेकिन हटाए नहीं।
उसने दोनों स्क्रू और कस दिए — दो-तीन बार और घुमाए। अब दर्द पहले से भी ज्यादा था। जैसे निप्पल्स फटने वाले हों।
फिर उसने स्टेप लैडर निकाला। मेरी एंकल कफ्स खोलीं और मुझे लैडर पर खड़ा होने को कहा। मेरे काँपते हाथों को छत के हुक से खोला।
मैं इतना कमजोर हो चुका था कि लैडर पर खड़े होते ही मेरी टाँगें लड़खड़ा गईं। जैसे ही मैं नीचे उतरा, घुटने मुड़ गए।
धड़ाम!
मैं फर्श पर गिर पड़ा। पूरा शरीर दर्द से तड़प रहा था — पीठ, गांड, निप्पल्स, कंधे… सब जल रहे थे। मैं वहीं पड़ा-पड़ा हाँफ रहा था।
मुझे लगा कि शायद अब वो रुक जाएगी। शायद अब काफी हो गया।
लेकिन शीतल मेरे ऊपर झुकी। उसने मेरे बालों को खींचकर मेरा चेहरा ऊपर किया और बोली,
“क्या सोच रही है गोपिका? कि अब छुट्टी मिल गई?
नहीं रे… अभी तो सिर्फ शुरुआत हुई है।
अब हम तुझे सजाएँगे।
पूरा मेकअप, रेड शिमरी साड़ी, चूड़ियाँ, बिंदिया…
फिर तेरी उस लंबी चोटी को खींचकर नया bondage…
और तब असली रात शुरू होगी।”
नंदिनी, अंजलि, रीना — सब मेरे चारों तरफ खड़ी हो गईं। उनकी आँखों में वही भूख थी।
मैं फर्श पर पड़ा था… रो रहा था… काँप रहा था… लेकिन जानता था —
अब कोई रुकावट नहीं।
मैं उनकी गोपिका हूँ। पूरी तरह।
शीतल जोर-जोर से हँस रही थी। उसकी हँसी में क्रूरता थी।
“गिर गई गोपिका? अरे नहीं… अभी तो बहुत कुछ बाकी है,” कहते हुए उसने मेरे दोनों हाथ पीछे करके wrist cuffs को आपस में जोड़ दिया।
फिर बैग से एक लंबी, मोटी रस्सी निकाली। उसने रस्सी को मेरी wrist cuffs से बाँधा, मुझे खड़े होने को कहा। मेरी टाँगें काँप रही थीं, लेकिन मैं किसी तरह खड़ा हो गया।
जैसे ही मैं खड़ा हुआ, शीतल ने रस्सी का दूसरा सिरा छत वाले हुक से लूप किया और खींचना शुरू कर दिया।
“आआआह्ह्ह्ह…!!!”
मेरी बाहें पीछे की तरफ खिंच गईं। कंधे मुड़ गए, जैसे कोई जोड़ तोड़ रहा हो। मेरी कमर झुक गई। अब मैं आगे की तरफ झुका हुआ खड़ा था — गांड ऊपर, सिर नीचे, हाथ पीछे बहुत ऊपर खिंचे हुए। कंधों में इतना दर्द था कि साँस लेना भी मुश्किल हो रहा था।
शीतल ने रस्सी को कसकर बाँध दिया।
“अब गिरने की कोशिश भी मत करना,” उसने चेतावनी दी, “वरना कंधे सच में टूट जाएँगे।”
फिर उसने मेरी एंकल cuffs फिर से लगाईं, दोनों टाँगों को आपस में जोड़ा और फर्श वाले हुक से बाँध दिया। अब मैं बिल्कुल不动 था — झुका हुआ, हाथ पीछे खिंचे, टाँगें बँधी, कोई हिलने की जगह नहीं।
मेरी स्मूद, चिकनी गांड अभी भी चाबुक और बेंत से लाल-लाल थी। दोनों निप्पल्स पर वाइस ग्रिप्स लटक रहे थे। हर साँस के साथ क्लिप्स हिलतीं और निप्पल्स में आग लगातीं। गांड में वो 6 इंच का प्लग अभी भी भरा हुआ था। मेरी लंबी, घनी चोटी अब आगे की तरफ लटक रही थी, मेरे चेहरे को छू रही थी।
मैं सिसक-सिसक कर रो रहा था।
“म्म्म… म्म्मह्ह्ह… प्लीज…” — गैग के अंदर से सिर्फ कराह निकल रही थी।
शीतल मेरे सामने आई, मेरी झुकी हुई कमर पर हाथ फेरा और बोली,
“देखो कितना खूबसूरत लग रहा है मेरा गुलाम…
झुका हुआ, बिल्कुल helpless, गांड ऊपर, निप्पल्स पर क्लिप्स…
मैं झुका हुआ, बंधा हुआ, दर्द से तड़पता हुआ… बस रो रहा था।
कोई जवाब नहीं था।
कोई बचाव नहीं था।
जब शीतल को यकीन हो गया कि मैं पूरी तरह बंध चुका हूँ — झुका हुआ, हाथ पीछे खिंचे, टाँगें बँधी, कोई हिलने की जगह नहीं — तो वो मुस्कुराई। उसने बैग उठाया और मेरी पीठ के पीछे चली गई।
मैं सिर्फ उसकी आवाजें सुन सकता था — कुछ खटखटाहट, कपड़ों की सरसराहट।
जब वो फिर मेरे सामने आई, तो मेरी सांस रुक गई।
शीतल अब पूरी तरह नंगी थी। सिर्फ एक बड़ा, मोटा, 8 इंच लंबा लाल स्ट्रैप-ऑन उसके कमर पर बंधा हुआ था। वो इतना मोटा और लंबा था कि मेरी आँखें फट गईं। अभी तक जो प्लग अंदर था, वो भी नया रिकॉर्ड था… लेकिन ये तो उससे भी बड़ा था।
मेरा पूरा शरीर काँप उठा।
शीतल ने स्ट्रैप-ऑन को धीरे-धीरे, प्यार से लुब्रिकेंट लगाना शुरू किया। जैसे वो अपना प्रेमी हो। उसकी उँगलियाँ लुभावने अंदाज में ऊपर-नीचे चल रही थीं।
“ये वो चीज है जिसका मैं बहुत दिनों से इंतजार कर रही थी गोपिका,” वो मेरी आँखों में देखकर बोली। “बहुत समय से मैं तुझे सच में रेप करना चाहती थी… असली रेप। लेकिन इच्छुक को रेप करना मुश्किल होता है।”
उसने स्ट्रैप-ऑन को मेरे चेहरे के पास लाकर हिलाया।
“लेकिन आज… मुझे नहीं लगता कि तू अभी भी willing है, है ना?”
मैं जोर-जोर से सिर हिलाने लगा। गैग के अंदर से “नहीं… प्लीज… म्म्म्मह्ह्ह… नहीं!!!” की सिसकारियाँ निकल रही थीं। मेरी आँखों में फिर से आँसू भर आए।
रीना (अपनी लंबी चोटी पीछे करके) हँसते हुए बोली, “देखो… गोपिका डर गई है।”
नंदिनी (खुले बाल) मेरे पास आई, मेरी झुकी हुई कमर पर हाथ फेरते हुए बोली, “8 इंच… और इतना मोटा… तेरी गांड फट जाएगी आज।”
अंजलि (बड़ा हेयर बन) ने मेरी लंबी चोटी खींची, “इसकी चोटी को पकड़कर हम इसे और भी helpless बना देंगे।”
शिवानी, आश्विनी और प्रतिक्षा भी मेरे चारों तरफ थीं। उनकी आँखों में वही भूख थी। सबकी लंबी बालें, sexy Indian dresses — मरमेड साड़ी, बैकलेस ब्लाउज, शाइनी सिल्क — सब तैयार थीं मेरे torture का मजा लेने को।
शीतल मेरे पीछे चली गई। उसने मेरी केमिज ऊपर की, प्लग वाले रिंग को पकड़ा और धीरे-धीरे प्लग बाहर निकाला।
“आह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ!!!”
गांड अचानक खाली हो गई, लेकिन राहत सिर्फ एक पल की थी।
शीतल ने स्ट्रैप-ऑन की नोक मेरी गांड की दरार पर रखी। वो ठंडी और बहुत मोटी थी।
“तैयार हो गोपिका?” उसने मेरी लंबी चोटी को मुट्ठी में भरकर खींचा और कान में फुसफुसाया,
“अब मैं तुझे सच में रेप करूँगी…
जोर से… बिना रुके…
जितना तू सहन कर सके, उससे ज्यादा।
चिल्ला… रो… भीख माँग… कोई फर्क नहीं पड़ेगा।”
मेरी टाँगें काँप रही थीं।
निप्पल्स पर क्लिप्स जल रहे थे।
कंधे फट रहे थे।
और अब… वो भयानक 8 इंच वाला लाल स्ट्रैप-ऑन मेरी गांड के बाहर दबाव बना रहा था।
मैं रो रहा था… सच में रो रहा था।
मैं कुछ नहीं बोला। गैग में मेरा मुँह फटा हुआ था, सिर्फ सिसकारियाँ निकल रही थीं। मेरे दिमाग में अभी भी घूम रहा था कि मेरी बीवी शीतल आज कितनी बदल गई है।
उसे मेरा जवाब न मिला तो वो गुस्से में झुक गई। उसने दोनों वाइस ग्रिप्स को फिर से पकड़ा और जोर-जोर से खींचने लगी — जैसे कोई गाय का दूध निकाल रही हो।
“आआआआह्ह्ह्ह्ह!!!! म्म्म्मम्ह्ह्ह्ह्ह!!!!”
निप्पल्स पर दर्द की लहरें उठ रही थीं। क्लिप्स खिंच-खिंचकर मेरे निप्पल्स को लंबा खींच रही थीं। मैं चीखता रहा, बदन हिलाता रहा, लेकिन बंधनों ने मुझे बिल्कुल fixed रखा था। आँसू फिर से बह निकले।
शीतल ने कुछ मिनट तक यही यातना दी, फिर मेरे कान में बोली,
“तो बता… तू अभी भी willing slave है?”
मैंने जोर-जोर से सिर हिलाया — नहीं! नहीं!!
“बहुत अच्छा,” शीतल ने क्रूर मुस्कान के साथ कहा। “मुझे भी यही सुनना था।”
वो मेरे पीछे चली गई। उसने प्लग के रिंग को पकड़ा और एक झटके से पूरा बाहर निकाल लिया।
“आह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ!!!”
गांड अचानक खाली हो गई। लेकिन राहत सिर्फ एक सेकंड की थी।
फिर उसने प्लग को फिर से मेरी गांड पर रखा और जोर से धकेल दिया।
“MMMMMMMMHHHHHHHH!!!!”
