📝 Story Preview:
साड़ी में मॉल ले गई गर्लफ्रेंड...फिर जो हुआ... हैरान रह जाओगे!
“नमस्ते मेरे प्यारे पाठकों… मैं Anita।

आज मैं आपके सामने एक ऐसी कहानी लेकर आई हूँ जो शुरू तो एक छोटी सी नाराज़गी से होती है, लेकिन खत्म… वो आप खुद पढ़कर ही समझोगे।
कहानी है एक लड़के की… जो अपनी गर्लफ्रेंड Anu से बहुत प्यार करता था। इतना प्यार कि जब Anu ने रोकर शर्त रखी, तो उसने बिना सोचे-समझे हाँ कर दी।
मेहंदी लग चुकी थी। साड़ी पहनी जा चुकी थी। चूड़ियाँ खनक रही थीं। और लिपस्टिक… वो कड़वी सी लिपस्टिक भी लग चुकी थी।

अब सिर्फ एक काम बचा था – मॉल जाना।
लेकिन मॉल पहुँचते ही जो नज़ारा सामने आया… उससे उसका दिल धड़कना भूल गया।
क्या आप जानना चाहते हो कि Anu की सहेलियाँ वहाँ क्यों खड़ी थीं?
क्या आप जानना चाहते हो कि उस लड़के ने आईने में खुद को पहली बार साड़ी में देखकर क्या महसूस किया?
क्या आप जानना चाहते हो कि जब Anu ने कहा ‘I love you’ तो उसके मन में कौन-सी तस्वीरें घूम गईं?
तो चलो… पहले चैप्टर में चलते हैं। जहाँ सब कुछ शुरू होता है – एक छोटी सी गुस्से वाली बातचीत से।”
**Chapter 1: मेहंदी और नाराज़गी**
Anu मेरे सामने ज़मीन पर बैठ गई थी। उसके हाथ में मेहंदी का कोन था और आँखों में वो शरारती चमक, जो मुझे हमेशा घबरा देती थी।
“हाथ आगे करो,” उसने मीठे स्वर में कहा।

मैंने हँसते हुए हाथ बढ़ा दिए। “फिर से? कल ही तो लगाई थी।”
“आज वाली खास है,” उसने जवाब दिया और कोन दबाते हुए मेरी हथेली पर डिज़ाइन बनाना शुरू कर दिया। ठंडी मेहंदी की अनुभूति हाथों पर फैल रही थी। Anu बहुत ध्यान से लगा रही थी—फूल, बेल, और बीच में एक छोटा सा दिल। वह कभी-कभी मुस्कुरा जाती, मानो कोई सीक्रेट प्लान बना रही हो।
पंद्रह-बीस मिनट में दोनों हाथ और पैरों पर मेहंदी लग चुकी थी। Anu ने मेरे हाथों को सावधानी से सुखाया, फिर अचानक उठ खड़ी हुई।
“अब उठो। आज पूरा गेटअप करना है।”
मैंने भौंहें चढ़ाईं। “क्या मतलब?”
वह अलमारी के पास गई और एक गहरे लाल रंग की साड़ी निकालकर मेरे सामने लहरा दी। साथ में क्रीम कलर का ब्लाउज़, मैचिंग पेटिकोट, और एक डिब्बे में चूड़ियाँ, बिंदी, और मेकअप की चीज़ें।
“Anu… ये क्या है?” मेरी आवाज़ में हल्की घबराहट आ गई।
“तुम्हें खुश करने के लिए,” वह मुस्कुराई। “मैंने सोचा आज तुम मेरे लिए लड़की बनोगे। बस थोड़ी देर के लिए। फोटो निकाल लूँगी, उसके बाद उतार देना।”
मैं हँसने लगा, लेकिन हँसी में डर छिपा था। “मज़ाक मत कर। मैं लड़का हूँ।”
“तो क्या हुआ?” Anu ने साड़ी मेरे कंधे पर डाल दी। “आज सिर्फ मेरे लिए। प्लीज़…”
उसकी आँखों में विनती थी। मैं मना नहीं कर सका। आखिर वह Anu थी।
अगले चालीस मिनट कमरे में एक अजीब सी खामोशी छाई रही, जिसमें सिर्फ कपड़ों की सरसराहट और मेरे दिल की धड़कनें सुनाई दे रही थीं।
पहले पेटिकोट। Anu ने उसे मेरी कमर में बाँधा। ढीला कपड़ा टाँगों के आसपास लहरा रहा था। फिर ब्लाउज़। उसने पीछे से हुक लगाए। ब्लाउज़ थोड़ा टाइट था। सीने पर कपड़े का दबाव महसूस हो रहा था—अजनबी और अजीब।
फिर आई साड़ी।
Anu ने मुझे खड़ा किया और बड़ी सावधानी से प्लीट्स बनाते हुए साड़ी कमर में लपेटने लगी। हर लपेट के साथ मेरा शरीर और सिकुड़ता जा रहा था। साड़ी का पल्लू उसने मेरे बाएँ कंधे पर डाला, फिर घूंघट की तरह आधा चेहरा ढक दिया।
“अब चूड़ियाँ,” उसने कहा।
लाल और सुनहरी चूड़ियाँ एक-एक करके दोनों हाथों में पहनाईं। खनक की आवाज़ कमरे में गूँजी। फिर कर्णफूल जैसे छोटे झुमके। कानों में वजन महसूस हुआ। बिंदी माथे पर लगाई। और आखिर में…

लिपस्टिक।
Anu ने मेरे होंठों को रुमाल से पोछा, फिर गहरे मैरून रंग की लिपस्टिक निकाली। “मुँह खोलो थोड़ा… नहीं, ऐसे ही रहो।”
ठंडी लिपस्टिक होंठों पर फिसली। पहली बार किसी ने मेरे होंठों पर लिपस्टिक लगाई थी। स्वाद कड़वा था। मैं चाहता था कि आँखें बंद कर लूँ, लेकिन Anu की आँखों में देखता रहा।
जब सब कुछ पूरा हो गया, तो Anu ने मुझे आईने के सामने खड़ा कर दिया।
मैंने खुद को देखा… और साँस रुक गई।
आईने में एक लड़की खड़ी थी। गहरे लाल साड़ी में, चूड़ियाँ खनकाती, बिंदी चमकती, और मैरून होंठ। घूंघट के अंदर से मेरी आँखें डर और अजीब सी उत्सुकता से भरी हुई थीं। चेहरा पहचान में तो आ रहा था, लेकिन पूरा लुक इतना बदल गया था कि कुछ सेकंड के लिए मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि वह मैं ही हूँ।
“देखो कितनी प्यारी लग रही हो,” Anu ने पीछे से कहा और हँसने लगी।
मैंने गला साफ किया। “Anu… काफी हो गया। अब फोटो मत खींचो।”
लेकिन वह पहले ही फोन निकाल चुकी थी।
“एक-दो तो बन जाएँगे न?”
