📝 Story Preview:
🔥 अरे भाई-बहन… ये कहानी पढ़ते वक्त आपका हाथ खुद पैंट में चला जाएगा! 🔥
दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-13 के छोटे से फ्लैट में राहुल अपनी बीवी अनीता से छुप-छुपकर मिनाक्षी बनता था — टाइट ब्लाउज, गुलाबी साड़ी, DD सिलिकॉन वाले भारी स्तन, 5 इंच की हाई-हील्स, लिंग को Ace bandage से इतना कस-कस के बाँधता कि खड़ा रहकर भी न छूटे। लेकिन एक शाम अनीता और उसकी छोटी बहन डिंपल ने पूरा राज़ पकड़ लिया।
फिर जो बदला लिया… वो सुनकर भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे!
अनीता ने खुद 8 इंच का मोटा डिल्डो बाँधकर मिनाक्षी की गांड फाड़ दी, कपिल ने गला तक भर दिया, डिंपल ने टाई-रैप्स से लंड को हमेशा के लिए जाँघों के बीच चिपका दिया — अब खड़ा होना मुश्किल, पेशाब भी औरतों की तरह बैठकर ही!
Vicks Vaporub से भरा inflatable dildo गांड में फूला, बिजली के झटके लंड और गांड पर, diaper में पेशाब करते हुए रात भर जलता रहा, nipple clamps, tight corset, leather hood में अंधेरा… और सबसे खतरनाक — motor home में दिल्ली की सड़कों पर घूमते हुए Lavender Lounge के पार्किंग में 36 अजनबी मर्दों का मुंह और गांड बनना!
गले तक लंड घुसा, आँसू बहाते, उबकाई रोकते, फिर झुकाकर गांड में एक-एक करके… कैमरे पर पूरा रिकॉर्ड!
Forced Sissy | Extreme Anal Torture | Electric Shock | Permanent Chastity | Public Gangbang | Diaper Humiliation | Wife Revenge — सब कुछ है इस कहानी में!
शर्म, दर्द, उत्तेजना और क्रूर बदले की ऐसी आग कि एक बार शुरू किया तो पूरी रात छोड़ नहीं पाओगे। हाथ काँपेगा, साँस फूल जाएगी, लेकिन कहानी खत्म होने का नाम नहीं लेगी!
अब तक की सबसे गंदी, सबसे डार्क और सबसे लत लगाने वाली forced feminization सिसी कहानी पढ़ने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करो 👇
https://beingfaltu.blogspot.com/2026/05/blog-post.html
Part 1
दिल्ली का वो छोटा-सा 2BHK फ्लैट, रोहिणी सेक्टर-13। शाम के सात बज रहे थे। Anita, मेरी बीवी, अभी-अभी नीचे उतरी थी। उसकी ऑटो की आवाज़ गली में गूँजी और धीरे-धीरे दूर होती गई। आज उसकी सहेली की बर्थडे थी, लेट आएगी, उसने कहा था।
दरवाज़ा बंद होते ही मेरे सीने में एक अजीब-सी धड़कन शुरू हो गई। हाथ काँप रहे थे। छह महीने... पूरे छह महीने से मैं ये पल छुपा के रखा था। शादी के दूसरे दिन से ही।
मैं तेज़ी से बेडरूम में गया। अलमारी के सबसे पीछे, पुरानी रजाई और सूटकेस के नीचे, दो पुरानी लोहे की संदूकियाँ थीं। दोनों पर ताला लगा था। बटुए में छुपी चाबियाँ निकालीं। उँगलियाँ इतनी काँप रही थीं कि पहली चाबी लगाने में तीन बार चूक गया।
क्लिक।
पहली संदूक खुली।
अंदर वो सब था... मिनाक्षी का संसार।
सॉफ्ट गुलाबी साड़ी, जिसकी पल्लू पर हल्के-हल्के चाँदी के काम थे। ब्लाउज... वो वाला जो बहुत टाइट था। काला लेस वाला ब्रा-पैंटी सेट जिसे मैंने ऑनलाइन मँगाया था। लंबे बालों वाली विग, लाल लिपस्टिक, काजल, चूड़ियाँ, बिंदिया, पायल... सब कुछ। एक-एक चीज़ को मैंने महीनों में जमा किया था, हर बार डरते-डरते, Anita के ऑफिस जाने के बाद।
दूसरी संदूक खोली।
इसमें वो सामान था जिसके बारे में मैं किसी से कभी नहीं बोल सकता था। रस्सियाँ, सॉफ्ट चेन, लॉक, लेग स्प्रेडर, आँखों पर पट्टी... सब कुछ। आज रात मैं मिनाक्षी बनने के बाद खुद को बाँधने वाला था। पूरी तरह। जैसे कोई और मुझे बाँध रहा हो।
मैं संदूक के सामने घुटनों पर बैठ गया।
आईने में अपनी शक्ल देखी — Rahul, 29 साल का साधारण सा लड़का, जो दिन में ऑफिस जाता है, मम्मी को फोन करता है, Anita को "जानू" कहता है। लेकिन अंदर... अंदर तो वो लड़की थी जो कभी बाहर नहीं आ पाई।
आँखों में पानी आ गया।
"मिनाक्षी..." मैं फुसफुसाया, आवाज़ में कंपकंपी थी, "आज तू पूरी तरह आज़ाद रहेगी... बस कुछ घंटों के लिए।"
मैंने पहला कपड़ा निकाला — वो काला लेस वाला ब्लाउज। उसे छूते ही साँस तेज़ हो गई। डर भी लग रहा था। Anita के लौट आने का। पड़ोसियों के देख लेने का। समाज के... माँ-बाप के... सबका।
फिर भी रोक नहीं पाया।
मैं धीरे-धीरे कपड़े बदलने लगा।
मैंने घड़ी की तरफ देखा। शाम के सात बज चुके थे। Anita ने सुबह ही बताया था कि आज उसकी छोटी बहन Dimple के साथ पूरा दिन शॉपिंग करने वाली है। Lajpat Nagar मार्केट जाना है, फिर Sarojini, उसके बाद शायद Sector-18 मार्केट भी। लौटने में रात के नौ-दस बज जाएँगे। मतलब मेरे पास पूरा समय था... ढेर सारा समय।
मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था। डर और उत्साह दोनों साथ-साथ।
"आज कोई जल्दी नहीं है," मैंने खुद से कहा, आवाज़ barely सुनाई दे रही थी। "मिनाक्षी आज पूरी तरह से आज़ाद रहेगी।"
मैंने पहली संदूक से वो साड़ी निकाली — सॉफ्ट जॉर्जेट, हल्का गुलाबी रंग, जिस पर छोटे-छोटे चाँदी के फूल बने थे। Anita के आने से पहले मैंने इसे ऑनलाइन मँगाया था। ब्लाउज बहुत टाइट था, ठीक वैसा जैसा मुझे पसंद था। मैं धीरे-धीरे कपड़े बदलने लगा। हर कपड़ा पहनते वक्त मेरा शरीर काँप रहा था।
पहले ब्रा... फिर पैंटी... फिर ब्लाउज। साड़ी की चुन्नटें ठीक करने में वक्त लगा। विग लगाई, बालों को कंधे पर गिराया। लिपस्टिक लगाई — गहरी लाल। काजल से आँखें गहरी कीं। पायल पैरों में बाँधी तो हल्की सी झनकार हुई।
आईने के सामने खड़ी "मिनाक्षी" को देखकर मेरी आँखें नम हो गईं।
"कितनी सुंदर लग रही है तू आज..." मैंने फुसफुसाकर कहा। आवाज़ औरत जैसी बनाने की कोशिश में थोड़ी नरम और काँपती हुई।
फिर दूसरी संदूक की तरफ मुड़ा।
अंदर से निकाला — नरम रस्सियाँ, चेन, दोनों हाथों के लिए लॉक, लेग स्प्रेडर और वो खास पट्टी जो आँखों पर बाँधने के बाद कुछ भी दिखाई नहीं देता। सब कुछ मैंने महीनों पहले अलग-अलग जगहों से मँगाया था, Anita को कभी शक न हो।
मैं बेड पर चला गया।
"आज मैं खुद को बाँध लूँगी... पूरी तरह।"
मैंने मन ही मन सोचा। "जैसे कोई मुझे जबरदस्ती पकड़ के बिस्तर से बाँध रहा हो। मैं छूटना चाहूँगी, लेकिन नहीं छूट पाऊँगी। जितना ज़्यादा छूटने की कोशिश करूँगी, उतना ही और कस जाएगा।"
ये फैंटसी मुझे सबसे ज़्यादा पसंद थी — असहाय होना, लेकिन सुरक्षित भी। कोई नहीं आएगा, कोई नहीं देखेगा। सिर्फ मैं... मिनाक्षी... और मेरी अपनी दुनिया।
मैंने पहली रस्सी हाथ में ली। ठंडी चेन की आवाज़ कमरे में गूँजी।
मिनाक्षी बनने से पहले एक और काम करना था। वो काम जो मुझे सबसे ज़्यादा शर्मिन्दा भी करता था और सबसे ज़्यादा उत्साहित भी।
मैंने पैंट उतारी। मेरा लिंग पहले ही सख्त हो चुका था, सिर्फ़ इन कपड़ों को छूने भर से। मैंने अलमारी के नीचे से वो 4 इंच चौड़ा सफ़ेद Ace elastic bandage का रोल निकाला, जो मैंने महीने भर पहले मंगाया था।
"पहले इसे बाँध लूँ... ताकि कितना भी खेल लूँ, वो नरम न पड़े," मैंने मन ही मन कहा। आवाज़ अंदर ही अंदर काँप रही थी।
मैं बेड के किनारे पर बैठ गया। घुटनों के बीच में हाथ डाले। ठंडी हवा कमरे में से गुजर रही थी, लेकिन मेरा शरीर जल रहा था।
धीरे-धीरे मैंने bandage को खींचा। पहले आधार से शुरू किया — बहुत कस के लपेटा। फिर ऊपर की तरफ़, एक चक्कर, दो चक्कर, तीन... हर चक्कर के साथ मैं उसे और खींच रहा था। लिंग का सिरा आगे की तरफ़ खिंचता जा रहा था, पूरी लंबाई में फैलता जा रहा था। दबाव बढ़ता गया। हल्का-हल्का दर्द होने लगा, लेकिन वो दर्द मीठा था।
"आह..." एक हल्की सी सिसकारी निकली मेरे मुँह से।
मैं लगातार लपेटता रहा — base से head की तरफ़, फिर वापस। bandage इतना टाइट हो गया कि अब वो बिल्कुल भी नरम नहीं पड़ सकता था। खड़ा रहने वाला था... चाहे मैं कितना भी छेड़-छाड़ कर लूँ। और सबसे बड़ी बात — मैं तब तक कुछ नहीं निकाल पाऊँगा, जब तक ये bandage खुद न खोलूँ।
मेरा पूरा शरीर पसीने से तर हो गया था। साँसें तेज़। आँखें आधी बंद।
मैंने नीचे देखा — अब वो पूरी तरह बंधा हुआ था, लंबा, तना हुआ, और पूरी तरह मेरे कंट्रोल से बाहर।
एक गहरी साँस ली।
"अब मिनाक्षी तैयार हो सकती है..."