मैं चीख पड़ा। प्लग का मोटा हिस्सा जबरदस्ती अंदर घुस रहा था। शीतल ने उसे पूरा अंदर ठेल दिया और दबाव बनाए रखा, जैसे वो और भी गहरा धकेलना चाहती हो। मेरी गांड फटने जैसी हो रही थी। मैं आगे की तरफ झुककर छटपटाने लगा, लेकिन बंधनों ने मुझे बिल्कुल जगह नहीं दी।
शीतल हँसते हुए बोली,
“अगर ये छोटा-सा प्लग तुझे इतना चीखा रहा है…
तो देखते हैं जब ये 8 इंच वाला मोटा स्ट्रैप-ऑन तेरी गांड में जाएगा तो तू क्या करेगा।”
रीना (अपनी लंबी चोटी खींचते हुए) बोली, “हाँ शीतल… इसे अच्छे से चोदो।”
नंदिनी (खुले बाल) मेरी लंबी चोटी को पकड़कर खींच रही थी, “इसकी चोटी को पकड़कर रखो, ताकि हिले नहीं।”
अंजलि, शिवानी, आश्विनी और प्रतिक्षा सब मेरे चारों तरफ खड़ी थीं। उनकी आँखों में भूख थी।
शीतल ने प्लग को आखिरी बार और जोर से दबाया, फिर बाहर निकाला। अब मेरी गांड पूरी तरह खुली और तैयार थी।
उसने स्ट्रैप-ऑन को मेरी गांड की दरार पर रखा। वो ठंडा, मोटा और बहुत भारी था।
“तो गोपिका…” शीतल ने मेरी चोटी को मुट्ठी में भरकर खींचा और गहरी साँस ली,
“अब मैं तुझे सच में रेप करूँगी।
बिना दया के।
बिना रुके।
जितना तू सहन कर सके, उससे कहीं ज्यादा।
चिल्ला… रो… भीख माँग… कोई नहीं सुनेगा।”
मेरी टाँगें काँप रही थीं।
निप्पल्स जल रहे थे।
कंधे फट रहे थे।
और अब… वो भयानक लाल 8 इंच वाला स्ट्रैप-ऑन मेरी गांड के मुहाने पर दबाव बना रहा था।
मैं रो रहा था… सच में डर गया था।
बिना एक शब्द बोले शीतल ने अपना कमर आगे धकेला।
“आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह!!!!!!”
8 इंच वाला वो मोटा, लाल स्ट्रैप-ऑन एक ही झटके में मेरी गांड में घुस गया। आधा से ज्यादा अंदर चला गया। प्लग पूरे दिन अंदर रहने की वजह से मेरी गांड थोड़ी खुली हुई थी, वरना शायद फट जाती। फिर भी दर्द इतना तेज था कि मेरी आँखें बाहर निकलने को हो गईं।
शीतल रुकी नहीं। उसने कसकर मेरी लंबी चोटी पकड़ ली और जोर-जोर से पंप करना शुरू कर दिया।
धप्प… धप्प… धप्प… धप्प…
हर धक्के के साथ पूरा 8 इंच अंदर-बाहर हो रहा था। वो जानवर की तरह मुझे चोद रही थी — तेज, बेरहम, बिना रुके। मेरी सिसकारियाँ पहले चीखों में बदल गईं, फिर धीरे-धीरे कराह में। दर्द के साथ एक गहरी, शर्मनाक उत्तेजना भी आने लगी।
“म्म्मह्ह्ह… आह्ह्ह… म्म्म्मह्ह्ह!!”
मेरा लंड पैंटी के अंदर तना हुआ टपक रहा था। शरीर में लहरें उठ रही थीं। लेकिन वो रुकने का नाम नहीं ले रही थी। लगातार, तेज-तेज, गहरे-गहरे धक्के। जैसे कभी थकती ही नहीं।
मेरी टाँगें काँप रही थीं। कंधे पहले से ही फट रहे थे। निप्पल्स पर क्लिप्स हर धक्के के साथ झूल रहे थे और आग बरसा रहे थे।
आखिरकार, भले ही मजा आ रहा था, लेकिन शरीर थक गया। मैंने गैग के अंदर से भीख माँगनी शुरू कर दी —
“म्म्मह्ह्ह… बस… प्लीज मिस्ट्रेस… थोड़ा रुक जाओ… म्म्मह्ह्ह!!”
लेकिन मेरी भीख ने शीतल को और उत्तेजित कर दिया।
उसकी आँखों में एक पागलपन आ गया। उसने अपनी हथेली उठाई और हर धक्के के साथ मेरी पहले से ही सूजी हुई, चाबुक से लाल गांड पर जोरदार थप्पड़ मारना शुरू कर दिया।
धप्प… चटाक्क!!
धप्प… चटाक्क!!
हर थप्पड़ के साथ दर्द की नई लहर उठती। मेरी गांड अब जल रही थी। क्लिप्स और तेजी से झूल रहे थे, निप्पल्स पर आग लग रही थी। दर्द और खुशी दोनों एक साथ मेरे दिमाग को पागल कर रहे थे।
“रो… चीख… गोपिका!” शीतल हाँफते हुए चिल्लाई, “तेरी गांड आज मेरी है!”
रीना ने मेरी चोटी और जोर से खींच ली, “हाँ… और जोर से चोदो इसे!”
नंदिनी (खुले बाल) मेरे सामने झुकी और मेरे निप्पल क्लिप्स को उँगलियों से हिलाती रही। अंजलि, शिवानी, आश्विनी और प्रतिक्षा सब मेरे चारों तरफ खड़ी थीं, मेरी पीड़ा और कराह का मजा ले रही थीं।
शीतल अभी भी नहीं रुकी। वो मुझे जानवरों की तरह चोद रही थी — तेज, गहरा, बेरहम। मेरी गांड फट रही थी, लेकिन शरीर बार-बार झड़ने के कगार पर पहुँच रहा था।
मैं रो रहा था… भीख माँग रहा था… लेकिन वो रुकने वाली नहीं थी।
दर्द और सुख का वो मिश्रण अब मुझे पागल कर रहा था।
मैं चाहता था कि सब कुछ रुक जाए।
निप्पल्स पर लगे वो भारी वाइस ग्रिप्स निकल जाएँ।
मेरी सूजी हुई गांड, पीठ और जाँघों पर पड़े चाबुक के निशान कुछ देर के लिए शांत हो जाएँ।
सबसे ज्यादा मैं चाहता था कि शीतल का वो 8 इंच वाला मोटा स्ट्रैप-ऑन मेरी गांड से निकल जाए।
मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतना सुख भी यातना बन सकता है।
दर्द तो अलग था, लेकिन सुख इतना तीव्र था कि मेरा दिमाग और शरीर दोनों उसे सहन नहीं कर पा रहे थे। शीतल को कोई दया नहीं आ रही थी। वो लगातार, बिना रुके, जानवर की तरह मुझे चोद रही थी।
धप्प… धप्प… धप्प… धप्प…
हर धक्का गहरा और तेज। स्ट्रैप-ऑन मेरी प्रोस्टेट को बार-बार कुचल रहा था। मेरी लंबी चोटी शीतल के हाथ में थी — वो उसे खींच-खींचकर मुझे और पीछे खींच रही थी।
मैं गैग के अंदर से रो रहा था, भीख माँग रहा था, लेकिन मेरा शरीर खुद ही गद्दार हो गया। मेरी गांड अपने आप पीछे की तरफ धकेलने लगी — जैसे मैं और ज्यादा चाह रहा होऊँ।
“म्म्मह्ह्ह… आह्ह्ह… म्म्म्मह्ह्ह!!”
धीरे-धीरे मेरे लंड में एक भयानक ऑर्गेज्म बनने लगा। दर्द की वजह से वो बहुत धीरे-धीरे बढ़ रहा था। हर धक्के के साथ वो करीब आता, लेकिन पूरा नहीं छूटता। ये tease मुझे दीवाना बना रही थी। मैं अपनी गांड और पीछे करके शीतल के धक्कों से मिलाने लगा।
रीना हँसते हुए बोली, “देखो… गोपिका खुद पीछे कर रही है। कितनी रंडी बन गई है!”
शीतल ने मेरी चोटी को और कसकर पकड़ा और तेजी से चोदने लगी।
“ले गोपिका… ले… और ले!”
आखिरकार जब मैं सोच रहा था कि अब बेहोश हो जाऊँगा, तो ऑर्गेज्म आया।
एक… दो… तीन… लहरों में।
मेरा पूरा शरीर काँप उठा। मैंने जिंदगी में पहले कभी इतना तेज, इतना लंबा और इतना तीव्र ऑर्गेज्म नहीं अनुभव किया था। मेरा लंड पैंटी के अंदर फूट-फूटकर निकल रहा था। मेरी आँखें उलट गईं, शरीर में झटके लग रहे थे। गांड स्ट्रैप-ऑन को अपने आप दबा रही थी।
लेकिन शीतल ने रुकने का नाम नहीं लिया। वो अभी भी तेजी से धक्के दे रही थी, मेरी गांड को चीर रही थी।
मैं चीख रहा था… रो रहा था… झड़ रहा था… और वो मुझे चोदती जा रही थी।
आँसू, पसीना, लार और वीर्य — सब मिलकर मैं पूरी तरह टूट चुका था।
शीतल मेरी पीठ पर झुककर कान में फुसफुसाई,
“ये सिर्फ शुरुआत है गोपिका…
अभी तो मैंने झड़ा भी नहीं।
और मेरी छह सहेलियाँ भी इंतजार कर रही हैं।
आज रात तू पूरी तरह हमारी हो जाएगी।”
मैं झुका हुआ, बंधा हुआ, थर-थर काँपता हुआ… बस रो रहा था।
मेरा पूरा शरीर बेजान होकर लटक गया। घुटने मुड़ गए, सिर नीचे झुक गया। शीतल ने एक कदम पीछे लिया और मुझे देखा कि कहीं मैं बेहोश तो नहीं हो गया।
फर्श पर मेरे पैरों के बीच एक बड़ा-सा सफेद वीर्य का पोखर बन गया था। शीतल ने उसे देखा और बस एक क्रूर मुस्कान दी।
“वाह गोपिका… इतना सारा पानी निकाला?”