“नहीं!” मेरी आवाज़ में पहली बार सख्ती आ गई। “तुम्हें खुश करने के लिए मेहंदी लगाई थी, लेकिन तुमने तो ज़िद पकड़ ली—ये साड़ी, चूड़ियाँ, मेकअप और ऊपर से ये कड़वी सी लिपस्टिक भी… अब कम से कम तस्वीर मत लो, वरना सच में कह रहा हूँ, तुमसे कभी बात नहीं करूँगा। मज़ाक मत समझना… और प्लीज़ हँसना बंद करो।”
Anu का चेहरा अचानक गंभीर हो गया। हँसी गायब हो गई। वह फोन नीचे रखती हुई बोली, “तो तुम मुझ पर गुस्सा हो रहे हो न? और डाँट भी रहे हो न? ठीक है… अब मैं भी तुमसे बात नहीं करूँगी। आज के बाद कभी नहीं।”
उसकी आँखें भर आईं। वह मुँह फेरकर बिस्तर के किनारे बैठ गई और रोने लगी। कंधे हल्के-हल्के काँप रहे थे।
मेरा दिल जैसे मुट्ठी में सिमट गया।
मैं साड़ी की प्लीट्स संभालते हुए उसके पास गया। चूड़ियाँ खनक उठीं। “बाबू… नहीं। मैं तुमसे गुस्सा नहीं हूँ। प्लीज़ मुझे माफ कर दो। देखो…” मैंने दोनों कान पकड़ लिए। “सच में माफ कर दो।”
Anu ने मुँह नहीं फेर। थोड़ी देर खामोशी रही। फिर उसने धीरे से कहा, “ठीक है… माफ कर दूँगी। लेकिन एक शर्त पर।”
मैंने बिना सोचे जवाब दे दिया, “कुछ भी करूँगा।”
वह उठी। आँखें अभी भी गीली थीं, लेकिन उनमें फिर से वह शरारती चमक आ गई थी। वह मेरे बहुत करीब आई और धीरे से बोली—
“तो फिर… इसी गेटअप में मेरे साथ मॉल चलो। बस।”
मैं चौंक गया। “क्या?! मज़ाक कर रही हो?”
Anu ने सिर हिलाया। “बिल्कुल नहीं।”
मेरी आवाज़ काँप गई। “अगर कोई पहचान गया तो…?”