मेरे मन में Anita का चेहरा घूम गया। उसकी मुस्कान। उसका विश्वास। और फिर तुरंत एक तेज़ दर्द उठा सीने में। लेकिन मैंने उसे दबा दिया।
आज रात सिर्फ़ मिनाक्षी की थी।
bandage का पूरा रोल खत्म हो चुका था। सिर्फ़ लिंग का सिरा बाहर निकला हुआ था — लाल, सूजा हुआ, और अब पहले से कहीं ज़्यादा मोटा और लंबा दिख रहा था। constriction की वजह से वो इतना तना हुआ था कि नसें उभर आई थीं। हल्का-हल्का बैंगनी रंग लिए हुए।
मैंने अंत को पिन से जकड़ दिया। अब वो कहीं नहीं हिलने वाला था।
फिर मैंने दूसरी संदूक से वो लंबा, बहुत टाइट और boned girdle निकाला — काला, हाई-वेस्ट, जो कमर को भयंकर कस के पकड़ लेता था और जाँघों तक नीचे जाता था। crotch में split था। मैंने साँस रोके हुए उसे पैरों से चढ़ाया।
कपड़ा मेरी त्वचा पर चढ़ते ही एक ठंडी-गर्म सिहरन दौड़ गई। मैंने जाँघों को कसते हुए ऊपर खींचा। फिर crotch वाले छेद से अपना बंधा हुआ लिंग और अंडकोष बाहर निकाल लिए। अब वो girdle के बाहर, पूरी तरह exposed था — सूजा हुआ, बैंगनी, और पूरी तरह मेरे कंट्रोल से बाहर।
"उफ़... कितना दर्द हो रहा है... लेकिन कितना अच्छा लग रहा है," मैंने दाँत भींचकर फुसफुसाया।
अब बारी थी काली नायलॉन स्टॉकिंग्स की।
मैंने रोल खोला और धीरे-धीरे पैरों पर चढ़ाई। ठंडी, चिकनी, शीशे जैसी नायलॉन मेरी जाँघों को सहलाती हुई ऊपर चढ़ रही थी। हर इंच के साथ रोमांच बढ़ता जा रहा था। छह garters थे girdle के नीचे — मैंने हर एक को ध्यान से स्टॉकिंग के टॉप पर क्लिप किया।
सब कुछ ठीक हो गया।
मैं उठा और अलमारी वाले पूरे लंबे आईने के सामने खड़ा हो गया।
आईने में मिनाक्षी खड़ी थी।
कमर इतनी पतली और कसी हुई लग रही थी कि साँस लेना भी मुश्किल हो रहा था। जाँघें चमकदार काली नायलॉन में लिपटी हुईं। बाहर निकला हुआ सूजा लिंग... और ऊपर से अभी साड़ी और ब्लाउज बाकी था।
मेरा गला रुँध गया।
"भगवान... मैं क्या कर रहा हूँ..."
एक पल के लिए Anita का चेहरा आँखों के सामने घूम गया — उसकी innocent मुस्कान, सुबह का "Rahul, चाय पी लो" वाला प्यार। लेकिन फिर मैंने आँखें बंद कर लीं।
आज सिर्फ़ मिनाक्षी की रात थी।
मैंने गहरी साँस ली और अलमारी से वो लंबा, हेवी लाइन वाला ब्रा निकाला — काला, पीछे हुक और आई वाली। कमर तक जाता था, कमर को और भी कसने वाला। पीछे हाथ घुमाकर हुक लगाने में मुश्किल हो रही थी, लेकिन आखिरकार लग गए।
फिर दोनों तरफ़ realistic DD सिलिकॉन ब्रेस्ट पैड्स निकाले — नरम, भारी, बिल्कुल असली जैसी। ब्रा के कप में डालते ही मेरी छाती भारी और गोल हो गई। आईने में देखा तो साँस अटक गई।
"हाय भगवान..."
मैंने दोनों हाथों से अपने नए बड़े स्तनों को दबाया। नरम, भारी, गर्म। अंगूठे से ऊपर वाले हिस्से को सहलाया। एक अजीब-सी लहर पूरे शरीर में दौड़ गई। अब नीचे से वो सूजा हुआ, बैंगनी लिंग बाहर निकला हुआ था, लेकिन ऊपर से... मैं सचमुच एक औरत लग रही थी।
मिनाक्षी।
अब बारी थी जूतों की।
काले, 5 इंच ऊँचे हाई-हील स्ट्रैप वाली पेटेंट लेदर वाली सैंडल। "बॉन्डेज़" वाली संदूक पर बैठकर मैंने पैरों में पहने। एड़ी के स्ट्रैप को कस के बाँधा। जब उठकर खड़ा हुआ तो पैर काँप गए। बैलेंस बनाना मुश्किल था, लेकिन मैंने हिम्मत करके अलमारी के अंदर दो-तीन कदम चलाए।
क्लिक-क्लिक... क्लिक-क्लिक...
आईने में अपनी चाल देखी। कमर हिल रही थी, जाँघें चमक रही थीं, स्तन हल्के-हल्के उछल रहे थे।
"मैं... मैं सच में औरत लग रही हूँ," मन में फुसफुसाया। दिल में एक अनोखा सुकून और शर्म का मिश्रण था।
जल्दी से मैंने वो गुलाबी टैफ़ेटा स्लिप निकाली — जाँघों तक आती हुई, हल्की-हल्की चमक वाली। उसे पहनते ही मेरा बंधा हुआ, सूजा लिंग थोड़ा छुप गया। अब पूरा लुक feminine लग रहा था।
मैं मुड़ी कि...
अचानक — धड़ाम!
अलमारी का दरवाज़ा जोर से खुल गया।
दहलीज़ पर Anita खड़ी थी। उसके साथ उसकी छोटी बहन Dimple।
दोनों की आँखें फटी हुई थीं।
Anita का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। उसके हाथ में शॉपिंग बैग थे, जो ज़मीन पर गिर गए। Dimple ने मुँह पर हाथ रख लिया, उसकी आँखें हैरानी और घृणा से भर गईं।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
सिर्फ़ मेरी पायल की हल्की झनकार और मेरी तेज़-तेज़ साँसें सुनाई दे रही थीं।
Anita की आँखों में आँसू भर आए। उसकी आवाज़ काँप रही थी, जैसे कोई चीज़ उसके अंदर टूट गई हो —
"Monik...?"
Part 2
कमरे में सन्नाटा जैसे कोई चाकू चुभो दिया हो।
मैं हाई-हील्स में लड़खड़ाते हुए पीछे हटा। पायल की झनकार रुक गई। मेरे सूजे हुए, बैंगनी लिंग के साथ-साथ पूरा शरीर काँप रहा था। गुलाबी स्लिप, काली स्टॉकिंग्स, 5 इंच की एड़ी, भारी सिलिकॉन वाले स्तन — सब कुछ अब बेतुका और शर्मनाक लग रहा था।
Anita और Dimple दोनों मुझे घूर रही थीं।
मेरा गला सूख गया। मैंने हकलाते हुए कहा, आवाज़ औरत जैसी बनाते-बनाते भी टूट रही थी —
"अ... Anita... तुम... तुम तो पूरा दिन शॉपिंग पर जाने वाली थीं ना? Dimple के साथ... लाजपत नगर... फिर सरोजिनी... तो फिर इतनी जल्दी... क्यों वापस आ गईं?"
Anita ने एक ठंडी, गहरी नज़र मुझ पर डाली। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं, बल्कि एक अजीब-सा दर्द और निराशा थी। Dimple ने बगल में खड़े होकर मुँह फेर लिया, जैसे देखना भी बर्दाश्त न हो।
Anita धीरे-धीरे, लेकिन बहुत साफ़ आवाज़ में बोली,
"Monik... या फिर कहूँ — मिनाक्षी?
मुझे तेरे इस राज़ का पता बहुत पहले से था। महीनों से।
पहले शक तब हुआ जब मेरी पैंटीज़ और ब्रा अलमारी में उल्टी-सीधी रखी मिलीं। मैं हमेशा एक खास तरीके से रखती हूँ, तू जानता है ना? फिर मुझे तेरे इस्तेमाल की हुई मेरी पैंटीज़ कपड़े धोने की टोकरी में मिलीं... उन पर तेरे वीर्य के धब्बे। साफ़ था कि तू क्या कर रहा था।
फिर एक रात जब तू सो रहा था, मैंने तेरी पैंट से चाबियाँ निकालीं। वो 'हंटिंग-फिशिंग' वाले तालों की चाबियाँ। दोनों संदूकियाँ खोलीं। एक में मिनाक्षी का पूरा सामान... साड़ियाँ, विग, मेकअप, लेस के कपड़े। दूसरी में रस्सियाँ, चेन, ताले... सब।
और हाँ, वो bondage catalogs भी मिले — पोस्ट ऑफिस बॉक्स पर, नाम लिखा 'Minaxi'।"
Anita की आवाज़ थोड़ी काँपी, लेकिन उसने खुद को संभाला।
"मैंने सब कुछ Dimple को बता दिया। रो-रो के। कई रातें हम दोनों ने इसी बारे में बात कीं। क्या करूँ? तलाक ले लूँ? या... चुप रहूँ?