फिर बिना रुके उसने स्ट्रैप-ऑन को फिर से मेरी गांड में धकेल दिया और पंपिंग शुरू कर दी।
धप्प… धप्प… धप्प…
मेरा शरीर अभी भी काँप रहा था, लेकिन कुछ ही देर में फिर से वही उत्तेजना बनने लगी। इस बार बहुत धीरे-धीरे। दर्द और थकान की वजह से ऑर्गेज्म आने में काफी समय लगा, लेकिन आखिरकार वो फिर से चरम पर पहुँचने लगा।
जैसे ही मैं झड़ने वाला था, शीतल अचानक रुक गई। उसने स्ट्रैप-ऑन बाहर निकाल लिया।
“म्म्मह्ह्ह…!!!” मैं गैग के अंदर से निराशा में कराह उठा। ऑर्गेज्म पीछे हटने लगा।
शीतल मेरे बगल में घुटनों के बल बैठ गई। उसने मेरे लंड को पैंटी से बाहर निकाला और अपनी नरम, गर्म उँगलियों से पकड़ लिया। फिर धीरे-धीरे स्ट्रोक करने लगी।
मेरा ऑर्गेज्म फिर से बनने लगा। जैसे ही मैं चरम पर पहुँचा, उसने हाथ रोक लिया।
“नहीं… प्लीज… म्म्मह्ह्ह!!” मैं भीख माँग रहा था, लेकिन गैग की वजह से सिर्फ कराह निकल रही थी।
शीतल मुस्कुराई और फिर से स्ट्रोक शुरू कर दी। एक बार, दो बार, तीन बार… हर बार ठीक उस पल रुक जाती जब मैं झड़ने वाला होता।
ये सबसे भयानक यातना थी।
दर्द से ज्यादा ये edging मुझे तोड़ रही थी। मेरा लंड सूजकर लाल हो गया था, लेकिन राहत नहीं मिल रही थी। मैं रो रहा था, छटपटा रहा था, अपनी गांड हिला-हिलाकर भीख माँग रहा था।
रीना (अपनी लंबी चोटी खींचते हुए) हँस रही थी, “देखो… गोपिका कितना तरस रही है।”
नंदिनी (खुले बाल) ने मेरी लंबी चोटी खींचकर कहा, “रो… और रो… आज तुझे झड़ने भी नहीं देंगे आसानी से।”
आखिरकार, जब मैं सोच रहा था कि अब सच में बेहोश हो जाऊँगा, शीतल ने हाथ नहीं रोका।
मेरा ऑर्गेज्म आया… और इस बार बहुत ज्यादा तेज, बहुत ज्यादा लंबा।
लहर… लहर… लहर…
मेरा पूरा शरीर झटके से काँप उठा। मैंने जिंदगी में कभी इतना तीव्र, इतना गहरा ऑर्गेज्म नहीं अनुभव किया था। मेरे मुँह से गैग के अंदर से एक जंगली, पशु जैसी चीख निकल गई। वीर्य फूट-फूटकर फर्श पर गिर रहा था। मेरी टाँगें थर-थर काँप रही थीं। आँखें उलट गईं।
शीतल ने मेरी चोटी को कसकर खींच रखा था और पूरे समय मुझे देख रही थी।
जब आखिरी लहर भी निकल गई, तो मैं पूरी तरह टूटकर लटक गया। शरीर में ताकत नाम की कोई चीज नहीं बची थी।
शीतल मेरे कान में फुसफुसाई,
“दूसरा ऑर्गेज्म भी बहुत सुंदर था गोपिका…
लेकिन अभी रात बहुत लंबी है।
मैंने तो अभी शुरू ही किया है।
अब मेरी सहेलियाँ बारी-बारी तुझे इस्तेमाल करेंगी।
शिवानी, नंदिनी, अंजलि, रीना, आश्विनी, प्रतिक्षा…
सब तैयार बैठी हैं तेरी गांड और तेरी लंबी चोटी का मजा लेने को।”
मैं झुका हुआ, बंधा हुआ, थर-थर काँपता, आँसू और वीर्य से सना हुआ… बस सिसक रहा था।
शीतल ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और मेरे झड़ चुके वीर्य को अपनी हथेली में जमा कर लिया। फिर वो हाथ मेरी आँखों के सामने उठाकर दिखाया। सफेद, गाढ़ा, चिपचिपा तरल उसकी हथेली पर चमक रहा था।
“ये सब तुझे पीना है गोपिका,” उसने ठंडे स्वर में कहा। “मैं गैग निकाल रही हूँ। लेकिन अगर तूने एक छोटी-सी भी आवाज की, या एक बूँद भी नहीं पिया, तो गैग वापस लगाकर मैं फिर से बेंत से शुरू करूँगी। समझ गई?”
मैंने तेजी से सिर हिलाया — नहीं… प्लीज…
शीतल ने गैग की स्ट्रैप खोली और उसे मेरे मुँह से निकाला। मेरे जबड़े में इतने घंटों से दर्द हो रहा था। मुँह खुला-खुला सा महसूस हो रहा था। लेकिन राहत मिलने से पहले ही शीतल ने अपना वीर्य भरा हाथ मेरे होंठों के पास कर दिया।
नाक में अपना ही नमकीन, गाढ़ा запах घुस रहा था। शर्म से मेरा चेहरा जल रहा था। लेकिन मैंने हिम्मत करके जीभ निकाली और उसकी हथेली से चाटना शुरू कर दिया — जैसे कोई कुत्ता पानी पी रहा हो।
धीरे-धीरे मैंने अपना पूरा वीर्य चाटकर मुँह में भर लिया। स्वाद अजीब, नमकीन और थोड़ा कड़वा था। मैंने उसे जीभ पर घुमाया, फिर निगल लिया। गला रुक-रुक कर गया, लेकिन मैंने सब निगल लिया।
शीतल मेरे चेहरे को घूर रही थी। उसकी आँखों में एक दिव्य, बेहद संतुष्ट मुस्कान थी — शुद्ध आनंद। जैसे वो स्वर्ग देख रही हो।
उस पल कुछ बदल गया मेरे अंदर।
मैंने महसूस किया कि अब मैं सिर्फ दर्द या सुख के लिए नहीं… बल्कि उस मुस्कान के लिए जीना चाहता हूँ। उसकी खुशी के लिए मैं कुछ भी सहन कर सकता हूँ। चाहे जितनी मार, जितनी यातना, जितनी शर्म… सब।
क्योंकि आखिरकार…
मेरा बचपन का सपना सच हो रहा था।
मैं औरत बनकर, साड़ी पहनकर, लंबी चोटी खिंचवाकर, बंधकर, रेप होकर, torture होकर… पूरी तरह गुलाम बन गया था।
रीना (अपनी लंबी चोटी घुमाते हुए) हँसी, “वाह गोपिका… अपना माल पी लिया?
मैं झुका हुआ, बंधा हुआ, आँसू और वीर्य से सना हुआ… बस सिर हिलाकर रह गया।
मैंने आखिरी बूँद तक अपना वीर्य निगल लिया। गला जल रहा था, स्वाद अभी भी जीभ पर चिपका हुआ था। शीतल ने मेरे चेहरे को देखा और संतोष से मुस्कुराई।
“बहुत अच्छी लड़की… गोपिका।”
फिर उसने दोनों वाइस ग्रिप्स को एक साथ पकड़ा और खींचकर निकाल दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह्ह!!!!”
निप्पल्स पर इतनी तेज जलन हुई जैसे कोई सुई अंदर चुभो दी गई हो। खून की रफ्तार से दर्द लौटा। मैं जोर से चीख पड़ा। निप्पल्स अब काले-नीले सूज गए थे और भयानक जलन कर रहे थे।
शीतल ने मेरी wrist cuffs वाली रस्सी को थोड़ा ढीला कर दिया, ताकि मैं पेट के बल फर्श पर लेट सकूँ। मेरी टाँगें अभी भी बँधी थीं, हाथ पीछे बंधे हुए थे। मैं काँपता हुआ पेट के बल लेट गया। मेरी सूजी हुई, चाबुक और थप्पड़ों से लाल गांड ऊपर थी।
शीतल ने गैग फिर से मेरे मुँह में ठूँस दिया और बकसुआ कस दिया। फिर उसने 6 इंच वाला प्लग उठाया और मेरी गांड में जोर से धकेल दिया।
“म्म्म्मह्ह्ह!!!”
प्लग फिर से पूरी तरह अंदर चला गया। अब मैं पूरी तरह बंधा, गैग वाला, प्लग वाला, निप्पल्स जलता हुआ… फर्श पर पड़ा था।
शीतल मेरे सिर के पास बैठ गई। उसने मेरी लंबी चोटी को धीरे से सहलाया और बहुत प्यार से, लेकिन ठंडे स्वर में बोली,
“बहुत अच्छा किया गोपिका…
आज तूने मुझे सच में बहुत खुश किया।
कल मैंने ऑफिस की छुट्टी ले ली है।
तो कल पूरा दिन… और पूरी रात हम खेलेंगे।
मैं और मेरी ये छह सहेलियाँ — शिवानी, नंदिनी, अंजलि, रीना, आश्विनी और प्रतिक्षा।
सब तैयार हैं तुझे और तोड़ने को।”
उसने उठकर लाइट ऑफ कर दी। कमरा अंधकार में डूब गया। सिर्फ बाहर की हल्की रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी।
दरवाजा बंद होने की आवाज आई।
मैं अकेला पड़ा था — रोहिणी सेक्टर-14 के फ्लैट के बेडरूम में, फर्श पर, पेट के बल, हाथ-टाँग बँधे, मुँह में गैग, गांड में प्लग, निप्पल्स जलते हुए, शरीर पर चाबुक और बेंत के निशान, और मुँह में अपना ही वीर्य का स्वाद।
दर्द हर जगह था… लेकिन अंदर एक अजीब सी खुशी भी थी।
मैं अब सच में गुलाम था।
मैं … गोपिका था… शीतल का और उसकी सहेलियों का।
डर भी लग रहा था… कल क्या होगा, इसका अंदाजा नहीं था।
लेकिन उसी डर के साथ एक गहरी उत्तेजना भी थी।
मैं आँखें बंद करके लेटा रहा।
शरीर जल रहा था।
गांड प्लग से भरी हुई थी।
और मन में बस एक ही ख्याल घूम रहा था —
कल… नई शुरुआत होगी।
रात भर मुझे नींद नहीं आई।
दर्द और गांड में भरा वो 6 इंच का मोटा प्लग — दोनों ने मिलकर मुझे तड़पाया रखा। भले ही शीतल ने मुझे पेट के बल लेटने दिया था, लेकिन मेरे हाथ पीछे छत की रस्सी से खिंचे हुए थे। कंधे इतने दर्द कर रहे थे जैसे कोई जोड़ तोड़ रहा हो। जबड़ा गैग की वजह से भारी और अकड़ा हुआ था।
आधी रात तक मैं कराहता रहा, छटपटाता रहा। आँखों से आँसू निकलते रहे। आखिरकार थकान ने हार मान ली और मैं बेचैनी भरी नींद में चला गया।
सुबह…
मैं अभी नींद में था कि अचानक महसूस हुआ — कोई मेरी गांड में उँगली डाल रहा है।
“आआआह्ह्ह्ह्ह!!!!”
शीतल ने प्लग के रिंग को अपनी उँगली में फंसाया और जितनी ताकत थी, उतना जोर से खींचा। प्लग आधा बाहर निकला, फिर उसी जोर से वापस अंदर धकेल दिया।
मैं तुरंत जाग गया। मेरी आँखें फट गईं। रात वाली रेपिंग की वजह से अंदर अभी भी बहुत नाजुक था। प्लग के अंदर-बाहर होते ही वही तेज, जलता हुआ सुख-दर्द लौट आया।
शीतल रुकी नहीं।
उसने प्लग को तेजी से पंप करना शुरू कर दिया — अंदर-बाहर, अंदर-बाहर। साथ ही अपनी दूसरी hand से मेरी पहले से ही लाल और वेल्ट्स भरी गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारने लगी।
चटाक! चटाक! चटाक!
रात की मार से जो दर्द धीमा हो गया था, वो फिर से आग बन गया। मेरी गांड जल उठी। मैं गैग के अंदर चीखने लगा —
“म्म्म्मह्ह्ह्ह!!! म्म्म्मह्ह्ह्ह!!!!”
शरीर फर्श पर छटपटाने लगा, लेकिन बंधे हुए हाथ और टाँगों की वजह से कहीं नहीं हिल पा रहा था।
जब शीतल को यकीन हो गया कि मैं पूरी तरह जाग चुका हूँ, तो उसने प्लग को पूरी तरह अंदर ठेल दिया और आखिरी जोरदार थप्पड़ मारा।
चटाक्क्क!!
फिर वो मेरे सिर के पास बैठ गई। मेरी लंबी चोटी को अपनी मुट्ठी में लेकर खींचा और मीठे-क्रूर स्वर में पूछा,
“कैसा लग रहा है सुबह-सुबह…Gopal ? या फिर गोपिका?”