**Chapter 2: आईने के सामने**
Anu की शर्त के बाद कमरे में कुछ सेकंड के लिए सन्नाटा छा गया।
मैं अभी भी आईने के सामने खड़ा था। दोनों हाथों में लाल-सुनहरी चूड़ियाँ खनक रही थीं। साड़ी का पल्लू कंधे से फिसलने को था, जिसे मैं बार-बार संभाल रहा था। मैरून लिपस्टिक होंठों पर चिपकी हुई थी और उसका कड़वा स्वाद अभी भी ज़ुबान पर तैर रहा था।
Anu मेरे पीछे खड़ी थी। वह आईने में मेरी आँखों से मिलती हुई बोली, “अब ठीक से देखो खुद को।”
मैंने गहरी साँस ली और आईने में देखा।
पहली बार इतनी देर तक… इतनी नज़दीक से।
चेहरा मेरा ही था, लेकिन बाकी सब कुछ किसी और का लग रहा था। माथे पर छोटी सी लाल बिंदी चमक रही थी। कानों में हल्के झुमके हिल रहे थे। गर्दन के नीचे ब्लाउज़ का गला था, जो मेरे सीने को हल्का सा दबा रहा था। साड़ी की प्लीट्स कमर पर सटी हुई थीं और नीचे की तरफ लहरा रही थीं। पेटिकोट के कारण टाँगों में कपड़े का अहसास बिलकुल अलग था—नॉर्मल पैंट से बहुत अलग। हर छोटी सी हलचल पर चूड़ियाँ खनक उठतीं और वह आवाज़ मुझे बार-बार याद दिलाती कि मैं अभी भी “उस” रूप में हूँ।
मैंने अपने होंठों को देखा। मैरून रंग ने उन्हें स्त्रीलिंग बना दिया था। मैंने उंगली से हल्के से छुआ। लिपस्टिक थोड़ी सी उंगली पर लग गई।
Anu हँस पड़ी। “अरे छुओ मत! खराब हो जाएगी।”
मैंने जल्दी से हाथ पीछे खींच लिया। “ये… ये बहुत अजीब लग रहा है।”
“अजीब या प्यारा?” उसने शरारत से पूछा और पास आकर साड़ी का पल्लू ठीक किया। उसने पल्लू को और ऊपर खींचकर घूंघट जैसा बना दिया। अब मेरा आधा चेहरा ढक चुका था। सिर्फ आँखें और होंठ दिख रहे थे।
आईने में अब एक लड़की खड़ी थी जो घूंघट के अंदर से डर और शर्म से मुझे देख रही थी।
मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था। एक हिस्सा कह रहा था—‘यह गलत है, इसे उतार दो’। दूसरा हिस्सा… चुपचाप आईने में देखे जा रहा था। जैसे कोई अनजाना सा आकर्षण हो। मैंने आँखें फेर लीं।
Anu ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। “घबराओ मत। तुम बहुत प्यारी लग रही हो। सच में।”

“मत कहो प्यारी…” मेरी आवाज़ कमज़ोर निकली। “मैं लड़का हूँ।”
“अभी के लिए लड़की हो,” उसने हँसते हुए कहा। “और लड़कियाँ आईने के सामने इतनी देर खड़ी रहती हैं। तुम भी रहो।”
वह पीछे हट गई और बिस्तर पर बैठकर मुझे देखती रही। मैं फिर से आईने की तरफ मुड़ा। इस बार थोड़ा और ध्यान से। साड़ी का रंग गहरे लाल में सुनहरी बॉर्डर था। ब्लाउज़ क्रीम रंग का था और आस्तीनें कोहनी तक थीं। चूड़ियाँ हर बार हाथ हिलाने पर खनकतीं। मैंने धीरे से कमर पर हाथ फेरा। साड़ी का कपड़ा चिकना और थोड़ा भारी था। पैरों में अभी भी मेरी पुरानी चप्पलें थीं, जो इस पूरे लुक के साथ बिलकुल बेमेल लग रही थीं।
Anu ने मेरी नज़र पकड़ ली। “चप्पलें नहीं चलेंगी। रुको।”
वह अलमारी से एक जोड़ी सर concaves हील्स निकाल लाई। काले रंग की, छोटी एड़ी वाली। “ये पहनो।”
मैंने सिर हिलाया। “नहीं… इनसे नहीं चल पाऊँगा।”
“ट्राय तो करो,” उसने ज़िद की।
मैंने हिचकिचाते हुए चप्पलें उतारीं और हील्स पहनीं। पहली बार एड़ी का अनुभव। संतुलन बिगड़ गया। मैंने दीवार पकड़ ली। Anu हँसने लगी। “अरे आराम से! पहले घर में चलो।”
मैंने दो-चार कदम बढ़ाए। हील्स पर चलना अजीब था। साड़ी के पल्लू को एक हाथ से संभालना पड़ता था और दूसरे हाथ से चूड़ियाँ खनकती रहतीं। हर कदम के साथ मन में एक ही ख्याल आ रहा था—‘बाहर जाऊँगा तो क्या होगा?’
Anu उठकर मेरे पास आई। उसने मेरे बालों को हल्के से ठीक किया (मेरे बाल छोटे थे, लेकिन उसने एक साइड में हल्की सी क्लिप लगा दी)। फिर उसने मेरी ठुड्डी पकड़कर चेहरा ऊपर किया और बोली, “अब तैयार हो?”
मैंने आईने में आखिरी बार देखा।
घूंघट के अंदर से मेरी आँखें मुझे वापस देख रही थीं। शर्म थी… बहुत शर्म थी। लेकिन उसके साथ एक अजीब सी बेचैनी भी थी। जैसे कोई दरवाज़ा थोड़ा सा खुल गया हो और मैं उसके पार झाँक रहा हूँ।
“Anu…” मेरी आवाज़ काँपी। “घर से निकलने में डर लग रहा है। अगर रास्ते में कोई देख ले तो?”
Anu ने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए। चूड़ियाँ एक साथ खनक उठीं। वह मेरी आँखों में देखती हुई बोली, “कोई नहीं देखेगा। घूंघट रखा है न। और मैं तुम्हारे साथ हूँ। बस मेरा हाथ पकड़े रहना।”
मैंने धीरे से सर हिलाया। लेकिन मन के अंदर आवाज़ें चल रही थीं—
‘क्या कर रहा हूँ मैं?’
‘अगर किसी ने पहचान लिया तो?’
‘Anu की खातिर… बस Anu की खातिर।’
Anu ने दरवाज़े की तरफ कदम बढ़ाया और मुड़कर मुस्कुराई। “चलो। मॉल जाना है याद है न?”