मैंने तलाक नहीं लिया, राहुल। क्योंकि मैं तुझे अभी भी... प्यार करती हूँ। लेकिन अब ये सब छुपा के नहीं चलेगा।
Dimple और मैंने फैसला किया है कि अब हम भी इस 'मिनाक्षी' से थोड़ा मज़ा लेंगे।"
Dimple ने पहली बार मुँह खोला, उसकी आवाज़ में तीखापन था —
"हाँ जीजू... अब छुपाछुपी खत्म। अब तो खेल खुला खेलेंगे।"
Anita ने मेरी तरफ़ एक कदम बढ़ाया। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन होंठों पर एक अजीब-सी मुस्कान भी।
"तो बोल... मिनाक्षी... अब क्या करेगी?"
Anita के मुँह से ये सारी बातें सुनते हुए मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई। कमरे में भारी सन्नाटा था, सिर्फ़ मेरी तेज़-तेज़ साँसें और पायल की हल्की झनकार।
तभी Dimple आगे बढ़ी। उसने मेरी दूसरी संदूक — बॉन्डेज़ वाली — का ढक्कन खोला और बिना कुछ बोले अंदर हाथ डाल दिया। जैसे वो पहले से ही सब जानती हो। उसने कुछ चीज़ें निकालीं — चमकदार स्टील की हैंडकफ़, लंबी रस्सी, एक मोटा लॉक और आँखों की पट्टी — और सब बेड पर फेंक दिया। धम-धम की आवाज़ हुई।
Dimple की आवाज़ सख्त और ठंडी थी,
"अब बाहर निकल यहाँ से। मुड़ जा और दोनों हाथ पीछे कर।"
मेरे शरीर में करंट-सा दौड़ गया। 5 इंच की हाई-हील्स में चलना पहले ही मुश्किल था। पैर काँप रहे थे। मैंने छोटे-छोटे, औरत जैसी नाज़ुक कदमों में (mincing) अलमारी से बाहर निकलकर बेडरूम में आ गया। हर कदम पर घुटने लड़खड़ा रहे थे। गुलाबी टैफ़ेटा स्लिप हिल रही थी।
"हाथ पीछे," Dimple ने फिर से हुक्म दिया।
मैंने धीरे-धीरे दोनों हाथ पीछे कर दिए। ठंडी हवा मेरी नंगी पीठ पर लग रही थी। Anita मेरे पास आई। उसकी साँस मेरी गर्दन पर पड़ रही थी। उसने मेरे दोनों हाथों को कस के पकड़ लिया, एक-दूसरे से चिपका दिया।
Dimple ने हैंडकफ़ उठाई।
क्लिक... क्लिक...
धातु की ठंडी छुअन और ताले की आवाज़ के साथ मेरे हाथ पीछे जकड़ गए। अब मैं पूरी तरह असहाय था।
मेरा वो bandage से कसा हुआ, सूजा हुआ लिंग अभी भी सख्त था। गुलाबी स्लिप के नीचे से वो इतना उभरा हुआ था कि कपड़ा कई इंच बाहर की तरफ़ तना हुआ दिख रहा था। जैसे कोई शर्मनाक गवाही दे रहा हो कि अंदर क्या चल रहा है।
Anita ने नीचे देखा। उसकी आँखें एक पल के लिए वहीं अटक गईं। फिर उसने धीरे से, लेकिन दर्द भरी आवाज़ में कहा,
"देख रही है Dimple... हमारा 'पति' कितना 'उत्तेजित' है अपनी बीवी के सामने पकड़े जाने पर भी।"
Dimple हँसी — वो हँसी जिसमें शर्मिंदगी, मज़ा और तिरस्कार सब घुला हुआ था।
"अब तो खेल शुरू होता है जीजू... मिनाक्षी को आज रात बहुत कुछ सहना पड़ेगा।"
मेरी आँखों में आँसू आ गए। गालों पर गरम-गरम लकीरें बहने लगीं। शर्म, डर, और एक अजीब-सी बेचैनी... सब एक साथ।
मैं कुछ बोल नहीं पाया। सिर्फ़ सिर झुका लिया।
Anita ने आगे बढ़कर मेरी गुलाबी स्लिप का किनारा ऊपर उठाया। उसकी आँखें मेरे उभरे हुए, बंधे लिंग पर पड़ीं।
"अरे वाह Dimple... देख तो सही, क्या हालत बना रखी है इसने अपनी।"
मेरा लिंग का सिरा अब गहरा लाल-बैंगनी हो चुका था। bandage की जकड़न से इतना सूज गया था कि हर नस उभरी हुई दिख रही थी। अंदर दबा हुआ वीर्य निकलने को बेकरार था, लेकिन कोई रास्ता नहीं था। लिंग के ऊपर चमकते हुए pre-cum के छोटे-छोटे कतरे थे।
Anita ने अपनी नाखूनों से हल्के-हल्के उस पर थपकी मारी — एक, दो, तीन बार।
"आह्ह्ह!"
मेरे मुँह से दर्द भरी चीख निकली, लेकिन स्लिप और दाँतों के बीच दबी रही। हर थपकी के साथ झटका लगा, कतरे इधर-उधर बिखर गए। जलन और दर्द का एक तेज़ लहर पूरे शरीर में दौड़ गई।
Dimple ने ठंडी हँसी दी, "अभी इसे... अरे 'इसे' नहीं, 'इसे' को ऐसे ही छोड़ देते हैं। मिनाक्षी को अभी और सजा मिलनी बाकी है।"
उसने पीछे से मेरी कोहनियों को कस के पास लाकर रस्सी से बाँधना शुरू कर दिया। अब मेरी छाती और भी आगे निकल आई थी, स्तन और भी उभरकर दिख रहे थे।
"ये... ये क्या कर रही हो तुम?" मैंने काँपती, औरत जैसी आवाज़ में पूछा।
Dimple मेरे सामने आई। उसके हाथ में एक बड़ा लाल बॉल गैग था।
"मुँह खोल। वरना तेरे उस बंधे हुए लंड की ऐसी हालत कर दूँगी कि याद रखेगा।"
मेरा दिल जोर से धड़का। मैंने मुँह खोल दिया। Dimple ने वो मोटा, लाल रबर का गोला ज़ोर से मेरे मुँह में ठूँस दिया। मेरी आँखें फैल गईं। Anita ने पीछे से बकल कस के बाँध दिया। अब मैं सिर्फ़ "म्म्म... म्म्म" की आवाज़ ही निकाल पा रहा था। लार मेरे होंठों के कोनों से बहने लगी।
Anita ने मेरे बालों को पकड़कर सिर ऊपर किया और बोली,
"अब इस मिनाक्षी को तेरे घर ले चलते हैं Dimple। तू गाड़ी को गैरेज में ले आ, ताकि पड़ोसी न देख लें। मैं meanwhile इसका ball harness और leash लगा देती हूँ।"
Dimple ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया, "ठीक है दीदी। आज तो मिनाक्षी की असली परीक्षा है।"
Anita ने एक चेन वाला harness निकाला और मेरे गले में डाल दिया। फिर leash को उसमें क्लिप किया। ठंडी चेन मेरी गरम त्वचा पर पड़ी तो सिहरन दौड़ गई।
मैं हाई-हील्स में, हाथ पीछे जकड़े, मुँह में गैग, लिंग बाहर उभरा हुआ, आँखों में आँसू लिए... पूरी तरह टूटा हुआ खड़ा था।
Anita ने leash खींची और धीरे से फुसफुसाया,
"चल... मेरी सुंदर मिनाक्षी... अब तेरी असली ज़िंदगी शुरू होती है।"
Anita ने झुककर मेरे अंडकोष के चारों तरफ़ वो चेन वाला ball harness कस के बाँध दिया। ठंडी धातु की जकड़न से मेरे अंडकोष में तेज़ दर्द उठा। फिर उसने leash को खींचा।
"चल... मेरी रंडी मिनाक्षी..."
मैं हाई-हील्स में लड़खड़ाता हुआ उसके पीछे-पीछे चला। हर कदम पर leash खिंच रही थी, जैसे कोई कुत्ता घसीटा जा रहा हो। हाथ पीछे हैंडकफ़ में, कोहनियाँ रस्सी से कसी हुईं, मुँह में लाल बॉल गैग — मैं सिर्फ़ "म्म्म... म्म्म" की आवाज़ ही निकाल पा रहा था।
सीढ़ियाँ उतरते वक्त मैं दो बार गिरते-गिरते बचा। हाई-हील्स की वजह से घुटने काँप रहे थे। Anita ने बिना रुके leash खींची। रसोई से होते हुए गैरेज तक घसीट लिया गया।
Dimple ने कार का पिछला दरवाज़ा खोला। Anita ने मुझे ज़ोर से धक्का दिया। मैं कार की पिछली सीट के फर्श पर मुँह के बल गिर पड़ा।
"पैर सीधे कर," Dimple ने हुक्म दिया।
उसने मेरी टखनों को मोटी रस्सी से कस के बाँध दिया। फिर मेरे हाथों की हैंडकफ़ को टखनों से छोटी रस्सी से जोड़ दिया — हॉग टाई। अब मेरा शरीर धनुष की तरह टेढ़ा हो गया था। पेट के बल लेटा हुआ, मेरा सूजा हुआ, दर्द भरा लिंग मेरे ही पेट के नीचे दबा हुआ था। हर हलचल के साथ उस पर दबाव पड़ रहा था। अंडकोष harness से कसे हुए जल रहे थे।
Anita ने ऊपर से एक पुरानी रजाई डाल दी। अंधेरा छा गया।
कार की इंजन शुरू हुई। गैरेज का दरवाज़ा खुला। कार पीछे हिली।
मैं अंदर अंधेरे में पड़ा-पड़ा सोच रहा था — इन्हें मुझे Dimple के घर क्यों ले जाना है? क्या प्लान है इनका?