मेरी आँखों में आँसू थे।
गांड जल रही थी।
कंधे फट रहे थे।
निप्पल्स अभी भी रात की क्लिप्स से सूजे हुए थे।
मुँह गैग से भरा हुआ था।
मैं सिर्फ सिसक-सिसक कर रो रहा था।
शीतल मुस्कुराई। उसने मेरी चोटी को और खींचा और बोली,
“उठ… आज पूरा दिन हमारे पास है।
मैंने ऑफिस की छुट्टी ली है।
और मेरी छह सहेलियाँ भी 10 बजे तक आ रही हैं —
शिवानी, नंदिनी, अंजलि, रीना, आश्विनी और प्रतिक्षा।
मैं फर्श पर पड़ा काँप रहा था।
कल की रात अभी खत्म भी नहीं हुई थी…
और आज का दिन शुरू हो चुका था।
गैग मुँह में होने की वजह से मैं कुछ बोल ही नहीं सकता था। बस “म्म्म… म्म्मह्ह्ह…” की सिसकारियाँ निकल रही थीं। रात भर का दर्द, कंधों का खिंचाव, निप्पल्स की जलन, गांड में प्लग — सब कुछ एक साथ मेरे ऊपर टूट पड़ा। मैं फर्श पर पड़ा-पड़ा अनियंत्रित रूप से फूट-फूटकर रोने लगा। आँसू मेरे गालों पर बह रहे थे, फर्श पर गिर रहे थे।
शीतल मेरी सिसकियाँ सुनकर जोर से हँसी।
“अरे वाह… मेरी छोटी सी रंडी को बहुत अच्छा लग रहा है। रो ले गोपिका, रो ले। मुझे बहुत खुशी हो रही है। उम्मीद है तू कल रात जहाँ छोड़ा था, वहाँ से फिर शुरू करने के लिए तैयार है?”
उसने छत वाले हुक से जुड़ी रस्सी को खींचा।
“आआआआह्ह्ह्ह्ह!!!!”
मेरी कलाइयाँ ऊपर खिंच गईं। कंधे इतने जोर से मुड़े कि लगा बाँहें कंधों से अलग हो जाएँगी। दर्द इतना तेज था कि मेरी आँखों के आगे अँधेरा छा गया। आखिरकार मैं वही पोजीशन में आ गया — कमर झुकी हुई, गांड ऊपर, टाँगें फर्श के हुक से बँधी, हाथ पीछे खिंचे हुए छत की तरफ। पूरी तरह helpless, बिल्कुल कल वाली स्थिति में।
शीतल ने कोई समय बर्बाद नहीं किया।
उसने रात वाली बेंत उठाई और शांत, लगभग शौकिया अंदाज में मेरी गांड पर मारना शुरू कर दिया।
चटाक्क्क!!
चटाक्क्क!!
चटाक्क्क्क!!
कल की तरह उन्माद नहीं था उसमें। वो बहुत शांत थी, जैसे कोई हॉबी पूरी कर रही हो। बेंत बार-बार मेरी पहले से लाल और सूजी हुई गांड पर पड़ रही थी। हर वार के साथ नया जलता हुआ निशान उभर रहा था।
फिर उसने बेंत रखी और चाबुक उठा लिया।
फटाक्क्क!! फटाक्क्क!!
पीठ पर, जाँघों पर, कमर पर — हर जगह। वो धीरे-धीरे, लेकिन लगातार मार रही थी। कभी-कभी रुककर मेरी लंबी चोटी खींचती, फिर फिर से मारती।
मैं चीखता रहा… रोता रहा… छटपटाता रहा। गैग के अंदर से मेरी आवाजें दबी हुई थीं, लेकिन दर्द इतना था कि लगा अब बेहोश हो जाऊँगा। कंधे फट रहे थे, गांड आग बन चुकी थी, निप्पल्स अभी भी रात की क्लिप्स से दर्द कर रहे थे।
शीतल बीच-बीच में मेरी चोटी खींचकर पूछती,
“और कैसा लग रहा है गोपिका? रो… जितना रोना है रो ले। आज पूरा दिन हमारे पास है।”
मैं सिर्फ सिसक-सिसक कर रो रहा था।
रोहिणी सेक्टर-14 के फ्लैट में सुबह की रोशनी धीरे-धीरे कमरे में फैल रही थी, और मैं बंधा हुआ, नंगा, लाल-लाल निशानों से भरा, दर्द से तड़प रहा था।
शीतल ने चाबुक नीचे रखा, मेरी सूजी हुई गांड पर हाथ फेरा और बोली,
“अभी तो सिर्फ वार्म-अप हुआ है।
10 बजे तक मेरी सहेलियाँ आ जाएँगी।
फिर हम तुझे नहलाएँगे, पूरा मेकअप करेंगे, रेड शिमरी साड़ी पहनाएँगे, तेरी लंबी चोटी बनाएँगे…
और फिर असली खेल शुरू होगा।”
मैं फर्श पर झुका हुआ काँप रहा था…
कल की रात अभी खत्म भी नहीं हुई थी, और आज का दिन और भी भयानक होने वाला था।
आखिरकार शीतल ने बेंत और चाबुक नीचे रख दिए। मेरे चेहरे पर आँसू बह रहे थे, साँस फूल रही थी। गांड और पीठ पर आग लगी हुई थी।
वो कमरे से बाहर चली गई। कुछ मिनट बाद वापस आई — एक फोल्डिंग कुर्सी और एक कटोरा लेकर। कुर्सी को मेरे सामने रखा, कटोरा साइड में।
“अब तुझे मेरे लिए कुछ करना है गोपिका,” कहते हुए उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए। वो पूरी तरह नंगी हो गई।
उसने कुर्सी पर बैठकर मेरे गैग को खोला। फिर अपनी दोनों टाँगें मेरी पीठ पर रख दीं। मेरे पहले से दर्द कर रहे कंधों पर और दबाव पड़ गया। मेरा चेहरा सीधा उसकी योनि में धँस गया।
“चाट रंडी! जोर से!” उसने आदेश दिया।
मैंने तुरंत अपनी जीभ निकाली। उसके गीले, गर्म slit पर ऊपर-नीचे चाटने लगा। उसकी clit को चूसने लगा। शीतल की सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगीं। वो अपनी योनि को मेरे चेहरे पर रगड़ने लगी।
“हाँ… और तेज… चाट मेरी गांड की रंडी… आह्ह्ह!!”
मैं जितनी तेजी से हो सके चाटता रहा। मेरी लंबी चोटी मेरी पीठ पर लटक रही थी। कंधे फट रहे थे, लेकिन मैं रुका नहीं। कुछ ही मिनट बाद शीतल काँपने लगी। उसने मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और जोर से अपनी योनि मेरे मुँह पर दबा दी।
“आआआह्ह्ह्ह… हाँ… गोपिका…!!”
उसका रस मेरे चेहरे पर, मुँह में, आँखों में छूट गया। वो जोर से चीखी और काँपती रही। मैंने उसका पूरा रस चाटकर निगल लिया।
शीतल कुछ देर तक हाँफती रही। वो धीरे-धीरे अपनी योनि मेरे चेहरे पर रगड़ती रही, अपना ऑर्गेज्म का आनंद लेती रही।
फिर वो उठी। उसने स्ट्रैप-ऑन उठाया और अपनी कमर पर बाँध लिया — वही 8 इंच वाला मोटा, लाल वाला।
“बहुत अच्छा किया Gopika… मतलब गोपिका,” उसने मेरी चोटी सहलाते हुए कहा। “ये इतना अच्छा था कि तुझे एक छोटा सा इनाम मिलना चाहिए।”
मैं हाँफ रहा था। मेरे चेहरे पर उसका रस चिपका हुआ था। कंधे जल रहे थे। गांड में प्लग दब रहा था।
शीतल मेरे पीछे गई। उसने प्लग को बाहर निकाला और स्ट्रैप-ऑन की नोक मेरी गांड पर रख दी।
“इनाम ये है कि आज मैं तुझे फिर चोदूँगी… लेकिन इस बार धीरे-धीरे… ताकि तू हर सेकंड महसूस करे।”
उसने मेरी लंबी चोटी को मुट्ठी में भरकर खींचा और धीरे-धीरे स्ट्रैप-ऑन अंदर धकेलना शुरू कर दिया।
मैं फिर से कराह उठा…
मैं जानता था क्या आने वाला है… और सच कहूँ तो अब मेरा शरीर खुद बेकरार हो रहा था। उस 8 इंच वाले मोटे स्ट्रैप-ऑन के बारे में सोचते ही मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। शर्म आ रही थी, लेकिन रुक नहीं पा रहा था।
शीतल ने मुस्कुराते हुए कहा, “ओह… लगभग भूल ही गई थी।”
उसने कटोरा उठाया और ठीक उसी जगह रख दिया जहाँ कल रात मेरा वीर्य गिरा था — मेरे पैरों के बीच। फिर वो मेरे पीछे चली गई।
इस बार उसने कोई नरमी नहीं बरती। प्लग को एक झटके से बाहर खींचा और तुरंत अपना मोटा, लाल स्ट्रैप-ऑन मेरी गांड में जोर से ठेल दिया।
“आआआह्ह्ह्ह्ह!!!!”
“चलो गोपिका… इस बार बिना हाथ लगाए तीन ऑर्गेज्म निकालते हैं,” कहते हुए उसने मेरी लंबी चोटी को कसकर पकड़ लिया और तेजी से पंपिंग शुरू कर दी।
धप्प… धप्प… धप्प… धप्प…
हर धक्का गहरा और जोरदार था। शीतल को जैसे स्ट्रैप-ऑन से पैदा हुई हो। उसकी रिदम परफेक्ट थी। कुछ ही मिनट में मेरे अंदर फिर से वो लहर उठने लगी।
मेरा पहला ऑर्गेज्म आया।
शरीर काँप उठा। मैं जोर से कराहा और मेरा वीर्य सीधा कटोरे में गिरने लगा।
“आह्ह्ह्ह… मmmmmm!!”
लेकिन शीतल ने रुकने का नाम नहीं लिया। वो लगातार तेजी से मुझे चोदती रही। मेरे ऑर्गेज्म की आखिरी लहरें भी खत्म नहीं हुई थीं कि उसने और तेज धक्के देना शुरू कर दिए।
दूसरा ऑर्गेज्म आने में ज्यादा समय लगा। शरीर थक रहा था, लेकिन सुख इतना तीव्र था कि दिमाग सुन्न हो रहा था। आखिरकार दूसरा भी आ गया — और भी तेज। मेरी आँखें उलट गईं, टाँगें काँपने लगीं, और कटोरे में और वीर्य गिरा।
अब मेरा शरीर हाँफ रहा था। मैं आराम चाहता था… बस एक मिनट का ब्रेक। लेकिन शीतल ने मुझे कोई राहत नहीं दी। वो जानती थी कि अब सुख यातना बनने वाला है।
तीसरा ऑर्गेज्म आने लगा। अब दर्द और सुख दोनों एक साथ हो रहे थे। हर धक्के के साथ मेरी गांड जल रही थी, कंधे फट रहे थे, लेकिन शरीर बार-बार झड़ने को मजबूर हो रहा था। मैं अब भीख माँगने लगा था —
“प्लीज मिस्ट्रेस… बस… एक मिनट… आह्ह्ह… बहुत हो गया… मmmmmm!!”