मैंने आईने में एक आखिरी नज़र डाली।
लाल साड़ी में लिपटी वो तस्वीर अभी भी वहीं खड़ी थी… और मैं उससे नज़रें नहीं हटा पा रहा था।
**Chapter 3: रास्ते का सफर**
गली में कदम रखते ही मेरी साँस उखड़ गई।
हील्स पर चलना घर के अंदर जितना मुश्किल लगा था, बाहर उससे कहीं ज़्यादा था। हर कदम के साथ एड़ी ज़मीन पर क्लिक करती और साड़ी का निचला हिस्सा हल्के से लहराता। मैंने पल्लू को कसकर पकड़ रखा था ताकि घूंघट न खुले। चूड़ियाँ हर हलचल पर खनक उठतीं—खनक… खनक… मानो वे खुद ही लोगों का ध्यान खींच रही हों।
Anu मेरे बिल्कुल बगल में चल रही थी। उसने मेरा हाथ पकड़ रखा था। उसका हाथ गर्म था, मेरा ठंडा और पसीने से भीगा हुआ।
“धीरे चलो,” उसने धीरे से कहा। “कोई जल्दी नहीं है।”
मैंने जवाब नहीं दिया। गली में दो-तीन लोग खड़े थे। एक रिक्शा वाला हमें देखकर रुक गया। मेरी गर्दन अपने आप झुक गई। घूंघट के अंदर से मैंने आँखें नीची कर लीं। दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था—बाप रे… अगर किसी ने आवाज़ दे दी तो?
Anu ने मेरा हाथ और कस लिया। “घबराओ मत। सब अपने काम में व्यस्त हैं।”
हम छोटी सी पार्किंग की तरफ बढ़े जहाँ Anu की कार खड़ी थी। काली सैडान। Anu ने दरवाज़ा खोला और मुझे आगे वाली सीट पर बैठने का इशारा किया। साड़ी में कार में बैठना भी एक अलग अनुभव था। प्लीट्स संभालते हुए, हील्स को अंदर खींचते हुए मैंने बड़ी मुश्किल से खुद को सीट पर समाया। साड़ी का पल्लू फिर से ठीक करना पड़ा।
Anu ड्राइवर सीट पर बैठ गई और इंजन स्टार्ट कर दिया। कार धीरे-धीरे गली से निकलकर मुख्य सड़क पर आ गई।
अब खिड़की के बाहर दुनिया भाग रही थी।
ऑटो, बाइक, लोग, ट्रैफिक लाइट… हर चीज़ सामान्य लग रही थी, लेकिन मेरे लिए कुछ भी सामान्य नहीं था। मैंने खिड़की की तरफ पीठ कर ली और घूंघट को और आगे खींच लिया। अपने हाथों को गोद में रख लिया। चूड़ियाँ हल्की सी खनक गईं। वह छोटी सी आवाज़ भी मुझे बड़ी लग रही थी।
Anu ने एक बार मेरी तरफ देखा और मुस्कुराई। “तुम बहुत क्यूट लग रही हो अभी।”
“Anu प्लीज़…” मेरी आवाज़ फुसफुसाहट जैसी निकली। “ऐसे मत बोलो।”
“क्यों?” उसने हल्के से छेड़ा। “सच लग रही हो न। अगर मैं तुम्हें न जानती तो सोचती ये कोई नई सहेली है।”
मैंने आँखें बंद कर लीं। उसका मज़ाक सुनकर शर्म और भी बढ़ गई। लेकिन अंदर एक अजीब सी बात हो रही थी। उसकी तारीफ सुनकर गुस्सा तो आ रहा था, लेकिन पूरी तरह नाराज़ भी नहीं हो पा रहा था। जैसे कोई छोटा सा हिस्सा… चुपचाप सुन रहा हो।
कार एक सिग्नल पर रुकी। बगल वाली कार में से एक लड़की ने हमारी तरफ देखा। मेरी साँस रुक गई। मैंने तुरंत सर झुका लिया। Anu ने ध्यान दिया और हँसते हुए बोली, “अरे बाबा, वह तुम्हें नहीं देख रही। अपने फोन में व्यस्त है।”
“पता नहीं…” मैंने धीरे से कहा। “लगता है सब देख रहे हैं।”

“कोई नहीं देख रहा,” Anu ने आवाज़ नरम कर दी। उसने एक हाथ स्टेयरिंग से हटाकर मेरी गोद में रखे हाथ पर रख दिया। उसकी उंगलियाँ मेरी चूड़ियों पर फिसलीं। “मैं हूँ न तुम्हारे साथ। कुछ हुआ तो मैं संभाल लूँगी।”
उसके स्पर्श से थोड़ा सा हौसला मिला। लेकिन दिल की धड़कन अभी भी तेज़ थी। मैंने खिड़की के शीशे में अपनी झलक चुराने की कोशिश की। घूंघट के अंदर से सिर्फ आँखें और मैरून होंठ दिख रहे थे। लिपस्टिक की वजह से होंठ चमक रहे थे। मैंने जल्दी से नज़र फेर ली।
सड़कें बदलती रहीं। बाज़ार की तरफ का इलाका आने लगा। लोग ज़्यादा हो गए। ट्रैफिक बढ़ गया। हर बार जब कोई बाइक हमारे करीब से गुज़रती, मेरा शरीर अपने आप सिकुड़ जाता। साड़ी का कपड़ा कमर पर और सीने पर महसूस हो रहा था। हील्स में पैर हल्के से दुखने लगे थे। लेकिन सबसे ज़्यादा तकलीफ़ मन को हो रही थी—हर सेकंड यही डर कि कहीं कोई पुराना दोस्त, कोई जाना-पहचाना चेहरा न मिल जाए।
Anu ने गाना लगा दिया था। हल्का सा रोमांटिक गाना। वह कभी-कभी गुनगुना रही थी और बीच-बीच में मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी।
“तुम सच में बहुत बहादुर हो,” उसने अचानक कहा। “ज्यादातर लड़के तो इतना भी नहीं कर पाते।”
मैंने सर हिलाया। “बहादुर नहीं… बेवकूफ हूँ शायद।”
Anu हँस पड़ी। “बेवकूफ नहीं। प्यार करने वाला हो। और मुझे वो पसंद है।”
उसकी बात सुनकर मेरा दिल फिर से अजीब सा हुआ। गुस्सा, शर्म, प्यार और डर—सब एक साथ।
फिर कार ने एक मोड़ काटा और सामने बड़ा सा मॉल दिखने लगा। काँच की बिल्डिंग, चमकती लाइट्स, बाहर खड़ी गाड़ियाँ और लोग। मॉल का गेट नज़दीक आ रहा था।
मेरी साँसें तेज़ हो गईं।
“Anu… पहुँच गए?”