तभी आगे वाली सीट से Anita की आवाज़ आई। ठंडी, लेकिन बहुत deliberate —
"सुन रही है ना मिनाक्षी? हम तुझे Dimple के घर ले जा रहे हैं। वहाँ आज रात कोई नहीं है। तीन दिन तक घर खाली पड़ा है।
Dimple ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ दीदी... कल सुबह मैं ऑफिस से छुट्टी ले लूँगी। हम तीनों मिलकर मिनाक्षी की अच्छी ट्रेनिंग करेंगे। पहले तो इसे औरत बनाना सिखाएँगे... साड़ी पहनाना, मेकअप करना, औरतों वाली चाल चलना... फिर इसके बॉन्डेज़ वाले सपनों को हकीकत में बदलेंगे।
Anita ने leash को हल्का खींचा, हालाँकि मैं फर्श पर पड़ा था,
"और हाँ... तूने छह महीने तक मुझे धोखा दिया। अब हम तुझे वैसा ही असहाय और शर्मिंदा करके रखेंगे, जैसा तू चाहता था। लेकिन अब अकेले नहीं... हम दोनों के सामने।
Dimple हँसी, "और जो तू सोच रहा था ना कि कोई नहीं देखेगा... आज से वो सब खत्म। अब तेरी हर सिसकारी, हर आँसू, हर शर्म हम देखेंगे और मज़ा लेंगे।"
कार तेज़ी से आगे बढ़ रही थी।
मेरी आँखों से आँसू बह रहे थे। रजाई के नीचे मेरा शरीर पसीने और दर्द से तर था।
मिनाक्षी अब छुपी नहीं रह सकती थी।
उसकी असली ज़िंदगी... शुरू हो चुकी थी।
कार की पिछली सीट के फर्श पर रजाई के अंदर मैं पड़ा था — हॉग टाई में जकड़ा, मुँह में गैग, लिंग और अंडकोष जल रहे थे। हर उछाल के साथ दर्द की लहर उठ रही थी।
तभी Anita ने आगे से धीरे-धीरे, लगभग प्यार भरी लेकिन बेहद क्रूर आवाज़ में कहा,
"मेरी प्यारी मिनाक्षी... हम तुझे Dimple और कपिल के घर ले जा रहे हैं। थोड़ा मज़ा करने।"
मेरे कान खड़े हो गए। कपिल? Dimple का पति?
Anita हँसी, "हाँ... हमने कपिल को भी तेरे छोटे-से राज़ के बारे में बता दिया है। वो बहुत खुश हुआ। बोला — 'अरे वाह, घर में एक फुल फ्लेज्ड रंडी-सी सिसी मिल जाएगी तो मज़ा आ जाएगा।' उसने तेरी तस्वीरें देखीं संदूक से... और बोला कि अब हर वीकेंड basement में हम सब 'हमारी छोटी सिसी गर्ल' के साथ अच्छा टाइम स्पेंड करेंगे।"
Dimple ने कार का स्टीयरिंग घुमाते हुए जोड़ा,
"कपिल ने basement को पूरा तैयार कर रखा है। वहाँ अब सब कुछ है — चेन वाली दीवारें, स्प्रेडर बार, सस्पेंशन हुक, व्हिप, कैंडल... सब। तेरी उन bondage catalogs से हमने और भी ढेर सारा सामान मँगवाया है। नए-नए टॉयज़। लेदर कॉर्सेट — जो तेरी कमर को इतना कसेंगे कि साँस लेना मुश्किल हो जाएगा। लेटेक्स रबर के सूट... जो तेरे पूरे शरीर को चिपक के पसीना निकालेंगे।"
Anita ने leash को हल्का खींचा, हालाँकि मैं नीचे था,
"अब छुपाछुपी खत्म, मिनाक्षी। अब तुझे हर हफ्ते शनिवार-रविवार को basement में बाँधा जाएगा। कभी कपिल, कभी हम दोनों बहनें... कभी सब मिलकर। तू जो सपना देखता था — असहाय होना, बंधा होना, औरत बनकर इस्तेमाल होना — वो अब हकीकत बनने वाला है। लेकिन अकेले नहीं... हम सबके सामने।"
Dimple मुस्कुराई, "और हाँ... तू चुपचाप लेटा रह। रास्ते का मज़ा ले ले। घर पहुँचते ही तेरी असली ट्रेनिंग शुरू होगी।"
मेरी आँखों से आँसू रजाई को भिगो रहे थे।
शरीर दर्द से तड़प रहा था, लेकिन उससे ज़्यादा मन तड़प रहा था।
Anita — जिससे मैंने शादी की, जिसे मैंने प्यार किया, जिसके सामने कभी कुछ नहीं छुपाया... आज वो मुझे इस हालत में दूसरे आदमी के घर ले जा रही है। कपिल के सामने। सबके सामने।
मेरा दिल टूट रहा था।
फिर भी... एक कोने में वो पुरानी, बीमार इच्छा अभी भी जल रही थी — जो मुझे रोक नहीं पा रही थी।
कार Delhi की सड़कों पर तेज़ी से भाग रही थी।
बाहर रात का अंधेरा।
अंदर... मेरी दुनिया हमेशा के लिए बदल चुकी थी।
लगभग दस मिनट बाद कार धीरे-धीरे रुकी और एक ड्राइववे में मुड़ गई। मैंने गैरेज का इलेक्ट्रिक दरवाज़ा ऊपर उठने की भारी आवाज़ सुनी। फिर वो नीचे गिरा और बंद हो गया — धड़ाम।
रजाई अचानक खींच ली गई।
ठंडी, तेज़ रोशनी मेरी आँखों में पड़ी। मैंने पलकें झपकाईं।
कार के एक तरफ़ कपिल खड़ा था।
पूरी तरह नंगा... सिर्फ़ एक काला, चमकदार लेटेक्स रबर का ब्रिफ़ पहने हुए। उसके अंदर उसका मोटा, सख्त लिंग और अंडकोष एक sheath में कैद थे, जो बाहर से बहुत उभरा हुआ दिख रहा था। उसकी छाती चौड़ी, बाइसेप्स फटे हुए, कंधे भारी — एकदम जिम का बॉडीबिल्डर टाइप।
Anita और Dimple बिना कुछ बोले अंदर चली गईं। उनकी हँसी की आवाज़ दूर जाती सुनाई दी।
कपिल झुका। उसकी मोटी, मज़बूत उँगलियों ने मेरी एड़ियों और हॉग टाई की रस्सियाँ खोल दीं। लेकिन हाथ पीछे वाली हैंडकफ़ नहीं खोली।
"बाहर निकल," उसने गहरी, भारी आवाज़ में हुक्म दिया।
मैं हाई-हील्स में लड़खड़ाता हुआ कार की पिछली सीट से रेंगकर बाहर निकला। घुटनों पर पड़ा रहा एक पल। फिर कपिल ने मेरी बाँह पकड़कर खींचा और खड़ा कर दिया।
मैं 5 फुट 7 इंच का हूँ।
कपिल मेरे सिर से अच्छे छह इंच ऊँचा — लगभग 6 फुट 1 इंच। उसकी छाती मेरे चेहरे के सामने थी। उसकी मांसपेशियाँ मेरे नाज़ुक, कसे हुए, औरत वाले शरीर के सामने बहुत भारी और डरावनी लग रही थीं।
मेरा गुलाबी स्लिप अभी भी बाहर उभरा हुआ था। लिंग bandage में कसा, दर्द कर रहा था। गले में leash लटक रही थी। आँखों से आँसू बह रहे थे, मेकअप बह रहा था, लार गैग से टपक रही थी।
कपिल ने मुझे ऊपर से नीचे तक घूरा। उसकी नज़र मेरे सिलिकॉन वाले स्तनों पर, काली स्टॉकिंग्स पर, हाई-हील्स पर और बाहर निकले लिंग पर रुकी। फिर वो ज़ोर से हँसा — एक गहरी, पुरुष वाली हँसी।
"वाह मिनाक्षी... सच में बहुत सुंदर बनाई है तुझे Anita ने।"
उसने मेरी leash को अपनी मोटी उँगलियों में लपेट लिया और खींचा। मैं उसके सामने हिलते हुए खड़ा था, पूरी तरह असहाय।
"डर लग रहा है ना? अच्छा है। डरना चाहिए।"
उसने मेरे गाल पर एक थपकी मारी — हल्की, लेकिन इतनी कि मेरा सिर हिल गया।
"अंदर चल। तेरी दीदी लोग इंतज़ार कर रही हैं। आज तेरी पहली रात है basement में... हम सबकी छोटी सिसी रंडी की।"
मेरी साँसें रुक रही थीं।
शरीर काँप रहा था।
और सबसे ज़्यादा... दिल टूट रहा था।
क्योंकि अब ये खेल सिर्फ Anita और Dimple का नहीं रहा।
एक और मर्द... और वो भी इतना ताकतवर।
कपिल ने मुझे ऊपर से नीचे तक फिर से घूरा — मेरी लंबी सुनहरी विग से लेकर चमकदार 5 इंच वाली पेटेंट हाई-हील्स तक। उसकी आँखों में भूख और तिरस्कार दोनों थे।
"अरे वाह sweetie..." उसने धीमी, भारी आवाज़ में कहा, "सुना है तू औरत बनना बहुत पसंद करता है... लेकिन कपड़े तो पूरी रंडी-वाली वेश्या जैसा पहनता है।"
उसने मेरी गुलाबी टैफ़ेटा स्लिप को एक झटके में ऊपर उठा दिया। मेरा bandage से कसा हुआ, सूजा और बैंगनी पड़ा लिंग बाहर आ गया। कपिल ने अपनी मोटी, गर्म उँगलियों से उसे बीच में से पकड़ लिया — कस के, जैसे कोई मालिक कुत्ते की चेन पकड़ता है।
"चल... मेरी छोटी वेश्या... चल।"
दर्द की एक तेज़ लहर मेरे पूरे निचले शरीर में दौड़ गई। मैं "म्म्म... म्म्म!" की दबी हुई चीख निकालता हुआ उसके पीछे-पीछे खिंचा चला। हाई-हील्स में कदम रखना मुश्किल हो रहा था, घुटने लड़खड़ा रहे थे, लेकिन वो रुकने का नाम नहीं ले रहा था।
धड़धड़... धड़धड़...