लेकिन शीतल सिर्फ हँस रही थी। उसने मेरी चोटी और जोर से खींची और तेजी से चोदती रही।
“रो… चीख… भीख माँग गोपिका।
ये सुख अब तेरी सजा है।
जब तक तू तीन बार नहीं झड़ जाती, तब तक मैं नहीं रुकूँगी।”
मैं रो रहा था… काँप रहा था… और तीसरा ऑर्गेज्म मेरे अंदर बन रहा था।
ये सुख अब यातना बन चुका था।
बहुत ज्यादा अच्छा लगना भी दर्द बन सकता है — अब मैं समझ गया था।
मैं अब गैग के अंदर से जोर-जोर से भीख माँग रहा था।
“प्लीज मिस्ट्रेस… बस… रुक जाओ… आह्ह्ह… बहुत हो गया… मmmmmmh!!”
कल रात की रेपिंग की वजह से मेरी गांड अंदर से बहुत नाजुक और कोमल हो गई थी। हर धक्का दस गुना ज्यादा तेज लग रहा था। स्ट्रैप-ऑन का हर इंच अंदर-बाहर होते वक्त लगता था जैसे कोई आग का लंड मेरी गांड को चीर रहा हो।
लेकिन शीतल को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। वो हँसती हुई और भी तेजी से मुझे चोद रही थी। मेरी हर भीख पर वो और जोर से हँसती और मेरी लंबी चोटी खींचकर मुझे पीछे खींच लेती।
“भीख माँग… रो… चीख गोपिका! तेरी चीखें मुझे और उत्तेजित कर रही हैं।”
समय का पता ही नहीं चल रहा था। मेरे लिए अब सिर्फ एक ही चीज बची थी — उस मोटे स्ट्रैप-ऑन का लगातार अंदर-बाहर होना। दर्द, सुख, थकान — सब मिलकर एक धुंध बन गया था।
तीसरा ऑर्गेज्म आने में बहुत लंबा समय लगा। इतना लंबा कि मैं सोचने लगा था कि शायद अब कभी नहीं आएगा। मेरा लंड सूजकर दर्द कर रहा था, लेकिन रिलीज नहीं हो रही थी। मैं पागल हो रहा था।
आखिरकार, बहुत देर बाद, वो लहर फिर उठी।
मेरा शरीर काँपने लगा। गैग के अंदर से एक लंबी, टूटी हुई कराह निकली। तीसरा ऑर्गेज्म आया — बहुत धीमा, बहुत गहरा, लेकिन इतना तीव्र कि लगा मेरा दिमाग उड़ जाएगा। मेरे पैरों के बीच रखे कटोरे में फिर से वीर्य गिरने लगा। शरीर में झटके लग रहे थे। आँखों के आगे अँधेरा छा रहा था।
लेकिन शीतल ने अब भी नहीं रोका। वो लगातार मुझे चोदती रही।
मैं अब सच में टूट चुका था।
आखिरकार, जब मेरे शरीर की आखिरी लहर भी शांत हो गई, शीतल ने एक झटके से स्ट्रैप-ऑन बाहर निकाला और तुरंत 6 इंच वाला प्लग मेरी गांड में धकेल दिया।
“उफ्फ्फ… आह्ह्ह!!”
प्लग फिर से पूरी तरह अंदर चला गया। मेरी गांड अब पूरी तरह भरी हुई और दर्द से भरी थी।
शीतल मेरे पीछे से आई, मेरी लंबी चोटी को सहलाया और कान में फुसफुसाई,
“तीन बार… बिना हाथ लगाए। बहुत अच्छी गोपिका।
मैं झुका हुआ, हाँफता हुआ, आँसू बहाता हुआ, कटोरे में अपना वीर्य भरकर… बस सिसक रहा था।
रोहिणी सेक्टर-14 का फ्लैट सुबह की रोशनी में चमक रहा था, लेकिन मेरे लिए अब दिन और रात दोनों यातना बन चुके थे।
“घुटनों के बल बैठ जा,” शीतल ने सिर्फ इतना कहा।
उसने मेरे पैरों के बीच रखा कटोरा उठाया और छत वाली रस्सी को ढीला कर दिया। मेरी कमजोर, थर-थर काँपती टाँगों पर मैं किसी तरह घुटनों के बल बैठ गया। शीतल मेरे सामने आई, कुर्सी पर बैठ गई और कटोरा हाथ में थाम लिया।
वो कुछ देर हाँफती रही। मैंने देखा — उसकी टाँगें भी मेरी तरह काँप रही थीं।
फिर उसने आगे झुककर गैग खोला। मेरे जबड़े में इतनी देर से दर्द हो रहा था कि मुँह खुलते ही कराह निकल गई।
“मुँह खोल,” उसने आदेश दिया।
मैं जानता था क्या होने वाला है। मैंने मुँह पूरी तरह खोला और सिर थोड़ा पीछे झुकाया। शीतल ने कटोरा मेरे होंठों से सटाया और सारा वीर्य मेरे मुँह में उंडेल दिया।
नमकीन, गाढ़ा, अपना ही स्वाद… नाक में अपनी ही गंध। मैंने आँखें बंद कर लीं और सब निगल लिया। हर बूँद। शीतल तब तक कटोरा झुकाए रही जब तक आखिरी कतरा भी मेरे गले में नहीं उतर गया।
“निगल,” उसने कहा।
मैंने गरम-गरम अपना वीर्य निगल लिया। गला जल गया।
शीतल ने मेरी केमिज ऊपर की और मेरे सूजे हुए, लाल निप्पल्स को उँगलियों से पकड़ लिया। धीरे-धीरे मरोड़ने और खींचने लगी — दर्द जितना कि मैं चीख न उठूँ, लेकिन यह एहसास जरूर दिला रही थी कि जब चाहेगी तब दर्द दोगुना कर सकती है।
“अब मैं तुझे खोल रही हूँ गोपिका,” उसने मेरे निप्पल्स को दबाते हुए कहा, उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। “तेरी ट्रेनिंग का अगला चरण शुरू होता है। तुझे औरत बनना सीखना है। मेकअप लगाना, औरतों जैसी चाल चलना, औरतों जैसी बात करना, हरकतें करना — सब सीखना है। आज तू सिर्फ सुनोगी और आज्ञा मानोगी। बोलने की इजाजत नहीं।
आज शाम हम बाहर जाएँगे। तुझे दिखाना होगा कि तूने कितना सीखा है।”
मैंने चुपचाप सिर हिला दिया कि समझ गया।
शीतल मेरे पीछे गई और रस्सियाँ खोलने लगी। कलाई और टखनों पर रस्सियों के गहरे निशान पड़ गए थे। रस्सी छूटते ही दर्द हुआ, लेकिन कुछ देर बाद कम हुआ।
जब मैं उठकर उसके पीछे-पीछे लिविंग रूम में गया, तो हर छोटी-सी हरकत से मेरी पीठ, गांड और जाँघों पर पड़े वेल्ट्स फिर से जल उठते थे।
मैं चुपचाप खड़ा रहा।
शरीर दर्द से चीख रहा था…
लेकिन अंदर कहीं एक अजीब सी बेचैनी भी थी —
क्या होगा जब मैं पूरी तरह गोपिका बनकर बाहर निकलूँगा?
अगले कई घंटों तक शीतल ने मुझे औरत बनना सिखाया। हर छोटी-छोटी बात — कैसे चलना है, कैसे बैठना है, हाथ कैसे हिलाने हैं, कमर कैसे झुकानी है, गांड कैसे हिलाकर चलना है।
“औरतों जैसी चाल… नाजुक… sexy… लेकिन शर्मीली,” वो बार-बार कहती।
जब भी मैं गलती करता — हाथ सीधे रख देता, या कदम पुरुषों जैसे पड़ जाते — तो वो बेंत या चाबुक उठा लेती।
चटाक्क्क!!
फटाक्क्क!!
हर गलती पर मेरी सूजी हुई गांड या पीठ पर मार पड़ती। दर्द इतना तेज था कि मैं चीख उठता, लेकिन फिर भी मैं कोशिश करता रहता। आश्चर्य की बात ये थी कि कुछ चीजें मुझे बहुत जल्दी आने लगीं — जैसे कमर हिलाकर चलना, नाजुक अंदाज में हाथ घुमाना।
फिर हम बाथरूम गए। वहाँ शीतल ने मुझे मेकअप सिखाया। फाउंडेशन, ब्लश, आईशैडो, मस्कारा, लिपस्टिक — सब कुछ। मैंने बार-बार प्रैक्टिस की। गलती होने पर वो मेरे निप्पल्स मरोड़ देती या चाबुक की हल्की मार देती।
“ठीक है गोपिका,” आखिर में शीतल ने कहा। “बहुत अच्छा सीखा। अब प्लग निकाल, अच्छे से नहा ले। फिर हम दोनों तैयार होंगे। आज शाम को बस दो लड़कियाँ शहर घूमने जा रही हैं।”
मैंने प्लग निकाला (बहुत दर्द हुआ) और नहाने लगा। शेविंग करते वक्त सूजे हुए निप्पल्स, लाल गांड और चाबुक के निशानों पर ब्लेड लगते ही आँखों से आँसू निकल आए। हर जगह जलन हो रही थी।
नहाकर जब मैं बाहर निकला तो शीतल बेडरूम में थी। बेड पर एक sexy ब्लैक स्पैगेटी स्ट्रैप वाली शॉर्ट ड्रेस रखी थी (जो उसने खास मेरे लिए मँगाई थी), उसके साथ ब्लैक गार्टर बेल्ट, लेस स्टॉकिंग्स और ब्लैक हाई हील्स।
मैंने उत्साह से सब पहन लिया। औरतों के कपड़े अब मुझे पुरुषों के कपड़ों से ज्यादा natural लगने लगे थे।
शीतल ने मुझे मिरर के सामने बिठाया और मेरे बालों को feminine स्टाइल में सेट किया।
फिर उसने मुझे खुद मेकअप लगाने को कहा और देखती रही। मैंने बहुत ध्यान से किया — फाउंडेशन, ब्लश, गाढ़ा काजल, लाल लिपस्टिक। एक बार कंसीलर लगाना भूल गया तो शीतल की आँखें सिकुड़ गईं। मैंने तुरंत ठीक कर लिया, वरना सजा मिल जाती।
जब मैं तैयार हुआ तो आईने में देखा — एक औरत खड़ी थी। पतला शरीर, मेकअप, लेस अंडरगारमेंट्स, हाई हील्स… और मेरी लंबी चोटी।
शीतल मेरे पीछे खड़ी होकर मेरी कमर पर हाथ रखकर बोली,
“बहुत सुंदर लग रही है मेरी गोपिका।
अब शाम को हम बाहर जाएँगे — रोहिणी, पिटामपुरा, मॉडल टाउन… कहीं भी।
तुझे लोगों के बीच औरत बनकर घूमना है।
डर लग रहा है ना?”