“हाँ,” उसने मुस्कुराते हुए कहा और कार को पार्किंग की तरफ मोड़ा। “अब तैयार हो जाओ।”
मैंने घूंघट को और कस लिया। हाथों की हथेलियाँ पूरी तरह पसीने से गीली हो चुकी थीं। चूड़ियाँ काँप रही थीं। हील्स में पैर जैसे पत्थर हो गए हों।
कार पार्किंग में रुकी। Anu ने इंजन बंद किया और मेरी तरफ देखा।
“डरो मत,” उसने धीरे से कहा। “मैं हूँ न।”
मैंने दरवाज़े का हैंडल पकड़ा। बाहर कदम रखने से पहले एक पल के लिए आँखें बंद कीं।
अब वापस मुड़ने का कोई रास्ता नहीं था।
**Chapter 4: मॉल का झटका**
Anu ने कार का दरवाज़ा खोला। बाहर की ठंडी हवा ने मेरे चेहरे को छुआ—घूंघट के अंदर तक। मैंने बड़ी मुश्किल से हील्स संभालते हुए बाहर कदम रखा। साड़ी का पल्लू एक हाथ से कसकर पकड़ा हुआ था, दूसरा हाथ Anu ने थाम रखा था। चूड़ियाँ हल्की सी खनक उठीं। वह छोटी सी आवाज़ मॉल की पार्किंग में भी मुझे बहुत तेज़ लगी।
हम पार्किंग से निकलकर मॉल के मुख्य गेट की तरफ बढ़े। काँच के दरवाज़े चमक रहे थे। अंदर से रोशनी और लोगों की हल्की-हल्की आवाज़ें आ रही थीं। मेरा दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था कि मुझे खुद अपनी धड़कनें सुनाई दे रही थीं। हर कदम पर यही ख्याल आ रहा था—‘बस जल्दी अंदर चले जाएँ… किसी ने पहचान लिया तो?’
Anu ने मेरे हाथ को हल्का सा दबाया। “सँभल कर। हील्स में धीरे चलना।”
मैंने सिर हिलाया और घूंघट को और आगे खींच लिया। अब सिर्फ आँखें और मैरून होंठ ही दिख रहे थे।
काँच का दरवाज़ा अपने आप खुल गया। अंदर की ठंडी एयर कंडीशनिंग ने शरीर को छूते ही एक अजीब सी सिहरन दे दी। साड़ी का कपड़ा शरीर से चिपकने लगा। मैंने नज़रें नीची रखीं और Anu के पीछे-पीछे चलने लगा।
तभी…
“अरे वाह!”
“ओह माई गॉड!”
“ये देखो तो!”
अचानक कई आवाज़ें एक साथ गूँजीं।
मैंने चौंककर सर उठाया।
मॉल के एंट्रेंस हॉल में, ठीक हमारे सामने… Anu की चार सहेलियाँ खड़ी थीं। सबके चेहरों पर मुस्कान और आँखों में शरारत। एक के हाथ में फोन था, जो हमें देखते ही रिकॉर्डिंग मोड में चालू हो गया। दूसरी जोर-जोर से ताली बजा रही थी।
मेरे पैर जैसे वहीं जम गए।
“Anu… ये क्या है?” मेरी आवाज़ फटते-फटते निकली। घूंघट के अंदर मेरा चेहरा जल रहा था।
Anu हँस पड़ी। वह हँसी इतनी खुलकर थी कि उसके कंधे काँप रहे थे। उसने मेरा हाथ नहीं छोड़ा। बल्कि और कस लिया।
“Relax,” उसने मेरे कान के पास झुककर कहा। “मैंने ही बुलाया है।”

मैं समझ नहीं पा रहा था। दिमाग में शोर मच गया था। सहेलियाँ हमारी तरफ बढ़ रही थीं। उनके चेहरों पर हैरानी और मज़े का मिश्रण था।
“असली में हमारी एक शर्त लगी थी,” Anu ने अब सबके सामने कहा। उसकी आवाज़ में जीत का गर्व था। “कौन अपनी बॉयफ्रेंड को लड़की बनाकर मॉल ला सकती है। और आज…” वह मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई, “तुमने प्रूव कर दिया… कि तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो।”
मेरी साँस रुक गई।
शर्त…
यही सब शर्त थी?
मेहंदी, साड़ी, लिपस्टिक, हील्स… सब कुछ सिर्फ इसलिए कि वह अपनी सहेलियों के बीच शर्त जीत सके?