लोहे की सीढ़ियाँ उतरते हुए हर कदम पर मेरी पायल बज रही थी। leash गले में खिंच रही थी, ball gag से लार टपक रही थी, आँसू विग के बालों को भिगो रहे थे। कपिल मुझे basement की तरफ़ घसीटते हुए ले जा रहा था।
नीचे पहुँचते ही ठंडी, नम हवा का झोंका आया।
बेसमेंट...
अंधेरा, लेकिन लाल-नीली dim लाइट्स जल रही थीं। दीवारों पर चेनें लटक रही थीं, बीच में एक बड़ा X-frame, सस्पेंशन हुक छत से, कोने में leather bench, whips, paddles, और न जाने कितने अजीब-अजीब उपकरण। एक कोने में नया लेदर कॉर्सेट और लेटेक्स सूट पैकेट में पड़े थे — अभी-अभी मँगवाए गए।
कपिल ने मुझे बीच में खड़ा किया। उसकी पकड़ अभी भी मेरे बंधे लिंग पर थी। उसने ज़ोर से दबाया।
"देख मिनाक्षी... ये सब तेरे लिए तैयार किया है। अब हर वीकेंड तू यहाँ रहेगी। हम चारों — Anita, Dimple, मैं और तू। तू हमारी निजी सिसी रंडी।"
उसने मेरे कान के पास मुँह लगाकर फुसफुसाया, गर्म साँस मेरे कान को छू रही थी,
"डर मत... पहले तो बस थोड़ा तोड़ेंगे तुझे। फिर तुझे इतना ट्रेन करेंगे कि तू खुद बेग करके माँगेगी... 'और कस के बाँध दो कपिल भैया...'"
मेरी आँखें बंद हो गईं।
शरीर काँप रहा था।
दिल में एक साथ हजार तीर चुभ रहे थे।
Anita... तुमने मुझे यहाँ तक पहुँचा दिया।
मैंने आँखें फाड़कर चारों तरफ देखा। विश्वास ही नहीं हो रहा था।
Dimple और कपिल का बेसमेंट अब कोई साधारण तहखाना नहीं था — ये तो नर्क का एक खूबसूरत, रोशनी वाला कमरा बन चुका था। बीच में बड़ा-सा illuminated एरिया था जहाँ:
लोहे के X-फ्रेम क्रॉस खड़े थे
स्पैंकिंग बेंचेस — चमड़े से ढकी, घुटनों के बल झुकने वाली
सस्पेंशन हार्नेस छत से लटक रहे थे
विन्च और चेन वाली दीवारें
नील-काला रंग का bondage table
घुटनों के बल बैठने वाली बेंच
दीवारों पर हुक लगे थे, जिन पर सैकड़ों चीज़ें टंगी हुई थीं — चमड़े की चाबुकें, riding crops, भारी paddles, हाथकड़ियाँ, bondage hoods, गैग्स, कॉलर... सब कुछ। कुछ बेंचों में दराज़ थे, जिनमें और भी ज़्यादा सामान होने का अंदाज़ा हो रहा था।
एक कोने में एक खास एरिया था — सफ़ेद restraint table, नल, और ढेर सारी एनिमा बोतलें, लंबी-लंबी रबर ट्यूब्स, नोज़ल्स और लंबे रबर के ग्लव्स। देखते ही मेरे पेट में मरोड़ उठी।
तभी सीढ़ियों पर हील्स की आवाज़ आई।
Anita और Dimple नीचे उतर रही थीं। दोनों के हाथों में वाइन के ग्लास थे। वो शराब धीरे-धीरे पीते हुए मुस्कुरा रही थीं।
लेकिन उनका लुक...
Anita ने काला, चमकदार लेटेक्स कैटसूट पहना हुआ था — जो उसके शरीर को दूसरी त्वचा की तरह चिपक गया था। कमर पर भारी लेदर कॉर्सेट, जिससे उसकी छाती और भी उभरकर दिख रही थी। होंठों पर गहरी लाल लिपस्टिक, आँखों में स्मोकी मेकअप।
Dimple ने रेड लेटेक्स ड्रेस पहनी थी — बहुत छोटी, जिसमें से उसकी जाँघें और cleavage साफ़ झाँक रही थीं। हाथ में एक लंबी चाबुक थी, जिसे वो हल्के-हल्के थपथपा रही थी।
दोनों मेरे सामने आकर रुकीं।
Anita ने मेरे गैग के ऊपर से मेरे आँसू भरे चेहरे को देखा और मुस्कुराई,
"क्या हुआ मिनाक्षी? आँखें फटी क्यों जा रही हैं? ये सब तो तेरे सपनों का सामान है ना? तू अकेले में जो फैंटसी देखता था... अब वो सब हकीकत में तेरे सामने है।"
Dimple ने आगे बढ़कर मेरे सूजे हुए लिंग पर हल्की-सी चाबुक की नोक फेरी।
"और ये देख कपिल... हमारी सिसी कितना एक्साइटेड है। अभी से ही टपक रहा है।"
कपिल मेरे पीछे खड़ा ज़ोर से हँसा। उसकी हँसी बेसमेंट में गूँज गई।
मैं वहाँ खड़ा था — हाथ पीछे जकड़े, मुँह में गैग, लिंग बाहर कसा हुआ, शरीर काँपता हुआ — और मेरी आँखों के सामने मेरी सारी गुप्त इच्छाएँ अब मेरे सबसे बड़े डर बन चुकी थीं।
Anita ने अपने ग्लास का एक घूँट लिया, फिर मेरे गाल पर ठंडा हाथ फेरा। उसकी आवाज़ में प्यार और क्रूरता दोनों घुली हुई थी,
"अब रो मत इतना... खेल तो अभी शुरू हुआ है। आज रात हम तुझे अच्छे से तोड़ेंगे... फिर जोड़ेंगे... फिर फिर से तोड़ेंगे।"
मेरी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे।
मिनाक्षी अब पूरी तरह फँस चुकी थी।
और राहुल... मोनिक कहीं गायब हो चुका था।
Anita और Dimple बेसमेंट की लाल-नीली रोशनी में खड़ी थीं, जैसे कोई डरावनी लेकिन बेहद आकर्षक फिल्म की सीन हो।
Anita... मेरी अपनी Anita...
उसने काला लेदर ब्रा पहना था — वो वाला जिसमें आगे दो गोल छेद थे, और उसकी बड़ी, भारी छातियाँ उन छेदों से बाहर निकलकर झूल रही थीं। ब्रा के ऊपर एक घंटाघर जैसा tight लेदर कॉर्सेट, जो उसकी कमर को इतना कस रहा था कि वो और भी ज्यादा घंटी जैसी लग रही थी। घुटनों तक ऊँचे laced लेदर बूट्स, जिनकी लेसिंग बहुत कस के बँधी थी। उसके काले घने बालों को सख्त पोनytail में बाँधा हुआ था, जो उसके चेहरे को और भी क्रूर और आकर्षक बना रहा था। पैरों में लंबी काली टाइट्स, और कान में लंबी चाँदी की झुमकियाँ जो फ्लोरेसेंट लाइट में चमक रही थीं। हाथों में कोहनियों तक काली साटन की gloves, जो उसके लेदर आउटफिट को और भी dominant बना रही थीं।
वो मेरी बीवी थी... जिसके साथ मैंने छह महीने पहले फेरे लिए थे। आज वही मुझे इस हालत में देख रही थी।
Dimple का लुक और भी ज़्यादा डरावना था।
उसने सिर से पैर तक skintight लाल लेटेक्स कैटसूट पहना हुआ था — इतना टाइट कि उसकी हर नस, हर कर्व बाहर उभर रही थी। ऊपर सफ़ेद हाई-हील पंप्स। हाथों में सफ़ेद लेटेक्स gloves — कैटसूट के आस्तीन के ऊपर भी चढ़ाए हुए, मानो उसे और भी ज़्यादा tight feeling चाहिए। लेकिन सबसे भयानक था उसका लेटेक्स हूड — जो उसके पूरे सिर को ढक रहा था। सिर्फ़ आँखें, नाक और मुँह के लिए छोटे-छोटे छेद थे। उसके auburn बाल कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे। वो बिल्कुल अजनबी, बेरहम और बेनाम लग रही थी।
दोनों ने वाइन के ग्लास में घूँट भरा और मुझे घूरा।
Anita आगे बढ़ी। उसकी लेदर बूट्स की आवाज़ बेसमेंट की दीवारों से टकरा रही थी। उसने मेरे गाल पर हाथ फेरा — साटन gloves की ठंडी, चिकनी छुअन।
"कैसा लग रहा है मिनाक्षी? हम दोनों को देखकर?"