मैं चुपचाप सिर हिला दिया।
अंदर से डर भी लग रहा था… और एक अजीब सी उत्तेजना भी।
कल तक मैं गोपाल था…
आज मैं गोपिका बन चुका था।
जब मैंने मेकअप पूरा कर लिया, तो शीतल ने मुझे वो ब्लैक स्पैगेटी स्ट्रैप वाली शॉर्ट ड्रेस पहनने को कहा। मैंने उसे सिर के ऊपर से पहना। ड्रेस मेरे शरीर पर बिल्कुल टाइट बैठ गई — दो पतली स्ट्रैप्स कंधों पर, और हेम मेरी जाँघों के बीच तक।
शीतल ने मुझे आईने के सामने खड़ा कर दिया।
मैंने खुद को देखा… और एक पल के लिए सांस रुक गई।
आईने में जो लड़की खड़ी थी, वो मैं नहीं लग रही थी। पतला, नाजुक शरीर, feminine चेहरे पर गाढ़ा काजल, लाल लिपस्टिक, हल्का ब्लश, और मेरी लंबी चोटी कंधे पर लहरा रही थी। सीने थोड़े flat थे, लेकिन ड्रेस की टाइटनेस की वजह से मेरी natural curves बहुत अच्छे से उभर रही थीं। मैं सच में passable लग रही थी — एक खूबसूरत, petite young woman।
शीतल मेरे पीछे खड़ी होकर आईने में मुझे घूर रही थी। उसने सिर हिलाया और मुस्कुराई,
“मैं यकीन नहीं कर पा रही… तू कितनी अच्छी लग रही है गोपिका।
मुझे नहीं लगा था कि तू इतनी सुंदर औरत बन जाएगी।
सच कहूँ तो… तू लड़की बनकर मुझसे भी ज्यादा अच्छी लगती है।”
मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया।
“थैंक यू Sheetal …” मैंने धीरे से कहा।
“वेलकम अब लिविंग रूम में जा और जो कुछ मैंने सिखाया है, उसकी प्रैक्टिस कर। मैं तैयार होकर आती हूँ।”
मैं हाई हील्स में लिविंग रूम में चहलकदमी करने लगा — नाजुक कदम, कमर हिलाकर, कंधे पीछे, चोटी को एक तरफ करके। हर कदम पर मेरी सूजी हुई गांड दर्द कर रही थी, लेकिन मैं रुकी नहीं।
कुछ देर बाद शीतल बाहर आई। वो एक sexy रेड स्लिंकी ड्रेस में थी — बहुत खूबसूरत, चमकदार, जो उसके शरीर पर परफेक्ट लग रही थी।
“ये ले,” उसने मुझे एक छोटा ब्लैक पर्स थमाया। “इसमें तेरा ड्राइविंग लाइसेंस रख दिया है… जरूरत पड़ी तो काम आएगा। तैयार है?”
मैं “हाँ” कहने ही वाली थी कि अचानक एहसास हुआ — मैं क्या करने जा रही हूँ?
घर के अंदर गोपिका बनना एक बात थी… लेकिन बाहर, दिल्ली की सड़कों पर, लोगों के बीच जाना…
मेरा चेहरा सफेद पड़ गया।
शीतल ने मेरी शक्ल देखकर जोर से हँसी। उसने मेरा हाथ पकड़ा और दरवाजे की तरफ खींचा,
“चल… डर मत। आज तू मेरी गोपिका है।”
जैसे ही हम गाड़ी की तरफ बढ़े, मैंने अचानक रुककर कहा,
“Sheetal ” मेरी आवाज काँप रही थी, “मैं… मैं कोई पैंटी नहीं पहनी हुई हूँ।”
शीतल रुकी, मेरी तरफ मुड़ी और बहुत शरारती मुस्कान के साथ बोली,
“पता है… जानबूझकर नहीं पहनाई।
आज रात जब तू बाहर घूमेगी, तो हर हवा के झोंके के साथ याद रहेगा कि तू कौन है।
चल… अब देर मत कर। रोहिणी से बाहर निकलते ही तेरी असली ट्रेनिंग शुरू होगी।”
मैं हाई हील्स में, टाइट ब्लैक ड्रेस में, बिना पैंटी के, लंबी चोटी पीठ पर लहराती हुई… शीतल के साथ कार की तरफ बढ़ गई।
दिल जोरों से धड़क रहा था।
डर… शर्म… और एक अजीब सी उत्तेजना — सब मिलकर मुझे पागल कर रहे थे।
अब असली दुनिया में गोपिका बनकर बाहर निकलने का समय आ गया था।
“अभी पैंटी पहनने की इजाजत नहीं है,” शीतल ने कार का दरवाजा खोलते हुए कहा। “तेरा लंड कभी बहुत बड़ा था ही नहीं, इसलिए bulge दिखने का डर नहीं है। बस ध्यान रखना — जब बैठे तो अपनी ड्रेस को अच्छे से संभालना, कहीं कोई ऊपर से न देख ले।”
वो मुस्कुराई और मुझे कार में बैठने दिया। मैं हाई हील्स में सावधानी से बैठी। ड्रेस मेरी जाँघों तक चढ़ गई थी। जैसे ही मैं बैठी, मेरी सूजी हुई गांड सीट पर दब गई और तेज दर्द हुआ। मैंने दाँत भींच लिए।
शीतल ड्राइवर सीट पर बैठी, कार स्टार्ट की और मुस्कुराते हुए बोली,
“आज बहुत मजा आने वाला है गोपिका।”
कार रोहिणी से निकली और साउथ दिल्ली की तरफ बढ़ गई।
पहले हम शीतल के फेवरेट रेस्टोरेंट “The Imperial Garden” (साकेत) पहुँचे। जैसे ही हम अंदर घुसे, मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। हर तरफ लोग थे — कपल्स, फैमिली, दोस्त। मुझे लग रहा था कि सब मुझे घूर रहे हैं, जैसे मेरी ड्रेस के अंदर तक देख रहे हों। मेरी टाँगें काँप रही थीं। मैं मेन्यू पढ़ भी नहीं पा रही थी, बस उसे घूर रही थी।
वेटर आया — लंबा, गोरा, गहरी नीली आँखों वाला, नाम था दaniel। उसकी सफेद शर्ट उसके टोन वाले शरीर पर टाइट थी।
“हाय, मैं Dinesh हूँ। आज आपकी सर्विस करूँगा। क्या ऑर्डर करेंगी मैडम?”
शीतल ने सहजता से कहा, “मुझे नॉन-फैट रैंच ड्रेसिंग के साथ सलाद।”
फिर Dinesh ने मेरी तरफ देखा, “और आप मैडम?”
मैंने पहली बार उसकी आँखों में देखा। वो सच में बहुत हैंडसम था। छह फीट से ऊँचा, शॉर्ट ब्लॉन्ड हेयर, मस्कुलर लेकिन स्लीक बॉडी। एक पल के लिए मैं भूल गई कि मैं गोपाल हूँ। मेरे गाल गर्म हो गए।
मैंने हल्की, feminine आवाज में कहा, “मुझे भी… वही सलाद।”
Dinesh मुस्कुराया और चला गया।
शीतल मेरी तरफ देखकर धीरे से हँसी, “क्या हुआ गोपिका? वेटर को देखकर शर्म आ रही है? कितनी प्यारी लग रही है तू… blush करके।”
मैं शर्म से सिकुड़ गई। ड्रेस के नीचे बिना पैंटी के, हाई हील्स में, लंबी चोटी कंधे पर, सूजी हुई गांड और निप्पल्स — सब कुछ मुझे याद दिला रहा था कि मैं अब औरत हूँ।
खाना आया। मैं बहुत सावधानी से खा रही थी — छोटे-छोटे कौर, नाजुक अंदाज में। हर बार जब मैं हिलती, ड्रेस मेरी जाँघों पर सरकती और सूजी गांड पर हवा लगती। दर्द और शर्म दोनों हो रही थी।
खाने के बाद शीतल ने मेरी तरफ देखा और बोली,
“अब चल… थोड़ा घूमते हैं।
GK-1 मार्केट, फिर मॉल…
लोगों के बीच तुझे घूमना है, बात करनी है, औरतों जैसा बर्ताव करना है।
अगर कोई पूछे तो तू मेरी ‘बहन’ है — Gopika”
मैंने काँपते हाथों से अपना पर्स उठाया।
कार पार्किंग से बाहर निकलते वक्त शीतल ने मेरी जाँघ पर हाथ रखा और फुसफुसाया,
“डर लग रहा है ना?
बहुत अच्छा।
डर के साथ ही उत्तेजना भी महसूस कर…
क्योंकि आज रात घर लौटकर मेरी छह सहेलियाँ इंतजार कर रही हैं।
और वो तुझे इस ड्रेस में देखकर छोड़ने वाली नहीं हैं।”
मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था।
रोहिणी से साकेत तक…
मैं पहली बार घर के बाहर पूरी तरह गोपिका बनकर जा रही थी।
“म-मुझे भी वही… सलाद,” मैं हकलाते हुए बोली। मेरी आवाज़ खुद को अजीब-सी feminine लग रही थी।
Dinesh मुस्कुराया और चला गया। जैसे ही वो मुड़ा, मेरी नजर उसके टाइट, गोल नितंबों पर पड़ गई। मैं अनायास ही उसे घूरती रह गई। शीतल ने ये सब देख लिया।
“मmmm… क्या बात है Gopika ?” वो शरारती मुस्कान के साथ बोली, “वेटर को पसंद आ गया? सच में yummy है ना। सोच तो… तू उसके लंड को मुँह में लेकर कैसी लगेगी?”
मेरा चेहरा एकदम लाल हो गया। मैं शर्म से पानी का ग्लास उठाने लगी, लेकिन अंदर कहीं एक अजीब सी उत्तेजना भी हुई।
कुछ देर बाद Dinesh वापस आया। उसने सलाद हमारे सामने रखा और मेरी आँखों में सीधे देखकर बोला,
“अगर आप दोनों लेडीज़ को कुछ भी चाहिए… कुछ भी… तो बस बताइए।”
उसकी गहरी नीली आँखें… मैं उनमें खो ही गई। जवाब देने की हिम्मत नहीं हुई, बस हल्का सा मुस्कुराकर सिर हिला दिया।
जैसे ही वो चला गया, शीतल हँस पड़ी,
“वाह गोपिका! तूने देखा? वो तेरे साथ flirt कर रहा था। और तूने भी थोड़ा-बहुत जवाब दे दिया। पहली रात बाहर निकली है और पहले ही छोटी-सी रंडी बन गई है।”
मेरा पेट पलट गया। सच में… वो flirt कर रहा था। और मैंने भी… बिना सोचे मुस्कुरा दिया था। अंदर से एक अजीब सी खुशी हुई — कि कोई मुझे लड़की समझकर flirt कर रहा है।
मैंने चुपचाप फोर्क उठाया और खाने की कोशिश करने लगी, हालाँकि भूख नाम की चीज बची ही नहीं थी। शीतल चुपके से हँसती रही।
खाना खत्म होने के बाद Dinesh बिल लेकर आया।
शीतल ने अपना क्रेडिट कार्ड देते हुए पूछा, “तुम कब फ्री होते हो honey?”
मेरा दिल उछल पड़ा। मैंने हैरानी से शीतल को देखा — ये क्या कर रही है?
“आधे घंटे में,” Dinesh ने जवाब दिया।
“बहुत अच्छा। हम थोड़ी देर बाद Club Aer (The Oberoi) जा रहे हैं। अगर मन हो तो वहाँ मिल सकते हो।”
फिर शीतल ने मुझे कुहनी मारी, “क्या कहती है गोपिका? Dinesh को बुलाना अच्छा रहेगा ना?”