सहेलियों में से एक (रीमा) आगे आई। उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोली, “वाक़ई! साड़ी बहुत अच्छी लग रही है तुम पर। और लिपस्टिक… वाह!”
दूसरी सहेली (काव्या) ने ताली बजाई। “परफेक्ट! Anu तुमने कमाल कर दिया।”
तीसरी ने हँसते हुए कहा, “अगर घूंघट हटा दो तो और मज़ा आए!”
मैंने तुरंत दोनों हाथों से पल्लू और कस लिया। मेरी उंगलियाँ काँप रही थीं। चूड़ियाँ जोर से खनक उठीं। शर्म से मेरा पूरा शरीर जल रहा था। मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था। सिर्फ Anu की तरफ देख रहा था—आँखों में सवाल और धोखे का भाव लेकर।
Anu मेरे और करीब आई। उसने बाकी सहेलियों को हल्के से इशारे से दूर रहने को कहा। फिर उसने दोनों हाथों से मेरे घूंघट के किनारों को पकड़ा और धीरे से मेरी आँखों में देखा।
उसकी आँखों में अभी भी हँसी थी… लेकिन उसके नीचे कुछ और भी था। कुछ नरम।
“I love you,” उसने बहुत धीरे से कहा। सिर्फ मेरे सुनने के लिए।
वे तीन शब्द…
मॉल की रोशनी, सहेलियों की हँसी, चूड़ियों की खनक… सब कुछ एक पल के लिए गायब हो गया।
मेरे मन में अचानक तस्वीरें दौड़ने लगीं।
हमारी शादी… अनू साड़ी में, मैं शेरवानी में।
फिर हनीमून… समुद्र किनारे।
फिर बच्चे… छोटे-छोटे हाथ।
पूरा भविष्य एक झलक में आँखों के सामने तैर गया।
मैं जैसे किसी और दुनिया में चला गया था। Anu की आँखों में खोया हुआ।
तभी अचानक जोर की हँसी ने मुझे वापस खींच लिया।
“अरे ये दोनों रोमांस करने लगे!” रीमा जोर से हँसी।
“परफेक्ट कपल!” काव्या ने कहा।
“फोटो तो बननी चाहिए!” तीसरी सहेली फोन उठाए खड़ी थी।
मैं सपने से जगा। मॉल की रोशनी फिर से आँखों में चुभने लगी। साड़ी का वजन, हील्स का दबाव, होंठों पर लिपस्टिक का कड़वा स्वाद… सब कुछ वापस आ गया। सहेलियाँ हमें घेर चुकी थीं। उनकी नज़रें मुझे ऊपर से नीचे तक स्कैन कर रही थीं। कोई मेरी चूड़ियाँ छूने की कोशिश कर रही थी, कोई साड़ी की बॉर्डर की तारीफ।
Anu ने मुझे अपने पास खींच लिया। उसका हाथ मेरी कमर पर था—साड़ी के ऊपर। वह गर्व से सबको बता रही थी, “देखा? मैंने कहा था न मैं जीतूँगी।”
मैं चुप था।
दिल के अंदर दो आवाज़ें लड़ रही थीं।
एक कह रही थी—‘तुमने मुझे बेवकूफ बनाया’।
दूसरी… अभी भी उसके “I love you” को दोहरा रही थी।
**Chapter 5: परफेक्ट कपल**
सहेलियाँ हमें बीच में लेकर चलने लगीं। मॉल का बड़ा सा कॉरिडोर रोशनी से जगमगा रहा था। दुकानों की चमकदार विंडोज़, लोगों की भीड़, और बीच में मैं… गहरे लाल साड़ी में, हील्स पर लड़खड़ाता हुआ, घूंघट को बार-बार संभालता हुआ।
रीमा मेरे एक तरफ थी, काव्या दूसरी तरफ। Anu ने मेरा हाथ नहीं छोड़ा था। उसका हाथ मेरी कलाई पर था, चूड़ियों के ठीक ऊपर। हर बार जब मैं थोड़ा भी पीछे हटने की कोशिश करता, वह हल्के से दबा देती।
“स्माइल करो यार!” रीमा ने फोन उठाया। “एक ग्रुप फोटो तो बननी चाहिए।”
मैंने सर झुका लिया। “नहीं… प्लीज़।”
“अरे बाबा, घूंघट रखो, कोई पहचान नहीं पाएगा,” काव्या ने हँसते हुए कहा। “तुम तो लग ही रही हो असली लड़की।”
उसकी बात ने मेरे अंदर एक अजीब सा दर्द सा मारा। मैंने जवाब नहीं दिया। Anu ने मेरी तरफ देखा और धीरे से बोली, “एक-दो फोटो निकाल लें? उसके बाद छोड़ देंगे।”
मैं मना करना चाहता था। बहुत ज़ोर से मना करना चाहता था। लेकिन उसकी आँखों में जो चमक थी… वह चमक देखकर मेरा गला जैसे सिमट गया। वह सच में खुश थी। गर्व से भरी हुई। जैसे उसने कोई बड़ी जीत हासिल की हो।
मैंने हल्के से सर हिला दिया।
फोन के कैमरे चमकने लगे। एक, दो, तीन… कई फोटोज़। कभी मैं Anu के साथ, कभी सबके बीच में। हर बार जब फ्लैश पड़ता, मैं पल्लू को और आगे खींच लेता। चूड़ियाँ खनकतीं। हील्स पर खड़े रहना मुश्किल हो रहा था। पैरों के तलवे दुखने लगे थे।
फोटोज़ के बाद हम आगे बढ़े। ब्रांडेड दुकानों के सामने से गुज़रते हुए सहेलियाँ बातें कर रही थीं।
“साड़ी कहाँ से ली Anu?”