उसकी आवाज़ में मीठापन था, लेकिन आँखों में बदला लेने वाली चमक।
Dimple ने अपनी चाबुक को हथेली पर थपथपाते हुए कहा,
"दीदी, लगता है हमारी सिसी को हमारा नया लुक बहुत पसंद आ रहा है। देखो कैसे उसका बंधा हुआ लंड अभी भी टपक रहा है।"
मैं वहाँ खड़ा था — पूरी तरह नंगा-सा, शर्म से जलता हुआ, आँसू बहाते हुए। मेरी सुंदर वाली विग, मेकअप, सिलिकॉन ब्रेस्ट, काली स्टॉकिंग्स, हाई-हील्स... सब अब हास्यास्पद और शर्मनाक लग रहे थे।
मेरी Anita... जिसे मैंने कभी छूने की हिम्मत नहीं की थी इतनी boldly... आज वो मेरे सामने इस रूप में खड़ी थी।
और Dimple... जो अब बिल्कुल किसी अजनबी mistress लग रही थी।
कपिल मेरे पीछे खड़ा ज़ोर से हँसा, "अब खेल शुरू करें? या पहले थोड़ा और दिखाएँ इस रंडी को कि आगे क्या-क्या होने वाला है?"
Anita ने मेरी leash खींची और मेरी आँखों में सीधे देखते हुए फुसफुसाया,
"रो मत इतना प्यार से... आज तो तेरी पहली ट्रेनिंग है।"
कपिल ने अपनी भारी आवाज़ में कहा, "चलो, शुरू करते हैं।"
उसने मेरी leash खींचकर मुझे बेसमेंट के बीच वाले खुले एरिया में ले गया। फर्श में दो adjustable ankle spreader bars बोल्ट किए हुए थे। उसने उन्हें लगभग तीन फीट apart खोल दिया। फिर झुककर मेरे दोनों टखनों पर मोटे लेदर restraints बाँध दिए और बकल कस-कस के बंद कर दिए।
अब मेरे पैर फैले हुए थे। हाई-हील्स में खड़े रहना और भी मुश्किल हो गया था। शरीर का बैलेंस बिगड़ रहा था।
कपिल ने फिर से मेरी स्लिप ऊपर की। ball harness खोल दिया। फिर धीरे-धीरे Ace bandage को मेरे सूजे हुए लिंग से खोलना शुरू किया।
जैसे ही bandage हटा, खून का पूरा रश आया। छह महीने की सारी इच्छा, सारी उत्तेजना एक साथ लौट आई। मेरे लिंग ने जोर से उछाला। मैं लगभग झड़ने ही वाला था... बस एक पल की बात थी।
लेकिन कपिल बहुत तेज़ था।
उसने तुरंत एक इलेक्ट्रिक shock unit मेरे लिंग और अंडकोष पर लगा दिया। इलेक्ट्रोड्स चिपकाए, वायर कनेक्ट किए।
"टेस्टिंग..." उसने कंट्रोल यूनिट पर मीडियम सेट किया और बटन दबा दिया।
झटका!
एक, दो, तीन — तेज़, जलता हुआ दर्द मेरे अंडकोष से लिंग के सिरे तक दौड़ा। फिर वापस — सिरे से अंडकोष की तरफ़।
"म्म्म्म!!! म्म्म्म!!!"
मैं गैग के अंदर चीख रहा था। शरीर झटके खा रहा था। आँखें बाहर निकलने को हो रही थीं। दर्द इतना तेज़ था कि लग रहा था कोई अंदर से चाकू चला रहा हो। झड़ने की सारी इच्छा एक पल में खत्म हो गई।
कपिल ने यूनिट बंद की और मेरी आँखों में देखते हुए बोला,
"जब तक तेरी बीवी Anita इजाजत न दे, तब तक तू कुछ नहीं निकाल पाएगा मिनाक्षी। अगर तूने हिम्मत की और हार्ड होने की कोशिश की... तो मैं फिर से ऑन कर दूँगा। समझ गया?"
मैं सिर हिलाने की कोशिश कर रहा था। आँखों से आँसू की धार बह रही थी।
क्या कर दिया मैंने...
मुझे तो बस थोड़ा self-bondage पसंद था। मिनाक्षी बनकर खुद को बाँधना, एक-दो घंटे असहाय महसूस करना। फिर आइस क्यूब पिघलता, चाबी गिरती और मैं खुद को छुड़ा लेता।
लेकिन यहाँ...
यहाँ कोई आइस क्यूब नहीं था।
कोई टाइमर नहीं था।
कोई escape नहीं था।
Anita आगे आई। उसने मेरे गाल पर हाथ रखा। उसकी साटन gloves ठंडी थीं। उसकी आवाज़ मीठी लेकिन बेहद खतरनाक थी,
"रो मत प्यार से... ये तो सिर्फ़ शुरुआत है। तूने छह महीने तक मुझे धोखा दिया। अब मैं तुझे वैसा ही असहाय रखूँगी, जैसा तू चाहता था। लेकिन अब मेरे कंट्रोल में।"
Dimple ने दूर से हँसकर कहा, "दीदी, लगता है हमारी सिसी को अब समझ आ रहा है कि खेल कितना गहरा होने वाला है।"
मैं फैले हुए पैरों के बीच खड़ा काँप रहा था।
लिंग अब भी दर्द से तड़प रहा था।
और दिल... दिल पूरी तरह टूट चुका था।
मैंने खुद को किस नर्क में धकेल दिया था?
Anita और Dimple ने आगे बढ़कर मेरी कोहनियों वाली रस्सी और हैंडकफ़ खोल दीं। एक पल के लिए हाथों में खून का रस आया, लेकिन राहत मिलने से पहले ही कपिल एक भारी, काला लेदर आर्मबाइंडर लेकर आ गया।
ये कोई साधारण चीज़ नहीं थी।
एक लंबा, मोटा लेदर ग्लव — दोनों हाथ और दोनों बाज़ू एक साथ अंदर डालने के लिए। कपिल ने मेरे दोनों हाथ पीछे करके उसमें ठूँस दिए। मेरी हथेलियाँ mitt के अंदर एक-दूसरे से चिपक गईं। फिर पीछे से लेसिंग शुरू हुई।
खींच... खींच... खींच...
हर बार लेस खींचते ही मेरी कोहनियाँ एक-दूसरे के और पास आ रही थीं। दर्द की लहर कमर तक उठ रही थी। Anita खुद झुककर लेस खींच रही थी, जैसे कोई कारीगर काम कर रही हो।
"और कस के..." Dimple ने कहा।
आखिरकार मेरी कोहनियाँ लगभग छू ही रही थीं। मेरी छाती और भी आगे निकल आई थी, सिलिकॉन स्तन और भी उभरकर दिख रहे थे। फिर कपिल ने तीन मोटी लेदर पट्टियाँ कसीं — कलाई, कोहनी और ऊपरी बाज़ू पर। दो और पट्टियाँ कंधों के ऊपर से जाती हुई पीछे बाँध दीं।
अब मेरे हाथ पूरी तरह लॉक थे।
एक भी उँगली हिला पाना नामुमकिन।
मेरे पैर पहले से ही तीन फीट फैले हुए spreader bar में जकड़े थे। अब हाथ भी पीछे इस कदर बँधे थे कि मैं बिल्कुल असहाय खड़ा था — जैसे कोई खिलौना। शरीर का हर हिस्सा काँप रहा था।
कपिल ने आगे बढ़कर पुराना बॉल गैग खोला। मेरे मुँह से लार की धार बह गई। लेकिन राहत सिर्फ़ दो सेकंड की थी।
उसने एक नया गैग निकाला — जो मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी नहीं देखा था।
ये गैग मुँह और गर्दन दोनों को घेरता था। आगे की तरफ़ एक मोटा, छोटा, हार्ड रबर का खोखला शाफ़्ट था। कपिल ने उसे ज़ोर से मेरे मुँह में ठूँस दिया। मेरी जबड़े पूरी तरह फैल गए। अब मुँह खुला ही रह गया था — न बंद हो सकता था, न बोल सकता था। सिर्फ़ गला ही हिल सकता था।
क्लिक...
उसने पीछे से लॉक कर दिया।
अब मैं वहाँ खड़ा था —
पैर फैले, हाथ पीछे पूरी तरह बंधे, मुँह खुला हुआ, लिंग अभी भी दर्द से तड़प रहा, आँखों से आँसू बह रहे, विग के बाल चेहरे पर चिपके हुए।
Anita मेरे सामने आई। उसने मेरे खुले मुँह में उँगली डालकर देखा, फिर मुस्कुराई।
"अब बोलने की कोशिश भी मत करना मिनाक्षी... आज से तेरी ज़ुबान सिर्फ़ चीखने और रोने के लिए है।"
Dimple ने पास आकर मेरे खुले मुँह को देखा और हँसी,
"दीदी, देखो कितना सुंदर लग रहा है हमारी सिसी... मुँह खुला, आँखें नम, शरीर बँधा हुआ... बिल्कुल तैयार है आज रात के लिए।"
कपिल ने मेरी leash खींची और मेरे कान में फुसफुसाया,
"अब असली मज़ा शुरू होता है... हमारी छोटी रंडी।"
मेरे मन में सिर्फ़ एक ही सवाल बार-बार घूम रहा था —
भगवान... मैंने खुद को किस जहन्नुम में फँसा लिया है?
कपिल ने मेरी आँखों में देखा और सख्ती से बोला, "मुँह खोल... पूरा खोल!"
मैंने तुरंत मुँह फैला दिया। बिजली के झटकों का डर अभी भी मेरी रीढ़ में दौड़ रहा था। वो दर्द दोबारा सहने की हिम्मत बिल्कुल नहीं थी।
कपिल ने वो नया "O" गैग उठाया — बीच में करीब डेढ़ इंच का गोल छेद वाला, हार्ड रबर का। उसने उसे मेरे पहले से खुले मुँह में ठूँस दिया। रिंग मेरे दाँतों के पीछे चली गई और जबड़े पूरी तरह लॉक हो गए। अब मेरा मुँह बिल्कुल गोल-गोल खुला रह गया था। बोलना तो दूर, साँस लेना भी मुश्किल हो रहा था। लार तुरंत टपकने लगी — ठुड्डी पर, सिलिकॉन ब्रेस्ट पर, नीचे तक।
मैं शर्म से मर रहा था।
तभी Dimple ने पीछे जाकर आर्मबाइंडर के अंत वाले स्टील रिंग में एक मोटी रस्सी बाँध दी, जो छत पर लगे pulley से होकर winch तक गई थी।
Anita ने winch का हैंडल घुमाना शुरू किया।
घर्र... घर्र... घर्र...