मैं Dinesh की तरफ देखी। घबराहट से मेरा गला सूख गया था, लेकिन शीतल की नजरें मुझे घूर रही थीं। मैंने काँपती आवाज़ में कहा,
“हाँ… वो… बहुत अच्छा रहेगा। हम वहाँ आपका इंतज़ार करेंगे।”
Dinesh मुस्कुराया, “ठीक है लेडीज़… मिलते हैं क्लब में।”
जब वो चला गया, शीतल मेरी जाँघ पर हाथ रखकर फुसफुसाई,
“बहुत अच्छा… मेरी छोटी सी slut।
अब चल… Club Aer चलते हैं।
वहाँ तुझे और बहुत कुछ सीखना है।
और हाँ… Dinesh के सामने भी तुझे औरत बनकर रहना है।”
मैं कार में बैठते वक्त काँप रही थी।
बिना पैंटी, टाइट ब्लैक ड्रेस, हाई हील्स, सूजी हुई गांड, और अब एक attractive लड़के से मिलने जा रही थी…
रोहिणी से साकेत तक जाते वक्त शीतल हँस रही थी।
मैं चुपचाप खिड़की से बाहर देख रही थी।
मेरा पहला रात… औरत बनकर… दिल्ली की रात में।
“हाँ… शायद मैं आ जाऊँ,” Dinesh ने मुस्कुराते हुए कहा। “बहुत अच्छा लगा मिलकर Gopika।”
“मुझे भी… Dinesh,” मैंने शरमाते हुए जवाब दिया।
जैसे ही वो चला गया, मैंने शीतल की तरफ देखा।
“मिस्ट्रेस… आप क्या कर रही हैं?”
शीतल ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में वही क्रूर चमक थी।
“बस थोड़ा मजा ले रही हूँ गोपिका। और अब से मेरे किसी भी काम पर सवाल मत करना। समझ गई?”
“जी मिस्ट्रेस…” मैंने सिर झुकाकर कहा। मुझे पता था कि इस छोटी सी बात की कीमत मुझे बाद में चुकानी पड़ेगी।
हम रेस्टोरेंट से निकले और शीतल मुझे Club DNA (DLF Avenue, Saket) ले गई। मैं सोच रही थी कि वो सिर्फ मजाक कर रही होगी, लेकिन अब असली डर लग रहा था। अगर Dinesh सच में आ गया तो? वो मुझसे क्या expect कर रही है?
क्लब के अंदर घुसते वक्त दरवाजे पर ID चेक हुआ। bouncer ने मेरी ड्राइविंग लाइसेंस देखा, एक पल मुझे घूरा, फिर आँखें घुमाकर अंदर जाने का इशारा कर दिया।
अंदर घुसते ही संगीत की दीवार से टकराया। धीमी लाइट्स, ब्लैक लाइट्स, स्टोर्ब लाइट्स — पूरा माहौल झूम रहा था। डांस फ्लोर पर लोग दीवाने होकर नाच रहे थे। हम भीड़ में से गुजरकर डांस फ्लोर के पास एक टेबल पर बैठ गए।
मैंने दो ड्रिंक्स ऑर्डर किए। शीतल ने मुझे वोडका-क्रैनबेरी दिया। मैं धीरे-धीरे पीती रही। पहले तो बहुत घबराहट हो रही थी — हर कोई मुझे देख रहा है, लग रहा था। लेकिन धीरे-धीरे अल्कोहल का नशा चढ़ा और मैं थोड़ी ढीली पड़ गई।
मैं वहाँ बैठी संगीत का आनंद ले रही थी कि अचानक किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा।
मैंने ऊपर देखा…
वही गहरी नीली आँखें।
Dinesh।
वो अब साधारण शर्ट और जीन्स में था, लेकिन अब भी उतना ही आकर्षक लग रहा था। उसने मुस्कुराते हुए कहा,
“तो… मिल गए आखिरकार Gopika।”
मेरा दिल जोर से धड़क उठा। शीतल मेरी तरफ देखकर शरारती मुस्कान दे रही थी।
मैंने हल्की, नाजुक आवाज में कहा, “हाँ… आप आ गए।”
Dinesh ने मेरे बगल में बैठते हुए पूछा, “तो बताओ… तुम दोनों यहाँ अक्सर आती हो?”
मैं कुछ बोलने ही वाली थी कि शीतल ने मेरी जाँघ पर हाथ रखकर दबाया — मतलब “चुप रह, मैं संभाल लूँगी”।
मेरी टाइट ब्लैक ड्रेस, बिना पैंटी, सूजी हुई गांड, हाई हील्स और लंबी चोटी… सब कुछ मुझे याद दिला रहा था कि मैं अब गोपिका हूँ।
और Dinesh की वो नीली आँखें मुझे घूर रही थीं।
“हाय,” Dinesh ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं तुम दोनों लेडीज़ के साथ बैठ सकता हूँ?”
मैंने चौड़ी आँखों से शीतल की तरफ देखा। वो बस शरारती मुस्कान के साथ सिर हिला दी।
“हाँ… जरूर,” मैंने हल्की-सी काँपती आवाज में कहा।
Dinesh मेरे बगल में बैठ गया। संगीत इतना तेज था कि बात करने के लिए हमें चिल्लाना पड़ रहा था। कुछ देर बातें हुईं — कहाँ की हो, क्या करती हो — मैंने जितना हो सके feminine अंदाज में जवाब दिए।
फिर Dinesh ने मेरी तरफ देखा और पूछा, “डांस करेंगे?”
“नहीं… थैंक यू,” मैंने तुरंत कहा, “मैं अच्छी नहीं नाचती।”
शीतल ने तुरंत बीच में बोल दिया, “अरे गो… मतलब Gopika, जाओ ना। थोड़ा enjoy करो। Let loose!”
मुझे इशारा समझ आ गया। मैं उठी और Dinesh के साथ डांस फ्लोर पर चली गई।
मैंने घर पर आईने के सामने जो प्रैक्टिस की थी, वो काम आ गई। कमर हिलाकर, नाजुक कदमों से, हाथ घुमाकर नाचने लगी। Dinesh भी अच्छा डांसर था। गाने बदलते रहे और मैं धीरे-धीरे मजा लेने लगी।
फिर DJ ने एक slow रोमांटिक गाना लगा दिया।
मेरा शरीर अकड़ गया। Dinesh ने दोनों हाथ मेरी कमर पर रखे और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मैं घबरा गई, लेकिन खुद को संभाला और अपने हाथ उसके गले में डाल दिए। हम बहुत करीब थे। उसकी छाती मेरी छाती से लग रही थी।
“मैं यकीन नहीं कर पा रहा… तुम कितनी सुंदर हो Gopika,” उसने मेरे कान में कहा। “मुझे ऐसी लड़कियाँ कम ही मिलती हैं।”
मैं शर्म से लाल हो गई। “शुक्रिया… मैं भी खुश हूँ कि तुम आए।”
धीरे-धीरे मैंने अपना सिर उसके कंधे पर टिका दिया। उसकी गर्मी, उसकी खुशबू, और उसकी मजबूत बाहें… एक पल के लिए मैं भूल गई कि मैं गोपाल हूँ। मेरी सूजी हुई गांड अभी भी दर्द कर रही थी, लेकिन उसकी बाहों में वो दर्द भी अजीब-सा अच्छा लग रहा था।
गाना खत्म होने के बाद हम टेबल पर वापस आए।
शीतल ने मुस्कुराते हुए कहा, “Gopika, जाकर दो और ड्रिंक्स ले आ।”
जब मैं वापस आई तो Dinesh गायब था।
“Dinesh कहाँ गया?” मैंने बैठते हुए पूछा।
“बाथरूम गया है,” शीतल ने कहा, फिर अपनी वो खतरनाक मुस्कान दिखाई, “तुम दोनों बहुत cute लग रहे थे। खासकर जब तूने अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया था। बहुत slutty look था। घर जाकर मैं तुझे दिखाऊँगी कि छोटी-छोटी teasing sluts का क्या हाल किया जाता है।”
मेरा पेट पलट गया। डर भी लगा और शर्म भी। लेकिन सच तो ये था कि Dinesh के कंधे पर सिर रखकर मुझे अच्छा लगा था।
शीतल ने मेरी तरफ झुककर फुसफुसाया,
“और हाँ Gopika… मैंने उसे हमारे बारे में सब कुछ बता दिया है।”
मैं चौंक गई। “सब कुछ?”
“हाँ… सब कुछ,” वो हँसी, “कि तू मेरी गोपिका है, मेरी स्लेव है, क्रॉसड्रेसर है… सब। और वो idea को काफी पसंद करता है।”
मैं हैरान थी। “सच में?”