“ब्लाउज़ कितना परफेक्ट फिट है!”
“लिपस्टिक का शेड भी कमाल का चुना है।”
हर तारीफ मेरे शरीर पर जैसे चाबुक की तरह लग रही थी। मैं चाहता था कि ज़मीन फट जाए और मैं उसमें समा जाऊँ। लेकिन Anu हर बार मेरी कमर पर हाथ रखकर मुझे अपने पास खींच लेती। उसका स्पर्श साड़ी के ऊपर से महसूस हो रहा था—हल्का, लेकिन बहुत भारी।
हम एक कैफ़े के बाहर रुके। सहेलियाँ कॉफ़ी का ऑर्डर करने की बात करने लगीं। मैंने Anu से धीरे से कहा, “मुझे बैठना है… पैर दुख रहे हैं।”
Anu तुरंत समझ गई। उसने एक बेंच की तरफ इशारा किया जो थोड़ा किनारे पर थी। हम वहाँ गए। मैंने बड़ी सावधानी से साड़ी संभालते हुए बैठने की कोशिश की। प्लीट्स बिखरने लगीं। Anu झुककर उन्हें ठीक करने लगी। उसकी उंगलियाँ मेरी कमर के पास से गुज़रीं। मैंने साँस रोक ली।
“ठीक हो?” उसने धीरे से पूछा।
मैंने घूंघट के अंदर से उसकी आँखों में देखा। “Anu… यह सब कितनी देर चलेगा?”
वह मुस्कुराई। वह मुस्कान में मज़ाक नहीं था। कुछ और था। “थोड़ी देर और। फिर घर चलेंगे। प्रॉमिस।”
रीमा तभी हमारे पास आ गई। “अरे तुम दोनों यहाँ रोमांस कर रहे हो? परफेक्ट कपल सच में!” उसने जोर से कहा। आसपास के कुछ लोग हमारी तरफ देखने लगे। मेरा चेहरा जलने लगा। मैंने तुरंत नज़रें नीचे कर लीं।
काव्या भी आ गई। “बोलो न, कैसा लग रहा है लड़की बनकर?”
मैं चुप रहा। Anu ने जवाब दिया, “उससे पूछो मत। वह अभी शर्म से मर रहा है।” फिर उसने मेरी तरफ देखा और आवाज़ नरम कर दी। “लेकिन मुझे गर्व है।”
उसके शब्द मेरे दिल में उतर गए।
गर्व…
वह मुझ पर गर्व कर रही थी।
मेरे अंदर दो आवाज़ें फिर से लड़ने लगीं।
एक कह रही थी—‘तुमने मुझे सबके सामने बेइज्जत कर दिया’।
दूसरी कह रही थी—‘वह मुस्कुरा रही है… सिर्फ तुम्हारी वजह से’।
मैंने अपनी गोद में रखे हाथों को देखा। लाल-सुनहरी चूड़ियाँ। मेहंदी के हल्के निशान अभी भी हथेलियों पर थे। साड़ी का किनारा उंगलियों से छू रहा था। मैंने धीरे से कपड़े को महसूस किया। चिकना, थोड़ा भारी… और अब शरीर का हिस्सा बनता जा रहा था।
Anu ने मेरा हाथ पकड़ लिया। उसकी उंगलियाँ मेरी उंगलियों में फँस गईं। चूड़ियाँ एक साथ खनक उठीं। उसने मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे कान के पास धीरे से कहा, “तुम आज बहुत खास लग रहे हो। मुझे तुम पर नाज़ है।”
मैंने उसकी आँखों में देखा।
वहाँ सिर्फ शरारत नहीं थी।
एक गहरी चमक थी—प्यार की, जीत की, और कुछ ऐसी जो मैं पहले कभी नहीं देख पाया था।
उस चमक ने मेरे अंदर के तूफान को कुछ सेकंड के लिए शांत कर दिया।
सहेलियाँ फिर से हँसने लगीं। कोई मज़ाक बना रहा था, कोई नई फोटो निकालने की जिद कर रहा था। मॉल की भीड़ के बीच हम पाँच लोग खड़े थे—और मैं उनके बीच एक अजीब सी चुप्पी में डूबा हुआ।
शर्म अभी भी थी। बहुत थी।
लेकिन उसके साथ अब एक और भावना भी घुल गई थी…
जो मैं अभी नाम नहीं दे पा रहा था।
सहेलियाँ धीरे-धीरे बिखरने लगीं। रीमा और काव्या ने आखिरी फोटो निकाली, गले मिले और “परफेक्ट कपल” कहते हुए विदा हो गईं। उनकी आवाज़ें मॉल के कॉरिडोर में गूँजती रह गईं।
Anu ने मेरा हाथ पकड़ा और पार्किंग की तरफ चलने लगी। मैं उसके साथ-साथ चल रहा था। हील्स अब पैरों में दर्द करने लगी थीं। साड़ी का पल्लू मैंने इतना कस रखा था कि उंगलियाँ दुख रही थीं। चूड़ियाँ हर कदम पर खनक रही थीं—अब वह आवाज़ मुझे अपनी साँस जैसी लगने लगी थी।
बाहर की हवा ने चेहरे को छुआ तो थोड़ी राहत मिली। घूंघट के अंदर मेरा चेहरा अभी भी गर्म था। शर्म पूरी तरह गई नहीं थी, लेकिन Anu की आँखों में जो चमक थी, वह बार-बार याद आ रही थी। उसका “I love you” अभी भी कानों में गूँज रहा था।
कार के पास पहुँचकर Anu ने दरवाज़ा खोला। मैंने साड़ी संभालते हुए बैठने की कोशिश की तभी उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली,
“रुको… एक मिनट।”
मैंने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में अब सिर्फ शरारत नहीं थी। कुछ और गहरा था।
“आज तुमने मेरे लिए जो किया…” वह थोड़ा रुकी, “वह मैं कभी नहीं भूलूँगी। लेकिन…”
मेरा दिल एकदम बैठ गया। “लेकिन क्या?”