मेरे हाथ पीछे ऊपर की तरफ़ खिंचने लगे। कंधों में भयानक खिंचाव हो रहा था। शरीर आगे की तरफ़ झुकने लगा। मैं जितना झुकता, मेरे हाथ उतने ही ऊपर जाते। कमर में तेज़ दर्द उठ रहा था।
"और... और झुक..." Anita ने ठंडी आवाज़ में कहा।
जब मेरा सिर मेरी कमर के बराबर आ गया, तब Anita ने winch लॉक कर दिया।
अब मैं पूरी तरह झुका हुआ था — पैर फैले, एड़ी वाले जूते में खड़े, हाथ पीछे छत की तरफ़ सीधे खिंचे हुए, मुँह खुला, लार टपकती हुई। कंधों में इतना दर्द था कि अगर मैंने हाथ नीचे करने की कोशिश की तो लगता था कंधे उखड़ जाएँगे।
मैं पूरी तरह फँस चुका था।
कोई हिलने-डुलने की गुंजाइश नहीं।
Anita मेरे सामने आई। उसने मेरे खुले मुँह में उँगली डाल दी, फिर मेरे आँसू भरे चेहरे को सहलाया। उसकी साटन gloves मेरे गाल पर फिसल रही थीं।
"देख मिनाक्षी... कितना खूबसूरत लग रहा है तू इस पोज़ में। ठीक वैसा ही जैसा तू अपने सपनों में सोचता था — बिल्कुल असहाय, बंधा हुआ, झुका हुआ... इस्तेमाल होने के लिए तैयार।"
Dimple ने चाबुक से हल्के से मेरी पीठ पर थपकी मारी और हँसी,
"अब रो मत... अभी तो सिर्फ़ वार्म-अप हो रहा है।"
कपिल ने मेरे झुके हुए चेहरे के पास आकर मेरे खुले मुँह को देखा और बोला,
"ये मुँह आज रात बहुत काम आने वाला है... समझी?"
मेरी आँखों से आँसू की धार बह रही थी।
शरीर दर्द से तड़प रहा था।
और मन में बस एक ही बात घूम रही थी —
Anita मेरे सामने आई। उसने मेरे झुके हुए सिर को अपनी साटन gloves वाली उँगलियों से ऊपर उठाया। उसकी आँखें मेरी आँखों में गड़ गईं। एक पल के लिए वो पुरानी Anita दिखाई दी — जिसके साथ मैंने शादी की थी, जिसके लिए मैंने "पति" बनने की कोशिश की थी। लेकिन फिर उसकी नज़र सख्त हो गई।
"सुन रही है ना मिनाक्षी..." उसकी आवाज़ धीमी लेकिन बहुत साफ़ थी, "अब तुझे अंधेरा होने वाला है। और इस अंधेरे में तुझे सिर्फ़ महसूस करना है — दर्द, शर्म, और हमारी मर्ज़ी।"
तभी Dimple मेरे पीछे आई। उसने एक मोटा, काला लेदर ब्लाइंडफोल्ड मेरे सिर पर चढ़ा दिया। अंदर से नरम फोम था, लेकिन बाहर से सख्त। उसने पीछे से बकल कस दिया। अब मेरी पूरी दुनिया अंधेरी हो गई। कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
लेकिन Dimple का काम अभी खत्म नहीं हुआ था।
ब्लाइंडफोल्ड के पीछे एक स्टील का रिंग लगा था। उसने एक लंबी लेदर पट्टी उस रिंग से निकाली और उसे मेरे आर्मबाइंडर के अंत वाले mitt के स्टील रिंग से जोड़ दिया। फिर पट्टी को खींचा...
खींच... खींच...
मेरा सिर पीछे की तरफ़ ज़ोर से खिंच गया। अब मेरा चेहरा पूरी तरह ऊपर की तरफ़ था — ठीक 90 डिग्री के कोण पर। गर्दन में भयानक खिंचाव हो रहा था। साँस लेना भी मुश्किल हो गया। लार मेरे खुले O-गैग से और तेज़ी से टपकने लगी — सीने पर, ब्रेस्ट पैड्स पर, फर्श पर।
मैं इस अजीब और बेहद दर्द भरी मुद्रा में पूरी तरह जकड़ चुका था।
पैर spreader bar में फैले।
हाथ पीछे ऊपर खिंचे।
सिर जबरदस्ती ऊपर।
मुँह खुला।
आँखें बंद।
कोई भी हलचल करने की कोशिश करता तो कंधे, गर्दन और कमर — सब जगह दर्द और बढ़ जाता।
मैं अब बिल्कुल immobile था।
एक मांस का लोथड़ा।
एक खिलौना।
Anita ने मेरे खुले मुँह के पास अपना चेहरा लाकर फुसफुसाया। उसकी गर्म साँस मेरे गाल पर पड़ रही थी,
"अब तू पूरी तरह हमारी मर्ज़ी पर है मिनाक्षी।
कपिल, Dimple... और मैं।
तेरी बीवी, तेरी साली, और तेरा नया मालिक।
जो हम चाहेंगे, तू करेगा।
जितना हम चाहेंगे, उतना सह लेगा।
और जब तक हम न कहें, तू कुछ नहीं कर पाएगा... न हिल पाएगा, न बोल पाएगा, न रो पाएगा।"
Dimple ने मेरी पीठ पर हल्के से चाबुक फेरी और हँसी,
"तो तैयार हो जा... हमारी छोटी, बंधी हुई, अंधी रंडी।"
कपिल की भारी हँसी बेसमेंट में गूँजी।
मैं अंधेरे में, दर्द और शर्म के समंदर में डूबा हुआ था।
आँखों से आँसू ब्लाइंडफोल्ड के अंदर बह रहे थे।
गर्दन जल रही थी।
और दिल... दिल चीख-चीख कर पूछ रहा था —
अंधेरे में मैं पूरी तरह जकड़ा हुआ था, जब अचानक मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरी नंगी गांड के दोनों हिस्सों को मोटी उँगलियों से फैला रहा है।
मेरा पूरा शरीर सिहर उठा।
Anita की मीठी लेकिन ज़हर भरी आवाज़ मेरे कान में गूँजी,
"हिल-डुल मत इतना, मेरी छोटी रंडी मिनाक्षी... बस तेरी इस टाइट 'चूत' को थोड़ा KY Jelly से चिकना कर रही हूँ। तुझे औरत बनना था ना? अच्छा... तो आज मैं तुझे असली औरत होने का मजा दिखाती हूँ।
याद है ना? कितनी बार मैं थककर, मूड न होने पर भी तेरे लिए पैर फैलाती थी... सिर्फ़ इसलिए कि तू 'पति' है। आज वही सब वापस मिलेगा तुझे, sweetie। Payback time है।"
ठंडा, चिकना KY Jelly मेरी गांड के अंदर छूटा। Anita ने अपनी उँगली अंदर डाल दी — धीरे-धीरे, लेकिन बिना रुके। उँगली अंदर-बाहर होने लगी, जेल को चारों तरफ फैलाती हुई।
"उफ्फ... कितनी टाइट है अभी भी," Anita ने हँसते हुए कहा, "लेकिन अब धीरे-धीरे खुल जाएगी।"
मैं "म्म्म... म्म्म!!" करके चीख रहा था। O-गैग के कारण सिर्फ़ गले से दबी हुई आवाज़ निकल रही थी। लार मेरे खुले मुँह से लगातार टपक रही थी। गर्दन पट्टी से खिंची हुई, कंधे जल रहे थे, आँखें ब्लाइंडफोल्ड में बंद।
फिर मुझे महसूस हुआ — कुछ गोल, मोटा और सख्त मेरी गांड के छेद पर दबाव डाल रहा था। धीरे-धीरे, लेकिन लगातार अंदर धकेला जा रहा था।
मेरा शरीर तन गया। दर्द और एक अजीब-सी जलन के साथ वो चीज़ मेरी गांड में घुसने लगा।
Anita ने मेरी कमर पर हाथ रखा और धीरे से बोली,
"आराम से ले ले मेरी जान... पहली बार में थोड़ा दर्द होगा। लेकिन तू तो यही चाहता था ना? औरत बनकर चोदवाना। आज तेरी बीवी खुद तुझे औरत बना रही है।"
Dimple ने पीछे से हँसकर कहा, "दीदी, धीरे-धीरे अंदर करो... पूरी रात पड़ी है। इसे अच्छे से फाड़ के रख दो आज।"
कपिल की भारी हँसी बेसमेंट में गूँजी।
मैं वहाँ झुका हुआ, अंधा, बंधा, मुँह खुला... पूरी तरह टूटता जा रहा था।
Anita — मेरी बीवी — अब मेरी गांड में कुछ घुसा रही थी।
और सबसे दर्द वाली बात...
मुझे पता था कि ये सिर्फ़ शुरुआत थी।
Anita ने मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और मेरे कान के पास फुसफुसाई,
"बस एंजॉय कर मेरी रंडी... आज मैंने आखिरकार 'चोदने वाली' बनने का मौका पा लिया है। छह महीने तक तेरी 'fuckee' बनकर थक गई थी मैं। आज तू देख, मैं कितनी अच्छी fucker हूँ।"
मैंने महसूस किया कि Anita ने लेदर हार्नेस पहन रखा था। उसकी कमर पर एक मोटा, 8 इंच लंबा, सख्त रबर का डिल्डो लगा हुआ था। एक पट्टी कमर के चारों तरफ, दूसरी पट्टी उसकी चूत से होकर पीछे बँधी हुई — पूरी तरह फिक्स।
वो मेरी गांड के छेद पर दबाव डाल रही थी।
"आह्ह्ह...!"