शीतल ने मेरी जाँघ पर हाथ फेरा और बोली,
“हाँ… और वो जल्दी वापस आएगा। अब देखते हैं… मेरी गोपिका आगे क्या करती है।”
मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था।
बिना पैंटी, टाइट ब्लैक ड्रेस में, सूजी हुई गांड, और अब Dinesh सब कुछ जानता हुआ…
रात अभी बहुत लंबी होने वाली थी।
“बिल्कुल सही,” शीतल ने मेरे कान में फुसफुसाया। “अब से जो कुछ भी वो करना चाहे, तू उसे करने दे। वो तुझे जहाँ चाहे छू सकता है, जितना चाहे छू सकता है। बस एक बात — उसे कहीं ले जाकर सेक्स मत करने देना। बाकी सब… allowed है।”
मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था।
कुछ देर बाद Dinesh वापस आया और सीधे मेरी कुर्सी के पास वाली कुर्सी खींचकर बैठ गया। उसने अपना हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया।
“तो…” वो मुस्कुराया, “तेरी मिस्ट्रेस ने मुझे तेरे बारे में सब कुछ बता दिया है।”
उसका हाथ धीरे-धीरे मेरी जाँघ के अंदर सरकने लगा। ड्रेस के नीचे, बिना पैंटी… उसकी उँगलियाँ मेरे छोटे, सख्त हो चुके लंड तक पहुँच गईं। वो उसे हल्के-हल्के सहलाने लगा।
“वाह… सच है। कितनी प्यारी clit है तेरी। बहुत sexy,” उसने कान में कहा।
मुझे निराशा हुई जब उसने हाथ बाहर निकाल लिया, लेकिन फिर उसने मेरे सिर के पीछे हाथ डाला और मुझे अपनी तरफ खींच लिया।
उसका पहला किस बहुत नरम था।
दूसरा गहरा।
तीसरा… उसकी जीभ मेरे होंठों पर फिसली और मैंने मुँह खोल दिया।
हम दोनों फ्रेंच किस करने लगे — जीभें एक-दूसरे में लिपटी हुईं, मुँह के अंदर घूम रही थीं। क्लब का संगीत, स्टोर्ब लाइट, भीड़ — सब भूल गया। मैंने अपनी बाहें उसके गले में डाल दीं और गहरे-गहरे किस करते रहे। मेरी सूजी हुई गांड अभी भी दर्द कर रही थी, लेकिन उसकी मजबूत बाहों में वो दर्द भी अच्छा लग रहा था।
बहुत देर तक हम kiss करते रहे। जब Dinesh अलग हुआ तो उसकी आँखों में चमक थी।
“बहुत खूबसूरत था Gopika,” उसने कहा।
मैं बस शरमा गई।
अगले दो घंटे हम तीनों बातें करते रहे। बीच-बीच में Dinesh मुझे डांस फ्लोर पर ले जाता। एक बार slow song पर फिर से हम close dance करते हुए kiss करते रहे। वो हमारे lifestyle के बारे में बहुत curious था। जब उसे पता चला कि ये मेरी सिर्फ दूसरी रात है औरत बनकर, तो वो और ज्यादा excited हो गया।
एक बार मैंने पीछे मुड़कर अपनी ड्रेस थोड़ी ऊपर की और उसे अपनी चाबुक और बेंत से लाल-लाल पड़ी गांड दिखा दी। उसकी आँखें चमक उठीं।
“वाह… कितनी सुंदर मार खाई है तू,” उसने कहा और अपना हाथ फिर मेरी ड्रेस के अंदर डाल दिया। वो मेरी “clit” को हल्के-हल्के सहलाता रहा, लेकिन जानबूझकर मुझे झड़ने नहीं दे रहा था। बस tease… लगातार tease।
मैं अब पागल हो रही थी।
आखिरकार शीतल ने अपनी घड़ी देखी और बोली,
“देर हो रही है। Gopika, अब घर चलते हैं।”
मुझे बहुत निराशा हुई। मैं सच में enjoy कर रही थी। Dinesh के साथ… उसकी छुअन… उसके किस।
शीतल उठी। Dinesh ने मुझे आखिरी बार गले लगाया और कान में फुसफुसाया,
“फिर मिलेंगे Gopika… बहुत जल्द।”
कार में बैठते वक्त शीतल ने मेरी जाँघ पर हाथ रखा और बोली,
“घर चल… मेरी छह सहेलियाँ इंतजार कर रही हैं।
शिवानी, नंदिनी, अंजलि, रीना, आश्विनी और प्रतिक्षा।
सबको तुझे इस ड्रेस में, इस मेकअप में, और Dinesh के kiss का स्वाद लेकर देखना है।
आज रात तुझे बहुत रोना पड़ेगा गोपिका… बहुत।”
मैं कार की सीट पर बैठी, सूजी गांड दब रही थी, बिना पैंटी, Dinesh के kiss का स्वाद अभी भी होंठों पर… और घर लौटने का डर।
रोहिणी की तरफ कार बढ़ रही थी।
अब असली रात शुरू होने वाली थी।
“जी मिस्ट्रेस,” मैंने Dinesh की तरफ देखा और नरम आवाज में कहा, “मुझे बहुत अच्छा लगा Dinesh। उम्मीद है फिर कभी मिलेंगे।”
“मुझे भी Gopika,” Dinesh ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। “अगर तुम्हारी मिस्ट्रेस को कोई एतराज न हो तो अपना नंबर दे दो… कभी कॉल कर लूँ।”
मैंने शीतल की तरफ देखा। वो बस मुस्कुराई और सिर हिला दिया। मैंने एक नैपकिन पर अपना नंबर लिखकर उसे दे दिया।
“बहुत अच्छा, थैंक यू,” Dinesh ने कहा। फिर उसने मुझे एक गहरा, लंबा किस किया, आँख मारकर मुड़ा और चला गया।
कार में बैठते ही शीतल ने मुझे घूरा और हँसते हुए बोली,
“अरे वाह गोपिका… तू तो कुछ और ही निकली। वो पहला किस… कितना गहरा था। मैं देख रही थी — तू पूरी तरह enjoy कर रही थी। मुझे नहीं पता था कि मेरी स्लेव इतनी बड़ी रंडी है। उसने तेरी ड्रेस के अंदर हाथ डाला और तू चुपचाप बैठी रही।”
मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया। लेकिन सच था — मैंने enjoy किया था। Dinesh की उँगलियाँ, उसके किस, उसकी छुअन… सब कुछ।
शीतल ने मेरी जाँघ पर हाथ रखा और बोली,
“घर चल… आज रात की सेशन पिछली वाली रातों को बच्चों का खेल बना देगी।”
घर पहुँचकर (रात 11:50)
जैसे ही घर पहुँचे, शीतल ने मुझे तुरंत ब्लैक ड्रेस उतारने को कहा। अब मैं सिर्फ ब्लैक गार्टर बेल्ट, लेस स्टॉकिंग्स और ब्लैक हाई हील्स में थी।
वो मुझे बेडरूम में ले गई और पुरानी पोजीशन में बाँध दिया — कमर झुकी हुई, हाथ पीछे खिंचे छत के हुक से, टाँगें बँधी फर्श के हुक से, और मुँह में गैग।
शीतल मेरे सामने खड़ी हो गई। उसने सारी कपड़े उतार दिए — पूरी तरह नंगी। फिर उसने 8 इंच वाला लाल स्ट्रैप-ऑन अपनी कमर पर बाँधना शुरू किया।
“चिंता मत कर गोपिका,” वो बोली, “हमेशा तुझे इसी तरह नहीं बाँधूँगी। मैंने ऑनलाइन bondage furniture ऑर्डर कर दिए हैं। जल्दी ही ये कमरा तेरे लिए पूरा torture chamber बन जाएगा। अच्छा रहेगा ना?”
उसने बेंत और चाबुक उठाए, जैसे चुन रही हो कि पहले कौन-सा इस्तेमाल करे। आखिर में उसने चाबुक रख दिया और बेंत हाथ में लेकर मेरे पीछे चली गई।
मैं तन गई — दर्द का इंतजार कर रही थी।
तभी अचानक doorbell बजी।
“ट्र्र्र्र्रिंग… ट्र्र्र्र्र्रिंग…”
शीतल नंगी, स्ट्रैप-ऑन बाँधे हुए, हाथ में बेंत लिए बाहर चली गई।
मैं अंदर ही अंदर घबरा गई — ये किसको दरवाजा खोलने जा रही है इस हालत में?
कुछ मिनट बाद लिविंग रूम से आवाजें आने लगीं। कई लोगों की।
फिर शीतल वापस कमरे में आई।
मैंने देखा और मेरी आँखें फट गईं।
शीतल के पीछे थीं — शिवानी, नंदिनी, अंजलि, रीना, आश्विनी और प्रतिक्षा।
सभी तैयार थीं — sexy Indian outfits में, लंबी-लंबी बालें खुली या स्टाइल की हुई, मेकअप, और हाथों में बैग्स भरे toys, ropes, clamps और मोमबत्तियों से।
रीना (अपनी लंबी चोटी घुमाते हुए) हँसी, “वाह… गोपिका तो Dinesh के साथ डांस करके आई है।”
नंदिनी (खुले बाल) मेरे पास आई, मेरी सूजी गांड पर हाथ फेरा और बोली, “आज तो हम सब मिलकर तुझे चोदेंगे।”
अंजलि (बड़ा हेयर बन) ने बेंत शीतल से ले ली, “पहले हम… फिर तू शीतल।”
मैं बंधी हुई, नंगी, गैग में, काँप रही थी।
रात अभी शुरू हुई थी…
और अब सातों औरतें मेरे साथ थीं।
शीतल कमरे में घुसी, और उसके पीछे… Dinesh।
वो पूरी तरह नंगा था। उसका मोटा, लंबा लंड सामने लटक रहा था। हाथ में एक बड़ा, भारी wooden paddle था। वो मुस्कुराते हुए रुका और पूरे कमरे का नजारा देखा — मैं बंधी हुई, नंगी, गैग में, गांड ऊपर, सूजी हुई, चाबुक के निशानों से भरी हुई।
जैसे ही उसकी नजर मुझ पर पड़ी, उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा। पूरी तरह खड़ा होकर वो शीतल के स्ट्रैप-ऑन जितना मोटा और लंबा दिख रहा था।
मेरी आँखें फट गईं। मैं घबराकर शीतल की तरफ देखने लगी, फिर Dinesh की तरफ। समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है।
शीतल मेरे सामने आई और बोली,
“तेरी आँखों में confusion साफ दिख रहा है गोपिका। सुन… Dinesh मेरा हाईस्कूल का दोस्त है। उसे crossdressers बहुत पसंद हैं। Bondage, S&M और cruelty में वो मुझसे भी ज्यादा expert है। जब मैंने फैसला किया कि तुझे पूरी तरह अपनी स्लेव गर्ल बना दूँगी, तो सबसे पहले मैंने उसी को फोन किया। वो तुरंत तैयार हो गया। और अब… वो यहाँ है।”
जब शीतल बात कर रही थी, Dinesh मेरे पास आया। उसने अपना खड़ा लंड मेरे चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दिया — गालों पर, होंठों पर, नाक पर। वो कुछ बोल नहीं रहा था, बस मुस्कुरा रहा था।
फिर वो मेरे पीछे चला गया। उसने अपनी हथेली से मेरी सूजी, लाल गांड को धीरे-धीरे सहलाया।
“ये बहुत मजेदार होने वाला है,” उसने कहा।
“फूँ…”
हवा में paddle की सनसनाहट हुई।
“धड़ाक्क्क्क!!!!”
पहला वार मेरी गांड पर पड़ा — इतना जोरदार कि मेरा पूरा शरीर झटके से आगे की तरफ उछला। दर्द की बिजली रीढ़ की हड्डी तक दौड़ गई। गैग के अंदर से मेरी चीख फट पड़ी।
“MMMMMMMMHHHHHHHH!!!!!!”
Dinesh रुका नहीं। वो paddle को बार-बार उठा-उठाकर मेरी पहले से चाबुक और बेंत से सजी हुई गांड पर मारने लगा।
धड़ाक्क्क!! धड़ाक्क्क!! धड़ाक्क्क्क!!
हर मार के साथ मेरी लंबी चोटी हिल रही थी। निप्पल्स अभी भी दर्द कर रहे थे। कंधे फट रहे थे। और अब ये नया, भारी paddle मेरी गांड को तोड़ रहा था।
शीतल, शिवानी, नंदिनी, अंजलि, रीना, आश्विनी और प्रतिक्षा — सातों औरतें मेरे चारों तरफ खड़ी थीं। सब हँस रही थीं, ताली बजा रही थीं।
रीना (अपनी लंबी चोटी घुमाते हुए) बोली, “मारो Dinesh… और जोर से। इसकी गांड आज फटनी चाहिए।”
नंदिनी मेरे सामने आई, मेरे निप्पल्स मरोड़ते हुए बोली, “Dinesh के लंड का स्वाद चखने के लिए तैयार हो जा गोपिका।”
Dinesh ने paddle नीचे रखा, मेरी गांड को दोनों हाथों से फैलाया और अपनी उँगली अंदर डाल दी।
“बहुत टाइट है अभी भी… लेकिन आज हम इसे खोल देंगे,” उसने कहा।
शीतल मेरे कान में फुसफुसाई,
“आज रात तू Dinesh का भी गुलाम है गोपिका।
वो जो चाहेगा, वो करेगा।
और हम सब देखेंगे।”
मैं बंधी हुई, रोती हुई, काँपती हुई… Dinesh के बड़े, खड़े लंड को अपनी गांड के पास महसूस कर रही थी।
रात अभी शुरू हुई थी।
और अब असली यातना शुरू होने वाली थी।
जो आपने अभी पढ़ा, वो तो बस शुरुआत थी — कहानी का सबसे रोमांचक हिस्सा अभी बाकी है!
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