Anu ने मेरी तरफ पूरा शरीर घुमाया। पार्किंग की हल्की रोशनी में उसका चेहरा चमक रहा था। उसने धीरे से कहा,

“मैं चाहती हूँ कि तुम आज रात भी… इसी तरह रहो।”
मैं चौंक गया। “क्या मतलब?”
“घर जाकर साड़ी मत उतारना,” उसकी आवाज़ धीमी लेकिन साफ थी। “आज रात मेरे साथ रहो। इसी गेटअप में। बस हम दो। कोई सहेली नहीं, कोई मज़ाक नहीं। सिर्फ तुम… और मैं।”
मेरी साँस जैसे अटक गई।
मॉल की शर्त तो किसी तरह कट गई थी। लेकिन यह… यह उससे कहीं आगे की बात थी। पूरी रात? साड़ी में? उसके साथ?
मैं कुछ बोल पाता, उससे पहले Anu का फोन बज उठा।
उसने देखा और माथे पर हल्की सी लकीर पड़ गई। “रीमा का मैसेज है…”
उसने फोन खोला। स्क्रीन की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ी। फिर उसका चेहरा अचानक गंभीर हो गया।
“क्या हुआ?” मैंने पूछा।
Anu ने फोन मेरे की तरफ घुमा दिया।
रीमा ने ग्रुप में एक स्टोरी शेयर की थी। फोटो में मैं और Anu साफ दिख रहे थे—मॉल के कॉरिडोर में, मेरा घूंघट थोड़ा सा खुलने पर मेरा आधा चेहरा, मैरून लिपस्टिक, चूड़ियाँ… सब कुछ। कैप्शन था:
“Anu जीत गई 🔥 परफेक्ट कपल गोल्स 💕”
और नीचे पहले ही तीन-चार लोग रिएक्ट कर चुके थे।
मेरा खून जैसे सूख गया।
“Anu… यह क्या किया उसने?!” मेरी आवाज़ काँप रही थी। “हटाओ इसे! अभी!”
Anu जल्दी-जल्दी टाइप करने लगी। “मैं बोल रही हूँ… अभी डिलीट करवाती हूँ।”
लेकिन तभी… पार्किंग में थोड़ी दूर से एक आवाज़ आई।
“अरे… वो देखो!”
मैंने सर घुमाया।
दो लड़के खड़े थे। उनमें से एक की नज़र हमारी तरफ थी। वह कुछ पहचानने की कोशिश कर रहा था। दूसरा उसका दोस्त बोला, “क्या हुआ?”
पहला लड़का थोड़ा और ध्यान से देखता हुआ बोला, “कुछ… कुछ जाना-पहचाना लग रहा है।”
मेरी रूह काँप गई।
घूंघट को मैंने दोनों हाथों से और आगे खींच लिया। दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। Anu ने भी सनसनी महसूस की। उसने जल्दी से फोन बंद किया, मेरे कंधे पर हाथ रखा और फुसफुसाई,
“कार में बैठो। जल्दी।”
मैंने काँपते हाथों से दरवाज़ा पकड़ा। हील्स में पैर फिसलने वाले थे। साड़ी का पल्लू एक बार फिर फिसला। मैंने उसे संभाला और कार की सीट पर गिरते हुए बैठ गया। Anu ने झट से दरवाज़ा बंद किया, दूसरी तरफ से आकर इंजन स्टार्ट कर दिया।
कार पार्किंग से निकलने लगी।
पीछे उस लड़के ने एक कदम हमारी तरफ बढ़ाया था… लेकिन कार निकल चुकी थी।
Anu एक हाथ से स्टेयरिंग पकड़े हुए थी, दूसरे हाथ से मेरा हाथ। उसकी हथेली भी पसीने से गीली थी।
“घबराओ मत,” उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में भी हल्का कंपन था। “रीमा से डिलीट करवा देती हूँ। और वह लड़का… शायद कुछ नहीं समझा।”
मैं चुप था।
खिड़की के बाहर रात की रोशनी भाग रही थी। साड़ी अभी भी शरीर पर थी। लिपस्टिक होंठों पर थी। चूड़ियाँ खनक रही थीं।

और Anu की बात कानों में गूँज रही थी—
“आज रात भी… इसी तरह रहो।”
फोन पर रीमा की स्टोरी अभी भी लाइव थी।
पीछे वह अजनबी लड़का हमें देख चुका था।
और मैं…
साड़ी में बैठा हुआ, यह फैसला नहीं कर पा रहा था कि अब आगे क्या होगा।
ये तो बस ट्रेलर है…
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