मैं गैग के अंदर चीख रहा था। मेरी गांड का छेद धीरे-धीरे फैल रहा था। जलन, दर्द और फटने जैसा अहसास... जैसे कोई आग का गोला अंदर घुस रहा हो।
"सिरा जा रहा है अंदर..." Anita हँसी, "ले ले मेरी जान... थोड़ा और... बस थोड़ा और..."
धक्का!
अचानक डिल्डो का मोटा सिरा मेरी गांड में घुस गया। दर्द इतना तेज़ था कि मेरी आँखें ब्लाइंडफोल्ड के अंदर भी फट गईं। मैंने जितना जोर से चीखा, O-गैग में सिर्फ़ "म्म्म्म!!! म्म्म्म!!!" की दबी हुई आवाज़ निकली। लार मेरे मुँह से जैसे फव्वारा बनकर बह रही थी।
"वाह... कितना टाइट है अभी भी तेरी गांड," Anita ने मज़ा लेते हुए कहा, "लेकिन अब खुल जाएगी।"
फिर उसने पूरा डिल्डो अंदर धकेल दिया।
"अब आ गई पूरी... ले मेरी सिसी रंडी... अब असली चुदाई शुरू होती है।"
Anita ने तेज़ी से पंप करना शुरू कर दिया — अंदर-बाहर, अंदर-बाहर। हर धक्के के साथ मेरी कमर हिल रही थी। दर्द के साथ एक अजीब-सी जलन और भरपूर शर्म का मिश्रण पूरे शरीर में फैल रहा था। मेरे सिलिकॉन वाले स्तन झूल रहे थे, पायल बज रही थी, शरीर पसीने से तर।
"कैसा लग रहा है honey? अच्छा लग रहा है ना? जितना तू मुझे चोदता था, उतना ही अब मैं तुझे चोद रही हूँ।"
Dimple और कपिल दोनों हँस रहे थे।
और तभी... अचानक मेरी जीभ पर कुछ गर्म, मोटा और नरम मांस लगा।
क्या हो रहा था?
मेरा खुला हुआ O-गैग... और उसमें कुछ घुस रहा था। गर्म, नम, और सख्त होता जा रहा था।
मेरी साँस रुक गई।
कपिल की भारी आवाज़ बेसमेंट में गूँजी,
"अच्छा... तेरी पिछली डोर तो Anita ने ऑक्यूपाई कर ली है। अब इस आगे वाले मुंह का भी इंतजाम कर देते हैं।"
मैंने महसूस किया कि कपिल ने अपना लेटेक्स ब्रिफ़ उतार दिया था। वो अब पूरी तरह नंगा खड़ा था। उसका मोटा, लंबा, पत्थर जैसा सख्त लंड मेरे खुले O-गैग के ठीक सामने था।
Anita अभी भी मेरी गांड में जोर-जोर से धक्के दे रही थी — तेज़, गहरे और बेरहम। हर धक्के के साथ मेरा पूरा शरीर आगे झूल रहा था।
कपिल ने मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़ा। फिर अपना मोटा, गर्म लंड का सिरा मेरे O-गैग वाले खुले मुंह में घुसा दिया।
"ले... मेरी सिसी रंडी... चूस।"
एक ही झटके में उसका मोटा सिरा मेरी जीभ पर फैल गया, मुंह की छत को छूता हुआ गले तक चला गया। मेरा पूरा मुंह भर गया। साँस लेना मुश्किल हो गया। उसकी भारी अंडकोष की थैलियाँ मेरी ठुड्डी और गालों से बार-बार टकरा रही थीं।
"म्म्म्म!!! ग्ग्ग्ग्...!!!"
मैं गैग और लंड के बीच suffocate हो रहा था। आँखें ब्लाइंडफोल्ड के अंदर फटी जा रही थीं। नाक से तेज़-तेज़ साँस लेने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हर धक्के के साथ उसका लंड मेरे गले में और गहरा उतर रहा था।
Anita पीछे से हँसते हुए और तेज़ हो गई,
"वाह कपिल... इसे दोनों तरफ़ से भर दो। देख रही हूँ मैं... मेरी प्यारी मिनाक्षी कितनी अच्छी तरह ले रही है।"
Dimple ने पास आकर मेरे बालों को पकड़ लिया और बोली,
"चूस रंडी... अच्छे से चूस। दीदी तेरी गांड मार रही है, और मेरा पति तेरा मुंह... आज तू पूरी तरह हमारी हो गई है।"
कपिल ने मेरे सिर को और कस के पकड़ लिया और तेज़ी से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। उसका भारी पेल्विस मेरे चेहरे से बार-बार टकरा रहा था। लार, थूक और pre-cum का मिश्रण मेरे मुंह से बाहर निकलकर मेरे स्तनों और फर्श पर गिर रहा था।
मैं पूरी तरह sandwiched था —
पीछे Anita का डिल्डो मेरी गांड फाड़ रहा था,
आगे कपिल का मोटा लंड मेरे गले को रौंद रहा था।
कोई बचाव नहीं।
कोई चीख नहीं।
सिर्फ़ दर्द, शर्म और बेबसी।
मेरा दिल रो रहा था —
Anita... तू मेरी बीवी थी...
आज तू मुझे दूसरे मर्द के लंड पर चूसवा रही है।
कपिल ने मेरे बालों को मुठ्ठी में कस के पकड़ लिया और गला फाड़कर चिल्लाया,
"चूस रंडी! अच्छे से चूस! वरना फिर से शॉकर ऑन कर दूँगा... चाहता है वो दर्द?"
नहीं... नहीं... प्लीज नहीं!
मेरे मन में चीख उठा, लेकिन मुंह में सिर्फ़ "म्म्म... ग्ग्ग्...!!" की आवाज़ निकली।
मैंने जितनी हिम्मत थी, उतनी जोर से चूसना शुरू कर दिया। मेरी जीभ उसके मोटे लंड के नीचे घूम रही थी, गला फूल रहा था। हर धक्के के साथ उसकी भारी गेंदें मेरी ठुड्डी से टकरा रही थीं।
पीछे Anita और तेज़ हो गई थी। उसके कूल्हे मेरी गांड से ज़ोर-ज़ोर से टकरा रहे थे। 8 इंच का रबर का डिल्डो पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था।
तभी Dimple ने शॉक यूनिट का कंट्रोल उठाया और स्विच ऑन कर दिया। Intensity को मैक्सिमम पर घुमा दिया।
झटका!!!
मेरा लिंग और अंडकोष एक साथ झड़ने लगे। बिजली की लहरें मेरे पूरे निचले शरीर में दौड़ रही थीं। दर्द इतना असहनीय था कि मेरी आँखें उलट गईं। शरीर convulsing कर रहा था। लग रहा था मैं बेहोश हो जाऊँगा। साँस रुक रही थी।
"आआआह्ह्ह्ह!!!"
मैं चीखना चाहता था, लेकिन मुंह में कपिल का लंड और O-गैग... सिर्फ़ दबी हुई कराहट निकल रही थी।
अचानक... शॉक्स बंद हो गए।
मैं पूरी तरह लटक गया — बंधा हुआ, थका हुआ, पसीने और लार से तर, आँसू बहाते हुए।
Anita और कपिल दोनों ने एक साथ बाहर निकाल लिया। मेरी गांड खुली हुई, जल रही थी। मुंह में खालीपन और थूक भरा हुआ।
Anita ने मेरी पीठ पर थपकी मारी और हँसते हुए कपिल से कहा,
"लो जी... मैंने तेरी छोटी वाली गांड को अच्छे से गर्म कर दिया है। अब आ जाओ पीछे... देखते हैं हमारी नई रंडी को असली मर्द का लंड कितना पसंद आता है।
जाकर अपनी virgin 'चूत' में पूरा लोड भर दो कपिल... आज इसे पहली बार औरत बनाओ।"
Dimple ने मेरी गांड को चाबुक से हल्का थप्पड़ मारा और बोली,
"हाँ जीजू... इसे अच्छे से चोदो। भर दो इसे। देखना कितना कसमसाएगी हमारी मिनाक्षी।"
कपिल मेरे पीछे आ गया। मैंने महसूस किया उसका गर्म, मोटा, असली लंड मेरी खुली हुई, चिकनी गांड के छेद पर रगड़ खा रहा था।
मेरा दिल टूट चुका था।
शरीर दर्द से तड़प रहा था।
और सबसे बड़ी बात — मेरी अपनी बीवी Anita अब मुझे दूसरे मर्द से चुदवाने के लिए उतावली हो रही थी।
अभी तो बस शुरुआत ही हुई है कुछ ही घंटे हुए है शायद पहला राउंड भी इनका पूरा नहीं हुआ है पता नहीं ये लोग मेरे साथ और क्या क्या करेंगे
अब तक जो तुमने पढ़ है वो तो बस एक ट्रैलर है पूरी पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त , और पूरी कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए GET PASSWORD पर क्लिक करो फिर एक फोरम भरना होगा और पासवर्ड आपके ईमेल पर या जाएगा अगर ईस कहानी को PDF मे लेना चाहते हो और हमेशा के लिए अपना बना लेना चाहते हो तो अपनी प्यारी अनिता को आभी व्हाट्सप्प करे व्हाट्सप्प अनिता @ 9891335772 । पूरी कहानी PDF मे लेने के 750/- चार्ज होंगे |
जो आपने अभी पढ़ा, वो तो बस शुरुआत थी — कहानी का सबसे रोमांचक हिस्सा अभी बाकी है!
पासवर्ड डालिए और जानिए आगे क्या हुआ 🔓
👉 पासवर्ड नहीं पता? Get Password पर क्लिक करो password जानने के लिए।
⭐ ⭐ मेरी कहानी की वेबसाइट पसंद आई हो तो Bookmark करना — भूलना मत!
https://beingfaltu.blogspot.com